Limitation Act 14अध्याय III · Computation of Period of Limitation
धारा 14 · अधिकार क्षेत्र से बाहर न्यायालय में सद्भावनापूर्वक कार्यवाही करने के समय को बाहर रखा गया है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी मुकदमे के लिए परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह समय अवधि जिसमें वादी ने प्रतिवादी के विरुद्ध प्रथम न्यायालय, अपील न्यायालय या पुनरीक्षण न्यायालय में किसी अन्य दीवानी कार्यवाही को उचित तत्परता से चलाया हो, को बाहर रखा जाएगा, यदि कार्यवाही उसी विवादित मामले से संबंधित हो और सद्भावनापूर्वक ऐसे न्यायालय में चलाई जा रही हो जो क्षेत्राधिकार की कमी या इसी प्रकार के अन्य कारण से उस पर विचार करने में असमर्थ हो।
(2) किसी आवेदन के लिए परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह समय जिसमें आवेदक ने उसी पक्ष के विरुद्ध उसी राहत के लिए प्रथम न्यायालय, अपील न्यायालय या पुनरीक्षण न्यायालय में किसी अन्य दीवानी कार्यवाही को उचित तत्परता से चलाया हो, उसे बाहर रखा जाएगा, यदि ऐसी कार्यवाही सद्भावना से ऐसे न्यायालय में चलाई जाती है जो क्षेत्राधिकार की कमी या इसी प्रकार के अन्य कारण से उस पर विचार करने में असमर्थ है।
(3) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश XXIII के नियम 2 में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के प्रावधान उस आदेश के नियम 1 के तहत न्यायालय द्वारा दी गई अनुमति पर दायर किए गए नए मुकदमे के संबंध में लागू होंगे, जहां ऐसी अनुमति इस आधार पर दी गई है कि न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में दोष या इसी तरह के अन्य कारण से पहला मुकदमा विफल होना चाहिए।
स्पष्टीकरण. —इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) पूर्व दीवानी कार्यवाही के लंबित रहने की अवधि को छोड़कर, उस कार्यवाही के आरंभ होने का दिन और उसके समाप्त होने का दिन, दोनों को गिना जाएगा;
(ख) अपील का विरोध करने वाले वादी या आवेदक को कार्यवाही चलाने वाला माना जाएगा;
(ग) पक्षकारों या वाद के कारणों का गलत संयोजन क्षेत्राधिकार की कमी के समान प्रकृति का कारण माना जाएगा।
(2) किसी आवेदन के लिए परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह समय जिसमें आवेदक ने उसी पक्ष के विरुद्ध उसी राहत के लिए प्रथम न्यायालय, अपील न्यायालय या पुनरीक्षण न्यायालय में किसी अन्य दीवानी कार्यवाही को उचित तत्परता से चलाया हो, उसे बाहर रखा जाएगा, यदि ऐसी कार्यवाही सद्भावना से ऐसे न्यायालय में चलाई जाती है जो क्षेत्राधिकार की कमी या इसी प्रकार के अन्य कारण से उस पर विचार करने में असमर्थ है।
(3) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश XXIII के नियम 2 में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के प्रावधान उस आदेश के नियम 1 के तहत न्यायालय द्वारा दी गई अनुमति पर दायर किए गए नए मुकदमे के संबंध में लागू होंगे, जहां ऐसी अनुमति इस आधार पर दी गई है कि न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में दोष या इसी तरह के अन्य कारण से पहला मुकदमा विफल होना चाहिए।
स्पष्टीकरण. —इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) पूर्व दीवानी कार्यवाही के लंबित रहने की अवधि को छोड़कर, उस कार्यवाही के आरंभ होने का दिन और उसके समाप्त होने का दिन, दोनों को गिना जाएगा;
(ख) अपील का विरोध करने वाले वादी या आवेदक को कार्यवाही चलाने वाला माना जाएगा;
(ग) पक्षकारों या वाद के कारणों का गलत संयोजन क्षेत्राधिकार की कमी के समान प्रकृति का कारण माना जाएगा।
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