BC Act 3अध्याय II · Transfer of the Undertakings of Existing Banks and Share Capitals of the Corresponding New Banks
धारा 3 · संबंधित नए बैंकों की स्थापना और उनका व्यवसाय।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [(1) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर, ऐसे संगत नए बैंकों का गठन किया जाएगा जैसा कि प्रथम अनुसूची के स्तंभ 2 में निर्दिष्ट है।
(2) उपधारा (1) के तहत गठित प्रत्येक संगत नए बैंक की चुकता पूंजी, जब तक धारा 9 के तहत बनाई गई किसी योजना में इस संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया जाता है, उस मौजूदा बैंक की चुकता पूंजी के बराबर होगी जिसके संबंध में यह संगत नया बैंक है।
2 [, [ 3 (2ए) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संगत नए बैंक की अधिकृत पूंजी तीन हजार करोड़ रुपये होगी, जो दस रुपये के तीन सौ करोड़ पूर्णतः भुगतान किए गए शेयरों में विभाजित होगी:
बशर्ते कि संबंधित नया बैंक शेयरों के अंकित या सममूल्य को कम कर सकता है, और अधिकृत पूंजी को रिजर्व बैंक की पूर्व स्वीकृति से ऐसे मूल्यवर्ग में विभाजित कर सकता है जैसा वह तय करे:
इसके अलावा, केंद्र सरकार रिजर्व बैंक से परामर्श करके और आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी करके अधिकृत पूंजी को अपनी इच्छानुसार बढ़ा या घटा सकती है, बशर्ते कि सभी मामलों में शेयर पूर्णतः भुगतान किए गए शेयर हों।
(2ख) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन गठित प्रत्येक समवर्ती नव बैंक की चुकता पूंजी समय-समय पर बढ़ाई जा सकती है।
(क) संबंधित नए बैंक के निदेशक मंडल द्वारा, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, ऐसे बैंक द्वारा स्थापित आरक्षित निधि से ऐसी चुकता पूंजी में हस्तांतरित की जाने वाली ऐसी राशि;
(ख) ऐसी राशियाँ जो केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद, ऐसी चुकता पूंजी में योगदान कर सकती है;
4 [(ग) संबंधित नए बैंक के निदेशक मंडल द्वारा, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, सार्वजनिक निर्गम 5 [या अधिकार निर्गम या बोनस शेयर निर्गम द्वारा] या अधिमान्य आवंटन या निजी प्लेसमेंट द्वारा इक्विटी शेयर या वरीयता शेयर, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जुटाई गई ऐसी राशि, इस प्रकार कि केंद्र सरकार प्रत्येक संबंधित नए बैंक की इक्विटी शेयरों से युक्त चुकता पूंजी का कम से कम इक्यावन प्रतिशत हिस्सा हमेशा अपने पास रखेगी:
बशर्ते कि वरीयता शेयरों का निर्गमन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार होगा, जिसमें वरीयता शेयरों की श्रेणी, प्रत्येक श्रेणी के ऐसे वरीयता शेयरों के निर्गमन की सीमा (चाहे वे शाश्वत हों, अपरिवर्तनीय हों या परिवर्तनीय हों) और वे नियम एवं शर्तें निर्दिष्ट होंगी जिनके अधीन प्रत्येक श्रेणी के वरीयता शेयर निर्गमन किए जा सकते हैं।
6 [(2बीबी) उप-धारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के अंतर्गत गठित किसी समरूप नए बैंक की चुकता पूंजी समय-समय पर और किसी भी चुकता पूंजी को 7 [सार्वजनिक निर्गमन 5 [या अधिकार निर्गमन या बोनस शेयरों के निर्गमन] या उप-धारा (2बी) के खंड (सी) के अंतर्गत अधिमान्य आवंटन या निजी प्लेसमेंट द्वारा बढ़ाने से पहले] कम की जा सकती है
(क) केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद, किसी भी खोई हुई या उपलब्ध परिसंपत्तियों द्वारा अप्रतिनिधित्वित किसी भी प्रदत्त पूंजी को रद्द करके;
(ख) निदेशक मंडल, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, संबंधित नए बैंकों की आवश्यकताओं से अधिक किसी भी चुकता पूंजी का भुगतान करके:
बशर्ते कि यदि किसी अन्य संगत नए बैंक या बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 2 के खंड (घ) में परिभाषित संगत नए बैंक के साथ विलय के कारण ऐसी पूंजी का नुकसान होता है, या उपलब्ध परिसंपत्तियों द्वारा उसका प्रतिनिधित्व नहीं किया जाता है, तो ऐसी कमी भावी या पूर्वव्यापी रूप से की जा सकती है, लेकिन ऐसे विलय की तिथि से पहले की तिथि से नहीं।
(2बीबीए) (क) कोई संगत नया बैंक, समय-समय पर और उपधारा ( 2 बी ) के खंड (सी) के तहत सार्वजनिक निर्गम [या अधिकार निर्गम या बोनस शेयरों के निर्गम] या अधिमान्य आवंटन या निजी आवंटन द्वारा किसी भी चुकता पूंजी को बढ़ाने के बाद, मतदान के हकदार शेयरधारकों की वार्षिक आम बैठक में पारित संकल्प द्वारा, व्यक्तिगत रूप से मतदान करके, या जहां प्रॉक्सी की अनुमति है, प्रॉक्सी द्वारा, और संकल्प के पक्ष में डाले गए वोटों की संख्या, यदि कोई हो, तो संकल्प के विरुद्ध मतदान करने वाले हकदार शेयरधारकों द्वारा डाले गए वोटों की संख्या के तीन गुना से कम नहीं है, तो अपनी चुकता पूंजी को किसी भी तरह से कम कर सकता है।
(ख) पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, चुकता पूंजी को निम्न प्रकार से कम किया जा सकता है--
(i) अवैतनिक शेयर पूंजी के संबंध में उसके किसी भी शेयर पर देयता को समाप्त करना या कम करना;
(ii) अपने किसी भी भुगतानित शेयर पर देयता को समाप्त या कम किए बिना या उसके साथ, खोई हुई या उपलब्ध परिसंपत्तियों द्वारा अप्रतिनिधित्वित किसी भी भुगतानित पूंजी को रद्द करना; या
(iii) अपने किसी भी भुगतानित शेयरों पर देयता को समाप्त या कम किए बिना, संबंधित नए बैंक की जरूरतों से अधिक किसी भी भुगतानित शेयर पूंजी का भुगतान करना।
(2बीबी) उपधारा (2बीबी) या उपधारा (2बीबीए) में किसी बात के होते हुए भी, किसी संगत नए बैंक की चुकता पूंजी को किसी भी समय इस प्रकार कम नहीं किया जाएगा कि वह बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) संशोधन अधिनियम, 1995 (1995 का 8) के प्रारंभ होने की तिथि पर उस बैंक की चुकता पूंजी के पच्चीस प्रतिशत से कम हो जाए।]
(2सी) किसी समरूप नए बैंक की संपूर्ण चुकता पूंजी, सार्वजनिक निर्गम 5 [या अधिकार निर्गम या बोनस शेयरों के निर्गम द्वारा] या अधिमान्य आवंटन या उपधारा (2बी) के खंड (सी) के तहत निजी प्लेसमेंट द्वारा जनता से जुटाई गई चुकता पूंजी 7 को छोड़कर, केंद्र सरकार में निहित होगी और उसे आवंटित की जाएगी।
(2D) केंद्र सरकार के स्वामित्व में न होने वाले प्रत्येक संगत नए बैंक के शेयर स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय होंगे:
बशर्ते कि भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति या कंपनी, या भारत में लागू न होने वाले किसी कानून के तहत निगमित कोई भी कंपनी, या ऐसी कंपनी की कोई भी शाखा, चाहे वह भारत के बाहर रहती हो या नहीं, किसी भी समय संबंधित नए बैंक के शेयरों को इस प्रकार धारण या हस्तांतरण या किसी अन्य तरीके से प्राप्त नहीं करेगी कि कुल मिलाकर ऐसा निवेश, केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट प्रतिशत से अधिक हो, जो कि चुकता पूंजी के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
स्पष्टीकरण। इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "कंपनी" का अर्थ कोई निगमित निकाय है और इसमें कोई फर्म या व्यक्तियों का अन्य संघ शामिल है।
(2ई) केंद्र सरकार के अलावा, संबंधित नए बैंक का कोई भी शेयरधारक, संबंधित नए बैंक के सभी शेयरधारकों के कुल मतदान अधिकारों के 8 [दस प्रतिशत] से अधिक शेयरों के संबंध में मतदान अधिकारों का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा।
9. बशर्ते कि संबंधित नए बैंक में किसी भी अधिमान्य शेयर पूंजी को धारण करने वाले शेयरधारक को ऐसी पूंजी के संबंध में केवल ऐसे संबंधित नए बैंक के समक्ष रखे गए प्रस्तावों पर मतदान करने का अधिकार होगा जो सीधे उसके अधिमान्य शेयरों से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करते हैं:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि [केंद्र सरकार के अलावा कोई भी वरीयता शेयरधारक, वरीयता शेयर पूंजी रखने वाले सभी शेयरधारकों के कुल मतदान अधिकारों के दस प्रतिशत से अधिक वरीयता शेयरों के संबंध में मतदान अधिकारों का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा।]
(2F) प्रत्येक पत्राचार करने वाला नया बैंक अपने प्रधान कार्यालय में एक या एक से अधिक पुस्तकों में शेयरधारकों का एक रजिस्टर रखेगा (इस अधिनियम में इसे रजिस्टर कहा गया है) और उसमें निम्नलिखित विवरण दर्ज करेगा:--
(i) शेयरधारकों के नाम, पते और व्यवसाय, यदि कोई हो, और प्रत्येक शेयरधारक द्वारा धारित शेयरों का विवरण, प्रत्येक शेयर को उसके निरूपित संख्या द्वारा अलग करते हुए;
(ii) वह तिथि जिस पर प्रत्येक व्यक्ति को शेयरधारक के रूप में दर्ज किया जाता है;
(iii) वह तिथि जिस पर कोई व्यक्ति शेयरधारक नहीं रह जाता; और
(iv) ऐसे अन्य विवरण जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
11. इस उपधारा की कोई बात डिपॉजिटरी के पास रखे शेयरों पर लागू नहीं होगी।
(2जी) उपधारा (2एफ) में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक पत्राचार करने वाले नए बैंक के लिए कंप्यूटर फ्लॉपी या डिस्क में रजिस्टर रखना वैध होगा, बशर्ते कि ऐसे सुरक्षा उपाय निर्धारित किए जाएं।
(3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्टर की प्रति या उससे उद्धृत अंश, जो इस संबंध में अधिकृत संबंधित नए बैंक के अधिकारी द्वारा प्रमाणित सत्य प्रतिलिपि हो, सभी कानूनी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगा।]
(4) प्रत्येक संगत नया बैंक एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी और इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उसे संपत्ति प्राप्त करने, धारण करने और उसका निपटान करने तथा अनुबंध करने का अधिकार होगा तथा उसके नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है।
(5) प्रत्येक पत्राचार नया बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 के खंड (ख) में परिभाषित बैंकिंग व्यवसाय करेगा और उसका संचालन करेगा तथा उस अधिनियम की धारा 6 की उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट [एक या अधिक अन्य प्रकार के व्यवसाय] में संलग्न हो सकता है।
(6) प्रत्येक संगत नया बैंक एक आरक्षित निधि स्थापित करेगा जिसमें शेयर प्रीमियम और शेष राशि, यदि कोई हो, उस मौजूदा बैंक की आरक्षित निधि में जमा की जाएगी जिसके संबंध में यह संगत नया बैंक है, और ऐसी अतिरिक्त राशियाँ, यदि कोई हो, जो बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 17 के प्रावधानों के अनुसार हस्तांतरित की जा सकती हैं।
13 [(7) (i) संबंधित नया बैंक, यदि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, तो भारत में उन सभी स्थानों पर जहाँ उसकी शाखा है, भारतीय रिज़र्व बैंक के एजेंट के रूप में कार्य करेगा, क्योंकि--
(क) भारत में किसी भी सरकार की ओर से धन, बुलियन और प्रतिभूतियों का भुगतान करना, प्राप्त करना, एकत्र करना और प्रेषण करना; और
(ख) कोई अन्य व्यवसाय करना और उसका संचालन करना जिसे रिजर्व बैंक समय-समय पर उसे सौंप सकता है।
(ii) रिजर्व बैंक की ओर से संबंधित नए बैंक द्वारा इस प्रकार के किसी भी एजेंसी व्यवसाय को चलाने के लिए जो नियम और शर्तें लागू होंगी, वे ऐसी होंगी जिन पर सहमति हो सकती है।
(iii) यदि खंड (ii) में निर्दिष्ट किसी मामले पर कोई समझौता नहीं हो पाता है, या यदि संबंधित नए बैंक और रिजर्व बैंक के बीच उनके बीच किसी समझौते की व्याख्या को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो मामला केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और उस पर केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
(iv) संबंधित नया बैंक खंड (i) के अधीन उसे सौंपे गए किसी भी व्यवसाय का लेन-देन कर सकता है या किसी भी कार्य का निष्पादन स्वयं या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी एजेंट के माध्यम से कर सकता है।]
(2) उपधारा (1) के तहत गठित प्रत्येक संगत नए बैंक की चुकता पूंजी, जब तक धारा 9 के तहत बनाई गई किसी योजना में इस संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया जाता है, उस मौजूदा बैंक की चुकता पूंजी के बराबर होगी जिसके संबंध में यह संगत नया बैंक है।
2 [, [ 3 (2ए) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संगत नए बैंक की अधिकृत पूंजी तीन हजार करोड़ रुपये होगी, जो दस रुपये के तीन सौ करोड़ पूर्णतः भुगतान किए गए शेयरों में विभाजित होगी:
बशर्ते कि संबंधित नया बैंक शेयरों के अंकित या सममूल्य को कम कर सकता है, और अधिकृत पूंजी को रिजर्व बैंक की पूर्व स्वीकृति से ऐसे मूल्यवर्ग में विभाजित कर सकता है जैसा वह तय करे:
इसके अलावा, केंद्र सरकार रिजर्व बैंक से परामर्श करके और आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी करके अधिकृत पूंजी को अपनी इच्छानुसार बढ़ा या घटा सकती है, बशर्ते कि सभी मामलों में शेयर पूर्णतः भुगतान किए गए शेयर हों।
(2ख) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन गठित प्रत्येक समवर्ती नव बैंक की चुकता पूंजी समय-समय पर बढ़ाई जा सकती है।
(क) संबंधित नए बैंक के निदेशक मंडल द्वारा, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, ऐसे बैंक द्वारा स्थापित आरक्षित निधि से ऐसी चुकता पूंजी में हस्तांतरित की जाने वाली ऐसी राशि;
(ख) ऐसी राशियाँ जो केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद, ऐसी चुकता पूंजी में योगदान कर सकती है;
4 [(ग) संबंधित नए बैंक के निदेशक मंडल द्वारा, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, सार्वजनिक निर्गम 5 [या अधिकार निर्गम या बोनस शेयर निर्गम द्वारा] या अधिमान्य आवंटन या निजी प्लेसमेंट द्वारा इक्विटी शेयर या वरीयता शेयर, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जुटाई गई ऐसी राशि, इस प्रकार कि केंद्र सरकार प्रत्येक संबंधित नए बैंक की इक्विटी शेयरों से युक्त चुकता पूंजी का कम से कम इक्यावन प्रतिशत हिस्सा हमेशा अपने पास रखेगी:
बशर्ते कि वरीयता शेयरों का निर्गमन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार होगा, जिसमें वरीयता शेयरों की श्रेणी, प्रत्येक श्रेणी के ऐसे वरीयता शेयरों के निर्गमन की सीमा (चाहे वे शाश्वत हों, अपरिवर्तनीय हों या परिवर्तनीय हों) और वे नियम एवं शर्तें निर्दिष्ट होंगी जिनके अधीन प्रत्येक श्रेणी के वरीयता शेयर निर्गमन किए जा सकते हैं।
6 [(2बीबी) उप-धारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के अंतर्गत गठित किसी समरूप नए बैंक की चुकता पूंजी समय-समय पर और किसी भी चुकता पूंजी को 7 [सार्वजनिक निर्गमन 5 [या अधिकार निर्गमन या बोनस शेयरों के निर्गमन] या उप-धारा (2बी) के खंड (सी) के अंतर्गत अधिमान्य आवंटन या निजी प्लेसमेंट द्वारा बढ़ाने से पहले] कम की जा सकती है
(क) केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद, किसी भी खोई हुई या उपलब्ध परिसंपत्तियों द्वारा अप्रतिनिधित्वित किसी भी प्रदत्त पूंजी को रद्द करके;
(ख) निदेशक मंडल, रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, संबंधित नए बैंकों की आवश्यकताओं से अधिक किसी भी चुकता पूंजी का भुगतान करके:
बशर्ते कि यदि किसी अन्य संगत नए बैंक या बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 2 के खंड (घ) में परिभाषित संगत नए बैंक के साथ विलय के कारण ऐसी पूंजी का नुकसान होता है, या उपलब्ध परिसंपत्तियों द्वारा उसका प्रतिनिधित्व नहीं किया जाता है, तो ऐसी कमी भावी या पूर्वव्यापी रूप से की जा सकती है, लेकिन ऐसे विलय की तिथि से पहले की तिथि से नहीं।
(2बीबीए) (क) कोई संगत नया बैंक, समय-समय पर और उपधारा ( 2 बी ) के खंड (सी) के तहत सार्वजनिक निर्गम [या अधिकार निर्गम या बोनस शेयरों के निर्गम] या अधिमान्य आवंटन या निजी आवंटन द्वारा किसी भी चुकता पूंजी को बढ़ाने के बाद, मतदान के हकदार शेयरधारकों की वार्षिक आम बैठक में पारित संकल्प द्वारा, व्यक्तिगत रूप से मतदान करके, या जहां प्रॉक्सी की अनुमति है, प्रॉक्सी द्वारा, और संकल्प के पक्ष में डाले गए वोटों की संख्या, यदि कोई हो, तो संकल्प के विरुद्ध मतदान करने वाले हकदार शेयरधारकों द्वारा डाले गए वोटों की संख्या के तीन गुना से कम नहीं है, तो अपनी चुकता पूंजी को किसी भी तरह से कम कर सकता है।
(ख) पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, चुकता पूंजी को निम्न प्रकार से कम किया जा सकता है--
(i) अवैतनिक शेयर पूंजी के संबंध में उसके किसी भी शेयर पर देयता को समाप्त करना या कम करना;
(ii) अपने किसी भी भुगतानित शेयर पर देयता को समाप्त या कम किए बिना या उसके साथ, खोई हुई या उपलब्ध परिसंपत्तियों द्वारा अप्रतिनिधित्वित किसी भी भुगतानित पूंजी को रद्द करना; या
(iii) अपने किसी भी भुगतानित शेयरों पर देयता को समाप्त या कम किए बिना, संबंधित नए बैंक की जरूरतों से अधिक किसी भी भुगतानित शेयर पूंजी का भुगतान करना।
(2बीबी) उपधारा (2बीबी) या उपधारा (2बीबीए) में किसी बात के होते हुए भी, किसी संगत नए बैंक की चुकता पूंजी को किसी भी समय इस प्रकार कम नहीं किया जाएगा कि वह बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) संशोधन अधिनियम, 1995 (1995 का 8) के प्रारंभ होने की तिथि पर उस बैंक की चुकता पूंजी के पच्चीस प्रतिशत से कम हो जाए।]
(2सी) किसी समरूप नए बैंक की संपूर्ण चुकता पूंजी, सार्वजनिक निर्गम 5 [या अधिकार निर्गम या बोनस शेयरों के निर्गम द्वारा] या अधिमान्य आवंटन या उपधारा (2बी) के खंड (सी) के तहत निजी प्लेसमेंट द्वारा जनता से जुटाई गई चुकता पूंजी 7 को छोड़कर, केंद्र सरकार में निहित होगी और उसे आवंटित की जाएगी।
(2D) केंद्र सरकार के स्वामित्व में न होने वाले प्रत्येक संगत नए बैंक के शेयर स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय होंगे:
बशर्ते कि भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति या कंपनी, या भारत में लागू न होने वाले किसी कानून के तहत निगमित कोई भी कंपनी, या ऐसी कंपनी की कोई भी शाखा, चाहे वह भारत के बाहर रहती हो या नहीं, किसी भी समय संबंधित नए बैंक के शेयरों को इस प्रकार धारण या हस्तांतरण या किसी अन्य तरीके से प्राप्त नहीं करेगी कि कुल मिलाकर ऐसा निवेश, केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट प्रतिशत से अधिक हो, जो कि चुकता पूंजी के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
स्पष्टीकरण। इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "कंपनी" का अर्थ कोई निगमित निकाय है और इसमें कोई फर्म या व्यक्तियों का अन्य संघ शामिल है।
(2ई) केंद्र सरकार के अलावा, संबंधित नए बैंक का कोई भी शेयरधारक, संबंधित नए बैंक के सभी शेयरधारकों के कुल मतदान अधिकारों के 8 [दस प्रतिशत] से अधिक शेयरों के संबंध में मतदान अधिकारों का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा।
9. बशर्ते कि संबंधित नए बैंक में किसी भी अधिमान्य शेयर पूंजी को धारण करने वाले शेयरधारक को ऐसी पूंजी के संबंध में केवल ऐसे संबंधित नए बैंक के समक्ष रखे गए प्रस्तावों पर मतदान करने का अधिकार होगा जो सीधे उसके अधिमान्य शेयरों से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करते हैं:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि [केंद्र सरकार के अलावा कोई भी वरीयता शेयरधारक, वरीयता शेयर पूंजी रखने वाले सभी शेयरधारकों के कुल मतदान अधिकारों के दस प्रतिशत से अधिक वरीयता शेयरों के संबंध में मतदान अधिकारों का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा।]
(2F) प्रत्येक पत्राचार करने वाला नया बैंक अपने प्रधान कार्यालय में एक या एक से अधिक पुस्तकों में शेयरधारकों का एक रजिस्टर रखेगा (इस अधिनियम में इसे रजिस्टर कहा गया है) और उसमें निम्नलिखित विवरण दर्ज करेगा:--
(i) शेयरधारकों के नाम, पते और व्यवसाय, यदि कोई हो, और प्रत्येक शेयरधारक द्वारा धारित शेयरों का विवरण, प्रत्येक शेयर को उसके निरूपित संख्या द्वारा अलग करते हुए;
(ii) वह तिथि जिस पर प्रत्येक व्यक्ति को शेयरधारक के रूप में दर्ज किया जाता है;
(iii) वह तिथि जिस पर कोई व्यक्ति शेयरधारक नहीं रह जाता; और
(iv) ऐसे अन्य विवरण जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
11. इस उपधारा की कोई बात डिपॉजिटरी के पास रखे शेयरों पर लागू नहीं होगी।
(2जी) उपधारा (2एफ) में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक पत्राचार करने वाले नए बैंक के लिए कंप्यूटर फ्लॉपी या डिस्क में रजिस्टर रखना वैध होगा, बशर्ते कि ऐसे सुरक्षा उपाय निर्धारित किए जाएं।
(3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्टर की प्रति या उससे उद्धृत अंश, जो इस संबंध में अधिकृत संबंधित नए बैंक के अधिकारी द्वारा प्रमाणित सत्य प्रतिलिपि हो, सभी कानूनी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगा।]
(4) प्रत्येक संगत नया बैंक एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी और इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उसे संपत्ति प्राप्त करने, धारण करने और उसका निपटान करने तथा अनुबंध करने का अधिकार होगा तथा उसके नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है।
(5) प्रत्येक पत्राचार नया बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 के खंड (ख) में परिभाषित बैंकिंग व्यवसाय करेगा और उसका संचालन करेगा तथा उस अधिनियम की धारा 6 की उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट [एक या अधिक अन्य प्रकार के व्यवसाय] में संलग्न हो सकता है।
(6) प्रत्येक संगत नया बैंक एक आरक्षित निधि स्थापित करेगा जिसमें शेयर प्रीमियम और शेष राशि, यदि कोई हो, उस मौजूदा बैंक की आरक्षित निधि में जमा की जाएगी जिसके संबंध में यह संगत नया बैंक है, और ऐसी अतिरिक्त राशियाँ, यदि कोई हो, जो बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 17 के प्रावधानों के अनुसार हस्तांतरित की जा सकती हैं।
13 [(7) (i) संबंधित नया बैंक, यदि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, तो भारत में उन सभी स्थानों पर जहाँ उसकी शाखा है, भारतीय रिज़र्व बैंक के एजेंट के रूप में कार्य करेगा, क्योंकि--
(क) भारत में किसी भी सरकार की ओर से धन, बुलियन और प्रतिभूतियों का भुगतान करना, प्राप्त करना, एकत्र करना और प्रेषण करना; और
(ख) कोई अन्य व्यवसाय करना और उसका संचालन करना जिसे रिजर्व बैंक समय-समय पर उसे सौंप सकता है।
(ii) रिजर्व बैंक की ओर से संबंधित नए बैंक द्वारा इस प्रकार के किसी भी एजेंसी व्यवसाय को चलाने के लिए जो नियम और शर्तें लागू होंगी, वे ऐसी होंगी जिन पर सहमति हो सकती है।
(iii) यदि खंड (ii) में निर्दिष्ट किसी मामले पर कोई समझौता नहीं हो पाता है, या यदि संबंधित नए बैंक और रिजर्व बैंक के बीच उनके बीच किसी समझौते की व्याख्या को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो मामला केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और उस पर केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
(iv) संबंधित नया बैंक खंड (i) के अधीन उसे सौंपे गए किसी भी व्यवसाय का लेन-देन कर सकता है या किसी भी कार्य का निष्पादन स्वयं या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी एजेंट के माध्यम से कर सकता है।]
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

