धारा 228A · धारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
(1) जो कोई किसी नाम या अन्य बात को, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है, जिसके विरुद्ध धारा 376, धारा 376क, धारा 376ख, धारा 376ग या धारा 376घ के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया पाया गया है, मुद्रित या प्रकाशित करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
(2) उपधारा (1) की किसी भी बात का विस्तार किसी नाम या अन्य बात के ऐसे मुद्रण या प्रकाशन पर, यदि उससे पीड़ित व्यक्ति की पहचान हो सकती है, तब लागू नहीं होता है जब ऐसा मुद्रण या प्रकाशन -
(क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा या उसके लिखित आदेश के अधीन अथवा ऐसे अपराध का अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी द्वारा, जो ऐसे अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए सद्भावपूर्वक कार्य करता है, या उसके लिखित आदेश के अधीन किया जाता है ; या
(ख) पीडित व्यक्ति द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है ; या
(ग) जहां पीड़ित व्यक्ति की मॄत्यु हो चुकी है अथवा वह अवयस्क या विकॄतचित्त है वहां, पीड़ित व्यक्ति के निकट संबंधी द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से, किया जाता है :
परन्तु निकट संबंधी द्वारा कोई भी ऐसा प्राधिकार किसी मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन के अध्यक्ष या सचिव से चाहे उसका जो भी नाम हो, भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया जाएगा ।
स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन” से केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए किसी मान्यताप्राप्त कोई समाज कल्याण संस्था या संगठन अभिप्रेत है ।
(3) जो कोई व्यक्ति उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अपराध की बाबत किसी न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही के संबंध में, उस न्यायालय की पूर्व अनुज्ञा के बिना कोई बात मुद्रित या प्रकाशित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण - किसी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन इस धारा के अर्थ में कोई अपराध नहीं है ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
नए कानून में
IPC 228ABNS 72
72. Disclosure of identity of victim of certain offences, etc.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
संबंधित कानूनी धाराएँ
- संबंधितभा.दं.सं. §376धारा 376 - बलात्संग के लिए दण्ड
- संबंधितभा.दं.सं. §376Aधारा 376A - पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र
- संबंधितभा.दं.सं. §376ABधारा 376AB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दंड
- संबंधितभा.दं.सं. §376Bधारा 376B - लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग
- संबंधितभा.दं.सं. §376Cधारा 376C - जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग
- संबंधितभा.दं.सं. §376Dधारा 376D - अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग
- संबंधितभा.दं.सं. §376DAधारा 376DA - सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
- संबंधितभा.दं.सं. §376DBधारा 376DB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
- संबंधितभा.दं.सं. §376Eधारा 376E - पुनरावृत्ति करने वाले अपराधियों के लिए दंड
इस धारा में हुए बदलाव
कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।
- 1983जोड़ा गया
किस उपबंध से: Act 43 of 1983
By 2.
- 2013प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:
किस उपबंध से: Act 13 of 2013
With effect from 3-2-2013.
पहले यह पाठ था
offence under section 376, section 376A, section 376B, section 376C or section 376D
- 2018प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:
किस उपबंध से: Act 22 of 2018
With effect from 21-4-2018.
पहले यह पाठ था
section 376A, section 376B, section 376C, section 376D
अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।
