बीएनएस → आईपीसी
14 प्रविष्टियाँ
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 43 - “अवैध”
“अवैध” “अवैध” शब्द हर उस बात को लागू है, जो अपराध हो, या जो विधि द्वारा प्रतिषिद्ध हो, या जो सिविल कार्यवाही के लिए आधार उत्पन्न करती हो; और “करने के लिए वैध रूप से आबद्ध” कोई व्यक्ति उस बात को “करने के लिए वैध रूप से आबद्ध” कहा जाता है जिसका लोप करना उसके लिए अवैध है ।
पूरा पढ़ेंसंपत्ति की निजी रक्षा के अधिकार का प्रारंभ और निरंतरता।
संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार,— (क) संपत्ति को खतरे की उचित आशंका उत्पन्न होने पर प्रारंभ होता है; (ख) चोरी के विरुद्ध कार्रवाई तब तक जारी रहती है जब तक अपराधी संपत्ति लेकर भाग न जाए या सार्वजनिक अधिकारियों की सहायता प्राप्त न हो जाए या संपत्ति बरामद न हो जाए; (ग) डकैती के विरुद्ध अपराध तब तक जारी रहता है जब तक…
पूरा पढ़ेंधारा 105 - संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार तब प्रारंभ होता है, जब संपत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है । संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार, चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकार्यो की…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कॄषिक प्रयोजनो के लिए, या मानव प्राणियों के या उन जीवजन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के, या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो या कमी कारित होना वह…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कॄषिक प्रयोजनो के लिए, या मानव प्राणियों के या उन जीवजन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के, या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो या कमी कारित होना वह…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 431 - लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य, नदी या प्राकॄतिक या कॄत्रिम नाव्य जलसरणी को यात्रा या सम्पत्ति प्रवहण के लिए अगम्य या कम निरापद बना दिया जाए या बना दिया जाना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनो में से, किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 432 - लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक जलनिकास में क्षतिप्रद या नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 433 - किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि जो कोई किसी दीपगॄह को, या समुद्री- चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री-चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिए मार्ग प्रदर्शन के लिए रखी गई हो, नष्ट करने या, हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा,…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 434 - लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि जो कोई लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाए गए किसी भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिह्न ऐसे भूमि चिह्न के रूप में कम उपयोगी बन जाए, रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 435 - सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि जो कोई किसी सम्पत्ति को, एक सौ रुपए या उससे अधिक का या (जहां कि सम्पत्ति कॄषि उपज हो, वहां) दस रुपए या उससे अधिक का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा ऐसा नुकसान कारित…
पूरा पढ़ेंचोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
जो कोई भी उपद्रव करता है, (क) कोई ऐसा कार्य करना जिससे कृषि प्रयोजनों के लिए, या मनुष्यों या संपत्ति के पशुओं के लिए भोजन या पेय की आपूर्ति में, या स्वच्छता के लिए, या किसी भी प्रकार के विनिर्माण कार्य के लिए जल की आपूर्ति में कमी हो, या जिसके बारे में वह जानता हो कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 436 - गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि जो कोई किसी ऐसे निर्माण का, जो मामूली तौर पर उपासनास्थान के रूप में या मानव-विकास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सभ्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा उसका नाश कारित करेगा, अग्नि…
पूरा पढ़ेंरेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
(1) जो कोई भी किसी रेल, विमान, या डेक वाले जहाज या बीस टन या उससे अधिक भार वाले किसी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करके उस रेल, विमान या जहाज को नष्ट या असुरक्षित बना देगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि जो कोई किसी तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बना देने के आशय से, या यह सभ्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा उसे नष्ट करेगा, या सापद बना देगा, उस जलयान की रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंरेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
(1) जो कोई भी किसी रेल, विमान, या डेक वाले जहाज या बीस टन या उससे अधिक भार वाले किसी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करके उस रेल, विमान या जहाज को नष्ट या असुरक्षित बना देगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि जो कोई किसी तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बना देने के आशय से, या यह सभ्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा उसे नष्ट करेगा, या सापद बना देगा, उस जलयान की रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंरेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
(1) जो कोई भी किसी रेल, विमान, या डेक वाले जहाज या बीस टन या उससे अधिक भार वाले किसी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करके उस रेल, विमान या जहाज को नष्ट या असुरक्षित बना देगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 438 - धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड
धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड जो कोई अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी रिष्टि करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, जैसी अंतिम पूर्ववर्ती धारा में वर्णित है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा…
पूरा पढ़ेंचोरी आदि के इरादे से जानबूझकर जहाज को किनारे या समुद्र तट पर फंसाने के लिए दंड।
जो कोई भी जानबूझकर किसी पोत को किनारे या समुद्र तट पर फंसाता है, इस इरादे से कि उसमें निहित किसी संपत्ति की चोरी की जाए या बेईमानी से ऐसी संपत्ति का दुरुपयोग किया जाए, या इस इरादे से कि ऐसी चोरी या संपत्ति का दुरुपयोग किया जा सके, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना…
पूरा पढ़ेंधारा 439 - चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड
चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड जो कोई किसी जलयान को यह आशय रखते हुए कि वह उसमें अंतर्विष्ट किसी संपत्ति की चोरी करे या बेईमानी से ऐसी किसी संपत्ति का दुर्विनियोग करे, या इस आशय से कि ऐसी चोरी या संपत्ति का दुर्विनियोग किया जाए, साशय भूमि पर चढ़ा देगा, वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ें- BNS §2(15)IPC §43
परिभाषाएँ।
धारा 43 - “अवैध”
- BNS §43IPC §105
संपत्ति की निजी रक्षा के अधिकार का प्रारंभ और निरंतरता।
धारा 105 - संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
- BNS §326IPC §430बदलाव हुआ
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
- BNS §326 (a)IPC §430
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
- BNS §326(b)IPC §431
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 431 - लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
- BNS §326 (c)IPC §432
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 432 - लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
- BNS §326(d)IPC §433
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 433 - किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
- BNS §326 (e)IPC §434
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 434 - लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
- BNS §326 (f)IPC §435
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 435 - सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
- BNS §326 (g)IPC §436
चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ आदि से होने वाली क्षति।
धारा 436 - गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
- BNS §327IPC §437बदलाव हुआ
रेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
धारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
- BNS §327 (1)IPC §437
रेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
धारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
- BNS §327 (2)IPC §438
रेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन भार वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से की गई शरारत।
धारा 438 - धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड
- BNS §328IPC §439
चोरी आदि के इरादे से जानबूझकर जहाज को किनारे या समुद्र तट पर फंसाने के लिए दंड।
धारा 439 - चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड

