MS Act 311अध्याय XV · Miscellaneous
धारा 311 · परित्यक्त जहाजों के संबंध में केंद्र सरकार की शक्तियां।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार किसी बंदरगाह प्राधिकरण या राज्य समुद्री बोर्ड या किसी अन्य प्राधिकरण या एजेंसी को लिखित में ऐसे निर्देश दे सकती है, जैसा वह उचित समझे, कि वह भारत के तट पर या उसके निकट या तटीय जल में छोड़े गए किसी परित्यक्त पोत के संबंध में सेवाएं या सहायता प्रदान करे या उपाय करे।
(2) उपधारा ( 1 ) के अधीन दिए गए निर्देश सुरक्षा सुनिश्चित करने, परित्यक्त पोत को जीवन, संपत्ति या पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करने से रोकने, और परित्यक्त पोत से उत्पन्न प्रदूषण या प्रदूषण के खतरे से भारत के तटवर्ती क्षेत्रों या संबंधित हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से होंगे।
(3) उपधारा ( 1 ) के तहत परित्यक्त पोत के संबंध में कोई उपाय करने के लिए केंद्र सरकार या किसी प्राधिकरण या एजेंसी द्वारा किए गए कोई भी खर्च या व्यय केंद्र सरकार को देय ऋण होगा और पोत या उसके माल की बिक्री से प्राप्त आय से वसूल किया जा सकता है।
(4) उपधारा ( 1 ) के अधीन केंद्र सरकार के निर्देशों का अनुपालन करने वाले प्राधिकरण या एजेंसी को सेवाओं के लिए दरों के निर्धारण के तरीके सहित लागत या व्यय की प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी निर्धारित की जा सकती है।
(5) एडमिरल्टी (क्षेत्राधिकार एवं समुद्री दावों का निपटान) अधिनियम, 2017 (22 ऑफ 2017) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( 3 ) के अंतर्गत केंद्र सरकार को देय ऋण पोत पर प्रभार होगा और निम्नलिखित समुद्री ग्रहणाधिकारों के बाद प्रथम प्राथमिकता प्राप्त करेगा---
(क) जहाज पर रोजगार के संबंध में जहाज के कप्तान, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और अन्य राशियों के दावे, जिनमें स्वदेश वापसी की लागत और उनकी ओर से देय सामाजिक बीमा अंशदान शामिल हैं;
(ख) पोत के संचालन के प्रत्यक्ष संबंध में, चाहे भूमि पर हो या जल पर, होने वाली जानमाल की हानि या व्यक्तिगत चोट के संबंध में दावे।
(2) उपधारा ( 1 ) के अधीन दिए गए निर्देश सुरक्षा सुनिश्चित करने, परित्यक्त पोत को जीवन, संपत्ति या पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करने से रोकने, और परित्यक्त पोत से उत्पन्न प्रदूषण या प्रदूषण के खतरे से भारत के तटवर्ती क्षेत्रों या संबंधित हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से होंगे।
(3) उपधारा ( 1 ) के तहत परित्यक्त पोत के संबंध में कोई उपाय करने के लिए केंद्र सरकार या किसी प्राधिकरण या एजेंसी द्वारा किए गए कोई भी खर्च या व्यय केंद्र सरकार को देय ऋण होगा और पोत या उसके माल की बिक्री से प्राप्त आय से वसूल किया जा सकता है।
(4) उपधारा ( 1 ) के अधीन केंद्र सरकार के निर्देशों का अनुपालन करने वाले प्राधिकरण या एजेंसी को सेवाओं के लिए दरों के निर्धारण के तरीके सहित लागत या व्यय की प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी निर्धारित की जा सकती है।
(5) एडमिरल्टी (क्षेत्राधिकार एवं समुद्री दावों का निपटान) अधिनियम, 2017 (22 ऑफ 2017) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( 3 ) के अंतर्गत केंद्र सरकार को देय ऋण पोत पर प्रभार होगा और निम्नलिखित समुद्री ग्रहणाधिकारों के बाद प्रथम प्राथमिकता प्राप्त करेगा---
(क) जहाज पर रोजगार के संबंध में जहाज के कप्तान, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और अन्य राशियों के दावे, जिनमें स्वदेश वापसी की लागत और उनकी ओर से देय सामाजिक बीमा अंशदान शामिल हैं;
(ख) पोत के संचालन के प्रत्यक्ष संबंध में, चाहे भूमि पर हो या जल पर, होने वाली जानमाल की हानि या व्यक्तिगत चोट के संबंध में दावे।
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