NHB Act 52Aअध्याय VII · Miscellaneous
धारा 52A · राष्ट्रीय आवास बैंक और रिजर्व बैंक को जुर्माना लगाने का अधिकार है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [52ए. राष्ट्रीय आवास बैंक और रिजर्व बैंक द्वारा जुर्माना लगाने की शक्ति 2 [जुर्माना]। -- (1) धारा 49 में किसी बात के होते हुए भी, यदि उक्त धारा में निर्दिष्ट प्रकृति का उल्लंघन या चूक किसी आवास वित्त संस्था द्वारा की जाती है जो एक कंपनी है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसी कंपनी पर जुर्माना लगा सकता है--
(क) 3 [पच्चीस हजार] से अधिक का जुर्माना नहीं; या
(ख) जहां उल्लंघन या चूक उपधारा (2क) या उस धारा की उपधारा (3) के खंड (क) 4 *** के अंतर्गत है, वहां 5 [दस लाख] रुपये से अधिक का जुर्माना या ऐसे उल्लंघन या चूक में शामिल राशि का दुगुना, जहां राशि का निर्धारण किया जा सकता है, जो भी अधिक हो; और जहां ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर जारी है, वहां पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
7 [(1ए) यदि कोई व्यक्ति या आवास वित्त संस्था जो एक कंपनी है, कोई बही, खाता या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में या कोई विवरण या सूचना प्रस्तुत करने में विफल रहती है, जिसे इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था का प्रस्तुत करना या प्रस्तुत करना कर्तव्य है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था पर प्रत्येक उल्लंघन या चूक के लिए एक लाख पचास हजार रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है और जहां ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर है, वहां पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए सात हजार पांच सौ रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
(1ख) यदि कोई लेखा परीक्षक धारा 33 के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए किसी निर्देश या आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति पर दस लाख रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है।
(1सी) यदि कोई व्यक्ति (लेखा परीक्षक के अतिरिक्त) या आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, अध्याय 5 के किसी भी प्रावधान के तहत राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए किसी निर्देश या आदेश का पालन करने में विफल रहती है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था पर दस लाख रुपये से अधिक का जुर्माना या उल्लंघन या चूक में शामिल राशि का दुगुना जुर्माना लगा सकता है, जहां राशि का निर्धारण किया जा सकता है, जो भी अधिक हो; और यदि ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर जारी रहता है, तो पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
(1D) यदि इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है या इस अधिनियम की किसी अन्य आवश्यकता, या इसके अंतर्गत जारी किए गए किसी आदेश, नियम या निर्देश, या लगाई गई किसी शर्त का पालन करने में चूक की जाती है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे उल्लंघन या चूक के दोषी किसी व्यक्ति या आवास वित्त संस्था (जो एक कंपनी है) पर प्रत्येक उल्लंघन या चूक के लिए एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है, और यदि ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर जारी रहता है, तो पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए दस हजार रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।]
(2) धारा 8 [इस धारा] के तहत जुर्माना लगाने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, कंपनी 9 [व्यक्ति या आवास वित्त संस्था] को नोटिस जारी करेगा, जिसमें उससे कारण बताने को कहा जाएगा कि नोटिस में निर्दिष्ट राशि को जुर्माने के रूप में क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए और ऐसे 10 [व्यक्ति या आवास वित्त संस्था] को सुनवाई का उचित अवसर भी दिया जाएगा।
(3) राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस धारा के तहत लगाया गया कोई भी जुर्माना उस तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर देय होगा जिस तारीख को राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटिस, जिसमें राशि के भुगतान की मांग की गई हो, [कंपनी के रूप में किसी व्यक्ति या आवास वित्त संस्था को] तामील कराया गया हो, और [ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था द्वारा] इस अवधि के भीतर राशि का भुगतान न करने की स्थिति में, [उस क्षेत्र में जहां ऐसा व्यक्ति सामान्यतः निवास करता है या, जैसा भी मामला हो, पंजीकृत कार्यालय] या ऐसी आवास वित्त संस्था का प्रधान कार्यालय स्थित है, उस क्षेत्र में क्षेत्राधिकार रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
बशर्ते कि ऐसा कोई निर्देश तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस संबंध में अधिकृत रूप से प्रधान सिविल न्यायालय में आवेदन न किया जाए।
(4) उपधारा (3) के तहत निर्देश देने वाला न्यायालय, कंपनी के 14 [व्यक्ति या] आवास वित्त संस्था द्वारा देय राशि निर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाण पत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाण पत्र उसी प्रकार लागू होगा जैसे कि वह दीवानी मुकदमे में न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय हो।
(5) किसी भी आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में किसी भी उल्लंघन या चूक के संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी, जिसके लिए राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस धारा के तहत कोई जुर्माना लगाया गया हो।
(6) यदि किसी कंपनी के स्वामित्व वाली आवास वित्त संस्था के विरुद्ध धारा 49 में निर्दिष्ट प्रकृति के उल्लंघन या चूक के संबंध में न्यायालय में कोई शिकायत दर्ज की गई हो, तो ऐसी आवास वित्त संस्था के विरुद्ध इस धारा के अंतर्गत दंड लगाने की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।]
(क) 3 [पच्चीस हजार] से अधिक का जुर्माना नहीं; या
(ख) जहां उल्लंघन या चूक उपधारा (2क) या उस धारा की उपधारा (3) के खंड (क) 4 *** के अंतर्गत है, वहां 5 [दस लाख] रुपये से अधिक का जुर्माना या ऐसे उल्लंघन या चूक में शामिल राशि का दुगुना, जहां राशि का निर्धारण किया जा सकता है, जो भी अधिक हो; और जहां ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर जारी है, वहां पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
7 [(1ए) यदि कोई व्यक्ति या आवास वित्त संस्था जो एक कंपनी है, कोई बही, खाता या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में या कोई विवरण या सूचना प्रस्तुत करने में विफल रहती है, जिसे इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था का प्रस्तुत करना या प्रस्तुत करना कर्तव्य है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था पर प्रत्येक उल्लंघन या चूक के लिए एक लाख पचास हजार रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है और जहां ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर है, वहां पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए सात हजार पांच सौ रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
(1ख) यदि कोई लेखा परीक्षक धारा 33 के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए किसी निर्देश या आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति पर दस लाख रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है।
(1सी) यदि कोई व्यक्ति (लेखा परीक्षक के अतिरिक्त) या आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, अध्याय 5 के किसी भी प्रावधान के तहत राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए किसी निर्देश या आदेश का पालन करने में विफल रहती है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था पर दस लाख रुपये से अधिक का जुर्माना या उल्लंघन या चूक में शामिल राशि का दुगुना जुर्माना लगा सकता है, जहां राशि का निर्धारण किया जा सकता है, जो भी अधिक हो; और यदि ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर जारी रहता है, तो पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
(1D) यदि इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है या इस अधिनियम की किसी अन्य आवश्यकता, या इसके अंतर्गत जारी किए गए किसी आदेश, नियम या निर्देश, या लगाई गई किसी शर्त का पालन करने में चूक की जाती है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, ऐसे उल्लंघन या चूक के दोषी किसी व्यक्ति या आवास वित्त संस्था (जो एक कंपनी है) पर प्रत्येक उल्लंघन या चूक के लिए एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है, और यदि ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर जारी रहता है, तो पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए दस हजार रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।]
(2) धारा 8 [इस धारा] के तहत जुर्माना लगाने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक, जैसा भी मामला हो, कंपनी 9 [व्यक्ति या आवास वित्त संस्था] को नोटिस जारी करेगा, जिसमें उससे कारण बताने को कहा जाएगा कि नोटिस में निर्दिष्ट राशि को जुर्माने के रूप में क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए और ऐसे 10 [व्यक्ति या आवास वित्त संस्था] को सुनवाई का उचित अवसर भी दिया जाएगा।
(3) राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस धारा के तहत लगाया गया कोई भी जुर्माना उस तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर देय होगा जिस तारीख को राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटिस, जिसमें राशि के भुगतान की मांग की गई हो, [कंपनी के रूप में किसी व्यक्ति या आवास वित्त संस्था को] तामील कराया गया हो, और [ऐसे व्यक्ति या आवास वित्त संस्था द्वारा] इस अवधि के भीतर राशि का भुगतान न करने की स्थिति में, [उस क्षेत्र में जहां ऐसा व्यक्ति सामान्यतः निवास करता है या, जैसा भी मामला हो, पंजीकृत कार्यालय] या ऐसी आवास वित्त संस्था का प्रधान कार्यालय स्थित है, उस क्षेत्र में क्षेत्राधिकार रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
बशर्ते कि ऐसा कोई निर्देश तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस संबंध में अधिकृत रूप से प्रधान सिविल न्यायालय में आवेदन न किया जाए।
(4) उपधारा (3) के तहत निर्देश देने वाला न्यायालय, कंपनी के 14 [व्यक्ति या] आवास वित्त संस्था द्वारा देय राशि निर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाण पत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाण पत्र उसी प्रकार लागू होगा जैसे कि वह दीवानी मुकदमे में न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय हो।
(5) किसी भी आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में किसी भी उल्लंघन या चूक के संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी, जिसके लिए राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस धारा के तहत कोई जुर्माना लगाया गया हो।
(6) यदि किसी कंपनी के स्वामित्व वाली आवास वित्त संस्था के विरुद्ध धारा 49 में निर्दिष्ट प्रकृति के उल्लंघन या चूक के संबंध में न्यायालय में कोई शिकायत दर्ज की गई हो, तो ऐसी आवास वित्त संस्था के विरुद्ध इस धारा के अंतर्गत दंड लगाने की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।]
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