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धारा 256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु
256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु (1) यदि समन परिवाद पर जारी किया गया है और अभियुक्त की हाजिरी के लिए नियत दिन को, अथवा उसके पश्चात्वर्ती किसी ऐसे दिन को जिसके लिए सुनवाई स्थगित की जाए, परिवादी हाजिर नहीं होता है, तो मजिस्ट्रेट, इसमें इसके पूर्व अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, अभियुक्त को दोषमुक्त कर देगा, जब…
पूरा पढ़ेंशिकायतकर्ता की अनुपस्थिति या मृत्यु।
(1) यदि शिकायत पर समन जारी किया गया है, और आरोपी की उपस्थिति के लिए निर्धारित दिन पर, या उसके बाद किसी ऐसे दिन पर जिस पर सुनवाई स्थगित की जा सकती है, शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं होता है, तो मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता को उपस्थित होने के लिए तीस दिन का समय देने के बाद, इसमें पहले निहित किसी भी बात के बावजूद, आरोपी को बरी कर…
पूरा पढ़ेंशिकायत वापस लेना।
यदि इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट को संतुष्ट कर दे कि उसके पास आरोपी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, या यदि एक से अधिक आरोपी हों, तो उन सभी या उनमें से किसी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए…
पूरा पढ़ेंशिकायत वापस लेना।
यदि कोई शिकायतकर्ता, इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय, मजिस्ट्रेट को संतुष्ट कर देता है कि उसके पास आरोपी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, या यदि एक से अधिक आरोपी हैं, तो उन सभी या उनमें से किसी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने…
पूरा पढ़ेंधारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति किसी ऐसे समन-मामले में, जो परिवाद पर संस्थित मामले से भिन्न है, प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपने द्वारा अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, कार्यवाही को किसी भी प्रक्रम पर कोई निर्णय सुनाए बिना रोक…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में कार्यवाही रोकने का अधिकार।
शिकायत के अलावा किसी अन्य तरीके से दायर किए गए किसी भी समन मामले में, प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व स्वीकृति से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपने द्वारा दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, बिना कोई निर्णय सुनाए किसी भी स्तर पर कार्यवाही रोक सकता है, और यदि मुख्य गवाहों के साक्ष्य…
पूरा पढ़ेंधारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति जब छह मास से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध से संबंधित समन-मामले के विचारण के दौरान मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में उस अपराध का विचारण वारंट-मामलों के विचारण के लिए उपबंधित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए, तब ऐसा…
पूरा पढ़ेंन्यायालय को समन मामलों को वारंट मामलों में परिवर्तित करने का अधिकार है।
जब किसी ऐसे अपराध से संबंधित समन मामले की सुनवाई के दौरान, जिसके लिए छह महीने से अधिक की कारावास की सजा का प्रावधान है, मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में, अपराध की सुनवाई वारंट मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए, तो मजिस्ट्रेट इस संहिता में वारंट मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित…
पूरा पढ़ेंधारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति (1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) कोई महानगर मजिस्ट्रेट; (ग) प्रथम वर्ग का कोई ऐसा मजिस्ट्रेट, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया गया है, यदि ठीक समझे तो निम्नलिखित सब या किन्हीं अपराधों का विचारण संक्षिप्त रूप…
पूरा पढ़ेंसंक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट, निम्नलिखित में से सभी या किसी भी अपराध का संक्षिप्त तरीके से निपटारा किया जाएगा:— (i) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2), धारा 305 या धारा 306 के अंतर्गत चोरी, जहाँ चोरी की गई संपत्ति का…
पूरा पढ़ेंधारा 261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण उच्च न्यायालय, द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से निहित किसी मजिस्ट्रेट को ऐसे किसी अपराध का, जो केवल जुर्माने से, या छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास से, जुर्माने सहित या रहित, दंडनीय है, तथा ऐसे किसी अपराध के दुष्प्रेरण या उसे करने के प्रयत्न का,…
पूरा पढ़ेंद्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त सुनवाई।
उच्च न्यायालय द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से युक्त किसी भी मजिस्ट्रेट को ऐसे किसी भी अपराध की संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार प्रदान कर सकता है जो केवल जुर्माने या छह महीने से अधिक की अवधि के कारावास (जुर्माने सहित या बिना जुर्माने के) से दंडनीय हो, और ऐसे किसी भी अपराध के लिए उकसाने या प्रयास करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया
262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया (1) इस अध्याय के अधीन विचारणों में, इसमें इसके पश्चात् वर्णित बातों के सिवाय, समन-मामलों के विचारण के लिए इस संहिता में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा। (2) इस अध्याय के अधीन किसी दोषसिद्धि की दशा में तीन मास से अधिक की अवधि के कारावास का दंडादेश नहीं दिया जाएगा।
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त परीक्षणों की प्रक्रिया।
(1) इस अध्याय के अंतर्गत मुकदमों में, समन-मामलों के मुकदमे के लिए इस संहिता में निर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, सिवाय इसके कि जैसा कि आगे उल्लेख किया गया है। (2) इस अध्याय के अंतर्गत किसी भी दोषसिद्धि के मामले में तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास की सजा नहीं दी जाएगी।
पूरा पढ़ेंधारा 263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख
263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख संक्षेपतः विचारित प्रत्येक मामले में मजिस्ट्रेट, ऐसे प्ररूप में जैसा राज्य सरकार निदेश दे, निम्नलिखित विशिष्टियां प्रविष्ट करेगा, अर्थात्:— (क) मामले की क्रम संख्या; (ख) अपराध किए जाने की तारीख; (ग) रिपोर्ट या परिवाद की तारीख; (घ) परिवादी का नाम (यदि कोई हो); (ङ) अभियुक्त का नाम,…
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त परीक्षणों में रिकॉर्ड करें।
संक्षिप्त सुनवाई वाले प्रत्येक मामले में, मजिस्ट्रेट राज्य सरकार द्वारा निर्देशित प्रपत्र में निम्नलिखित विवरण दर्ज करेगा, अर्थात्:— (क) मामले का क्रमांक; (ख) अपराध किए जाने की तिथि; (ग) रिपोर्ट या शिकायत की तिथि; (घ) शिकायतकर्ता का नाम (यदि कोई हो); (ई) अभियुक्त का नाम, पिता का नाम और निवास स्थान; (f) शिकायत किया गया…
पूरा पढ़ेंधारा 264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय
264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय संक्षेपतः विचारित प्रत्येक ऐसे मामले में, जिसमें अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्य का सार और ऐसा निर्णय अभिलिखित करेगा जिसमें निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त कथन हो।
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त सुनवाई वाले मामलों में निर्णय।
प्रत्येक ऐसे मामले में जिसकी संक्षिप्त सुनवाई की जाती है और जिसमें आरोपी अपना अपराध स्वीकार नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्यों का सार और निर्णय दर्ज करेगा जिसमें निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त विवरण होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 265. अभिलेख और निर्णय की भाषा
265. अभिलेख और निर्णय की भाषा (1) प्रत्येक ऐसा अभिलेख और निर्णय न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा। (2) उच्च न्यायालय, अपराधों का संक्षेपतः विचारण करने के लिए सशक्त किसी मजिस्ट्रेट को यह प्राधिकार दे सकेगा कि वह पूर्वोक्त अभिलेख या निर्णय या दोनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी के…
पूरा पढ़ेंरिकॉर्ड और निर्णय की भाषा।
(1) ऐसा प्रत्येक अभिलेख एवं निर्णय न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा। (2) उच्च न्यायालय किसी भी मजिस्ट्रेट को, जिसे अपराधों की संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में नियुक्त अधिकारी के माध्यम से उपर्युक्त अभिलेख या निर्णय या दोनों तैयार करने के लिए अधिकृत कर सकता है, और…
पूरा पढ़ेंधारा 265A. अध्याय का लागू होना
265A. अध्याय का लागू होना (1) यह अध्याय ऐसे अभियुक्त के संबंध में लागू होगा जिसके विरुद्ध— (क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा धारा 173 के अधीन यह अभिकथन करते हुए रिपोर्ट भेजी गई है कि उसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया प्रतीत होता है जो ऐसा अपराध नहीं है जिसके लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन मृत्यु या आजीवन कारावास…
पूरा पढ़ेंअध्याय का अनुप्रयोग।
(1) यह अध्याय ऐसे अभियुक्त के संबंध में लागू होगा जिसके विरुद्ध— (क) पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा धारा 193 के तहत रिपोर्ट भेजी गई है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि उसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया प्रतीत होता है जो उस अपराध से इतर है जिसके लिए उस समय लागू कानून के तहत मृत्युदंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से…
पूरा पढ़ेंधारा 265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन
265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन (1) किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में, जिसमें ऐसा अपराध विचारण के लिए लंबित है, अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा। (2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन में उस मामले का संक्षिप्त वर्णन होगा जिससे संबंधित वह आवेदन फाइल किया गया है, जिसके अंतर्गत वह अपराध भी है जिससे…
पूरा पढ़ेंसमझौता ज्ञापन के लिए आवेदन।
(1) किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति, उस न्यायालय में, जिसमें ऐसा अपराध विचाराधीन है, आरोप तय होने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन दाखिल कर सकता है। (2) उपधारा (1) के अंतर्गत आवेदन में उस मामले का संक्षिप्त विवरण होना चाहिए जिसके संबंध में आवेदन दाखिल किया गया है, जिसमें उस अपराध का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत धारा 265ख की उपधारा (4) के खंड (क) के अधीन पारस्परिक संतोषप्रद निपटारा तैयार करने में, न्यायालय निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, अर्थात्:— (क) पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामले में, न्यायालय लोक अभियोजक को, उस पुलिस अधिकारी को जिसने मामले का अन्वेषण किया…
पूरा पढ़ेंपारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटान के लिए दिशानिर्देश।
धारा 290 की उपधारा (4) के खंड (क) के तहत पारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटान करते समय न्यायालय निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करेगा, अर्थात्:— (क) पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज किए गए किसी मामले में, न्यायालय लोक अभियोजक, मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी, आरोपी और पीड़ित को मामले के संतोषजनक निपटारे के लिए बैठक में भाग लेने…
पूरा पढ़ेंधारा 265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना
265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना जहां धारा 265ग के अधीन किसी बैठक में मामले का संतोषप्रद निपटारा तैयार कर लिया गया है, वहां न्यायालय ऐसे निपटारे की रिपोर्ट तैयार करेगा जिस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा और उन सभी अन्य व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे…
पूरा पढ़ेंआपसी सहमति से हुए समझौते की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
जहां धारा 291 के तहत हुई बैठक में मामले का संतोषजनक निपटारा हो गया हो, वहां न्यायालय ऐसे निपटारे की रिपोर्ट तैयार करेगा जिस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी और बैठक में भाग लेने वाले अन्य सभी व्यक्तियों के हस्ताक्षर होंगे। यदि ऐसा कोई निपटारा नहीं हुआ है, तो न्यायालय इस अवलोकन को दर्ज करेगा और इस संहिता के प्रावधानों के…
पूरा पढ़ेंधारा 265E. मामले का निपटारा
265E. मामले का निपटारा जहां धारा 265घ के अधीन मामले का संतोषप्रद निपटारा तैयार कर लिया गया है, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित रीति से करेगा, अर्थात्:— (क) न्यायालय धारा 265घ के अधीन निपटारे के अनुसार पीड़ित को प्रतिकर अधिनिर्णीत करेगा और दंड की मात्रा पर, धारा 360 के अधीन सदाचरण की परिवीक्षा पर या भर्त्सना…
पूरा पढ़ेंमामले का निपटारा।
जहां धारा 292 के तहत मामले का संतोषजनक निपटारा हो चुका हो, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित तरीके से करेगा, अर्थात्:— (क) न्यायालय धारा 292 के अधीन किए गए निर्णय के अनुसार पीड़ित को मुआवजा प्रदान करेगा और सजा की मात्रा, अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर या धारा 401 के तहत चेतावनी के बाद अभियुक्त को रिहा करने या…
पूरा पढ़ेंधारा 265F. न्यायालय का निर्णय
265F. न्यायालय का निर्णय न्यायालय धारा 265ङ के निबंधनों में अपना निर्णय खुले न्यायालय में सुनाएगा और उस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
पूरा पढ़ेंन्यायालय का निर्णय।
न्यायालय धारा 293 के अनुसार खुले न्यायालय में अपना निर्णय सुनाएगा और उस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे।
पूरा पढ़ेंधारा 265G. निर्णय की अंतिमता
265G. निर्णय की अंतिमता धारा 265च के अधीन न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम होगा और ऐसे निर्णय के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई अपील (संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन विशेष इजाजत याचिका तथा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 227 के अधीन रिट याचिका के सिवाय) नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंनिर्णय की अंतिमता।
इस धारा के तहत न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम होगा और ऐसे निर्णय के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में कोई अपील (संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका और अनुच्छेद 226 और 227 के तहत रिट याचिका को छोड़कर) नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति
265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति इस अध्याय के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए न्यायालय को वे सभी शक्तियां होंगी जो इस संहिता के अधीन ऐसे न्यायालय में जमानत, अपराधों के विचारण और मामले के निपटारे से संबंधित अन्य विषयों की बाबत निहित हैं।
पूरा पढ़ेंसमझौता ज्ञापन में न्यायालय की शक्ति।
इस अध्याय के अंतर्गत अपने कार्यों के निर्वहन हेतु न्यायालय को इस संहिता के अंतर्गत जमानत, अपराधों के परीक्षण और किसी मामले के निपटारे से संबंधित अन्य मामलों के संबंध में प्राप्त सभी शक्तियां प्राप्त होंगी।
पूरा पढ़ेंधारा 265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना
265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना इस अध्याय के अधीन अधिरोपित कारावास के दंडादेश में अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का मुजरा करने के लिए धारा 428 के उपबंध उसी रीति से लागू होंगे जिस रीति से वे इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन कारावास के संबंध में लागू होते हैं।
पूरा पढ़ेंअभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
इस अध्याय के अंतर्गत लगाए गए कारावास की सजा के विरुद्ध अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को समायोजित करने के लिए धारा 468 के प्रावधान उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे वे इस संहिता के अन्य प्रावधानों के अंतर्गत कारावास के संबंध में लागू होते हैं।
पूरा पढ़ेंधारा 265J. व्यावृत्ति
265J. व्यावृत्ति इस अध्याय के उपबंध, इस संहिता के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे और ऐसे अन्य उपबंधों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह इस अध्याय के किसी उपबंध के अर्थ को निर्बंधित करती है। स्पष्टीकरण—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, "लोक अभियोजक" पद का वही…
पूरा पढ़ेंबचत।
इस अध्याय के प्रावधान इस संहिता के किसी अन्य प्रावधान में निहित किसी भी असंगत बात के बावजूद प्रभावी होंगे और ऐसे अन्य प्रावधानों में किसी भी बात को इस अध्याय के किसी भी प्रावधान के अर्थ को सीमित करने के रूप में नहीं समझा जाएगा। स्पष्टीकरण। —इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, "लोक अभियोजक" अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा जो…
पूरा पढ़ेंधारा 265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना
265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, धारा 265B के अधीन फाइल किए गए सौदा अभिवाक् के आवेदन में अभियुक्त द्वारा किए गए कथनों या उसमें कथित तथ्यों का उपयोग, इस अध्याय के प्रयोजन से भिन्न किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंअभियुक्तों के बयान का उपयोग नहीं किया जाएगा।
किसी भी कानून में फिलहाल लागू किसी भी बात के होते हुए भी, धारा 290 के तहत दायर प्ली बार्गेनिंग आवेदन में आरोपी द्वारा दिए गए बयान या तथ्यों का उपयोग इस अध्याय के उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 265L. अध्याय का लागू न होना
265L. अध्याय का लागू न होना इस अध्याय की कोई बात किसी ऐसे किशोर या बालक को लागू नहीं होगी जो किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 (2000 का 56) की धारा 2 के खंड (ट) में यथापरिभाषित है।
पूरा पढ़ेंअध्याय का लागू न होना।
इस अध्याय में कोई भी बात किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2 ऑफ 2016) की धारा 2 में परिभाषित किसी किशोर या बच्चे पर लागू नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 266. परिभाषाएं
266. परिभाषाएं इस अध्याय में,— (क) "निरुद्ध" के अंतर्गत निवारक निरोध के लिए उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन निरुद्ध होना भी है; (ख) "कारागार" के अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं,— (i) कोई ऐसा स्थान, जिसे राज्य सरकार ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, सहायक जेल घोषित किया है; (ii) कोई सुधारालय, बोर्स्टल संस्था या वैसी ही…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस अध्याय में,--- (क) "हिरासत में लिया गया" में निवारक हिरासत का प्रावधान करने वाले किसी भी कानून के तहत हिरासत में लिया गया शामिल है; (ख) "कारागार" में निम्नलिखित शामिल हैं,--- (i) कोई भी स्थान जिसे राज्य सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा सहायक कारागार घोषित किया गया हो; (ii) कोई सुधारगृह, बोर्स्टल संस्था या…
पूरा पढ़ेंधारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति (1) जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी दंड न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि— (क) किसी कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का उत्तर देने के लिए, या उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही के प्रयोजन के लिए, न्यायालय के…
पूरा पढ़ेंकैदियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार।
(1) जब भी, इस संहिता के अंतर्गत किसी जाँच, परीक्षण या कार्यवाही के दौरान, किसी आपराधिक न्यायालय को यह प्रतीत हो कि,--- (क) कि किसी कारागार में बंद या हिरासत में रखे गए व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का उत्तर देने के लिए या उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही के प्रयोजन से न्यायालय के समक्ष लाया जाए; या (ख) न्याय के उद्देश्यों…
पूरा पढ़ेंधारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति (1) राज्य सरकार, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि किसी व्यक्ति को या व्यक्तियों के किसी वर्ग को उस कारागार से, जिसमें वह या वे परिरुद्ध या निरुद्ध…
पूरा पढ़ेंधारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
(1) राज्य सरकार या केंद्र सरकार, जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मामलों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय सामान्य या विशेष आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को उस कारागार से नहीं हटाया जाएगा जिसमें वे बंद या हिरासत में हैं, और इसके बाद, जब तक यह आदेश लागू रहता है, धारा…
पूरा पढ़ेंधारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 267 के अधीन आदेश दिया गया है,— (क) रुग्णता या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के लिए अयोग्य है; या (ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण लंबित रहने तक अथवा प्रारंभिक अन्वेषण…
पूरा पढ़ेंकुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
जहां वह व्यक्ति जिसके संबंध में धारा 302 के तहत आदेश दिया गया है--- (क) बीमारी या दुर्बलता के कारण कारागार से निकाले जाने के लिए अयोग्य है; या (ख) मुकदमे की सुनवाई के लिए हिरासत में है या मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक या प्रारंभिक जांच लंबित रहने तक हिरासत में है; या (ग) वह ऐसी अवधि के लिए हिरासत में है जो आदेश का…
पूरा पढ़ेंधारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना धारा 269 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन किए गए और, जहां आवश्यक हो वहां, उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाएगा जिसमें उसकी…
पूरा पढ़ेंकैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
धारा 304 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कारागार प्रभारी अधिकारी, धारा 302 की उपधारा (1) के तहत जारी किए गए और आवश्यक होने पर उसकी उपधारा (2) के तहत विधिवत प्रतिहस्ताक्षरित आदेश की प्राप्ति पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाने की व्यवस्था करेगा जिसमें उसकी उपस्थिति आवश्यक है, ताकि वह आदेश में उल्लिखित…
पूरा पढ़ेंधारा 271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति
271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति इस अध्याय के उपबंध, किसी कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध किसी व्यक्ति की साक्षी के रूप में परीक्षा के लिए धारा 284 के अधीन कमीशन निकालने की न्यायालय की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होंगे; और अध्याय 23 के भाग ख के उपबंध, कारागार में ऐसे किसी व्यक्ति…
पूरा पढ़ेंजेल में बंद गवाहों की जांच के लिए आयोग जारी करने का अधिकार।
इस अध्याय के प्रावधान न्यायालय की धारा 319 के तहत किसी कारागार में बंद या हिरासत में लिए गए व्यक्ति की गवाह के रूप में जांच के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे; और अध्याय 25 के भाग बी के प्रावधान कारागार में बंद किसी भी व्यक्ति की कमीशन पर जांच के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे…
पूरा पढ़ेंधारा 272. न्यायालयों की भाषा
272. न्यायालयों की भाषा राज्य सरकार यह अवधारित कर सकेगी कि इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, उच्च न्यायालय से भिन्न, राज्य के भीतर के हर न्यायालय की भाषा कौन सी होगी।
पूरा पढ़ेंन्यायालयों की भाषा।
राज्य सरकार यह निर्धारित कर सकती है कि इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, उच्च न्यायालय के अतिरिक्त राज्य के प्रत्येक न्यायालय की भाषा क्या होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना जैसा अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित है उसके सिवाय, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान लिया गया सब साक्ष्य अभियुक्त की उपस्थिति में, अथवा जब उसकी व्यक्तिगत हाजिरी अभिमुक्त कर दी गई हो तब, उसके प्लीडर की उपस्थिति में लिया जाएगा। स्पष्टीकरण—इस धारा में "अभियुक्त" के…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त की उपस्थिति में साक्ष्य लिए जाएंगे।
जब तक कि अन्यथा स्पष्ट रूप से प्रावधान न किया गया हो, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के दौरान लिए गए सभी साक्ष्य आरोपी की उपस्थिति में लिए जाएंगे, या, जब उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई हो, तो उसके वकील की उपस्थिति में, जिसमें ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के माध्यम से भी, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले…
पूरा पढ़ेंधारा 274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख
274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख (1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब समन-मामलों में, धारा 145 से धारा 148 तक (दोनों सहित) के अधीन सब जांचों में, और धारा 446 के अधीन सब कार्यवाहियों में, जो विचारण के दौरान की गई कार्यवाहियों से भिन्न हैं, मजिस्ट्रेट, ज्यों-ज्यों हर साक्षी की परीक्षा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों…
पूरा पढ़ेंसमन मामलों और पूछताछों में दर्ज रिकॉर्ड।
(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारणित सभी समन मामलों में, धारा 164 से 167 (दोनों सहित) के अंतर्गत सभी जाँचों में, और धारा 491 के अंतर्गत मुकदमे की कार्यवाही के अलावा अन्य सभी कार्यवाहियों में, मजिस्ट्रेट प्रत्येक गवाह की परीक्षा आगे बढ़ने पर न्यायालय की भाषा में साक्ष्य के सार का एक ज्ञापन तैयार करेगा: बशर्ते कि यदि…
पूरा पढ़ेंधारा 275. वारंट-मामलों में अभिलेख
275. वारंट-मामलों में अभिलेख (1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब वारंट-मामलों में, हर साक्षी का साक्ष्य, ज्यों-ज्यों उसकी परीक्षा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों या तो मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं, या खुले न्यायालय में उसके श्रुतलेख से, अथवा जहां वह शारीरिक या अन्य असमर्थता के कारण ऐसा करने में असमर्थ है वहां उसके निदेश और…
पूरा पढ़ेंवारंट मामलों में रिकॉर्ड।
(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारणित सभी वारंट मामलों में, प्रत्येक गवाह की गवाही, उसकी परीक्षा के दौरान, मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं लिखित रूप में दर्ज की जाएगी। या तो खुले न्यायालय में उनके निर्देशानुसार, या यदि वे शारीरिक या अन्य अक्षमता के कारण ऐसा करने में असमर्थ हों, तो उनके निर्देशन और पर्यवेक्षण में, इस संबंध में उनके…
पूरा पढ़ेंधारा 276. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख
276. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख (1) सेशन न्यायालय के समक्ष सब विचारणों में, हर साक्षी का साक्ष्य, ज्यों-ज्यों उसकी परीक्षा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों या तो पीठासीन न्यायाधीश द्वारा स्वयं, या खुले न्यायालय में उसके श्रुतलेख से, अथवा उसके निदेश और अधीक्षण के अधीन न्यायालय के ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे उसने इस…
पूरा पढ़ेंसत्र न्यायालय के समक्ष मुकदमे का रिकॉर्ड।
(1) सत्र न्यायालय के समक्ष सभी मुकदमों में, प्रत्येक गवाह की गवाही, जैसे-जैसे उसकी परीक्षा आगे बढ़ती है, या तो पीठासीन न्यायाधीश द्वारा स्वयं लिखित रूप में दर्ज की जाएगी, या खुले न्यायालय में उसके द्वारा लिखित रूप में दर्ज की जाएगी, या उसके निर्देशन और पर्यवेक्षण के अधीन, इस संबंध में उसके द्वारा नियुक्त न्यायालय के…
पूरा पढ़ेंधारा 277. साक्ष्य के अभिलेख की भाषा
277. साक्ष्य के अभिलेख की भाषा हर ऐसे मामले में, जिसमें साक्ष्य धारा 275 या धारा 276 के अधीन लेखबद्ध किया जाता है,— (क) यदि साक्षी न्यायालय की भाषा में साक्ष्य देता है तो वह उसी भाषा में लेखबद्ध किया जाएगा; (ख) यदि वह किसी अन्य भाषा में साक्ष्य देता है तो वह, यदि साध्य हो, उसी भाषा में लेखबद्ध किया जा सकेगा, और यदि…
पूरा पढ़ेंसाक्ष्य के अभिलेख की भाषा।
धारा 310 या धारा 311 के तहत साक्ष्य दर्ज किए जाने वाले प्रत्येक मामले में,--- (क) यदि गवाह न्यायालय की भाषा में साक्ष्य देता है, तो उसे उसी भाषा में दर्ज किया जाएगा; (ख) यदि वह किसी अन्य भाषा में साक्ष्य देता है, तो यदि संभव हो तो उसे उसी भाषा में लिख लिया जाए, और यदि ऐसा करना संभव न हो, तो न्यायालय की भाषा में…
पूरा पढ़ेंधारा 278. ऐसे साक्ष्य के पूरा हो जाने पर उसके संबंध में प्रक्रिया
278. ऐसे साक्ष्य के पूरा हो जाने पर उसके संबंध में प्रक्रिया (1) ज्यों ही धारा 275 या धारा 276 के अधीन लिया गया किसी साक्षी का साक्ष्य पूरा हो जाता है, त्यों ही वह अभियुक्त की, यदि वह हाजिर हो, अथवा उसके प्लीडर की, यदि वह प्लीडर द्वारा हाजिर होता है, उपस्थिति में उसे पढ़कर सुनाया जाएगा और, यदि आवश्यक हो तो, शुद्ध किया…
पूरा पढ़ेंऐसे साक्ष्यों से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने पर।
(1) धारा 310 या धारा 311 के तहत लिए गए प्रत्येक गवाह के साक्ष्य के पूरा होने पर, यदि आरोपी उपस्थित हो तो उसकी उपस्थिति में, या यदि वह किसी वकील के माध्यम से उपस्थित हो तो उसके वकील की उपस्थिति में, उसे पढ़कर सुनाया जाएगा, और यदि आवश्यक हो तो उसे सुधारा जाएगा। (2) यदि गवाह साक्ष्य के किसी भाग की सत्यता से इनकार करता है…
पूरा पढ़ेंधारा 279. अभियुक्त या उसके प्लीडर के लिए साक्ष्य का विवर्तन
279. अभियुक्त या उसके प्लीडर के लिए साक्ष्य का विवर्तन (1) जब कभी कोई साक्ष्य ऐसी भाषा में दिया जाता है जिसे अभियुक्त नहीं समझता और वह न्यायालय में स्वयं उपस्थित है, तब वह उसे खुले न्यायालय में ऐसी भाषा में विवर्तित किया जाएगा जिसे वह समझता है। (2) यदि वह प्लीडर द्वारा हाजिर होता है और साक्ष्य न्यायालय की भाषा से…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त या उसके वकील को साक्ष्यों की व्याख्या करने का अधिकार।
(1) जब भी कोई साक्ष्य ऐसी भाषा में दिया जाए जिसे अभियुक्त न समझता हो, और वह स्वयं न्यायालय में उपस्थित हो, तो उसे खुले न्यायालय में उसकी समझ में आने वाली भाषा में अनुवाद किया जाएगा। (2) यदि वह किसी अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होता है और साक्ष्य न्यायालय की भाषा के अलावा किसी अन्य भाषा में दिया जाता है, और अधिवक्ता…
पूरा पढ़ेंधारा 280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां
280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां जब कोई पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी साक्षी का साक्ष्य अभिलिखित कर चुका है, तब वह ऐसी टिप्पणियां (यदि कोई हों) भी अभिलिखित करेगा, जिन्हें वह उस साक्षी के परीक्षा के दौरान के हाव-भाव के संबंध में तात्त्विक समझता है।
पूरा पढ़ेंगवाह के व्यवहार के संबंध में टिप्पणियाँ।
जब पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी गवाह के साक्ष्य को दर्ज कर लेते हैं, तो वे उस गवाह के परीक्षा के दौरान के व्यवहार के संबंध में ऐसी टिप्पणियां (यदि कोई हो) भी दर्ज करेंगे जिन्हें वे महत्वपूर्ण समझते हैं।
पूरा पढ़ेंधारा 281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख
281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख (1) जब कभी अभियुक्त की परीक्षा किसी महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है, तब मजिस्ट्रेट अभियुक्त की परीक्षा के सार का ज्ञापन न्यायालय की भाषा में तैयार करेगा और ऐसा ज्ञापन मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा तथा अभिलेख का भाग होगा। (2) जब कभी अभियुक्त की परीक्षा महानगर मजिस्ट्रेट…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त की जांच का रिकॉर्ड।
(1) जब भी किसी मजिस्ट्रेट या सत्र न्यायालय द्वारा अभियुक्त की परीक्षा ली जाती है, तो ऐसी संपूर्ण परीक्षा, जिसमें उससे पूछे गए प्रत्येक प्रश्न और उसके द्वारा दिए गए प्रत्येक उत्तर शामिल हैं, पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं पूर्ण रूप से दर्ज की जाएगी, या यदि वह शारीरिक या अन्य अक्षमता के कारण ऐसा करने में…
पूरा पढ़ेंधारा 282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना
282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना जब किसी दंड न्यायालय द्वारा किसी साक्ष्य या कथन के विवर्तन के लिए किसी दुभाषिए की सेवाएं अपेक्षित की जाती हैं, तब वह ऐसे साक्ष्य या कथन का सही विवर्तन बताने के लिए आबद्ध होगा।
पूरा पढ़ेंदुभाषिया सत्यपूर्वक अनुवाद करने के लिए बाध्य है।
जब किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा किसी साक्ष्य या कथन की व्याख्या के लिए किसी दुभाषिए की सेवाओं की आवश्यकता होती है, तो वह ऐसे साक्ष्य या कथन की सही व्याख्या बताने के लिए बाध्य होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 283. उच्च न्यायालय में अभिलेख
283. उच्च न्यायालय में अभिलेख हर उच्च न्यायालय, साधारण नियम द्वारा, वह रीति विहित कर सकेगा जिससे उसके समक्ष आने वाले मामलों में साक्षियों का साक्ष्य और अभियुक्त की परीक्षा लेखबद्ध की जाएगी; और ऐसा साक्ष्य तथा परीक्षा ऐसे नियम के अनुसार लेखबद्ध की जाएगी।
पूरा पढ़ेंउच्च न्यायालय में दर्ज रिकॉर्ड।
प्रत्येक उच्च न्यायालय सामान्य नियम द्वारा यह निर्धारित कर सकता है कि उसके समक्ष आने वाले मामलों में गवाहों के साक्ष्य और अभियुक्तों की परीक्षा किस प्रकार दर्ज की जाएगी, और ऐसे साक्ष्य और परीक्षा उस नियम के अनुसार दर्ज की जाएगी।
पूरा पढ़ेंधारा 284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा
284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा (1) जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के उद्देश्यों के लिए किसी साक्षी की परीक्षा आवश्यक है और यह कि ऐसे साक्षी की हाजिरी इतने विलंब, व्यय या असुविधा…
पूरा पढ़ेंजब गवाह की उपस्थिति से छूट दी जा सकती है और कमीशन जारी किया जा सकता है।
(1) जब भी इस संहिता के अंतर्गत किसी जाँच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत हो कि न्याय के हित में किसी साक्षी की परीक्षा आवश्यक है, और ऐसी साक्षी की उपस्थिति में विलंब, व्यय या असुविधा की मात्रा इतनी अधिक हो कि मामले की परिस्थितियों में यह अनुचित हो, तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट…
पूरा पढ़ेंधारा 285. कमीशन किसे जारी किया जाए
285. कमीशन किसे जारी किया जाए (1) यदि साक्षी उन राज्यक्षेत्रों के भीतर है जिन पर इस संहिता का विस्तार है, तो कमीशन उस मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जैसी स्थिति हो, निदिष्ट किया जाएगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह साक्षी पाया जाना है। (2) यदि साक्षी भारत में है, किन्तु ऐसे राज्य या…
पूरा पढ़ेंयह आयोग किसे जारी किया जाना है।
(1) यदि गवाह उन क्षेत्रों के भीतर है जिन पर यह संहिता लागू होती है, तो आयोग उस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया जाएगा जिसके स्थानीय अधिकार क्षेत्र में गवाह पाया जाता है। (2) यदि गवाह भारत में है, लेकिन किसी ऐसे राज्य या क्षेत्र में है जिस पर यह संहिता लागू नहीं होती, तो आयोग ऐसे न्यायालय या अधिकारी को…
पूरा पढ़ेंधारा 286. कमीशनों का निष्पादन
286. कमीशनों का निष्पादन कमीशन की प्राप्ति पर, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, या ऐसा महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट जिसे वह इस निमित्त नियुक्त करे, साक्षी को अपने समक्ष समन करेगा या उस स्थान को जाएगा जहां साक्षी है, और उसका साक्ष्य उसी रीति से लेखबद्ध करेगा, तथा इस प्रयोजन के लिए वही…
पूरा पढ़ेंकमीशनों का निष्पादन।
अभियोग प्राप्त होने पर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या ऐसा कोई मजिस्ट्रेट जिसे वह इस संबंध में नियुक्त करे, गवाह को अपने समक्ष बुलाएगा या उस स्थान पर जाएगा जहां गवाह मौजूद है, और उसी प्रकार से उसका साक्ष्य दर्ज करेगा, और इस उद्देश्य के लिए वह इस संहिता के अंतर्गत वारंट-मामलों के परीक्षणों में प्राप्त शक्तियों का ही…
पूरा पढ़ेंधारा 287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे
287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे (1) इस संहिता के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही के पक्षकार, जिसमें कमीशन जारी किया गया है, क्रमशः कोई ऐसी लिखित प्रश्नावली भेज सकेंगे जिसे कमीशन का निदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट विवाद्यक के लिए सुसंगत समझे, और उस मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी के लिए, जिसे कमीशन निदिष्ट…
पूरा पढ़ेंपक्षकार गवाहों से पूछताछ कर सकते हैं।
(1) इस संहिता के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही में, जिसमें कोई कमीशन जारी किया जाता है, पक्षकार क्रमशः लिखित में कोई भी प्रश्नपत्र भेज सकते हैं, जिसे कमीशन जारी करने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट मामले से प्रासंगिक समझे, और मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी, जिसे कमीशन जारी करने का निर्देश दिया गया है, या जिसे इसे निष्पादित…
पूरा पढ़ेंधारा 288. कमीशन की वापसी
288. कमीशन की वापसी (1) धारा 284 के अधीन जारी किए गए किसी कमीशन के सम्यक् रूप से निष्पादित हो जाने के पश्चात्, वह उसके अधीन परीक्षित साक्षी के अभिसाक्ष्य सहित, कमीशन जारी करने वाले न्यायालय या मजिस्ट्रेट को लौटाया जाएगा; और वह कमीशन, उस पर की गई वापसी तथा अभिसाक्ष्य सभी उचित समयों पर पक्षकारों के निरीक्षण के लिए खुले…
पूरा पढ़ेंकमीशन की वापसी।
(1) धारा 319 के तहत जारी किए गए किसी भी कमीशन पर विधिवत हस्ताक्षर हो जाने के बाद, उसे, उसके अधीन जांचे गए गवाह के बयान सहित, कमीशन जारी करने वाले न्यायालय या मजिस्ट्रेट को लौटा दिया जाएगा; और कमीशन, उसकी प्रति और बयान सभी उचित समय पर पक्षों के निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे, और सभी उचित अपवादों के अधीन रहते हुए, किसी भी…
पूरा पढ़ेंधारा 289. कार्यवाही का स्थगन
289. कार्यवाही का स्थगन हर मामले में, जिसमें धारा 284 के अधीन कमीशन निकाला जाता है, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही कमीशन के निष्पादन और वापसी के लिए युक्तियुक्त रूप से पर्याप्त विनिर्दिष्ट समय के लिए स्थगित की जा सकेगी।
पूरा पढ़ेंकार्यवाही स्थगित।
धारा 319 के तहत आयोग जारी किए जाने वाले प्रत्येक मामले में, आयोग के निष्पादन और वापसी के लिए यथोचित रूप से पर्याप्त निर्दिष्ट समय के लिए जांच, परीक्षण या अन्य कार्यवाही स्थगित की जा सकती है।
पूरा पढ़ेंधारा 290. विदेशी कमीशनों का निष्पादन
290. विदेशी कमीशनों का निष्पादन (1) धारा 286 के उपबंध तथा धारा 287 और धारा 288 के वे उपबंध, जहां तक वे किसी कमीशन के निष्पादन और उसकी वापसी से संबंधित हैं, इसमें इसके पश्चात् वर्णित न्यायालयों, न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेटों में से किसी के द्वारा जारी किए गए कमीशनों के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 284 के…
पूरा पढ़ेंविदेशी आयोगों का निष्पादन।
(1) धारा 321 के प्रावधान और धारा 322 और धारा 323 के वे प्रावधान जो किसी आयोग के निष्पादन और उसकी वापसी से संबंधित हैं, न्यायालयों, न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेटों द्वारा जारी किए गए आयोगों के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे धारा 319 के तहत जारी किए गए आयोगों पर लागू होते हैं। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट न्यायालय,…
पूरा पढ़ेंधारा 291. चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य
291. चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य (1) किसी सिविल सर्जन या अन्य चिकित्सीय साक्षी का ऐसा अभिसाक्ष्य, जो अभियुक्त की उपस्थिति में किसी मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया और अनुप्रमाणित किया गया है, या जो इस अध्याय के अधीन कमीशन पर लिया गया है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य में दिया जा सकेगा,…
पूरा पढ़ेंचिकित्सा गवाह का बयान।
(1) सिविल सर्जन या अन्य चिकित्सा गवाह का बयान, जो किसी मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त की उपस्थिति में लिया और सत्यापित किया गया हो, या इस अध्याय के तहत कमीशन पर लिया गया हो, इस संहिता के तहत किसी भी जांच, परीक्षण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में दिया जा सकता है, भले ही बयान देने वाले को गवाह के रूप में न बुलाया…
पूरा पढ़ेंधारा 291A. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट
291A. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट (1) कोई दस्तावेज, जो किसी व्यक्ति या संपत्ति के संबंध में किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के अधीन शिनाख्त की रिपोर्ट होना तात्पर्यित है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा, यद्यपि ऐसा मजिस्ट्रेट साक्षी के रूप…
पूरा पढ़ेंमजिस्ट्रेट की पहचान रिपोर्ट।
(1) किसी व्यक्ति या संपत्ति के संबंध में किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर से पहचान रिपोर्ट होने का दावा करने वाला कोई भी दस्तावेज इस संहिता के तहत किसी भी जांच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, भले ही ऐसे मजिस्ट्रेट को गवाह के रूप में न बुलाया गया हो। बशर्ते कि यदि ऐसी…
पूरा पढ़ेंटकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।
(1) कोई भी दस्तावेज, जो किसी टकसाल या नोट मुद्रण प्रेस या सुरक्षा मुद्रण प्रेस (स्टाम्प और स्टेशनरी नियंत्रक के अधिकारी सहित) या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभाग या किसी सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक या किसी राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक, जैसा भी मामला हो, के किसी अधिकारी द्वारा इस…
पूरा पढ़ेंटकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।
(1) कोई भी दस्तावेज जो किसी टकसाल या किसी नोट मुद्रण प्रेस या किसी सुरक्षा मुद्रण प्रेस (जिसमें स्टाम्प और स्टेशनरी नियंत्रक का अधिकारी भी शामिल है) या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभाग या किसी सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक या किसी राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक के राजपत्रित अधिकारी…
पूरा पढ़ें- CRPC §256BNSS §279
धारा 256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु
शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति या मृत्यु।
- CRPC §257BNSS §280
शिकायत वापस लेना।
- CRPC §258BNSS §281
धारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने का अधिकार।
- CRPC §259BNSS §282
धारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
न्यायालय को समन मामलों को वारंट मामलों में परिवर्तित करने का अधिकार है।
- CRPC §260BNSS §283
धारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
संक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
- CRPC §261BNSS §284
धारा 261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त सुनवाई।
- CRPC §262BNSS §285
धारा 262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया
संक्षिप्त परीक्षणों की प्रक्रिया।
- CRPC §263BNSS §286
धारा 263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख
संक्षिप्त परीक्षणों में रिकॉर्ड करें।
- CRPC §264BNSS §287
धारा 264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय
संक्षिप्त सुनवाई वाले मामलों में निर्णय।
- CRPC §265BNSS §288
धारा 265. अभिलेख और निर्णय की भाषा
रिकॉर्ड और निर्णय की भाषा।
- CRPC §265ABNSS §289
धारा 265A. अध्याय का लागू होना
अध्याय का अनुप्रयोग।
- CRPC §265BBNSS §290
धारा 265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन
समझौता ज्ञापन के लिए आवेदन।
- CRPC §265CBNSS §291
धारा 265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
पारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटान के लिए दिशानिर्देश।
- CRPC §265DBNSS §292
धारा 265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना
आपसी सहमति से हुए समझौते की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
- CRPC §265EBNSS §293
धारा 265E. मामले का निपटारा
मामले का निपटारा।
- CRPC §265FBNSS §294
धारा 265F. न्यायालय का निर्णय
न्यायालय का निर्णय।
- CRPC §265GBNSS §295
धारा 265G. निर्णय की अंतिमता
निर्णय की अंतिमता।
- CRPC §265HBNSS §296
धारा 265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति
समझौता ज्ञापन में न्यायालय की शक्ति।
- CRPC §265-IBNSS §297
धारा 265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना
अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
- CRPC §265JBNSS §298
धारा 265J. व्यावृत्ति
बचत।
- CRPC §265KBNSS §299
धारा 265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना
अभियुक्तों के बयान का उपयोग नहीं किया जाएगा।
- CRPC §265LBNSS §300
धारा 265L. अध्याय का लागू न होना
अध्याय का लागू न होना।
- CRPC §266BNSS §301
धारा 266. परिभाषाएं
परिभाषाएँ।
- CRPC §267BNSS §302
धारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
कैदियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार।
- CRPC §268BNSS §303
धारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
धारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
- CRPC §269BNSS §304
धारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
कुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
- CRPC §270BNSS §305
धारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
कैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
- CRPC §271BNSS §306
धारा 271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति
जेल में बंद गवाहों की जांच के लिए आयोग जारी करने का अधिकार।
- CRPC §272BNSS §307
धारा 272. न्यायालयों की भाषा
न्यायालयों की भाषा।
- CRPC §273BNSS §308
धारा 273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
अभियुक्त की उपस्थिति में साक्ष्य लिए जाएंगे।
- CRPC §274BNSS §309
धारा 274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख
समन मामलों और पूछताछों में दर्ज रिकॉर्ड।
- CRPC §275BNSS §310
धारा 275. वारंट-मामलों में अभिलेख
वारंट मामलों में रिकॉर्ड।
- CRPC §276BNSS §311
धारा 276. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख
सत्र न्यायालय के समक्ष मुकदमे का रिकॉर्ड।
- CRPC §277BNSS §312
धारा 277. साक्ष्य के अभिलेख की भाषा
साक्ष्य के अभिलेख की भाषा।
- CRPC §278BNSS §313
धारा 278. ऐसे साक्ष्य के पूरा हो जाने पर उसके संबंध में प्रक्रिया
ऐसे साक्ष्यों से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने पर।
- CRPC §279BNSS §314
धारा 279. अभियुक्त या उसके प्लीडर के लिए साक्ष्य का विवर्तन
अभियुक्त या उसके वकील को साक्ष्यों की व्याख्या करने का अधिकार।
- CRPC §280BNSS §315
धारा 280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां
गवाह के व्यवहार के संबंध में टिप्पणियाँ।
- CRPC §281BNSS §316
धारा 281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख
अभियुक्त की जांच का रिकॉर्ड।
- CRPC §282BNSS §317
धारा 282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना
दुभाषिया सत्यपूर्वक अनुवाद करने के लिए बाध्य है।
- CRPC §283BNSS §318
धारा 283. उच्च न्यायालय में अभिलेख
उच्च न्यायालय में दर्ज रिकॉर्ड।
- CRPC §284BNSS §319
धारा 284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा
जब गवाह की उपस्थिति से छूट दी जा सकती है और कमीशन जारी किया जा सकता है।
- CRPC §285BNSS §320
धारा 285. कमीशन किसे जारी किया जाए
यह आयोग किसे जारी किया जाना है।
- CRPC §286BNSS §321
धारा 286. कमीशनों का निष्पादन
कमीशनों का निष्पादन।
- CRPC §287BNSS §322
धारा 287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे
पक्षकार गवाहों से पूछताछ कर सकते हैं।
- CRPC §288BNSS §323
धारा 288. कमीशन की वापसी
कमीशन की वापसी।
- CRPC §289BNSS §324
धारा 289. कार्यवाही का स्थगन
कार्यवाही स्थगित।
- CRPC §290BNSS §325
धारा 290. विदेशी कमीशनों का निष्पादन
विदेशी आयोगों का निष्पादन।
- CRPC §291BNSS §326
धारा 291. चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य
चिकित्सा गवाह का बयान।
- CRPC §291ABNSS §327
धारा 291A. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट
मजिस्ट्रेट की पहचान रिपोर्ट।
- CRPC §292BNSS §328
टकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।

