FEM Act 13अध्याय IV · Contravention and Penalties
धारा 13 · दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है, या इस अधिनियम के अधीन शक्तियों के प्रयोग में जारी किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निर्देश या आदेश का उल्लंघन करता है, या रिजर्व बैंक द्वारा जारी किसी प्राधिकरण की किसी शर्त का उल्लंघन करता है, तो वह न्यायनिर्णय के आधार पर, ऐसे उल्लंघन में शामिल राशि के तिगुने तक के जुर्माने का हकदार होगा, यदि ऐसी राशि का निर्धारण किया जा सकता है, या दो लाख रुपये तक के जुर्माने का, यदि राशि का निर्धारण नहीं किया जा सकता है, और यदि ऐसा उल्लंघन निरंतर जारी रहता है, तो उल्लंघन जारी रहने वाले पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
1 [(1ए) यदि किसी व्यक्ति को धारा 37ए की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन निर्धारित सीमा से अधिक कुल मूल्य की कोई विदेशी मुद्रा, विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति, जो भारत के बाहर स्थित हो, अर्जित करते हुए पाया जाता है, तो वह ऐसे उल्लंघन में शामिल राशि के तीन गुना तक के जुर्माने और भारत में स्थित समतुल्य मूल्य की विदेशी मुद्रा, विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति की ज़ब्ती के लिए उत्तरदायी होगा।
(1ख) यदि निर्णयकर्ता प्राधिकारी उपधारा (1क) के अंतर्गत कार्यवाही में उचित समझे, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद अभियोजन प्रारंभ करने की अनुशंसा कर सकता है, और यदि प्रवर्तन निदेशक संतुष्ट हो, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद सहायक निदेशक से कम रैंक के अधिकारी द्वारा दोषी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक शिकायत दर्ज करके अभियोजन का निर्देश दे सकता है।
(1सी) यदि किसी व्यक्ति को भारत के बाहर स्थित विदेशी मुद्रा, विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति का कुल मूल्य धारा 37ए की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन निर्धारित सीमा से अधिक प्राप्त करते हुए पाया जाता है, तो उसे उपधारा (1ए) के अधीन लगाए गए दंड के अतिरिक्त पांच वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
(1D) धारा 13 की उपधारा (1C) के अंतर्गत किसी अपराध का संज्ञान न्यायालय तब तक नहीं लेगा जब तक कि उपधारा (1B) में निर्दिष्ट सहायक निदेशक से कम रैंक के अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत न दी जाए।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी उल्लंघन का निर्णय करने वाला कोई भी न्यायनिर्णायक प्राधिकरण, यदि वह उचित समझे, तो ऐसे उल्लंघन के लिए लगाए जाने वाले किसी भी दंड के अतिरिक्त यह निर्देश दे सकता है कि कोई भी मुद्रा, प्रतिभूति या कोई अन्य धन या संपत्ति जिसके संबंध में उल्लंघन हुआ है, केंद्र सरकार के पास जब्त कर ली जाए और आगे यह निर्देश दे सकता है कि उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों की विदेशी मुद्रा धारिता, यदि कोई हो, या उसका कोई भाग, भारत में वापस लाया जाए या इस संबंध में दिए गए निर्देशों के अनुसार भारत से बाहर रखा जाए।
स्पष्टीकरण। --इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, जिस संपत्ति के संबंध में उल्लंघन हुआ है, उसमें निम्नलिखित शामिल होंगे--
(क) बैंक में जमा राशि, जहां उक्त संपत्ति को ऐसी जमा राशि में परिवर्तित किया जाता है;
(ख) भारतीय मुद्रा, जहां उक्त संपत्ति को उस मुद्रा में परिवर्तित किया जाता है; और
(ग) कोई अन्य संपत्ति जो उस संपत्ति के रूपांतरण से उत्पन्न हुई हो।
1 [(1ए) यदि किसी व्यक्ति को धारा 37ए की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन निर्धारित सीमा से अधिक कुल मूल्य की कोई विदेशी मुद्रा, विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति, जो भारत के बाहर स्थित हो, अर्जित करते हुए पाया जाता है, तो वह ऐसे उल्लंघन में शामिल राशि के तीन गुना तक के जुर्माने और भारत में स्थित समतुल्य मूल्य की विदेशी मुद्रा, विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति की ज़ब्ती के लिए उत्तरदायी होगा।
(1ख) यदि निर्णयकर्ता प्राधिकारी उपधारा (1क) के अंतर्गत कार्यवाही में उचित समझे, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद अभियोजन प्रारंभ करने की अनुशंसा कर सकता है, और यदि प्रवर्तन निदेशक संतुष्ट हो, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद सहायक निदेशक से कम रैंक के अधिकारी द्वारा दोषी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक शिकायत दर्ज करके अभियोजन का निर्देश दे सकता है।
(1सी) यदि किसी व्यक्ति को भारत के बाहर स्थित विदेशी मुद्रा, विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति का कुल मूल्य धारा 37ए की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन निर्धारित सीमा से अधिक प्राप्त करते हुए पाया जाता है, तो उसे उपधारा (1ए) के अधीन लगाए गए दंड के अतिरिक्त पांच वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
(1D) धारा 13 की उपधारा (1C) के अंतर्गत किसी अपराध का संज्ञान न्यायालय तब तक नहीं लेगा जब तक कि उपधारा (1B) में निर्दिष्ट सहायक निदेशक से कम रैंक के अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत न दी जाए।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी उल्लंघन का निर्णय करने वाला कोई भी न्यायनिर्णायक प्राधिकरण, यदि वह उचित समझे, तो ऐसे उल्लंघन के लिए लगाए जाने वाले किसी भी दंड के अतिरिक्त यह निर्देश दे सकता है कि कोई भी मुद्रा, प्रतिभूति या कोई अन्य धन या संपत्ति जिसके संबंध में उल्लंघन हुआ है, केंद्र सरकार के पास जब्त कर ली जाए और आगे यह निर्देश दे सकता है कि उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों की विदेशी मुद्रा धारिता, यदि कोई हो, या उसका कोई भाग, भारत में वापस लाया जाए या इस संबंध में दिए गए निर्देशों के अनुसार भारत से बाहर रखा जाए।
स्पष्टीकरण। --इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, जिस संपत्ति के संबंध में उल्लंघन हुआ है, उसमें निम्नलिखित शामिल होंगे--
(क) बैंक में जमा राशि, जहां उक्त संपत्ति को ऐसी जमा राशि में परिवर्तित किया जाता है;
(ख) भारतीय मुद्रा, जहां उक्त संपत्ति को उस मुद्रा में परिवर्तित किया जाता है; और
(ग) कोई अन्य संपत्ति जो उस संपत्ति के रूपांतरण से उत्पन्न हुई हो।
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