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583 प्रविष्टियाँ
धारा 46 - “मॄत्यु”
“मॄत्यु” जब तक कि संदर्भ केे तत्प्रतिकूल प्रतीत न हो, “मॄत्यु” शब्द मानव की मॄत्यु का द्योतक है ।
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इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 47 - “जीवजन्तु”
“जीवजन्तु” “जीवजन्तु” शब्द मानव से भिन्न किसी जीवधारी का द्योतक है ।
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इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 48 - “जलयान”
“जलयान” “जलयान” शब्द किसी चीज का द्योतक है, जो मानवों के या सम्पत्ति के जल द्वारा प्रवहण के लिए बनाई गई हो ।
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इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 49 - “वर्ष” या “मास”
“वर्ष” या “मास” जहां कहीं “वर्ष” शब्द या “मास” शब्द का प्रयोग किया गया है वहां यह समझा जाना है कि वर्ष या मास की गणना ब्रिटिश कलैंडर के अनुकूल की जानी है ।
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इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 50 - “धारा”
“धारा” “धारा” शब्द इस संहिता के किसी अध्याय के उन भागों में से किसी एक का द्योतक है, जो सिरे पर लगे संख्यांकों द्वारा सुभिन्न किए गए हैं ।
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
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धारा 51 - “शपथ”
“शपथ” शपथ के लिए विधि द्वारा प्रतिस्थापित सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञान और ऐसी कोई घोषणा, जिसका किसी लोक सेवक के समक्ष किया जाना या न्यायालय में या अन्यथा सबूत के प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाना विधि द्वारा अपेक्षित या प्राधिकॄत हो, “शपथ” शब्द के अन्तर्गत आती है ।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 52 - “सद्भावपूर्वक”
“सद्भावपूर्वक” कोई बात “सद्भावपूर्वक” की गई या विश्वास की गई नहीं कही जाती तो सम्यक् सतर्कता और ध्यान के बिना की गई या विश्वास की गई हो ।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 52A - “संश्रय”
“संश्रय” धारा 157 में के सिवाय और धारा 130 में वहां के सिवाय जहां कि संश्रय संश्रित व्यक्ति की पत्नी या पति द्वारा दिया गया हो, “संश्रय” शब्द के अन्तर्गत किसी व्यक्ति को आश्रय, भोजन, पेय, धन, वस्त्र, आयुध, गोलाबारूद या प्रवहण के साधन देना, या किन्हीं साधनों से चाहे वे उसी प्रकार के हों या नहीं, जिस प्रकार के इस धारा…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंदंड।
इस संहिता के प्रावधानों के तहत अपराधियों को जिन दंडों का सामना करना पड़ सकता है, वे इस प्रकार हैं— पहला. —मृत्यु; 1 [ द्वितीय — आजीवन कारावास;] 2 * * * * * चौथा.— कारावास, जिसके दो प्रकार हैं, अर्थात्:— (1) कठोर, अर्थात् कठिन श्रम के साथ; (2) सरल; पांचवीं बात. -संपत्ति की ज़ब्ती; छठी बात. —ठीक है।
पूरा पढ़ेंदंड।
इस संहिता के प्रावधानों के तहत अपराधियों को जिन दंडों का सामना करना पड़ सकता है, वे इस प्रकार हैं— (मौत; (ख) आजीवन कारावास; (ग) कारावास, जो दो प्रकार का होता है, अर्थात्:— (1) कठोर, अर्थात् कठिन श्रम के साथ; (2) सरल; (घ) संपत्ति की ज़ब्ती; (ई) जुर्माना; (f) सामुदायिक सेवा।
पूरा पढ़ेंपरिवहन के संदर्भ में निर्माण।
1 [53ए. परिवहन के संदर्भ का निर्माण। -- (1) उप-धारा (2) और उप-धारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी अन्य कानून में, जो उस समय लागू हो, या किसी ऐसे कानून या निरस्त अधिनियम के आधार पर प्रभावी किसी उपकरण या आदेश में, "आजीवन कारावास" के किसी संदर्भ को "आजीवन कारावास" के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा। (2) प्रत्येक…
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
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मृत्युदंड की सजा में कमी।
प्रत्येक मामले में जिसमें मृत्युदंड दिया गया हो, 1 [उपयुक्त सरकार] अपराधी की सहमति के बिना, इस संहिता द्वारा निर्धारित किसी अन्य दंड के लिए सजा को बदल सकती है।
पूरा पढ़ेंसजा में कमी।
उपयुक्त सरकार, अपराधी की सहमति के बिना, इस संहिता के अंतर्गत किसी भी दंड को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 474 के अनुसार किसी अन्य दंड में परिवर्तित कर सकती है। स्पष्टीकरण। ---इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए "उपयुक्त सरकार" अभिव्यक्ति का अर्थ है, --- (क) ऐसे मामलों में जहां सजा मृत्युदंड है या किसी ऐसे कानून…
पूरा पढ़ेंआजीवन कारावास की सजा में कमी।
प्रत्येक मामले में जिसमें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई हो, उपयुक्त सरकार अपराधी की सहमति के बिना, सजा को चौदह वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास में बदल सकती है।
पूरा पढ़ेंसजा में कमी।
उपयुक्त सरकार, अपराधी की सहमति के बिना, इस संहिता के अंतर्गत किसी भी दंड को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 474 के अनुसार किसी अन्य दंड में परिवर्तित कर सकती है। स्पष्टीकरण। ---इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए "उपयुक्त सरकार" अभिव्यक्ति का अर्थ है, --- (क) ऐसे मामलों में जहां सजा मृत्युदंड है या किसी ऐसे कानून…
पूरा पढ़ें"उपयुक्त सरकार" की परिभाषा।
1 [धारा चौवन और पचपन में "उपयुक्त सरकार" अभिव्यक्ति का अर्थ है, (क) ऐसे मामलों में जहां सजा मृत्युदंड है या किसी ऐसे कानून के विरुद्ध अपराध है जो संघ की कार्यकारी शक्ति से संबंधित है, तो केंद्र सरकार; और (ख) ऐसे मामलों में जहां सजा (चाहे मृत्युदंड हो या नहीं) किसी ऐसे कानून के उल्लंघन के लिए है जो राज्य की कार्यकारी…
पूरा पढ़ेंसजा में कमी।
उपयुक्त सरकार, अपराधी की सहमति के बिना, इस संहिता के अंतर्गत किसी भी दंड को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 474 के अनुसार किसी अन्य दंड में परिवर्तित कर सकती है। स्पष्टीकरण। ---इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए "उपयुक्त सरकार" अभिव्यक्ति का अर्थ है, --- (क) ऐसे मामलों में जहां सजा मृत्युदंड है या किसी ऐसे कानून…
पूरा पढ़ें[निरस्त]
[ यूरोपियनों और अमेरिकियों को कारावास की सजा। दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए सजा के संबंध में प्रावधान, लेकिन आजीवन कारावास के लिए नहीं।] आपराधिक कानून (नस्लीय भेदभाव निवारण) अधिनियम, 1949 (17 ऑफ 1949) (6-4-1949 से प्रभावी) द्वारा निरस्त।
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सजा की अवधि के अंश।
सजा की अवधि के अंशों की गणना करते समय, आजीवन कारावास के 1 [कारावास] को बीस वर्ष के 57 [कारावास] के बराबर माना जाएगा।
पूरा पढ़ेंसजा की अवधि के अंश।
सजा की अवधि के अंशों की गणना करते समय, आजीवन कारावास को बीस वर्ष के कारावास के समतुल्य माना जाएगा, जब तक कि अन्यथा प्रावधान न किया गया हो।
पूरा पढ़ें[निरस्त]
[ निर्वासन की सजा पाए अपराधियों के साथ तब तक कैसे निपटा जाता है जब तक उन्हें निर्वासित नहीं किया जाता। दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1955 (26 ऑफ 1955), धारा 117 और अनुसूची (1-1-1956 से प्रभावी) द्वारा संशोधित।]
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[निरस्त]
[ कारावास के बजाय परिवहन। निरस्त] धारा 117 और अनुसूची, इबिड द्वारा (1-1-1956 से प्रभावी)।
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कारावास के कुछ मामलों में सजा पूरी तरह या आंशिक रूप से कठोर या साधारण हो सकती है।
प्रत्येक ऐसे मामले में जिसमें किसी अपराधी को किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जा सकता है, ऐसे अपराधी को सजा सुनाने वाले न्यायालय को यह निर्देश देने का अधिकार होगा कि ऐसा कारावास पूरी तरह से कठोर हो, या पूरी तरह से साधारण हो, या ऐसे कारावास का कोई भाग कठोर हो और शेष साधारण हो।
पूरा पढ़ेंकारावास के कुछ मामलों में सजा पूरी तरह या आंशिक रूप से कठोर या साधारण हो सकती है।
प्रत्येक ऐसे मामले में जिसमें किसी अपराधी को किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जा सकता है, ऐसे अपराधी को सजा सुनाने वाले न्यायालय को यह निर्देश देने का अधिकार होगा कि ऐसा कारावास पूरी तरह से कठोर हो, या पूरी तरह से साधारण हो, या ऐसे कारावास का कोई भाग कठोर हो और शेष साधारण हो।
पूरा पढ़ें[निरस्त]
[ संपत्ति की ज़ब्ती की सज़ा। निरस्त] भारतीय दंड संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1921 (16 ऑफ 1921), धारा 4 द्वारा ।
पूरा पढ़ें—
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[निरस्त]
[ मृत्युदंड, निर्वासन या कारावास से दंडनीय अपराधियों के संबंध में संपत्ति की ज़ब्ती। धारा 4 द्वारा निरस्त।]
पूरा पढ़ें—
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जुर्माने की राशि।
जहां जुर्माने की राशि निर्दिष्ट नहीं है, वहां अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, लेकिन अत्यधिक नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंजुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
1. ऐसे प्रत्येक अपराध के मामले में, जिसमें कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय हो, और जिसमें अपराधी को कारावास सहित या बिना कारावास के जुर्माने की सजा दी जाती है, और हर उस अपराध के मामले में जो 2 [कारावास या जुर्माने से, या] केवल जुर्माने से दंडनीय है, जिसमें अपराधी को जुर्माने की सजा दी जाती है।] ऐसे अपराधी को सजा…
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंजब कारावास और जुर्माना दोनों दिए जा सकते हों, तो जुर्माने का भुगतान न करने पर कारावास की सीमा निर्धारित करना।
यदि अपराध कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय है, तो न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में अपराधी को कारावास की सजा देने की अवधि, उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास अवधि के एक-चौथाई से अधिक नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंजुर्माना न भरने पर कारावास का विवरण।
न्यायालय द्वारा जुर्माना अदा न करने पर दी जाने वाली कारावास की सजा किसी भी प्रकार की हो सकती है, जिस प्रकार की सजा अपराधी को उस अपराध के लिए दी जा सकती थी।
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंजुर्माना न भरने पर कारावास, जब अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय हो।
यदि अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय हो, तो [न्यायालय द्वारा जुर्माने के भुगतान में चूक के लिए लगाया गया कारावास साधारण होगा, और] न्यायालय द्वारा जुर्माने के भुगतान में चूक के लिए अपराधी को कारावास की सजा देने का निर्देश निम्नलिखित पैमाने से अधिक नहीं होगा, अर्थात्, जब जुर्माने की राशि पचास रुपये से अधिक न हो तो दो महीने…
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंजुर्माना अदा करने पर कारावास समाप्त हो जाएगा।
जुर्माने का भुगतान न करने पर लगाई गई कारावास की अवधि उस जुर्माने के भुगतान या विधिवत वसूली होने पर समाप्त हो जाएगी।
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंजुर्माने के आनुपातिक हिस्से के भुगतान पर कारावास की समाप्ति।
यदि जुर्माने का भुगतान न करने के कारण निर्धारित कारावास की अवधि समाप्त होने से पहले, जुर्माने का इतना अनुपात अदा कर दिया जाए या वसूला जाए कि जुर्माने का भुगतान न करने के कारण भुगती गई कारावास की अवधि, अभी तक अदा न किए गए जुर्माने के हिस्से के अनुपात से कम न हो, तो कारावास समाप्त हो जाएगा। चित्रण ए को एक सौ रुपये का…
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंछह साल के भीतर या कारावास की अवधि के दौरान जुर्माना लगाया जा सकता है। मृत्यु से संपत्ति दायित्व से मुक्त नहीं होती।
जुर्माना, या उसका कोई भी हिस्सा जो अदा नहीं किया गया है, सजा सुनाए जाने के छह साल के भीतर कभी भी वसूला जा सकता है, और यदि सजा के तहत अपराधी को छह साल से अधिक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जानी है, तो उस अवधि की समाप्ति से पहले कभी भी वसूला जा सकता है; और अपराधी की मृत्यु से ऐसी कोई भी संपत्ति दायित्व से मुक्त नहीं…
पूरा पढ़ेंजुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी। (2) प्रत्येक अपराध के मामले में--- (क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है; (ख)…
पूरा पढ़ेंधारा 71 - कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि जहां कि कोई बात, जो अपराध है, ऐसे भागों से, जिनमें का कोई भाग स्वयं अपराध है, मिलकर बनी है, वहां अपराधी अपने ऐसे अपराधों में से एक से अधिक के दण्ड से दण्डित न किया जाएगा, जब तक कि ऐसा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित न हो । जहां कि कोई बात अपराधों को परिभाषित या दण्डित करने…
पूरा पढ़ेंअनेक अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए सजा की सीमा।
(1) जहाँ कोई अपराध ऐसे भागों से बना हो, जिनमें से कोई भाग स्वयं अपराध हो, तो अपराधी को ऐसे अपराधों में से एक से अधिक के दंड से दंडित नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से प्रावधान न किया गया हो। (2) जहाँ--- (क) कोई भी चीज़ किसी ऐसे कानून की दो या दो से अधिक अलग-अलग परिभाषाओं के अंतर्गत आने वाला अपराध है जिसके…
पूरा पढ़ेंधारा 72 - कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिए दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है
कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिए दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है उन सब मामलों में, जिनमें यह निर्णय दिया जाता है कि कोई व्यक्ति उस निर्णय में विनिर्दिष्ट कई अपराधों में से एक अपराध का दोषी है, किन्तु यह संदेहपूर्ण है कि वह उन अपराधों में से किस अपराध का दोषी है, यदि…
पूरा पढ़ेंअनेक अपराधों में से किसी एक अपराध के दोषी व्यक्ति को दी गई सजा, जिसमें यह कहा गया हो कि यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा अपराध दोषी है।
उन सभी मामलों में जिनमें यह निर्णय दिया जाता है कि कोई व्यक्ति निर्णय में निर्दिष्ट अनेक अपराधों में से किसी एक का दोषी है, लेकिन यह संदेह हो कि वह इनमें से किस अपराध का दोषी है, तो अपराधी को उस अपराध के लिए दंडित किया जाएगा जिसके लिए सबसे कम दंड का प्रावधान है, यदि सभी अपराधों के लिए समान दंड का प्रावधान नहीं है।
पूरा पढ़ेंधारा 73 - एकांत परिरोध
एकांत परिरोध जब कभी कोई व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है जिसके लिए न्यायालय को इस संहिता के अधीन उसे कठिन कारावास से दंडादिष्ट करने की शक्ति है, तो न्यायालय अपने दंडादेश द्वारा आदेश दे सकेगा कि अपराधी को उस कारावास के, जिसके लिए वह दंडादिष्ट किया गया है, किसी भाग या भागों के लिए, जो कुल मिलाकर तीन मास…
पूरा पढ़ेंएकान्त कारावास।
जब भी कोई व्यक्ति ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है जिसके लिए इस संहिता के अधीन न्यायालय को उसे कठोर कारावास की सजा देने का अधिकार है, तो न्यायालय अपने फैसले में यह आदेश दे सकता है कि अपराधी को उसकी सजा के किसी भाग या भागों के लिए, कुल मिलाकर तीन महीने से अधिक न होने वाली अवधि के लिए, निम्नलिखित पैमाने के अनुसार एकांत…
पूरा पढ़ेंधारा 74 - एकांत परिरोध की अवधि
एकांत परिरोध की अवधि एकांत परिरोध के दण्डादेश के निष्पादन में ऐसा परिरोध किसी दशा में भी एक बार में चौदह दिन से अधिक न होगा । साथ ही ऐसे एकांत न की कालावधियों के बीच में उन कालावधियों से अन्यून अंतराल होंगे; और जब दिया गया कारावास तीन मास से अधिक हो, तब दिए गए सम्पूर्ण कारावास के किसी एक मास में एकांत परिरोध सात दिन…
पूरा पढ़ेंएकांत कारावास की सीमा।
एकांत कारावास की सजा को लागू करते समय, ऐसा कारावास किसी भी स्थिति में एक बार में चौदह दिनों से अधिक नहीं होगा, और एकांत कारावास की अवधियों के बीच का अंतराल इन अवधियों से कम नहीं होगा; और जब दी गई कारावास की अवधि तीन महीने से अधिक हो, तो दी गई कुल कारावास की अवधि के किसी भी महीने में एकांत कारावास सात दिनों से अधिक…
पूरा पढ़ेंधारा 75 - पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड
पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड जो कोई व्यक्ति - (क) भारत में के किसी न्यायालय द्वारा इस संहिता के अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए दोनों में से किसी भांति के कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए, दोषसिद्ध ठहराए जाने के पश्चात् उन…
पूरा पढ़ेंपूर्व दोषसिद्धि के बाद कुछ अपराधों के लिए बढ़ी हुई सजा।
जो कोई भी, भारत में किसी न्यायालय द्वारा इस संहिता के अध्याय X या अध्याय XVII के अंतर्गत किसी ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है, जिसके लिए तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार का कारावास दंडनीय है, और वह किसी ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है जिसके लिए इन अध्यायों में से किसी एक के अंतर्गत समान अवधि के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 76 - विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए, जो उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो, या जो तथ्य की भूल के कारण, न कि विधि की भूल के कारण, सद्भावपूर्वक यह विश्वास करता हो कि वह उसे करने के लिए…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य, जो कानून द्वारा बाध्य है, या जिसने तथ्य की गलती से स्वयं को कानून द्वारा बाध्य मान लिया है।
कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो कानून द्वारा बाध्य है, या जो किसी तथ्य की गलती के कारण, न कि कानून की गलती के कारण, सद्भावनापूर्वक यह मानता है कि वह कानून द्वारा बाध्य है। चित्र। (क) ए नामक सैनिक ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर, कानून के अनुसार, भीड़ पर गोली चलाई। ए ने कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 77 - न्यायिकतः कार्य करते हुए न्यायाधीश का कार्य
न्यायिकतः कार्य करते हुए न्यायाधीश का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो न्यायिकत: कार्य करते हुए न्यायाधीश द्वारा ऐसी किसी शक्ति के प्रयोग में की जाती है, जो या जिसके बारे में उसे सद्भावपूर्वक विश्वास है कि वह उसे विधि द्वारा दी गई है ।
पूरा पढ़ेंन्यायिक कार्यवाही करते समय न्यायाधीश का कार्य।
कोई भी कार्य अपराध नहीं है जो न्यायाधीश द्वारा न्यायिक रूप से कार्य करते समय, किसी ऐसी शक्ति का प्रयोग करते हुए किया जाता है जो उसे कानून द्वारा दी गई है, या जिसके बारे में वह सद्भावनापूर्वक मानता है कि उसे कानून द्वारा दी गई है।
पूरा पढ़ेंधारा 78 - न्यायलय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य
न्यायलय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य कोई बात जो न्यायलय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में की जाए या उसके द्वारा अधिदिष्ट हो, यदि वह उस निर्णय या आदेश के प्रवृत्त रहते, की जाए, अपराध नहीं है, चाहे उस न्यायलय को ऐसा निर्णय या आदेश देने की अधिकारिता न रही हो, परंतु यह तब जब कि वह कार्य करने वाला व्यक्ति…
पूरा पढ़ेंन्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसार किया गया कार्य।
न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में या उसके द्वारा समर्थित कोई भी कार्य, यदि ऐसे निर्णय या आदेश के लागू रहने के दौरान किया जाता है, तो अपराध नहीं है, भले ही न्यायालय को ऐसा निर्णय या आदेश पारित करने का अधिकार क्षेत्र न रहा हो, बशर्ते कि कार्य करने वाला व्यक्ति सद्भावनापूर्वक यह मानता हो कि न्यायालय को ऐसा अधिकार…
पूरा पढ़ेंधारा 79 - विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए, जो उसे करने के लिए विधि द्वारा न्यायानुमत हो, या तथ्य की भूल के कारण, न कि विधि की भूल के कारण सद्भावपूर्वक विश्वास करता हो कि वह उसे करने…
पूरा पढ़ेंकिसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य जो कानून द्वारा न्यायसंगत ठहराया गया हो, या जिसने तथ्य की गलती से स्वयं को कानून द्वारा न्यायसंगत मान लिया हो।
कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे कानून द्वारा न्यायोचित ठहराया गया हो, या जो किसी तथ्य की गलती के कारण और कानून की गलती के कारण नहीं, सद्भावना से यह मानता हो कि वह कार्य करने में कानून द्वारा न्यायोचित है। चित्रण A, Z को हत्या करते हुए देखता है। A, अपने विवेक और सद्भावना के…
पूरा पढ़ेंधारा 80 - विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना
विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना कोई बात अपराध नहीं है, जो दुर्घटना या दुर्भाग्य से और किसी आप्राधिक आशय या ज्ञान के बिना विधिपूर्ण परकार से विधिपूर्ण साधनों द्वारा और उचित सतर्कता और सावधानी के साथ विधिपूर्ण कार्य करने में हो जाती है । द्रष्टांत : क कुल्हाड़ी से काम कर रहा है ; कुल्हाड़ी का फल उसमें से निकल कर उछट…
पूरा पढ़ेंकिसी वैध कार्य को करते समय दुर्घटना।
कोई भी कार्य जो दुर्घटना या दुर्भाग्यवश हुआ हो, और जिसमें किसी आपराधिक इरादे या जानकारी के बिना, वैध तरीके से, वैध साधनों से और उचित सावधानी और सतर्कता के साथ वैध कार्य किया गया हो, वह अपराध नहीं है। चित्रण । A कुल्हाड़ी से काम कर रहा है; कुल्हाड़ी का सिर टूटकर गिरता है और पास खड़े एक आदमी को लगकर उसकी मौत हो जाती है।…
पूरा पढ़ेंधारा 81 - कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है
कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है कोई बात केवल इस कारण अपराध नहीं है कि वह यह जानते हुए की गई है कि उससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, यदि वह अपहानि कारित करने के किसी आप्राधिक आशय के बिना और व्यक्ति या संपत्ति को अन्य अपहानि का निवारण…
पूरा पढ़ेंऐसा कृत्य जिससे हानि होने की संभावना हो, लेकिन वह आपराधिक इरादे के बिना और अन्य हानि को रोकने के लिए किया गया हो।
कोई भी कार्य मात्र इस ज्ञान के साथ किए जाने के कारण अपराध नहीं हो जाता कि इससे हानि होने की संभावना है, यदि वह हानि पहुंचाने के किसी आपराधिक इरादे के बिना और सद्भावना से किसी व्यक्ति या संपत्ति को होने वाली अन्य हानि को रोकने या उससे बचने के उद्देश्य से किया गया हो। स्पष्टीकरण. —ऐसे मामले में यह तथ्य का प्रश्न है कि…
पूरा पढ़ेंधारा 82 - सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य
सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है ।
पूरा पढ़ेंसात वर्ष से कम आयु के बच्चे का कृत्य।
सात वर्ष से कम आयु के बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है।
पूरा पढ़ेंधारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो सात वर्ष से ऊपर और बारह वर्ष से कम आयु के ऐसे शिशु द्वारा की जाती है जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई है कि वह उस अवसर पर अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय कर सके ।
पूरा पढ़ेंसात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।
सात वर्ष से अधिक और बारह वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है, यदि उस बच्चे में अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का आकलन करने के लिए पर्याप्त परिपक्वता नहीं आई है।
पूरा पढ़ेंधारा 84 - विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
विकॄतचित व्यक्ति का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय चित्त-विकॄति के कारण उस कार्य की प्रकृति , या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ है ।
पूरा पढ़ेंमानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का कृत्य।
कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो उस समय मानसिक अस्वस्थता के कारण उस कार्य की प्रकृति को जानने में असमर्थ हो, या यह जानने में असमर्थ हो कि वह जो कर रहा है वह गलत है या कानून के विपरीत है।
पूरा पढ़ेंधारा 85 - ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मत्ता के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ है, परंतु यह तब जब कि वह…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा के विरुद्ध किए गए कृत्य, जिसमें वह निर्णय लेने में असमर्थ हो गया हो।
कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो नशे की हालत में हो और कार्य करते समय उस कार्य की प्रकृति को जानने में असमर्थ हो, या यह जानने में असमर्थ हो कि वह जो कर रहा है वह गलत है या कानून के विरुद्ध है; बशर्ते कि जिस पदार्थ से उसे नशा हुआ हो वह उसकी जानकारी के बिना या उसकी इच्छा के…
पूरा पढ़ेंधारा 86 - किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है उन दशाओं में, जहां कि कोई किया गया कार्य अपराध नहीं होता जब तक कि वह किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से न किया गया हो, कोई व्यक्ति, जो वह कार्य मत्ता की हालत में करता है, इस प्रकार बरते जाने के दायित्व के अधीन होगा मानो उसे…
पूरा पढ़ेंऐसा अपराध जिसमें किसी विशेष इरादे या जानकारी की आवश्यकता होती है और जिसे नशे की हालत में किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
जिन मामलों में कोई कार्य किसी विशेष ज्ञान या इरादे के बिना अपराध नहीं माना जाता, उन मामलों में, यदि कोई व्यक्ति नशे की अवस्था में वह कार्य करता है, तो उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा मानो उसे वही ज्ञान हो जो उसे नशे की अवस्था में न होने पर होता, बशर्ते कि उसे नशा कराने वाली वस्तु उसकी जानकारी के बिना या उसकी इच्छा के…
पूरा पढ़ेंधारा 87 - सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो
सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो कोई बात, जो मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के आशय से न की गई हो और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञान न हो कि उससे मृत्यु या घोर उपहति कारित होना संभाव्य है, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है जो उस बात से अठारह…
पूरा पढ़ेंऐसा कार्य जिसका उद्देश्य मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाना न हो और न ही जिसके बारे में यह ज्ञात हो कि ऐसा होने की संभावना है, और जो सहमति से किया गया हो।
कोई भी ऐसा कार्य जिसका उद्देश्य मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाना न हो, और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञात न हो कि उससे मृत्यु या गंभीर चोट होने की संभावना है, किसी भी ऐसे नुकसान के कारण अपराध नहीं है जो उससे किसी अठारह वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को हो सकता है, या जिसके लिए कर्ता का इरादा हो, और जिसने उस नुकसान को सहने…
पूरा पढ़ेंधारा 88 - किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है
किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है कोई बात, जो मृत्यु कारित करने के आशय से न की गई हो, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है जो उस बात से किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके फायदे के लिए वह बात सद्भावपूर्वक की जाए और जिसने उस अपहानि को सहने, या उस अपहानि की…
पूरा पढ़ेंऐसा कार्य जिसका उद्देश्य मृत्यु उत्पन्न करना न हो, और जो सद्भावनापूर्वक सहमति से व्यक्ति के हित में किया गया हो।
कोई भी ऐसा कार्य, जिसका उद्देश्य मृत्यु उत्पन्न करना न हो, किसी भी ऐसे नुकसान के कारण अपराध नहीं है जो वह किसी ऐसे व्यक्ति को पहुंचा सकता है, या पहुंचाने वाले का इरादा हो सकता है, या जिसके बारे में पहुंचाने वाले को पता हो कि वह नुकसान पहुंचा सकता है, जिसके लाभ के लिए वह कार्य सद्भावनापूर्वक किया गया हो, और जिसने उस…
पूरा पढ़ेंधारा 89 - संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य कोई बात, जो बारह वर्ष से कम आयु के या विकृतचित्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक उसके संरक्षक के, या विधिपूर्ण भारसाधक किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा, या की अभिव्यक्त या विवक्षित सम्मति से, की जाए, किसी ऐसी अपहानि…
पूरा पढ़ेंकिसी बच्चे या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के हित में, अभिभावक द्वारा या अभिभावक की सहमति से सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
बारह वर्ष से कम आयु के व्यक्ति या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के लाभ के लिए, अभिभावक या उस व्यक्ति के वैध रूप से प्रभारी अन्य व्यक्ति की स्पष्ट या निहित सहमति से, सद्भावनापूर्वक किया गया कोई भी कार्य, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण, या कर्ता द्वारा उस व्यक्ति को पहुँचाने के इरादे से किए गए कार्य के…
पूरा पढ़ेंधारा 90 - सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है कोई सम्मति ऐसी सम्मति नहीं है जैसी इस संहिता की किसी धारा से आशयित है, यदि वह सम्मति किसी व्यक्ति ने क्षतिभय के अधीन, या तथ्य के भ्रम के अधीन दी हो, और यदि कार्य करने वाला व्यक्ति यह जानता हो या उसके पास विश्वास करने का कारण हो कि ऐसे भय या भ्रम के…
पूरा पढ़ेंभय या गलतफहमी के तहत दी गई सहमति।
ऐसी सहमति, इस संहिता की किसी भी धारा के अनुसार अभिप्रेत सहमति नहीं है,—। (क) यदि सहमति किसी व्यक्ति द्वारा चोट के भय से, या तथ्य की गलत धारणा के तहत दी गई हो, और यदि कार्य करने वाला व्यक्ति जानता हो, या उसके पास यह मानने का कारण हो, कि सहमति ऐसे भय या गलत धारणा के परिणामस्वरूप दी गई थी; या। (ख) यदि सहमति किसी ऐसे…
पूरा पढ़ेंधारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है धारा 87, 88 और 89 के अपवादों का विस्तार उन कार्यो पर नहीं है जो उस अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध हैं जो उस व्यक्ति को, जो सम्मति देता है या जिसकी ओर से सम्मति दी जाती है, उन कार्यो से कारित हो, या कारित किए जाने का आशय हो, या कारित होने की संभाव्यता…
पूरा पढ़ेंउन कृत्यों को बाहर रखा गया है जो किसी भी प्रकार की हानि से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं।
धारा 25, 26 और 27 में दिए गए अपवाद उन कृत्यों पर लागू नहीं होते हैं जो किसी भी नुकसान से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं, जो वे सहमति देने वाले व्यक्ति को या जिसकी ओर से सहमति दी गई है, को पहुंचा सकते हैं, या पहुंचाने का इरादा रखते हैं, या जिसके होने की संभावना ज्ञात है। चित्रण। गर्भपात कराना (जब तक कि यह महिला का जीवन…
पूरा पढ़ेंधारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य कोई बात जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक यद्यपी, उसकी सम्मति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए यह असंभव हो कि वह अपनी…
पूरा पढ़ेंबिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
कोई भी कार्य, सद्भावनापूर्वक किए जाने पर भी, उस व्यक्ति की सहमति के बिना भी, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियाँ ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए सहमति देना असंभव हो, या यदि वह व्यक्ति सहमति देने में असमर्थ हो, और उसका कोई अभिभावक या अन्य कानूनी रूप से प्रभारी व्यक्ति न हो जिससे…
पूरा पढ़ें- IPC §46BNS §2(6)
धारा 46 - “मॄत्यु”
परिभाषाएँ।
- IPC §47BNS §2(2)
धारा 47 - “जीवजन्तु”
परिभाषाएँ।
- IPC §48BNS §2(32)
धारा 48 - “जलयान”
परिभाषाएँ।
- IPC §49BNS §2(20)
धारा 49 - “वर्ष” या “मास”
परिभाषाएँ।
- IPC §50BNS §DELETED
धारा 50 - “धारा”
हटाई गई धारा
IPC §50BNS §DELETED - IPC §51BNS §2(23)
धारा 51 - “शपथ”
परिभाषाएँ।
- IPC §52BNS §2(11)
धारा 52 - “सद्भावपूर्वक”
परिभाषाएँ।
- IPC §52ABNS §2(13)
धारा 52A - “संश्रय”
परिभाषाएँ।
- IPC §53BNS §4
दंड।
- IPC §53ABNS §DELETED
परिवहन के संदर्भ में निर्माण।
हटाई गई धारा
IPC §53ABNS §DELETED - IPC §54BNS §5
मृत्युदंड की सजा में कमी।
सजा में कमी।
- IPC §55BNS §5
आजीवन कारावास की सजा में कमी।
सजा में कमी।
- IPC §55ABNS §5
"उपयुक्त सरकार" की परिभाषा।
सजा में कमी।
- IPC §56BNS §-
[निरस्त]
—
IPC §56BNS §- - IPC §57BNS §6
सजा की अवधि के अंश।
- IPC §58BNS §-
[निरस्त]
—
IPC §58BNS §- - IPC §59BNS §-
[निरस्त]
—
IPC §59BNS §- - IPC §60BNS §7
कारावास के कुछ मामलों में सजा पूरी तरह या आंशिक रूप से कठोर या साधारण हो सकती है।
- IPC §61BNS §-
[निरस्त]
—
IPC §61BNS §- - IPC §62BNS §-
[निरस्त]
—
IPC §62BNS §- - IPC §63BNS §8(1)
जुर्माने की राशि।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §64BNS §8(2)
जुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §65BNS §8(3)
जब कारावास और जुर्माना दोनों दिए जा सकते हों, तो जुर्माने का भुगतान न करने पर कारावास की सीमा निर्धारित करना।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §66BNS §8(4)
जुर्माना न भरने पर कारावास का विवरण।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §67BNS §8(5)
जुर्माना न भरने पर कारावास, जब अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय हो।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §68BNS §8(6(a))
जुर्माना अदा करने पर कारावास समाप्त हो जाएगा।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §69BNS §8(6(b))
जुर्माने के आनुपातिक हिस्से के भुगतान पर कारावास की समाप्ति।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §70BNS §8(7)
छह साल के भीतर या कारावास की अवधि के दौरान जुर्माना लगाया जा सकता है। मृत्यु से संपत्ति दायित्व से मुक्त नहीं होती।
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
- IPC §71BNS §9
धारा 71 - कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
अनेक अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए सजा की सीमा।
- IPC §72BNS §10
धारा 72 - कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिए दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है
अनेक अपराधों में से किसी एक अपराध के दोषी व्यक्ति को दी गई सजा, जिसमें यह कहा गया हो कि यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा अपराध दोषी है।
- IPC §73BNS §11
धारा 73 - एकांत परिरोध
एकान्त कारावास।
- IPC §74BNS §12
धारा 74 - एकांत परिरोध की अवधि
एकांत कारावास की सीमा।
- IPC §75BNS §13
धारा 75 - पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड
पूर्व दोषसिद्धि के बाद कुछ अपराधों के लिए बढ़ी हुई सजा।
- IPC §76BNS §14
धारा 76 - विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य, जो कानून द्वारा बाध्य है, या जिसने तथ्य की गलती से स्वयं को कानून द्वारा बाध्य मान लिया है।
- IPC §77BNS §15
धारा 77 - न्यायिकतः कार्य करते हुए न्यायाधीश का कार्य
न्यायिक कार्यवाही करते समय न्यायाधीश का कार्य।
- IPC §78BNS §16
धारा 78 - न्यायलय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य
न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसार किया गया कार्य।
- IPC §79BNS §17
धारा 79 - विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य जो कानून द्वारा न्यायसंगत ठहराया गया हो, या जिसने तथ्य की गलती से स्वयं को कानून द्वारा न्यायसंगत मान लिया हो।
- IPC §80BNS §18
धारा 80 - विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना
किसी वैध कार्य को करते समय दुर्घटना।
- IPC §81BNS §19
धारा 81 - कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है
ऐसा कृत्य जिससे हानि होने की संभावना हो, लेकिन वह आपराधिक इरादे के बिना और अन्य हानि को रोकने के लिए किया गया हो।
- IPC §82BNS §20
धारा 82 - सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य
सात वर्ष से कम आयु के बच्चे का कृत्य।
- IPC §83BNS §21
धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
सात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।
- IPC §84BNS §22
धारा 84 - विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का कृत्य।
- IPC §85BNS §23
धारा 85 - ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
किसी व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा के विरुद्ध किए गए कृत्य, जिसमें वह निर्णय लेने में असमर्थ हो गया हो।
- IPC §86BNS §24
धारा 86 - किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
ऐसा अपराध जिसमें किसी विशेष इरादे या जानकारी की आवश्यकता होती है और जिसे नशे की हालत में किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
- IPC §87BNS §25
धारा 87 - सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो
ऐसा कार्य जिसका उद्देश्य मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाना न हो और न ही जिसके बारे में यह ज्ञात हो कि ऐसा होने की संभावना है, और जो सहमति से किया गया हो।
- IPC §88BNS §26
धारा 88 - किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है
ऐसा कार्य जिसका उद्देश्य मृत्यु उत्पन्न करना न हो, और जो सद्भावनापूर्वक सहमति से व्यक्ति के हित में किया गया हो।
- IPC §89BNS §27
धारा 89 - संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
किसी बच्चे या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के हित में, अभिभावक द्वारा या अभिभावक की सहमति से सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
- IPC §90BNS §28
धारा 90 - सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
भय या गलतफहमी के तहत दी गई सहमति।
- IPC §91BNS §29
धारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
उन कृत्यों को बाहर रखा गया है जो किसी भी प्रकार की हानि से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं।
- IPC §92BNS §30
धारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
बिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
