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धारा 215. गलतियों का प्रभाव
215. गलतियों का प्रभाव अपराध को या उन विशिष्टियों को, जिनका आरोप में कथित किया जाना अपेक्षित है, कथित करने में कोई गलती, और अपराध या उन विशिष्टियों को कथित करने का कोई लोप, मामले के किसी भी प्रक्रम में तात्विक न समझा जाएगा, जब तक कि अभियुक्त वस्तुतः ऐसी गलती या लोप से भ्रमित न हो गया हो और उससे न्याय की विफलता न हो गई…
पूरा पढ़ेंत्रुटियों का प्रभाव।
अपराध या आरोप में बताए जाने वाले विवरणों को बताने में कोई त्रुटि, या अपराध या उन विवरणों को बताने में कोई चूक, मामले के किसी भी चरण में महत्वपूर्ण नहीं मानी जाएगी, जब तक कि आरोपी वास्तव में ऐसी त्रुटि या चूक से गुमराह न हुआ हो और इसके कारण न्याय में विफलता न हुई हो। चित्र। (क) ए पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा…
पूरा पढ़ेंधारा 238. धारा 207 का अनुपालन
238. धारा 207 का अनुपालन जब किसी पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित वारंट-मामले में अभियुक्त विचारण के प्रारंभ में मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट अपना यह समाधान कर लेगा कि उसने धारा 207 के उपबंधों का अनुपालन कर लिया है।
पूरा पढ़ेंधारा 230 का अनुपालन।
जब किसी पुलिस रिपोर्ट पर शुरू किए गए वारंट मामले में, आरोपी मुकदमे की शुरुआत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश होता है या लाया जाता है, तो मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसने धारा 230 के प्रावधानों का अनुपालन किया है।
पूरा पढ़ें- CRPC §215BNSS §238
धारा 215. गलतियों का प्रभाव
त्रुटियों का प्रभाव।
- CRPC §238BNSS §261
धारा 238. धारा 207 का अनुपालन
धारा 230 का अनुपालन।

