CC Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,---
1 [(क) "वाणिज्यिक अपीलीय न्यायालय" से तात्पर्य धारा 3ए के अधीन नामित वाणिज्यिक अपीलीय न्यायालयों से है;]
2 [(अ)] "वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग" से तात्पर्य धारा 5 की उपधारा (1) के तहत गठित उच्च न्यायालय में वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग से है;
(ख) "वाणिज्यिक न्यायालय" से तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित वाणिज्यिक न्यायालय से है;
(ग) "व्यावसायिक विवाद" से तात्पर्य निम्नलिखित से उत्पन्न होने वाले विवाद से है---
(i) व्यापारियों, बैंकरों, वित्तदाताओं और कारोबारियों के सामान्य लेन-देन जैसे कि व्यापारिक दस्तावेजों से संबंधित लेन-देन, जिनमें ऐसे दस्तावेजों का प्रवर्तन और व्याख्या शामिल है;
(ii) माल या सेवाओं का निर्यात या आयात;
(iii) नौसेना और समुद्री कानून से संबंधित मुद्दे;
(iv) विमान, विमान इंजन, विमान उपकरण और हेलीकॉप्टर से संबंधित लेनदेन, जिसमें इनकी बिक्री, पट्टे पर देना और वित्तपोषण शामिल है;
(v) माल की ढुलाई;
(vi) निर्माण और अवसंरचना अनुबंध, निविदाओं सहित;
(vii) अचल संपत्ति से संबंधित समझौते जिनका उपयोग विशेष रूप से व्यापार या वाणिज्य में किया जाता है;
(viii) फ्रेंचाइज़िंग समझौते;
(ix) वितरण एवं लाइसेंसिंग समझौते;
(x) प्रबंधन एवं परामर्श समझौते;
(xi) संयुक्त उद्यम समझौते;
(xii) शेयरधारकों के समझौते;
(xiii) आउटसोर्सिंग सेवाओं और वित्तीय सेवाओं सहित सेवा उद्योग से संबंधित सदस्यता और निवेश समझौते;
(xiv) व्यापारिक एजेंसी और व्यापारिक उपयोग;
(xv) साझेदारी समझौते;
(xvi) प्रौद्योगिकी विकास समझौते;
(xvii) पंजीकृत और अपंजीकृत ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, पेटेंट, डिजाइन, डोमेन नाम, भौगोलिक संकेत और अर्धचालक एकीकृत सर्किट से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार;
(xviii) माल की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान के लिए समझौते;
(xix) विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम सहित तेल और गैस भंडार या अन्य प्राकृतिक संसाधनों का शोषण;
(xx) बीमा और पुनर्बीमा;
(xxi) उपरोक्त में से किसी से संबंधित एजेंसी के अनुबंध; और
(xxii) ऐसे अन्य वाणिज्यिक विवाद जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण .--- कोई वाणिज्यिक विवाद मात्र इसलिए वाणिज्यिक विवाद होना बंद नहीं कर देगा क्योंकि---
(क) इसमें अचल संपत्ति की वसूली या सुरक्षा के रूप में दी गई अचल संपत्ति से धन की वसूली के लिए कार्रवाई शामिल है या इसमें अचल संपत्ति से संबंधित कोई अन्य राहत शामिल है;
(ख) संविदा करने वाले पक्षों में से एक राज्य या उसकी कोई एजेंसी या संस्था, या सार्वजनिक कार्यों का निष्पादन करने वाला कोई निजी निकाय हो;
(घ) "वाणिज्यिक प्रभाग" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन गठित उच्च न्यायालय के वाणिज्यिक प्रभाग से है;
(ई) "जिला न्यायाधीश" का वही अर्थ होगा जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 236 के खंड (क) में दिया गया है;
(f) "दस्तावेज़" से तात्पर्य किसी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों, या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों, या इनमें से एक से अधिक माध्यमों द्वारा व्यक्त या वर्णित किसी भी विषय वस्तु से है, जिसका उपयोग उस विषय वस्तु को रिकॉर्ड करने के उद्देश्य से किया जाना है, या किया जा सकता है;
(जी) "अधिसूचना" का अर्थ आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना है तथा "अधिसूचित करना" शब्द को उसके संबंधित अर्थों और व्याकरणिक विविधताओं सहित तदनुसार समझा जाएगा;
(h) "अनुसूची" से तात्पर्य अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है; और
(i) वाणिज्यिक विवाद के संबंध में "निर्दिष्ट मूल्य" का अर्थ धारा 12 3 के अनुसार निर्धारित मुकदमे के विषय-वस्तु का मूल्य होगा [जो तीन लाख रुपये से कम नहीं होगा] या ऐसा उच्च मूल्य, जैसा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त और अपरिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, परन्तु सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) में परिभाषित, का वही अर्थ होगा जो क्रमशः उस संहिता और अधिनियम में उन्हें दिया गया है।
1 [(क) "वाणिज्यिक अपीलीय न्यायालय" से तात्पर्य धारा 3ए के अधीन नामित वाणिज्यिक अपीलीय न्यायालयों से है;]
2 [(अ)] "वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग" से तात्पर्य धारा 5 की उपधारा (1) के तहत गठित उच्च न्यायालय में वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग से है;
(ख) "वाणिज्यिक न्यायालय" से तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित वाणिज्यिक न्यायालय से है;
(ग) "व्यावसायिक विवाद" से तात्पर्य निम्नलिखित से उत्पन्न होने वाले विवाद से है---
(i) व्यापारियों, बैंकरों, वित्तदाताओं और कारोबारियों के सामान्य लेन-देन जैसे कि व्यापारिक दस्तावेजों से संबंधित लेन-देन, जिनमें ऐसे दस्तावेजों का प्रवर्तन और व्याख्या शामिल है;
(ii) माल या सेवाओं का निर्यात या आयात;
(iii) नौसेना और समुद्री कानून से संबंधित मुद्दे;
(iv) विमान, विमान इंजन, विमान उपकरण और हेलीकॉप्टर से संबंधित लेनदेन, जिसमें इनकी बिक्री, पट्टे पर देना और वित्तपोषण शामिल है;
(v) माल की ढुलाई;
(vi) निर्माण और अवसंरचना अनुबंध, निविदाओं सहित;
(vii) अचल संपत्ति से संबंधित समझौते जिनका उपयोग विशेष रूप से व्यापार या वाणिज्य में किया जाता है;
(viii) फ्रेंचाइज़िंग समझौते;
(ix) वितरण एवं लाइसेंसिंग समझौते;
(x) प्रबंधन एवं परामर्श समझौते;
(xi) संयुक्त उद्यम समझौते;
(xii) शेयरधारकों के समझौते;
(xiii) आउटसोर्सिंग सेवाओं और वित्तीय सेवाओं सहित सेवा उद्योग से संबंधित सदस्यता और निवेश समझौते;
(xiv) व्यापारिक एजेंसी और व्यापारिक उपयोग;
(xv) साझेदारी समझौते;
(xvi) प्रौद्योगिकी विकास समझौते;
(xvii) पंजीकृत और अपंजीकृत ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, पेटेंट, डिजाइन, डोमेन नाम, भौगोलिक संकेत और अर्धचालक एकीकृत सर्किट से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार;
(xviii) माल की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान के लिए समझौते;
(xix) विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम सहित तेल और गैस भंडार या अन्य प्राकृतिक संसाधनों का शोषण;
(xx) बीमा और पुनर्बीमा;
(xxi) उपरोक्त में से किसी से संबंधित एजेंसी के अनुबंध; और
(xxii) ऐसे अन्य वाणिज्यिक विवाद जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण .--- कोई वाणिज्यिक विवाद मात्र इसलिए वाणिज्यिक विवाद होना बंद नहीं कर देगा क्योंकि---
(क) इसमें अचल संपत्ति की वसूली या सुरक्षा के रूप में दी गई अचल संपत्ति से धन की वसूली के लिए कार्रवाई शामिल है या इसमें अचल संपत्ति से संबंधित कोई अन्य राहत शामिल है;
(ख) संविदा करने वाले पक्षों में से एक राज्य या उसकी कोई एजेंसी या संस्था, या सार्वजनिक कार्यों का निष्पादन करने वाला कोई निजी निकाय हो;
(घ) "वाणिज्यिक प्रभाग" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन गठित उच्च न्यायालय के वाणिज्यिक प्रभाग से है;
(ई) "जिला न्यायाधीश" का वही अर्थ होगा जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 236 के खंड (क) में दिया गया है;
(f) "दस्तावेज़" से तात्पर्य किसी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों, या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों, या इनमें से एक से अधिक माध्यमों द्वारा व्यक्त या वर्णित किसी भी विषय वस्तु से है, जिसका उपयोग उस विषय वस्तु को रिकॉर्ड करने के उद्देश्य से किया जाना है, या किया जा सकता है;
(जी) "अधिसूचना" का अर्थ आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना है तथा "अधिसूचित करना" शब्द को उसके संबंधित अर्थों और व्याकरणिक विविधताओं सहित तदनुसार समझा जाएगा;
(h) "अनुसूची" से तात्पर्य अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है; और
(i) वाणिज्यिक विवाद के संबंध में "निर्दिष्ट मूल्य" का अर्थ धारा 12 3 के अनुसार निर्धारित मुकदमे के विषय-वस्तु का मूल्य होगा [जो तीन लाख रुपये से कम नहीं होगा] या ऐसा उच्च मूल्य, जैसा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त और अपरिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, परन्तु सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) में परिभाषित, का वही अर्थ होगा जो क्रमशः उस संहिता और अधिनियम में उन्हें दिया गया है।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

