IPC 228Aअध्याय XI · Of False Evidence and Offences Against Public Justiceअब BNS 72

धारा 228A · धारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण

अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से

अपराध एक नज़र में

अधिकतम दंड
2 वर्ष
जुर्माना
जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
संज्ञेय
संज्ञेय
जमानतीय
जमानतीय
समझौता योग्य
समझौता योग्य नहीं
विचारण न्यायालय
कोई भी मजिस्ट्रेट
  • संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
  • जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है

इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।

प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से

नए कानून में

IPC 228ABNS 72

72. Disclosure of identity of victim of certain offences, etc.

दोनों पाठों की तुलना करें →

इस धारा पर आपका निजी नोट

यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

संबंधित कानूनी धाराएँ

इस धारा में हुए बदलाव

कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।

  1. 1983जोड़ा गया

    किस उपबंध से: Act 43 of 1983

    By 2.

  2. 2013प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:

    किस उपबंध से: Act 13 of 2013

    With effect from 3-2-2013.

    पहले यह पाठ था

    offence under section 376, section 376A, section 376B, section 376C or section 376D

  3. 2018प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:

    किस उपबंध से: Act 22 of 2018

    With effect from 21-4-2018.

    पहले यह पाठ था

    section 376A, section 376B, section 376C, section 376D

अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।