CF Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "अनुमोदित बैंक" से तात्पर्य स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1955 (23 ऑफ 1955) की धारा 3 के तहत गठित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (सहायक बैंक) अधिनियम, 1959 (38 ऑफ 1959) की धारा 3 के तहत गठित सहायक बैंक, या बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 (5 ऑफ 1970) की धारा 3 के तहत गठित संगत नया बैंक, या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (21 ऑफ 1976) की धारा 3 के तहत स्थापित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, या बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1980 (40 ऑफ 1980) की धारा 3 के तहत गठित संगत नया बैंक, या बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 के खंड (ई) के तहत परिभाषित बैंकिंग कंपनी, या अधिसूचित बैंकिंग संस्था से है। केंद्र सरकार द्वारा उस अधिनियम की धारा 51 के तहत या ऐसे किसी अन्य बैंकिंग संस्थान द्वारा जिसे राज्य सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित कर सकती है;
(ख) "चिट" का अर्थ है कोई ऐसा लेन-देन, चाहे उसे चिट, चिट फंड, चिट्टी, कुरी 1 [, भाईचारा कोष, घूर्णन बचत एवं ऋण संस्था] या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए, जिसके द्वारा या जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति निर्दिष्ट संख्या में व्यक्तियों के साथ एक समझौता करता है कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित अवधि में आवधिक किश्तों के रूप में एक निश्चित राशि (या इसके बदले अनाज की एक निश्चित मात्रा) का भुगतान करेगा और ऐसा प्रत्येक भुगतानकर्ता, अपनी बारी में, जैसा कि लॉटरी या नीलामी या निविदा या चिट समझौते में निर्दिष्ट किसी अन्य तरीके से निर्धारित किया गया हो, 2 [शुद्ध चिट राशि] का हकदार होगा।
स्पष्टीकरण। -- इस खंड के अर्थ में कोई लेन-देन चिट नहीं है, यदि ऐसे लेन-देन में,--
(i) केवल कुछ ग्राहकों को ही, सभी को नहीं, भविष्य में सदस्यता शुल्क का भुगतान करने की किसी भी देयता के बिना 2 [शुद्ध चिट राशि] प्राप्त होती है; या
(ii) सभी ग्राहकों को बारी-बारी से 3 [सकल चिट राशि] प्राप्त होती है, साथ ही भविष्य के सदस्यता शुल्क का भुगतान करने का दायित्व भी होता है;
(ग) "चिट समझौता" से तात्पर्य उस दस्तावेज से है जिसमें फोरमैन और ग्राहकों के बीच चिट से संबंधित समझौते के अनुच्छेद शामिल हैं;
4 * * * * *
(ई) "चिट व्यवसाय" से तात्पर्य चिट चलाने के व्यवसाय से है;
(f) "डिफ़ॉल्ट करने वाला ग्राहक" से तात्पर्य ऐसे ग्राहक से है जिसने चिट समझौते की शर्तों के अनुसार देय सदस्यता शुल्क के भुगतान में चूक की हो;
(g) "छूट" से तात्पर्य धनराशि या अनाज की मात्रा से है जिसे एक पुरस्कार विजेता ग्राहक को चिट समझौते की शर्तों के तहत त्यागना आवश्यक है और जिसे उक्त समझौते के तहत चिट चलाने के खर्चों को पूरा करने या ग्राहकों के बीच वितरण करने या दोनों के लिए अलग रखा जाता है;
5 * * * * *
(i) "ड्रॉ" से तात्पर्य चिट समझौते में निर्दिष्ट तरीके से चिट की किसी भी किस्त पर विजेता ग्राहक का पता लगाने से है;
(जे) "फोरमैन" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो चिट समझौते के तहत चिट के संचालन के लिए जिम्मेदार है और इसमें धारा 39 के तहत फोरमैन के कार्यों का निर्वहन करने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल है;
6 [(जेए) "सकल चिट राशि" से तात्पर्य किसी चिट की किसी किस्त के लिए सभी ग्राहकों द्वारा देय सदस्यता का कुल योग है, जिसमें छूट या अन्य किसी प्रकार की कटौती शामिल नहीं है;
(जेबी) "शुद्ध चिट राशि" का अर्थ सकल चिट राशि और छूट के बीच का अंतर है, और टिकट के अंश के मामले में इसका अर्थ सकल चिट राशि और टिकट के अंश के अनुपात में छूट के बीच का अंतर है, और जब शुद्ध चिट राशि नकद के अलावा किसी अन्य तरीके से देय हो, तो शुद्ध चिट राशि का मूल्य उस समय का मूल्य होगा जब वह देय हो जाती है;]
(k) "गैर-पुरस्कृत ग्राहक" में डिफ़ॉल्ट करने वाला ग्राहक शामिल नहीं है;
(l) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
7 * * * * *;
(n) "पुरस्कृत ग्राहक" से तात्पर्य ऐसे ग्राहक से है जिसने या तो 2 [शुद्ध चिट राशि] प्राप्त कर ली है या प्राप्त करने का हकदार है;
(ओ) "रजिस्ट्रार" से तात्पर्य धारा 61 के अधीन नियुक्त चिटों के रजिस्ट्रार से है, और इसमें उस धारा के अधीन नियुक्त अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक रजिस्ट्रार शामिल हैं;
(पी) "रिजर्व बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के तहत गठित भारतीय रिजर्व बैंक से है;
8 [(pa) “छूट का हिस्सा” का अर्थ है चिट समझौते के तहत उपलब्ध छूट की राशि में ग्राहक का हिस्सा, जो चिट की प्रत्येक किस्त पर ग्राहकों के बीच आनुपातिक वितरण के लिए निर्धारित है।]
(q) किसी केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में "राज्य सरकार" से तात्पर्य संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उस केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक से है;
(आर) "ग्राहक" में वह व्यक्ति शामिल है जो टिकट का अंश रखता है और साथ ही लिखित रूप में हस्तांतरण द्वारा या कानून के संचालन द्वारा टिकट या उसके अंश का हस्तांतरणकर्ता भी शामिल है;
(s) "टिकट" से तात्पर्य किसी चिट में ग्राहक के हिस्से से है।
(क) "अनुमोदित बैंक" से तात्पर्य स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1955 (23 ऑफ 1955) की धारा 3 के तहत गठित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (सहायक बैंक) अधिनियम, 1959 (38 ऑफ 1959) की धारा 3 के तहत गठित सहायक बैंक, या बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 (5 ऑफ 1970) की धारा 3 के तहत गठित संगत नया बैंक, या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (21 ऑफ 1976) की धारा 3 के तहत स्थापित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, या बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1980 (40 ऑफ 1980) की धारा 3 के तहत गठित संगत नया बैंक, या बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 के खंड (ई) के तहत परिभाषित बैंकिंग कंपनी, या अधिसूचित बैंकिंग संस्था से है। केंद्र सरकार द्वारा उस अधिनियम की धारा 51 के तहत या ऐसे किसी अन्य बैंकिंग संस्थान द्वारा जिसे राज्य सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित कर सकती है;
(ख) "चिट" का अर्थ है कोई ऐसा लेन-देन, चाहे उसे चिट, चिट फंड, चिट्टी, कुरी 1 [, भाईचारा कोष, घूर्णन बचत एवं ऋण संस्था] या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए, जिसके द्वारा या जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति निर्दिष्ट संख्या में व्यक्तियों के साथ एक समझौता करता है कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित अवधि में आवधिक किश्तों के रूप में एक निश्चित राशि (या इसके बदले अनाज की एक निश्चित मात्रा) का भुगतान करेगा और ऐसा प्रत्येक भुगतानकर्ता, अपनी बारी में, जैसा कि लॉटरी या नीलामी या निविदा या चिट समझौते में निर्दिष्ट किसी अन्य तरीके से निर्धारित किया गया हो, 2 [शुद्ध चिट राशि] का हकदार होगा।
स्पष्टीकरण। -- इस खंड के अर्थ में कोई लेन-देन चिट नहीं है, यदि ऐसे लेन-देन में,--
(i) केवल कुछ ग्राहकों को ही, सभी को नहीं, भविष्य में सदस्यता शुल्क का भुगतान करने की किसी भी देयता के बिना 2 [शुद्ध चिट राशि] प्राप्त होती है; या
(ii) सभी ग्राहकों को बारी-बारी से 3 [सकल चिट राशि] प्राप्त होती है, साथ ही भविष्य के सदस्यता शुल्क का भुगतान करने का दायित्व भी होता है;
(ग) "चिट समझौता" से तात्पर्य उस दस्तावेज से है जिसमें फोरमैन और ग्राहकों के बीच चिट से संबंधित समझौते के अनुच्छेद शामिल हैं;
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(ई) "चिट व्यवसाय" से तात्पर्य चिट चलाने के व्यवसाय से है;
(f) "डिफ़ॉल्ट करने वाला ग्राहक" से तात्पर्य ऐसे ग्राहक से है जिसने चिट समझौते की शर्तों के अनुसार देय सदस्यता शुल्क के भुगतान में चूक की हो;
(g) "छूट" से तात्पर्य धनराशि या अनाज की मात्रा से है जिसे एक पुरस्कार विजेता ग्राहक को चिट समझौते की शर्तों के तहत त्यागना आवश्यक है और जिसे उक्त समझौते के तहत चिट चलाने के खर्चों को पूरा करने या ग्राहकों के बीच वितरण करने या दोनों के लिए अलग रखा जाता है;
5 * * * * *
(i) "ड्रॉ" से तात्पर्य चिट समझौते में निर्दिष्ट तरीके से चिट की किसी भी किस्त पर विजेता ग्राहक का पता लगाने से है;
(जे) "फोरमैन" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो चिट समझौते के तहत चिट के संचालन के लिए जिम्मेदार है और इसमें धारा 39 के तहत फोरमैन के कार्यों का निर्वहन करने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल है;
6 [(जेए) "सकल चिट राशि" से तात्पर्य किसी चिट की किसी किस्त के लिए सभी ग्राहकों द्वारा देय सदस्यता का कुल योग है, जिसमें छूट या अन्य किसी प्रकार की कटौती शामिल नहीं है;
(जेबी) "शुद्ध चिट राशि" का अर्थ सकल चिट राशि और छूट के बीच का अंतर है, और टिकट के अंश के मामले में इसका अर्थ सकल चिट राशि और टिकट के अंश के अनुपात में छूट के बीच का अंतर है, और जब शुद्ध चिट राशि नकद के अलावा किसी अन्य तरीके से देय हो, तो शुद्ध चिट राशि का मूल्य उस समय का मूल्य होगा जब वह देय हो जाती है;]
(k) "गैर-पुरस्कृत ग्राहक" में डिफ़ॉल्ट करने वाला ग्राहक शामिल नहीं है;
(l) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
7 * * * * *;
(n) "पुरस्कृत ग्राहक" से तात्पर्य ऐसे ग्राहक से है जिसने या तो 2 [शुद्ध चिट राशि] प्राप्त कर ली है या प्राप्त करने का हकदार है;
(ओ) "रजिस्ट्रार" से तात्पर्य धारा 61 के अधीन नियुक्त चिटों के रजिस्ट्रार से है, और इसमें उस धारा के अधीन नियुक्त अतिरिक्त, संयुक्त, उप या सहायक रजिस्ट्रार शामिल हैं;
(पी) "रिजर्व बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के तहत गठित भारतीय रिजर्व बैंक से है;
8 [(pa) “छूट का हिस्सा” का अर्थ है चिट समझौते के तहत उपलब्ध छूट की राशि में ग्राहक का हिस्सा, जो चिट की प्रत्येक किस्त पर ग्राहकों के बीच आनुपातिक वितरण के लिए निर्धारित है।]
(q) किसी केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में "राज्य सरकार" से तात्पर्य संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उस केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक से है;
(आर) "ग्राहक" में वह व्यक्ति शामिल है जो टिकट का अंश रखता है और साथ ही लिखित रूप में हस्तांतरण द्वारा या कानून के संचालन द्वारा टिकट या उसके अंश का हस्तांतरणकर्ता भी शामिल है;
(s) "टिकट" से तात्पर्य किसी चिट में ग्राहक के हिस्से से है।
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