MAN Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,—
(क) “मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संगठन” से तात्पर्य किसी ऐसे संगठन से है जिसे केंद्र सरकार द्वारा धारा 20 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है;
(ख) “नेविगेशन में सहायता” का अर्थ है जहाजों के बाहर स्थित कोई उपकरण, प्रणाली या सेवा, जिसे व्यक्तिगत जहाजों और जहाज यातायात के सुरक्षित और कुशल नेविगेशन को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन और संचालित किया जाता है, लेकिन जब तक अन्यथा निर्दिष्ट न हो, इसे जहाज यातायात सेवाओं के संदर्भ में शामिल नहीं किया जाएगा;
(ग) “महानिदेशक” से तात्पर्य धारा 4 के अधीन नियुक्त नौवहन सहायता महानिदेशक से है;
(घ) “जिला” से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए जिले के रूप में सीमांकित क्षेत्र से है;
(ई) “सामान्य नौवहन सहायता” से तात्पर्य नौवहन सहायता से है, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सामान्य नौवहन सहायता घोषित कर सकती है;
(f) “विरासत प्रकाशस्तंभ” से तात्पर्य धारा 23 के अंतर्गत इस प्रकार नामित नौवहन सहायता से है;
(जी) “स्थानीय नौवहन सहायता” से तात्पर्य नौवहन सहायता से है जो सामान्य नौवहन सहायता नहीं है;
(h) “स्थानीय प्राधिकरण” से तात्पर्य राज्य सरकार या नौवहन के लिए स्थानीय सहायता पर अधीक्षण एवं प्रबंधन रखने वाले अन्य व्यक्ति से है;
(i) “समुद्री नौवहन सहायता शुल्क” से तात्पर्य धारा 24 के अधीन लगाए गए शुल्क से है;
(j) “अधिसूचना” से तात्पर्य भारत के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा “अधिसूचित करना” शब्द को उसके व्याकरणिक रूप और समरूप अभिव्यक्तियों सहित तदनुसार समझा जाएगा;
(k) “मालिक” से तात्पर्य पोत के मालिक से है, जिसमें उसका पंजीकृत मालिक, पोत में हिस्सेदारी रखने वाला व्यक्ति, बेयरबोट चार्टरर, प्रबंधक और पोत का संचालक शामिल है;
(एल) “बंदरगाह” से तात्पर्य भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 (15 ऑफ 1908) में परिभाषित किसी भी बंदरगाह से है;
(m) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(n) इस अधिनियम के अधीन निष्पादित किए जाने वाले किसी भी कार्य के संबंध में “उचित अधिकारी” से तात्पर्य सीमा शुल्क अधिकारी से है जिसे केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 (1963 का 54) के तहत गठित केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उन कार्यों को सौंपा गया है, और इसमें केंद्र सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन उचित अधिकारी के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त कोई भी व्यक्ति शामिल है;
(ओ) “नियम” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से है;
(p) “जहाज” में नौकायन पोत शामिल है;
(q) “जहाज” में समुद्री वातावरण में उपयोग किए जाने वाले या उपयोग किए जाने में सक्षम जलयानों के सभी प्रकार शामिल हैं, जैसे कि जहाज, नाव, नौकायन पोत, मछली पकड़ने वाला पोत, पनडुब्बी, अर्ध-पनडुब्बी, हाइड्रोफ़ॉइल, गैर-विस्थापन शिल्प, उभयचर शिल्प, विंग-इन-ग्राउंड शिल्प, मनोरंजन शिल्प, बजरा, लाइटर, मोबाइल अपतटीय ड्रिलिंग इकाइयाँ या मोबाइल अपतटीय इकाइयाँ;
(r) “जहाज यातायात सेवा” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत लागू की गई ऐसी सेवा से है जिसका उद्देश्य पोत यातायात की सुरक्षा और दक्षता में सुधार करना तथा पर्यावरण की रक्षा करना है।
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, जो इस अधिनियम में परिभाषित नहीं हैं, तथा व्यापारी जहाजरानी अधिनियम, 1958 (44 ऑफ 1958) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो क्रमशः उस अधिनियम में उन्हें दिया गया है।
(क) “मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संगठन” से तात्पर्य किसी ऐसे संगठन से है जिसे केंद्र सरकार द्वारा धारा 20 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है;
(ख) “नेविगेशन में सहायता” का अर्थ है जहाजों के बाहर स्थित कोई उपकरण, प्रणाली या सेवा, जिसे व्यक्तिगत जहाजों और जहाज यातायात के सुरक्षित और कुशल नेविगेशन को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन और संचालित किया जाता है, लेकिन जब तक अन्यथा निर्दिष्ट न हो, इसे जहाज यातायात सेवाओं के संदर्भ में शामिल नहीं किया जाएगा;
(ग) “महानिदेशक” से तात्पर्य धारा 4 के अधीन नियुक्त नौवहन सहायता महानिदेशक से है;
(घ) “जिला” से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए जिले के रूप में सीमांकित क्षेत्र से है;
(ई) “सामान्य नौवहन सहायता” से तात्पर्य नौवहन सहायता से है, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सामान्य नौवहन सहायता घोषित कर सकती है;
(f) “विरासत प्रकाशस्तंभ” से तात्पर्य धारा 23 के अंतर्गत इस प्रकार नामित नौवहन सहायता से है;
(जी) “स्थानीय नौवहन सहायता” से तात्पर्य नौवहन सहायता से है जो सामान्य नौवहन सहायता नहीं है;
(h) “स्थानीय प्राधिकरण” से तात्पर्य राज्य सरकार या नौवहन के लिए स्थानीय सहायता पर अधीक्षण एवं प्रबंधन रखने वाले अन्य व्यक्ति से है;
(i) “समुद्री नौवहन सहायता शुल्क” से तात्पर्य धारा 24 के अधीन लगाए गए शुल्क से है;
(j) “अधिसूचना” से तात्पर्य भारत के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा “अधिसूचित करना” शब्द को उसके व्याकरणिक रूप और समरूप अभिव्यक्तियों सहित तदनुसार समझा जाएगा;
(k) “मालिक” से तात्पर्य पोत के मालिक से है, जिसमें उसका पंजीकृत मालिक, पोत में हिस्सेदारी रखने वाला व्यक्ति, बेयरबोट चार्टरर, प्रबंधक और पोत का संचालक शामिल है;
(एल) “बंदरगाह” से तात्पर्य भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 (15 ऑफ 1908) में परिभाषित किसी भी बंदरगाह से है;
(m) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(n) इस अधिनियम के अधीन निष्पादित किए जाने वाले किसी भी कार्य के संबंध में “उचित अधिकारी” से तात्पर्य सीमा शुल्क अधिकारी से है जिसे केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 (1963 का 54) के तहत गठित केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उन कार्यों को सौंपा गया है, और इसमें केंद्र सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन उचित अधिकारी के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त कोई भी व्यक्ति शामिल है;
(ओ) “नियम” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से है;
(p) “जहाज” में नौकायन पोत शामिल है;
(q) “जहाज” में समुद्री वातावरण में उपयोग किए जाने वाले या उपयोग किए जाने में सक्षम जलयानों के सभी प्रकार शामिल हैं, जैसे कि जहाज, नाव, नौकायन पोत, मछली पकड़ने वाला पोत, पनडुब्बी, अर्ध-पनडुब्बी, हाइड्रोफ़ॉइल, गैर-विस्थापन शिल्प, उभयचर शिल्प, विंग-इन-ग्राउंड शिल्प, मनोरंजन शिल्प, बजरा, लाइटर, मोबाइल अपतटीय ड्रिलिंग इकाइयाँ या मोबाइल अपतटीय इकाइयाँ;
(r) “जहाज यातायात सेवा” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत लागू की गई ऐसी सेवा से है जिसका उद्देश्य पोत यातायात की सुरक्षा और दक्षता में सुधार करना तथा पर्यावरण की रक्षा करना है।
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, जो इस अधिनियम में परिभाषित नहीं हैं, तथा व्यापारी जहाजरानी अधिनियम, 1958 (44 ऑफ 1958) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो क्रमशः उस अधिनियम में उन्हें दिया गया है।
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