TAA Act 7
धारा 7 · विशेष न्यायालय का अधिकार क्षेत्र।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) संहिता या किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य के न्यायिक क्षेत्र में किसी भी समय उस अवधि के दौरान किया गया अनुसूचित अपराध, जिस अवधि के दौरान ऐसा न्यायिक क्षेत्र आतंकवादी प्रभावित क्षेत्र है या उसका हिस्सा है, ऐसी अवधि की समाप्ति के दौरान या उसके बाद, केवल राज्य में ऐसे न्यायिक क्षेत्र के लिए स्थापित विशेष न्यायालय द्वारा ही विचारणीय होगा।
बशर्ते कि जहां धारा 3 की उपधारा (2) के तहत निर्दिष्ट अवधि, जिसके दौरान उस धारा की उपधारा (1) के तहत अधिसूचना द्वारा किसी क्षेत्र को आतंकवादी प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाता है, ऐसी अधिसूचना जारी होने की तारीख से पहले की तारीख से शुरू होती है, तो—
(क) इस उपधारा के पूर्वगामी प्रावधानों में से कोई भी उस अनुसूचित अपराध पर लागू नहीं होगा जो ऐसे क्षेत्र में किया गया हो जिसमें अभियोजन के लिए संपूर्ण साक्ष्य ऐसी अधिसूचना जारी होने की तिथि से पहले एकत्र किए गए हों; और
(ख) ऐसे क्षेत्र में किए गए अनुसूचित अपराधों से संबंधित अन्य सभी मामले, जो ऐसी अधिसूचना जारी होने की तिथि से ठीक पहले किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित थे, इस धारा के अधीन अधिकार क्षेत्र रखने वाले विशेष न्यायालय को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और जिस विशेष न्यायालय को ऐसी कार्यवाही हस्तांतरित की गई है, वह ऐसे मामलों की कार्यवाही उस चरण से आगे बढ़ाएगा जिस चरण में वे उस समय लंबित थे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी राज्य के किसी न्यायिक क्षेत्र में किए गए अनुसूचित अपराध से संबंधित किसी मामले में, केंद्र सरकार धारा 4 की उपधारा (2) के प्रावधानों और मामले के तथ्यों और परिस्थितियों तथा अन्य सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, इस राय की हो कि ऐसे अपराध का विचारण राज्य के बाहर उस न्यायिक क्षेत्र के संबंध में स्थापित अतिरिक्त विशेष न्यायालय द्वारा किया जाना उचित है, तो केंद्र सरकार इस आशय की घोषणा कर सकती है:
बशर्ते कि ऐसी कोई घोषणा तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को लिखित में एक रिपोर्ट न भेज दी हो जिसमें ऐसी घोषणा करने का अनुरोध किया गया हो।
स्पष्टीकरण. —जहां दो या दो से अधिक न्यायिक क्षेत्रों के संबंध में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय की स्थापना की जाती है, तो इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे अतिरिक्त विशेष न्यायालय को ऐसे प्रत्येक न्यायिक क्षेत्र के संबंध में स्थापित माना जाएगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन की गई घोषणा पर किसी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(4) यदि किसी राज्य के न्यायिक क्षेत्र में किए गए किसी अपराध के संबंध में कोई घोषणा की जाती है, तो ऐसे अपराध के संबंध में अभियोग केवल राज्य के बाहर उस न्यायिक क्षेत्र के लिए स्थापित अतिरिक्त विशेष न्यायालय में ही चलाया जाएगा, और यदि ऐसी घोषणा से ठीक पहले किसी अन्य न्यायालय में ऐसे अपराध के संबंध में कोई अभियोग लंबित है, तो वह ऐसे अतिरिक्त विशेष न्यायालय में स्थानांतरित हो जाएगा और ऐसा अतिरिक्त विशेष न्यायालय उस मामले की कार्यवाही उस चरण से शुरू करेगा जिस चरण में वह उस समय लंबित था।
बशर्ते कि जहां धारा 3 की उपधारा (2) के तहत निर्दिष्ट अवधि, जिसके दौरान उस धारा की उपधारा (1) के तहत अधिसूचना द्वारा किसी क्षेत्र को आतंकवादी प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाता है, ऐसी अधिसूचना जारी होने की तारीख से पहले की तारीख से शुरू होती है, तो—
(क) इस उपधारा के पूर्वगामी प्रावधानों में से कोई भी उस अनुसूचित अपराध पर लागू नहीं होगा जो ऐसे क्षेत्र में किया गया हो जिसमें अभियोजन के लिए संपूर्ण साक्ष्य ऐसी अधिसूचना जारी होने की तिथि से पहले एकत्र किए गए हों; और
(ख) ऐसे क्षेत्र में किए गए अनुसूचित अपराधों से संबंधित अन्य सभी मामले, जो ऐसी अधिसूचना जारी होने की तिथि से ठीक पहले किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित थे, इस धारा के अधीन अधिकार क्षेत्र रखने वाले विशेष न्यायालय को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और जिस विशेष न्यायालय को ऐसी कार्यवाही हस्तांतरित की गई है, वह ऐसे मामलों की कार्यवाही उस चरण से आगे बढ़ाएगा जिस चरण में वे उस समय लंबित थे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी राज्य के किसी न्यायिक क्षेत्र में किए गए अनुसूचित अपराध से संबंधित किसी मामले में, केंद्र सरकार धारा 4 की उपधारा (2) के प्रावधानों और मामले के तथ्यों और परिस्थितियों तथा अन्य सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, इस राय की हो कि ऐसे अपराध का विचारण राज्य के बाहर उस न्यायिक क्षेत्र के संबंध में स्थापित अतिरिक्त विशेष न्यायालय द्वारा किया जाना उचित है, तो केंद्र सरकार इस आशय की घोषणा कर सकती है:
बशर्ते कि ऐसी कोई घोषणा तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को लिखित में एक रिपोर्ट न भेज दी हो जिसमें ऐसी घोषणा करने का अनुरोध किया गया हो।
स्पष्टीकरण. —जहां दो या दो से अधिक न्यायिक क्षेत्रों के संबंध में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय की स्थापना की जाती है, तो इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे अतिरिक्त विशेष न्यायालय को ऐसे प्रत्येक न्यायिक क्षेत्र के संबंध में स्थापित माना जाएगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन की गई घोषणा पर किसी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(4) यदि किसी राज्य के न्यायिक क्षेत्र में किए गए किसी अपराध के संबंध में कोई घोषणा की जाती है, तो ऐसे अपराध के संबंध में अभियोग केवल राज्य के बाहर उस न्यायिक क्षेत्र के लिए स्थापित अतिरिक्त विशेष न्यायालय में ही चलाया जाएगा, और यदि ऐसी घोषणा से ठीक पहले किसी अन्य न्यायालय में ऐसे अपराध के संबंध में कोई अभियोग लंबित है, तो वह ऐसे अतिरिक्त विशेष न्यायालय में स्थानांतरित हो जाएगा और ऐसा अतिरिक्त विशेष न्यायालय उस मामले की कार्यवाही उस चरण से शुरू करेगा जिस चरण में वह उस समय लंबित था।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

