NIA Act 6अध्याय III · Investigation by the National Investigation Agency
धारा 6 · अनुसूचित अपराधों की जांच।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) संहिता की धारा 154 के अंतर्गत किसी अनुसूचित अपराध से संबंधित सूचना प्राप्त होने और उसे दर्ज किए जाने पर पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी तुरंत राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजेगा।
(2) उपधारा (1) के तहत रिपोर्ट प्राप्त होने पर, राज्य सरकार यथाशीघ्र रिपोर्ट को केंद्र सरकार को अग्रेषित करेगी।
(3) राज्य सरकार से रिपोर्ट प्राप्त होने पर, केंद्र सरकार राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी या अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर यह निर्धारित करेगी कि अपराध अनुसूचित अपराध है या नहीं और यह भी कि अपराध की गंभीरता और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, यह एजेंसी द्वारा जांच के लिए उपयुक्त मामला है या नहीं।
(4) जहाँ केंद्र सरकार की राय है कि अपराध अनुसूचित अपराध है और यह एजेंसी द्वारा जांच के लिए उपयुक्त मामला है, तो वह एजेंसी को उक्त अपराध की जांच करने का निर्देश देगी।
(5) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, यदि केंद्र सरकार की राय है कि कोई अनुसूचित अपराध किया गया है जिसकी इस अधिनियम के अंतर्गत जांच की जानी आवश्यक है, तो वह स्वतः संज्ञान लेते हुए एजेंसी को उक्त अपराध की जांच करने का निर्देश दे सकती है।
(6) जहां उपधारा (4) या उपधारा (5) के तहत कोई निर्देश दिया गया है, वहां राज्य सरकार और राज्य सरकार का कोई पुलिस अधिकारी अपराध की जांच करते हुए जांच आगे नहीं बढ़ाएगा और संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों को तुरंत एजेंसी को भेज देगा।
(7) संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जब तक एजेंसी मामले की जांच शुरू नहीं करती, तब तक पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह जांच जारी रखे।
1. [(8) यदि केंद्र सरकार की राय है कि इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले भारत के बाहर किसी स्थान पर अनुसूचित अपराध किया गया है, तो वह एजेंसी को मामला दर्ज करने और इस प्रकार जांच करने का निर्देश दे सकती है जैसे कि वह अपराध भारत में किया गया हो।]
(9) उपधारा (8) के प्रयोजनों के लिए, नई दिल्ली स्थित विशेष न्यायालय को अधिकार क्षेत्र प्राप्त होगा।]
(2) उपधारा (1) के तहत रिपोर्ट प्राप्त होने पर, राज्य सरकार यथाशीघ्र रिपोर्ट को केंद्र सरकार को अग्रेषित करेगी।
(3) राज्य सरकार से रिपोर्ट प्राप्त होने पर, केंद्र सरकार राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी या अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर यह निर्धारित करेगी कि अपराध अनुसूचित अपराध है या नहीं और यह भी कि अपराध की गंभीरता और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, यह एजेंसी द्वारा जांच के लिए उपयुक्त मामला है या नहीं।
(4) जहाँ केंद्र सरकार की राय है कि अपराध अनुसूचित अपराध है और यह एजेंसी द्वारा जांच के लिए उपयुक्त मामला है, तो वह एजेंसी को उक्त अपराध की जांच करने का निर्देश देगी।
(5) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, यदि केंद्र सरकार की राय है कि कोई अनुसूचित अपराध किया गया है जिसकी इस अधिनियम के अंतर्गत जांच की जानी आवश्यक है, तो वह स्वतः संज्ञान लेते हुए एजेंसी को उक्त अपराध की जांच करने का निर्देश दे सकती है।
(6) जहां उपधारा (4) या उपधारा (5) के तहत कोई निर्देश दिया गया है, वहां राज्य सरकार और राज्य सरकार का कोई पुलिस अधिकारी अपराध की जांच करते हुए जांच आगे नहीं बढ़ाएगा और संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों को तुरंत एजेंसी को भेज देगा।
(7) संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जब तक एजेंसी मामले की जांच शुरू नहीं करती, तब तक पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह जांच जारी रखे।
1. [(8) यदि केंद्र सरकार की राय है कि इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले भारत के बाहर किसी स्थान पर अनुसूचित अपराध किया गया है, तो वह एजेंसी को मामला दर्ज करने और इस प्रकार जांच करने का निर्देश दे सकती है जैसे कि वह अपराध भारत में किया गया हो।]
(9) उपधारा (8) के प्रयोजनों के लिए, नई दिल्ली स्थित विशेष न्यायालय को अधिकार क्षेत्र प्राप्त होगा।]
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