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18 प्रविष्टियाँ
मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवेदना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य
मन की कोई भी दशा जैसे आशय, ज्ञान, सद्भाव, उपेक्षा, उतावलापरन, किसी विशिष्ट व्यक्ति के प्रति वैमनस्य या सदिच्छा दर्शित करने वाले अथवा शरीर की या शारीरिक संवेदना की किसी दशा का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य तब सुसंगत है, जबकि ऐसी मन की या शरीर की या शारिरिक संवेदना की किसी ऐसी दशा का अस्तित्व विवाद्य या सुसंगत है ।…
पूरा पढ़ेंऐसे तथ्य जो मन की अवस्था, शरीर की अवस्था या शारीरिक संवेदना के अस्तित्व को दर्शाते हैं।
किसी विशेष व्यक्ति के प्रति इरादा, ज्ञान, सद्भावना, लापरवाही, जल्दबाजी, दुर्भावना या सद्भावना जैसी किसी भी मानसिक स्थिति के अस्तित्व को दर्शाने वाले तथ्य, या शरीर या शारीरिक संवेदना की किसी भी स्थिति के अस्तित्व को दर्शाने वाले तथ्य, तब प्रासंगिक होते हैं, जब ऐसी किसी मानसिक या शारीरिक या शारीरिक संवेदना की स्थिति का…
पूरा पढ़ेंकारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत है
जबकि प्रश्न यह है कि क्या कोई विशिष्ट कार्य किया गया था, तब कारबार के ऐसे किसी भी अनुक्रम का अस्तित्व, जिसके अनुसार वह कार्य स्वभावत: किया जाता, सुसंगत तथ्य है । दृष्टांत : क)प्रश्न यह ह कि क्या एक विशिष्ट पत्र प्रषित किया गया था । ये तथ्य कि कारबार का यह साधारण अनुक्रम था कि वे सभी पत्र, जो किसी खास स्थान में रख दिए…
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर व्यवसाय के पाठ्यक्रम का अस्तित्व।
जब यह सवाल उठता है कि कोई विशेष कार्य किया गया था या नहीं, तो किसी भी व्यावसायिक प्रक्रिया का अस्तित्व, जिसके अनुसार वह कार्य स्वाभाविक रूप से किया गया होता, एक प्रासंगिक तथ्य है। चित्र। (क) प्रश्न यह है कि क्या कोई विशेष पत्र भेजा गया था। यह तथ्य प्रासंगिक है कि सभी पत्रों को एक निश्चित स्थान पर रखना सामान्य…
पूरा पढ़ेंसक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम
सक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम क्रमश: सिविल और दण्ड प्रक्रिया से तत्समय संबंधित विधि और पद्धति द्वारा, तथा ऐसी किसी विधि के अभाव में न्यायालय के विवेक द्वारा, विनियमित (नियंत्रण द्वारा सही करना) होगा ।
पूरा पढ़ेंगवाहों को पेश करने और उनकी जांच का क्रम।
गवाहों को पेश करने और उनसे पूछताछ करने का क्रम, दीवानी और आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन कानून और प्रथा द्वारा विनियमित किया जाएगा, और ऐसे किसी कानून के अभाव में, न्यायालय के विवेक द्वारा विनियमित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंन्यायाधीश साक्ष्य की ग्राह्यता के बारे में निश्चय करेगा
जबकि दोनों में से कोई पक्षकार किसी तथ्य का साक्ष्य देने की प्रस्थापना करता है, तब न्यायाधीश साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाले पक्षकार से पूछ सकेगा कि अभिकथित तथ्य, यदि वह साबित हो जाए, किसी प्रकार सुसंगत होगा, और यदि न्यायाधीश यह समझता है कि वह तथ्य यदि साबित हो गया तो सुसंगत होगा, तो वह उस साक्ष्य को ग्रहण करेगा…
पूरा पढ़ेंन्यायाधीश को साक्ष्य की स्वीकार्यता के संबंध में निर्णय लेना है।
(1) जब कोई पक्ष किसी तथ्य का साक्ष्य देने का प्रस्ताव करता है, तो न्यायाधीश साक्ष्य देने का प्रस्ताव करने वाले पक्ष से पूछ सकता है कि यदि वह तथ्य सिद्ध हो जाता है, तो वह किस प्रकार प्रासंगिक होगा; और न्यायाधीश साक्ष्य को स्वीकार करेगा यदि वह सोचता है कि यदि वह तथ्य सिद्ध हो जाता है, तो वह प्रासंगिक होगा, अन्यथा नहीं।…
पूरा पढ़ेंमुख्य परिक्षा
किसी साक्षी की उस पक्षकार द्वारा, जो उसे बुलाता है, परीक्षा उसकी मुख्य परीक्षा कहलाएगी । प्रतिपरिक्षा - किसी साक्षी की प्रतिपक्षी द्वारा की गई परिक्षा उसकी प्रतिपरीक्षा कहलाएगी । पुन:परिक्षा - किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा के पश्चात् उसकी उस पक्षकार द्वारा, जिसने उसे बुलाया था, परीक्षा उसकी पुन:परीक्षा कहलाएगी ।
पूरा पढ़ेंगवाहों की जांच।
(1) किसी गवाह को बुलाने वाले पक्ष द्वारा उसकी परीक्षा को उसकी मुख्य परीक्षा कहा जाएगा। (2) विरोधी पक्ष द्वारा किसी गवाह की परीक्षा को उसकी जिरह कहा जाएगा। (3) जिरह के बाद गवाह की परीक्षा, उसे बुलाने वाले पक्ष द्वारा की जाएगी, जिसे उसकी पुनर्परीक्षा कहा जाएगा।
पूरा पढ़ेंपरीक्षाओं का क्रम।
गवाहों की पहले मुख्य परीक्षा ली जाएगी, फिर (यदि विरोधी पक्ष चाहे तो) जिरह की जाएगी, और फिर (यदि गवाह को बुलाने वाला पक्ष चाहे तो) पुनः परीक्षा ली जाएगी। जांच और जिरह प्रासंगिक तथ्यों से संबंधित होनी चाहिए, लेकिन जिरह उन तथ्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जिनका गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में उल्लेख किया है। पुनर्परीक्षा…
पूरा पढ़ेंपरीक्षाओं का क्रम।
(1) गवाहों की पहले मुख्य परीक्षा ली जाएगी, फिर (यदि विरोधी पक्ष चाहे तो) जिरह की जाएगी, फिर (यदि बुलाने वाला पक्ष चाहे तो) पुनः परीक्षा ली जाएगी। (2) मुख्य परीक्षा और जिरह प्रासंगिक तथ्यों से संबंधित होनी चाहिए, लेकिन जिरह उन तथ्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जिनके बारे में गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में गवाही दी थी।…
पूरा पढ़ेंकिसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति की प्रतिपरीक्षा
किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति केवल इस तथ्य के कारण कि वह उसे पेश करता है साक्षी नहीं हो जाता तथा यदि और जब तक वह साक्षी के तौर पर बुलाया नहीं जाता, उसकी प्रतिपरिक्षा नहीं की जा सकती ।
पूरा पढ़ेंकिसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए बुलाए गए व्यक्ति से जिरह करना।
किसी व्यक्ति को दस्तावेज पेश करने के लिए बुलाया जाता है, लेकिन केवल दस्तावेज पेश करने मात्र से वह गवाह नहीं बन जाता, और जब तक उसे गवाह के रूप में नहीं बुलाया जाता, तब तक उससे जिरह नहीं की जा सकती।
पूरा पढ़ेंशील का साक्ष्य देने वाले साक्षी
शील का साक्ष्य देने वाले साक्षियों की प्रतिपरीक्षा और पुन:परीक्षा की जा सकेगी ।
पूरा पढ़ेंचरित्र के साक्षी।
चरित्र के संबंध में गवाही देने वालों से जिरह और पुन: जिरह की जा सकती है।
पूरा पढ़ेंसूचक प्रश्न
कोई प्रश्न, जो उस उत्तर को सुझाता है जिसे पुछने वाला व्यक्ति पाना चाहता है या पाने की आशा करता है, सूचक प्रश्न कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंमार्गदर्शक प्रश्न।
(1) कोई भी प्रश्न जो उस उत्तर का संकेत देता है जिसे प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है या अपेक्षा करता है, उसे अग्रणी प्रश्न कहा जाता है। (2) यदि विरोधी पक्ष आपत्ति करे तो मुख्य परीक्षा या पुनर्परीक्षा में ऐसे प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए जो प्रश्न का उत्तर देने में सहायक हों, सिवाय न्यायालय की अनुमति के।…
पूरा पढ़ेंउन्हें कब नहीं पूछना चाहिए
सूचक प्रश्न मुख्य परीक्षा में या पुन:परीक्षा में, यदि विरोधी पक्षकार द्वारा आक्षेप किया जाता है,न्यायालय की अनुज्ञा के बिना नहीं पूछे जाने चाहिए । न्यायालय उन बातों के बारे में, जो पुन: स्थापना के रुप में या निर्विवाद है या जो उसकी राय में पहले से ही पर्याप्त रुप से साबित हो चुके है, सूचक प्रश्नों के लिए अनुज्ञा देगा ।
पूरा पढ़ेंमार्गदर्शक प्रश्न।
(1) कोई भी प्रश्न जो उस उत्तर का संकेत देता है जिसे प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है या अपेक्षा करता है, उसे अग्रणी प्रश्न कहा जाता है। (2) यदि विरोधी पक्ष आपत्ति करे तो मुख्य परीक्षा या पुनर्परीक्षा में ऐसे प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए जो प्रश्न का उत्तर देने में सहायक हों, सिवाय न्यायालय की अनुमति के।…
पूरा पढ़ेंउन्हें कब नहीं पूछना चाहिए
सूचक प्रश्न मुख्य परीक्षा में या पुन:परीक्षा में, यदि विरोधी पक्षकार द्वारा आक्षेप किया जाता है,न्यायालय की अनुज्ञा के बिना नहीं पूछे जाने चाहिए । न्यायालय उन बातों के बारे में, जो पुन: स्थापना के रुप में या निर्विवाद है या जो उसकी राय में पहले से ही पर्याप्त रुप से साबित हो चुके है, सूचक प्रश्नों के लिए अनुज्ञा देगा ।
पूरा पढ़ेंमार्गदर्शक प्रश्न।
(1) कोई भी प्रश्न जो उस उत्तर का संकेत देता है जिसे प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है या अपेक्षा करता है, उसे अग्रणी प्रश्न कहा जाता है। (2) यदि विरोधी पक्ष आपत्ति करे तो मुख्य परीक्षा या पुनर्परीक्षा में ऐसे प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए जो प्रश्न का उत्तर देने में सहायक हों, सिवाय न्यायालय की अनुमति के।…
पूरा पढ़ेंमार्गदर्शक प्रश्न।
(1) कोई भी प्रश्न जो उस उत्तर का संकेत देता है जिसे प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है या अपेक्षा करता है, उसे अग्रणी प्रश्न कहा जाता है। (2) यदि विरोधी पक्ष आपत्ति करे तो मुख्य परीक्षा या पुनर्परीक्षा में ऐसे प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए जो प्रश्न का उत्तर देने में सहायक हों, सिवाय न्यायालय की अनुमति के।…
पूरा पढ़ेंलेखबद्ध विषयों के बारे में साक्ष्य
किसी साक्षी से, जबकि वह परीक्षाधीन है, यह पुछा जा सकेगा कि क्या कोई संविदा, अनुदान या संपत्ति का अन्य व्ययन, जिसके बारे में वह साक्ष्य दे रहा है, किसी दस्तावेज में अन्तर्विष्ट नहीं था, और यदि वह कहता है कि वह था, या यदि वह किसी ऐसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में कोई कथन करने ही वाला है, जिसे न्यायालय की राय में,…
पूरा पढ़ेंलिखित रूप में प्रस्तुत किए गए साक्ष्य।
किसी भी गवाह से पूछताछ के दौरान पूछा जा सकता है कि क्या कोई अनुबंध, अनुदान या संपत्ति का अन्य निपटान, जिसके संबंध में वह साक्ष्य दे रहा है, किसी दस्तावेज़ में दर्ज नहीं था, और यदि वह कहता है कि वह दर्ज था, या यदि वह किसी ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु के बारे में कोई बयान देने वाला है, जिसे न्यायालय की राय में प्रस्तुत…
पूरा पढ़ेंपूर्वतन लेखबद्ध कथनों के बारे में प्रतिपरिक्षा
किसी साक्षी की उन पूर्वतन कथनों के बारे में, जो उसने लिखित रुप में किए है या जो लेखबद्ध किए गए है और जो प्रश्नगत बातों से सुसंगत है, ऐसा लेख उसे दिखाए बिना, या ऐसे लेख साबित हुए बिना, प्रतिपरीक्षा की जा सकेगी, किन्तु यदि उस लेख द्वारा उसका खण्डन करने का आशय है तो उस लेख को साबित किए जा सकने पूर्व उसका ध्यान उस लेख के…
पूरा पढ़ेंपूर्व लिखित बयानों के संबंध में जिरह।
किसी गवाह से उसके द्वारा लिखित रूप में दिए गए या लिखित रूप में दर्ज किए गए पूर्व कथनों के संबंध में जिरह की जा सकती है, जो विचाराधीन मामले से संबंधित हों, बिना ऐसे लिखित कथनों को उसे दिखाए या साबित किए; लेकिन, यदि लिखित कथन के माध्यम से उसका खंडन करने का इरादा है, तो लिखित कथन को साबित करने से पहले उसका ध्यान उसके उन…
पूरा पढ़ेंप्रतिपरीक्षा में विधिपूर्ण प्रश्न
जबकि किसी साक्षी से प्रतिपरीक्षा की जाती है, तब उससे एतस्मिनपूर्व निर्दिष्ट प्रश्नों के अतिरिक्त ऐसे कोई भी प्रश्न पूछे जा सकेंगे, जिनकी प्रवृत्ति - १)उसकी सत्यवादिता परखने की है, २)यह पता चलाने की है वह कौन है और जीवन में उसकी स्थिति क्या है, अथवा ३)उसके शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता को धक्का पहुंचाने की है, चाहे…
पूरा पढ़ेंजिरह के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्न वैध होते हैं।
जब किसी गवाह से जिरह की जाती है, तो उससे ऊपर उल्लिखित प्रश्नों के अतिरिक्त, कोई भी ऐसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं जो— (क) उसकी सत्यता की परीक्षा लेने के लिए; या (ख) यह पता लगाना कि वह कौन है और जीवन में उसकी क्या स्थिति है; या (ग) उसके चरित्र को नुकसान पहुंचाकर उसकी साख को धूमिल करना, भले ही ऐसे प्रश्नों के उत्तर…
पूरा पढ़ेंसाक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाए
यदि ऐसा कोई प्रश्न उस वाद या कार्यवाही से सुसंगत किसी बात से संबंधित है, तो धारा १३२ के उपबंध उसको लागू होंगे ।
पूरा पढ़ेंजब गवाह को जवाब देने के लिए बाध्य किया जाए।
यदि ऐसा कोई प्रश्न मुकदमे या कार्यवाही से संबंधित किसी मामले से जुड़ा हो, तो उस पर धारा 137 के प्रावधान लागू होंगे।
पूरा पढ़ेंन्यायालय विनिश्चित करेगा कि कब प्रश्न पूछा जाएगा और साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाएगा
यदि ऐसा कोई प्रश्न ऐसी बात से संबंधित है, जो उस बात या कार्यवाही से वहां तक के सिवाय जहाँ तक कि वह साक्षी के शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता पर प्रभाव डालती है, सुसंगत नहीं है, तो न्यायालय विनिश्चित करेगा कि साक्षी को उत्तर देने के लिए विवश किया जाए या नहीं और यदि वह ठीक समझे, तो साक्षी को सचेत कर सकेगा कि वह उसका…
पूरा पढ़ेंन्यायालय यह तय करेगा कि प्रश्न कब पूछा जाए और गवाह को कब उत्तर देने के लिए बाध्य किया जाए।
(1) यदि ऐसा कोई प्रश्न मुकदमे या कार्यवाही से संबंधित किसी मामले से जुड़ा हो, सिवाय उस हद तक जहाँ तक वह गवाह के चरित्र को नुकसान पहुँचाकर उसकी साख को प्रभावित करता हो, तो न्यायालय यह निर्णय करेगा कि गवाह को उसका उत्तर देने के लिए बाध्य किया जाएगा या नहीं, और यदि वह उचित समझे तो गवाह को चेतावनी दे सकता है कि वह उसका…
पूरा पढ़ेंयुक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न न पूछा जाएगा
कोई भी ऐसा प्रश्न, जैसा की धारा १४८ में निर्दिष्ट है, नहीं पूछा जाना चाहिए, जब तक कि पूछने वाले व्यक्ति के पास यह सोचने के लिए युक्तियुक्त आधार न हो कि वह लांछन, जिसका उससे प्रवहण (पहुंचना) होता है, सुधारित है । दृष्टांत : क)किसी बैरिस्टर को किसी अटर्नी या वकिल द्वारा अनुदेश दिया गया है कि एक महत्वपूर्ण साक्षी डकैत है…
पूरा पढ़ेंउचित कारण के बिना प्रश्न नहीं पूछा जाना चाहिए।
धारा 151 में उल्लिखित ऐसा कोई प्रश्न नहीं पूछा जाना चाहिए, जब तक कि प्रश्न पूछने वाले व्यक्ति के पास यह सोचने के लिए उचित आधार न हो कि इससे लगाया गया आरोप सही है। रेखांकन (क) एक वकील को दूसरे वकील द्वारा यह निर्देश दिया जाता है कि एक महत्वपूर्ण गवाह डाकू है। यह गवाह से यह पूछने का एक उचित आधार है कि क्या वह डाकू है।…
पूरा पढ़ें- IEA §14BSA §12
मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवेदना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य
ऐसे तथ्य जो मन की अवस्था, शरीर की अवस्था या शारीरिक संवेदना के अस्तित्व को दर्शाते हैं।
- IEA §16BSA §14
कारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत है
प्रासंगिक होने पर व्यवसाय के पाठ्यक्रम का अस्तित्व।
- IEA §135BSA §140
सक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम
गवाहों को पेश करने और उनकी जांच का क्रम।
- IEA §136BSA §141
न्यायाधीश साक्ष्य की ग्राह्यता के बारे में निश्चय करेगा
न्यायाधीश को साक्ष्य की स्वीकार्यता के संबंध में निर्णय लेना है।
- IEA §137BSA §142
मुख्य परिक्षा
गवाहों की जांच।
- IEA §138BSA §143
परीक्षाओं का क्रम।
- IEA §139BSA §144
किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति की प्रतिपरीक्षा
किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए बुलाए गए व्यक्ति से जिरह करना।
- IEA §140BSA §145
शील का साक्ष्य देने वाले साक्षी
चरित्र के साक्षी।
- IEA §141BSA §146 (1)
सूचक प्रश्न
मार्गदर्शक प्रश्न।
- IEA §142BSA §146 (2)
उन्हें कब नहीं पूछना चाहिए
मार्गदर्शक प्रश्न।
- IEA §142BSA §146 (3)
उन्हें कब नहीं पूछना चाहिए
मार्गदर्शक प्रश्न।
- IEA §143BSA §146 (4)
उन्हें कब पूछा जा सकेगा
मार्गदर्शक प्रश्न।
- IEA §144BSA §147
लेखबद्ध विषयों के बारे में साक्ष्य
लिखित रूप में प्रस्तुत किए गए साक्ष्य।
- IEA §145BSA §148
पूर्वतन लेखबद्ध कथनों के बारे में प्रतिपरिक्षा
पूर्व लिखित बयानों के संबंध में जिरह।
- IEA §146BSA §149
प्रतिपरीक्षा में विधिपूर्ण प्रश्न
जिरह के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्न वैध होते हैं।
- IEA §147BSA §150
साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाए
जब गवाह को जवाब देने के लिए बाध्य किया जाए।
- IEA §148BSA §151
न्यायालय विनिश्चित करेगा कि कब प्रश्न पूछा जाएगा और साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाएगा
न्यायालय यह तय करेगा कि प्रश्न कब पूछा जाए और गवाह को कब उत्तर देने के लिए बाध्य किया जाए।
- IEA §149BSA §152
युक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न न पूछा जाएगा
उचित कारण के बिना प्रश्न नहीं पूछा जाना चाहिए।

