OPID Act 9
धारा 9 · कुर्की, बिक्री आदि के संबंध में नामित न्यायालय की शक्तियां
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1)
धारा 4 के तहत आवेदन प्राप्त होने पर, नामित न्यायालय वित्तीय संस्थान या किसी अन्य व्यक्ति को, जिसकी संपत्ति सरकार द्वारा धारा 3 के तहत कुर्क की गई है, आवेदन और शपथपत्रों तथा यदि कोई साक्ष्य दर्ज किया गया हो, के साथ एक नोटिस जारी करेगा, जिसमें उक्त संस्थान या उक्त व्यक्ति को नोटिस में निर्दिष्ट तिथि पर कारण बताने के लिए कहा जाएगा कि कुर्की का आदेश अंतिम क्यों न किया जाए और इस प्रकार कुर्क की गई संपत्तियों को सार्वजनिक नीलामी में क्यों न बेचा जाए।(2)
नामित न्यायालय उन सभी अन्य व्यक्तियों को भी नोटिस जारी करेगा, जिनके बारे में न्यायालय को यह बताया गया है कि वित्तीय संस्थान की संपत्ति में या उपधारा (1) के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया है, उसमें उनका कोई हित या हक है या होने की संभावना है। इस नोटिस में उन व्यक्तियों को नोटिस में निर्दिष्ट तिथि पर उपस्थित होने और यदि वे चाहें तो संपत्ति या उसके किसी भाग की कुर्की पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए कहा जाएगा, इस आधार पर कि उनका ऐसी संपत्ति या उसके भाग में कोई हित है।(3)
कुर्क की गई संपत्ति या उसके किसी भाग में हित का दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति, इस धारा के तहत उसे कोई नोटिस तामील न किए जाने के बावजूद, उपधारा (4) या उपधारा (6) के तहत आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय नामित न्यायालय में उपर्युक्त आपत्ति कर सकता है।(4)
यदि कोई कारण नहीं बताया जाता है और निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले कोई आपत्ति नहीं की जाती है, तो नामित न्यायालय तुरंत अंतरिम कुर्की आदेश को अंतिम रूप देने का आदेश पारित करेगा और सक्षम प्राधिकारी को निर्देश देगा कि वह कुर्क की गई संपत्ति को सार्वजनिक नीलामी द्वारा बेच दे और बिक्री से प्राप्त राशि वसूल करे।(5)
यदि कारण बताया जाए या उपर्युक्त अनुसार कोई आपत्ति उठाई जाए तो नामित न्यायालय उसकी जाँच करेगा और ऐसा करते समय, पक्षकारों की जाँच और अन्य सभी मामलों में, नामित न्यायालय, इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (5 ऑफ 1908) के अंतर्गत किसी वाद की सुनवाई करने वाले न्यायालय की प्रक्रिया का पालन करेगा और उसकी सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा। और आपत्ति करने वाले किसी भी व्यक्ति को यह दर्शाने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा कि कुर्की की तिथि पर कुर्क की गई संपत्ति में उसका कोई हित था।(6)
उपधारा (5) के तहत जांच के बाद, नामित न्यायालय धारा 4 की उपधारा (3) के तहत आवेदन प्राप्त होने की तिथि से एक सौ अस्सी दिनों की अवधि के भीतर आदेश पारित करेगा, या तो अंतरिम कुर्की आदेश को स्थायी कर देगा या संपत्ति के एक हिस्से को कुर्की से मुक्त करके उसमें संशोधन करेगा या अंतरिम कुर्की आदेश को रद्द कर देगा और फिर सक्षम प्राधिकारी को निर्देश देगा कि वह इस प्रकार कुर्क की गई संपत्ति को सार्वजनिक नीलामी द्वारा बेच दे और बिक्री से प्राप्त राशि को वसूल करे: बशर्ते कि नामित न्यायालय कुर्की से किसी भी हित को मुक्त नहीं करेगा, जिसके बारे में वह संतुष्ट है कि वित्तीय संस्थान या उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति का संपत्ति में हित है, जब तक कि वह इस बात से भी संतुष्ट न हो जाए कि कुर्की के तहत इतनी राशि या संपत्ति शेष रहेगी जिसका मूल्य ऐसे वित्तीय संस्थान के जमाकर्ताओं को पुनर्भुगतान के लिए आवश्यक मूल्य से कम नहीं होगा।(7)
नामित न्यायालय, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदन किए जाने पर, जमाकर्ताओं के बीच कुर्क किए गए या बिक्री से प्राप्त धन के न्यायसंगत वितरण के लिए ऐसा आदेश पारित करेगा या ऐसा निर्देश जारी करेगा।इस धारा पर आपका निजी नोट
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