PGST Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएं
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
परिभाषाएँ।
- इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-(1)
"कार्रवाई योग्य दावा" का वही अर्थ होगा जो संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 3 में इसे दिया गया है;(2)
"वितरण का पता" से तात्पर्य किसी पंजीकृत व्यक्ति द्वारा ऐसे माल या सेवाओं या दोनों के वितरण के लिए जारी किए गए कर चालान पर अंकित माल या सेवाओं या दोनों के प्राप्तकर्ता के पते से है;(3)
"रिकॉर्ड में दर्ज पता" से तात्पर्य आपूर्तिकर्ता के अभिलेखों में उपलब्ध प्राप्तकर्ता के पते से है;(4)
"निर्णय प्राधिकारी" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत कोई आदेश या निर्णय पारित करने के लिए नियुक्त या अधिकृत किसी प्राधिकारी से है, परन्तु इसमें आयुक्त, पुनरीक्षण प्राधिकारी, अग्रिम निर्णय प्राधिकारी, अग्रिम निर्णय अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी और अपीलीय न्यायाधिकरण शामिल नहीं हैं;(5)
"एजेंट" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है, जिसमें फैक्टर, ब्रोकर, कमीशन एजेंट, अरहतिया, डेलक्रेडर एजेंट, नीलामीकर्ता या कोई अन्य व्यापारिक एजेंट शामिल है, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति या प्राप्ति का व्यवसाय करता है;(6)
"कुल कारोबार" से तात्पर्य सभी कर योग्य आपूर्तियों (उन आवक आपूर्तियों के मूल्य को छोड़कर जिन पर किसी व्यक्ति द्वारा रिवर्स चार्ज आधार पर कर देय है), छूट प्राप्त आपूर्तियों, वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के निर्यात और एक ही स्थायी खाता संख्या वाले व्यक्तियों की अंतर-राज्यीय आपूर्तियों के कुल मूल्य से है, जिसकी गणना अखिल भारतीय आधार पर की जाएगी, लेकिन इसमें केंद्रीय कर, राज्य कर, केंद्र शासित प्रदेश कर, एकीकृत कर और उपकर शामिल नहीं हैं;(7)
"कृषक" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार से है जो भूमि की खेती करता है।(क)
स्वयं के श्रम से, या(ख)
परिवार के श्रम द्वारा, या(ग)
नकद या वस्तु के रूप में भुगतान किए जाने वाले वेतन पर काम करने वाले नौकरों द्वारा या व्यक्तिगत पर्यवेक्षण के अधीन या परिवार के किसी सदस्य के व्यक्तिगत पर्यवेक्षण के अधीन किराए पर लिए गए मजदूरों द्वारा;(8)
"अपीलीय प्राधिकारी" से तात्पर्य धारा 107 में निर्दिष्ट अपीलों की सुनवाई के लिए नियुक्त या अधिकृत प्राधिकारी से है;(9)
"अपीलीय न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 109 में निर्दिष्ट माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण से है;(10)
"नियुक्त दिन" से तात्पर्य उस तिथि से है जिस दिन इस अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे;(11)
"मूल्यांकन" का अर्थ इस अधिनियम के तहत कर देयता का निर्धारण है और इसमें स्व-मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन, अनंतिम मूल्यांकन, सारांश मूल्यांकन और सर्वोत्तम निर्णय मूल्यांकन शामिल है;(12)
"संबद्ध उद्यम" का वही अर्थ होगा जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 92ए में दिया गया है;(13)
"लेखापरीक्षा" का अर्थ है इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत व्यक्ति द्वारा रखे गए या प्रस्तुत किए गए अभिलेखों, प्रतिफलों और अन्य दस्तावेजों की जांच करना, ताकि घोषित कारोबार, भुगतान किए गए कर, दावा की गई वापसी और प्राप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की सत्यता को सत्यापित किया जा सके और इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के साथ उसके अनुपालन का आकलन किया जा सके;(14)
"अधिकृत बैंक" से तात्पर्य केंद्र सरकार द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत देय कर या किसी अन्य राशि को वसूल करने के लिए अधिकृत बैंक या बैंक की शाखा से है;(15)
"अधिकृत प्रतिनिधि" से तात्पर्य धारा 116 के अंतर्गत निर्दिष्ट प्रतिनिधि से है;(16)
"बोर्ड" से तात्पर्य केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के तहत गठित केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड से है;(17)
"व्यवसाय" में शामिल है -(क)
कोई भी व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण, पेशा, व्यवसाय, उद्यम, शर्त या कोई अन्य समान गतिविधि, चाहे वह आर्थिक लाभ के लिए हो या नहीं;(ख)
उप-खंड (क) के संबंध में या उससे संबंधित या उसके सहायक कोई भी गतिविधि या लेनदेन;(ग)
उप-खंड (क) की प्रकृति की कोई भी गतिविधि या लेनदेन, चाहे ऐसे लेनदेन की मात्रा, आवृत्ति, निरंतरता या नियमितता हो या न हो;(घ)
व्यवसाय के प्रारंभ या समापन के संबंध में पूंजीगत वस्तुओं और सेवाओं सहित वस्तुओं की आपूर्ति या अधिग्रहण;(ई)
किसी क्लब, संघ, समाज या ऐसे किसी निकाय द्वारा (सदस्यता शुल्क या किसी अन्य प्रतिफल के बदले) अपने सदस्यों को सुविधाएं या लाभ प्रदान करना;(f)
किसी परिसर में शुल्क लेकर व्यक्तियों का प्रवेश;(जी)
किसी व्यक्ति द्वारा किसी पद के धारक के रूप में प्रदान की गई सेवाएं, जिसे उसने अपने व्यापार, पेशे या व्यवसाय के दौरान या उसे आगे बढ़ाने के लिए स्वीकार किया हो;(h)
किसी रेस क्लब द्वारा टोटलाइज़र या ऐसे क्लब में बुकमेकर को लाइसेंस के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाएं; और(i)
केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा की गई कोई भी गतिविधि या लेनदेन जिसमें वे सार्वजनिक प्राधिकरणों के रूप में संलग्न हैं;(18)
"व्यापारिक क्षेत्र" से तात्पर्य किसी उद्यम के उस विशिष्ट घटक से है जो व्यक्तिगत वस्तुओं या सेवाओं या संबंधित वस्तुओं या सेवाओं के समूह की आपूर्ति में संलग्न है और जिसके जोखिम और प्रतिफल अन्य व्यापारिक क्षेत्रों से भिन्न हैं। स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, यह निर्धारित करने में कि वस्तुएँ या सेवाएँ संबंधित हैं या नहीं, निम्नलिखित कारकों पर विचार किया जाना चाहिए:(क)
वस्तुओं या सेवाओं की प्रकृति;(ख)
उत्पादन प्रक्रियाओं की प्रकृति;(ग)
वस्तुओं या सेवाओं के लिए ग्राहकों का प्रकार या वर्ग;(घ)
वस्तुओं के वितरण या सेवाओं की आपूर्ति के लिए उपयोग की जाने वाली विधियाँ; और(ई)
नियामक वातावरण की प्रकृति (जहां भी लागू हो), जिसमें बैंकिंग, बीमा या सार्वजनिक उपयोगिताएँ शामिल हैं;(19)
"पूंजीगत वस्तुएँ" से तात्पर्य उन वस्तुओं से है, जिनका मूल्य इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने वाले व्यक्ति के खातों की पुस्तकों में पूंजीकृत किया जाता है और जिनका उपयोग व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है या किया जाना अभिप्रेत है;(20)
"आकस्मिक कर योग्य व्यक्ति" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो कर योग्य क्षेत्र में, जहाँ उसका कोई निश्चित व्यवसाय स्थान नहीं है, व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए, चाहे वह मुख्य व्यक्ति हो, एजेंट हो या किसी अन्य क्षमता में, माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति से संबंधित लेनदेन कभी-कभार करता है;(21)
"केंद्रीय कर" से तात्पर्य केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत लगाया गया केंद्रीय माल एवं सेवा कर है;(22)
"उपकर" का वही अर्थ होगा जो वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम में इसे दिया गया है;(23)
"चार्टर्ड अकाउंटेंट" से तात्पर्य चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिनियम, 1949 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में परिभाषित चार्टर्ड अकाउंटेंट से है;(24)
"आयुक्त" से तात्पर्य धारा 3 के अधीन नियुक्त राज्य कर आयुक्त से है तथा इसमें धारा 3 के अधीन नियुक्त प्रधान मुख्य आयुक्त या राज्य कर मुख्य आयुक्त शामिल हैं;(25)
"बोर्ड में आयुक्त" से तात्पर्य केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 168 में निर्दिष्ट आयुक्त से है;(26)
"सामान्य पोर्टल" से तात्पर्य धारा 146 में निर्दिष्ट सामान्य वस्तु एवं सेवा कर इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल से है;(27)
"सामान्य कार्य दिवस" से तात्पर्य ऐसे दिनों से है जो केंद्र सरकार या पुडुचेरी सरकार द्वारा राजपत्रित अवकाश घोषित नहीं किए गए हों;(28)
"कंपनी सचिव" से तात्पर्य कंपनी सचिव अधिनियम, 1980 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (सी) में परिभाषित कंपनी सचिव से है;(29)
"सक्षम प्राधिकारी" से तात्पर्य ऐसे प्राधिकारी से है जिसे सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है;(30)
"मिश्रित आपूर्ति" से तात्पर्य किसी कर योग्य व्यक्ति द्वारा किसी प्राप्तकर्ता को की गई ऐसी आपूर्ति से है जिसमें वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की दो या दो से अधिक कर योग्य आपूर्तियाँ शामिल होती हैं, जो स्वाभाविक रूप से एक साथ बंडल की जाती हैं और व्यवसाय के सामान्य क्रम में एक साथ आपूर्ति की जाती हैं, जिनमें से एक मुख्य आपूर्ति होती है; उदाहरण: - जहाँ माल को पैक किया जाता है और बीमा सहित परिवहन किया जाता है, वहाँ माल, पैकिंग सामग्री, परिवहन और बीमा की आपूर्ति मिश्रित आपूर्ति होती है और माल की आपूर्ति मुख्य आपूर्ति होती है।(31)
वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के संबंध में "प्रतिफल" में निम्नलिखित शामिल हैं -(क)
वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के संबंध में, उसके प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप, या उसे प्रेरित करने के लिए, प्राप्तकर्ता द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, चाहे नकद में या किसी अन्य रूप में किया गया कोई भी भुगतान, लेकिन इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा दी गई कोई भी सब्सिडी शामिल नहीं होगी;(ख)
वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के संबंध में, उसके जवाब में, या उसे प्रेरित करने के लिए किए गए किसी भी कार्य या संयम का मौद्रिक मूल्य, चाहे वह प्राप्तकर्ता द्वारा किया गया हो या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, लेकिन इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा दी गई कोई भी सब्सिडी शामिल नहीं होगी।(32)
"माल की सतत आपूर्ति" से तात्पर्य माल की ऐसी आपूर्ति से है जो किसी अनुबंध के अंतर्गत सतत या आवर्ती आधार पर प्रदान की जाती है, या प्रदान करने के लिए सहमत होती है, चाहे वह तार, केबल, पाइपलाइन या अन्य माध्यम से हो या न हो, और जिसके लिए आपूर्तिकर्ता प्राप्तकर्ता को नियमित या आवधिक आधार पर चालान जारी करता है और इसमें ऐसे माल की आपूर्ति शामिल है जिसे सरकार, ऐसी शर्तों के अधीन, अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है;(33)
"सेवाओं की सतत आपूर्ति" से तात्पर्य सेवाओं की ऐसी आपूर्ति से है जो किसी अनुबंध के अंतर्गत तीन माह से अधिक की अवधि के लिए आवधिक भुगतान दायित्वों के साथ सतत या आवर्ती आधार पर प्रदान की जाती है, या प्रदान करने के लिए सहमत होती है, और इसमें ऐसी सेवाओं की आपूर्ति शामिल है जिन्हें सरकार, ऐसी शर्तों के अधीन, अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है;(34)
"परिवहन" में पोत, विमान और वाहन शामिल हैं;(35)
"लागत लेखाकार" से तात्पर्य लागत लेखाकार से है जैसा कि लागत एवं कार्य लेखाकार अधिनियम, 1959 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (सी) में परिभाषित है;(36)
"परिषद" से तात्पर्य संविधान के अनुच्छेद 279ए के अधीन स्थापित वस्तु एवं सेवा कर परिषद से है;(37)
"क्रेडिट नोट" से तात्पर्य धारा 34 की उपधारा (1) के अंतर्गत पंजीकृत व्यक्ति द्वारा जारी किए गए दस्तावेज से है;(38)
"डेबिट नोट" से तात्पर्य धारा 34 की उपधारा (3) के अंतर्गत पंजीकृत व्यक्ति द्वारा जारी किए गए दस्तावेज से है;(39)
"मानित निर्यात" से तात्पर्य माल की ऐसी आपूर्ति से है जिसे धारा 147 के तहत अधिसूचित किया जा सकता है;(40)
"नामित प्राधिकारी" से तात्पर्य ऐसे प्राधिकारी से है जिसे आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है;(41)
"दस्तावेज़" में किसी भी प्रकार का लिखित या मुद्रित अभिलेख तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 के खंड (टी) में परिभाषित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख शामिल हैं;(42)
भारत में निर्मित और निर्यातित किसी भी वस्तु के संबंध में "ड्रॉबैक" का अर्थ है आयातित इनपुट पर या ऐसे माल के निर्माण में प्रयुक्त घरेलू इनपुट या इनपुट सेवाओं पर प्रभार्य शुल्क, कर या उपकर की छूट;(43)
"इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर" से तात्पर्य धारा 49 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर से है;(44)
"इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य" का अर्थ है डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर डिजिटल उत्पादों सहित वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति;(45)
"इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य संचालक" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य के लिए डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक सुविधा या प्लेटफॉर्म का मालिक, संचालक या प्रबंधक हो;(46)
"इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर" से तात्पर्य धारा 49 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर से है;(47)
"छूट प्राप्त आपूर्ति" से तात्पर्य किसी भी वस्तु या सेवा या दोनों की आपूर्ति से है जिस पर शून्य दर का कर लगता है या जो एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 11 या धारा 6 के तहत कर से पूर्णतः छूट प्राप्त हो सकती है, और इसमें गैर-कर योग्य आपूर्ति शामिल है;(48)
"मौजूदा कानून" से तात्पर्य किसी भी कानून, अधिसूचना, आदेश, नियम या विनियम से है जो वस्तुओं या सेवाओं या दोनों पर शुल्क या कर लगाने और वसूलने से संबंधित हो और जिसे इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले विधानमंडल या किसी प्राधिकरण या व्यक्ति द्वारा पारित या बनाया गया हो, जिसे ऐसा कानून, अधिसूचना, आदेश, नियम या विनियम बनाने की शक्ति प्राप्त हो;(49)
"परिवार" से तात्पर्य है,-(i)
उस व्यक्ति का जीवनसाथी और बच्चे, और(ii)
उस व्यक्ति के माता-पिता, दादा-दादी, भाई और बहन, यदि वे पूरी तरह या मुख्य रूप से उक्त व्यक्ति पर आश्रित हैं;(50)
"स्थिर प्रतिष्ठान" से तात्पर्य एक स्थान (पंजीकृत व्यवसाय स्थान के अलावा) से है जो सेवाओं की आपूर्ति करने या अपनी आवश्यकताओं के लिए सेवाओं को प्राप्त करने और उपयोग करने के लिए मानव और तकनीकी संसाधनों के संदर्भ में पर्याप्त स्थायित्व और उपयुक्त संरचना द्वारा विशेषता रखता है;(51)
"निधि" से तात्पर्य धारा 57 के अधीन स्थापित उपभोक्ता कल्याण निधि से है;(52)
"माल" से तात्पर्य धन और प्रतिभूतियों के अलावा हर प्रकार की चल संपत्ति से है, लेकिन इसमें कार्रवाई योग्य दावा, बढ़ती फसलें, घास और भूमि से जुड़ी हुई या भूमि का हिस्सा बनने वाली चीजें शामिल हैं जिन्हें आपूर्ति से पहले या आपूर्ति के अनुबंध के तहत अलग करने पर सहमति हुई है;(53)
"सरकार" से तात्पर्य पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की सरकार से है;(54)
"वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम" से तात्पर्य वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम, 2017 से है;(55)
"वस्तु एवं सेवा कर व्यवसायी" से तात्पर्य ऐसे किसी व्यक्ति से है जिसे धारा 48 के अंतर्गत ऐसे व्यवसायी के रूप में कार्य करने के लिए अनुमोदित किया गया हो;(56)
"भारत" से तात्पर्य संविधान के अनुच्छेद 1 में निर्दिष्ट भारत के क्षेत्र, उसके प्रादेशिक जल, समुद्र तल और ऐसे जल के नीचे की उपमृदा, महाद्वीपीय शेल्फ, अनन्य आर्थिक क्षेत्र या प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 में निर्दिष्ट किसी अन्य समुद्री क्षेत्र और उसके क्षेत्र और प्रादेशिक जल के ऊपर के हवाई क्षेत्र से है;(57)
"एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम" से तात्पर्य एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 से है;(58)
"एकीकृत कर" से तात्पर्य एकीकृत माल एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत लगाए गए एकीकृत माल एवं सेवा कर से है;(59)
"इनपुट" का अर्थ है पूंजीगत वस्तुओं के अलावा कोई भी ऐसी वस्तु जिसका उपयोग आपूर्तिकर्ता द्वारा व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है या किया जाना है;(60)
"इनपुट सेवा" से तात्पर्य किसी आपूर्तिकर्ता द्वारा व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उपयोग की जाने वाली या उपयोग करने के लिए अभिप्रेत किसी भी सेवा से है;(61)
"इनपुट सेवा वितरक" से तात्पर्य माल या सेवाओं या दोनों के आपूर्तिकर्ता के उस कार्यालय से है जो इनपुट सेवाओं की प्राप्ति के लिए धारा 31 के तहत जारी किए गए कर चालान प्राप्त करता है और उक्त सेवाओं पर भुगतान किए गए केंद्रीय कर, राज्य कर, एकीकृत कर या केंद्र शासित प्रदेश कर के क्रेडिट को कर योग्य माल या सेवाओं या दोनों के आपूर्तिकर्ता को वितरित करने के प्रयोजन से एक निर्धारित दस्तावेज जारी करता है, जिसका स्थायी खाता संख्या उक्त कार्यालय के समान हो;(62)
किसी पंजीकृत व्यक्ति के संबंध में "इनपुट टैक्स" से तात्पर्य उस व्यक्ति को की गई वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर लगाए गए केंद्रीय कर, राज्य कर, एकीकृत कर या केंद्र शासित प्रदेश कर से है और इसमें शामिल हैं -(क)
वस्तुओं के आयात पर लगाया जाने वाला एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर;(ख)
धारा 9 की उपधारा (3) और (4) के प्रावधानों के तहत देय कर;(ग)
एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (3) एवं (4) के प्रावधानों के अंतर्गत देय कर; या(घ)
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (3) एवं (4) के प्रावधानों के अंतर्गत देय कर, परंतु इसमें संयोजन शुल्क के अंतर्गत भुगतान किया गया कर शामिल नहीं है;(63)
"इनपुट टैक्स क्रेडिट" से तात्पर्य इनपुट टैक्स क्रेडिट से है;(64)
"वस्तुओं की अंतरराज्यीय आपूर्ति" का वही अर्थ होगा जो एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 8 में दिया गया है;(65)
"सेवाओं की अंतर-राज्यीय आपूर्ति" का वही अर्थ होगा जो एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 8 में दिया गया है;(66)
"चालान" या "कर चालान" से तात्पर्य धारा 31 में निर्दिष्ट कर चालान से है;(67)
किसी व्यक्ति के संबंध में "आवक आपूर्ति" का अर्थ माल या सेवाओं या दोनों की प्राप्ति होगी, चाहे खरीद, अधिग्रहण या किसी अन्य माध्यम से, प्रतिफल के साथ या बिना प्रतिफल के;(68)
"जॉब वर्क" से तात्पर्य किसी अन्य पंजीकृत व्यक्ति से संबंधित माल पर किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी भी उपचार या प्रक्रिया से है और "जॉब वर्कर" अभिव्यक्ति को तदनुसार समझा जाएगा;(69)
"स्थानीय प्राधिकरण" से तात्पर्य है -(क)
संविधान के अनुच्छेद 243 के खंड (घ) में परिभाषित "पंचायत";(ख)
संविधान के अनुच्छेद 243पी के खंड (ई) में परिभाषित "नगरपालिका";(ग)
नगर समिति, जिला परिषद, जिला बोर्ड और कोई अन्य प्राधिकरण जो विधिवत रूप से नगर निगम या स्थानीय निधि के नियंत्रण या प्रबंधन का हकदार है या केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा उसे सौंपा गया है;(घ)
छावनी अधिनियम, 2006 की धारा 3 में परिभाषित छावनी बोर्ड;(ई)
संविधान की छठी अनुसूची के अधीन गठित क्षेत्रीय परिषद या जिला परिषद;(f)
संविधान के अनुच्छेद 371 के अधीन गठित विकास बोर्ड; या(जी)
संविधान के अनुच्छेद 371ए के अधीन गठित क्षेत्रीय परिषद;(70)
"सेवा प्राप्तकर्ता का स्थान" से तात्पर्य है, -(क)
जहां किसी व्यवसाय स्थल पर आपूर्ति प्राप्त होती है जिसके लिए पंजीकरण प्राप्त किया गया है, ऐसे व्यवसाय स्थल का स्थान;(ख)
जहां पंजीकरण प्राप्त किए गए व्यवसाय स्थल के अलावा किसी अन्य स्थान पर आपूर्ति प्राप्त होती है (अन्यत्र कोई स्थायी प्रतिष्ठान), तो ऐसे स्थायी प्रतिष्ठान का स्थान;(ग)
जहां एक से अधिक प्रतिष्ठानों पर आपूर्ति प्राप्त होती है, चाहे वह व्यवसाय स्थल हो या स्थायी प्रतिष्ठान, आपूर्ति की प्राप्ति से सबसे सीधे तौर पर संबंधित प्रतिष्ठान का स्थान; और(घ)
ऐसे स्थानों के अभाव में, प्राप्तकर्ता के सामान्य निवास स्थान का पता;(71)
"सेवाओं के आपूर्तिकर्ता का स्थान" से तात्पर्य है,-(क)
जहां किसी व्यवसाय स्थल से आपूर्ति की जाती है जिसके लिए पंजीकरण प्राप्त किया गया है, ऐसे व्यवसाय स्थल का स्थान;(ख)
जहां पंजीकरण प्राप्त किए गए व्यवसाय स्थल के अलावा किसी अन्य स्थान से आपूर्ति की जाती है (अन्यत्र स्थित एक स्थायी प्रतिष्ठान), तो ऐसे स्थायी प्रतिष्ठान का स्थान;(ग)
जहां आपूर्ति एक से अधिक प्रतिष्ठानों से की जाती है, चाहे वह व्यवसाय स्थल हो या स्थायी प्रतिष्ठान, आपूर्ति के प्रावधानों से सबसे सीधे तौर पर संबंधित प्रतिष्ठान का स्थान; और(घ)
ऐसे स्थानों के अभाव में, आपूर्तिकर्ता के सामान्य निवास स्थान का पता;(72)
"विनिर्माण" का अर्थ है कच्चे माल या इनपुट का किसी भी तरह से प्रसंस्करण जिसके परिणामस्वरूप एक नए उत्पाद का उद्भव होता है जिसका एक विशिष्ट नाम, चरित्र और उपयोग होता है और "विनिर्माता" शब्द को तदनुसार समझा जाएगा;(73)
"बाजार मूल्य" से तात्पर्य उस पूरी राशि से है जो आपूर्ति के प्राप्तकर्ता को समान प्रकार और गुणवत्ता की वस्तुओं या सेवाओं या दोनों को लगभग एक ही समय और एक ही वाणिज्यिक स्तर पर प्राप्त करने के लिए भुगतान करना आवश्यक है, जहां प्राप्तकर्ता और आपूर्तिकर्ता संबंधित नहीं हैं;(74)
"मिश्रित आपूर्ति" से तात्पर्य किसी कर योग्य व्यक्ति द्वारा एक ही कीमत पर एक साथ की गई वस्तुओं या सेवाओं की दो या दो से अधिक व्यक्तिगत आपूर्तियों, या उनके किसी संयोजन से है, जहाँ ऐसी आपूर्ति समग्र आपूर्ति नहीं होती है। उदाहरण: - डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, मिठाई, चॉकलेट, केक, सूखे मेवे, वातित पेय और फलों के रस से युक्त एक पैकेज की आपूर्ति, जब एक ही कीमत पर की जाती है, तो यह एक मिश्रित आपूर्ति है। इनमें से प्रत्येक वस्तु की आपूर्ति अलग से की जा सकती है और यह किसी अन्य पर निर्भर नहीं है। यदि इन वस्तुओं की आपूर्ति अलग-अलग की जाती है तो यह मिश्रित आपूर्ति नहीं होगी;(75)
"मुद्रा" से तात्पर्य भारतीय वैधानिक निविदा या किसी विदेशी मुद्रा, चेक, वचन पत्र, विनिमय बिल, साख पत्र, मसौदा, भुगतान आदेश, यात्री चेक, मनी ऑर्डर, डाक या इलेक्ट्रॉनिक प्रेषण या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य साधन से है, जब इसका उपयोग किसी दायित्व को निपटाने या किसी अन्य मूल्यवर्ग की भारतीय वैधानिक निविदा के साथ विनिमय करने के लिए प्रतिफल के रूप में किया जाता है, लेकिन इसमें ऐसी कोई मुद्रा शामिल नहीं होगी जो उसके मुद्राशास्त्रीय मूल्य के लिए रखी गई हो;(76)
"मोटर वाहन" का वही अर्थ होगा जो मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 2 के खंड (28) में दिया गया है;(77)
"गैर-निवासी कर योग्य व्यक्ति" से तात्पर्य ऐसे किसी व्यक्ति से है जो कभी-कभार माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति से संबंधित लेनदेन करता है, चाहे वह मुख्य व्यक्ति हो या एजेंट हो या किसी अन्य क्षमता में हो, लेकिन जिसका भारत में कोई निश्चित व्यवसाय स्थान या निवास स्थान नहीं है;(78)
"गैर-कर योग्य आपूर्ति" से तात्पर्य वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की ऐसी आपूर्ति से है जिस पर इस अधिनियम या एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के तहत कर नहीं लगाया जा सकता है;(79)
"गैर-कर योग्य क्षेत्र" से तात्पर्य उस क्षेत्र से है जो कर योग्य क्षेत्र के बाहर स्थित है;(80)
"अधिसूचना" का अर्थ आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना है तथा 'अधिसूचित करना' और 'अधिसूचित किया गया' शब्दों का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;(81)
"अन्य क्षेत्र" में उन क्षेत्रों के अतिरिक्त क्षेत्र शामिल हैं जो किसी राज्य में शामिल नहीं हैं तथा वे क्षेत्र जिनका उल्लेख खंड (114) के उपखंड (क) से (ङ) में किया गया है;(82)
किसी कर योग्य व्यक्ति के संबंध में "आउटपुट कर" का अर्थ है उसके द्वारा या उसके एजेंट द्वारा की गई वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की कर योग्य आपूर्ति पर इस अधिनियम के तहत प्रभार्य कर, लेकिन इसमें रिवर्स चार्ज आधार पर उसके द्वारा देय कर शामिल नहीं है;(83)
कर योग्य व्यक्ति के संबंध में "बाहरी आपूर्ति" का अर्थ है माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति, चाहे बिक्री, हस्तांतरण, अदला-बदली, विनिमय, लाइसेंस, किराया, पट्टा या निपटान या किसी अन्य तरीके से, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए की गई हो या करने पर सहमति हुई हो;(84)
"व्यक्ति" में शामिल है -(क)
एक व्यक्ति;(ख)
एक हिंदू अविभाजित परिवार;(सी)
एक कंपनी;(घ)
एक फर्म;(ई)
एक सीमित देयता भागीदारी;(f)
भारत में या भारत के बाहर निगमित हो या न हो, व्यक्तियों का कोई संघ या व्यक्तियों का कोई निकाय;(जी)
किसी केंद्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोई निगम या कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के खंड (45) में परिभाषित कोई सरकारी कंपनी;(h)
भारत के बाहर किसी देश के कानूनों द्वारा या उसके अधीन निगमित कोई निगमित निकाय;(i)
सहकारी समितियों से संबंधित किसी कानून के तहत पंजीकृत सहकारी समिति;(j)
स्थानीय प्राधिकरण;(k)
केंद्र सरकार या राज्य सरकार;(एल)
सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत परिभाषित सोसायटी;(m)
विश्वास; और(n)
प्रत्येक कृत्रिम कानूनी व्यक्ति, जो उपरोक्त में से किसी के अंतर्गत नहीं आता;(85)
"व्यापार स्थल" में शामिल है -(क)
वह स्थान जहाँ से सामान्यतः व्यवसाय संचालित होता है, और इसमें गोदाम, भंडारगृह या कोई अन्य स्थान शामिल है जहाँ कर योग्य व्यक्ति अपना माल रखता है, माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति करता है या प्राप्त करता है; या(ख)
वह स्थान जहाँ कर योग्य व्यक्ति अपने लेखा-पुस्तकों का रखरखाव करता है; या(ग)
ऐसा स्थान जहाँ कोई कर योग्य व्यक्ति किसी एजेंट के माध्यम से व्यवसाय में संलग्न हो, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए;(86)
"आपूर्ति का स्थान" से तात्पर्य एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अध्याय V में निर्दिष्ट आपूर्ति के स्थान से है;(87)
"प्रधान" "निर्धारित" का अर्थ है परिषद की अनुशंसाओं पर इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित;(88)
"प्रधान" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसकी ओर से कोई एजेंट माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति या प्राप्ति का व्यवसाय करता है;(89)
"प्रधान व्यापार स्थल" से तात्पर्य पंजीकरण प्रमाण पत्र में प्रधान व्यापार स्थल के रूप में निर्दिष्ट व्यापार स्थल से है;(90)
"प्रधान आपूर्ति" से तात्पर्य वस्तुओं या सेवाओं की उस आपूर्ति से है जो एक समग्र आपूर्ति का प्रमुख तत्व है और जिसके लिए उस समग्र आपूर्ति का हिस्सा बनने वाली कोई अन्य आपूर्ति सहायक है;(91)
इस अधिनियम के अधीन निष्पादित किए जाने वाले किसी भी कार्य के संबंध में "उचित अधिकारी" से तात्पर्य आयुक्त या राज्य कर के उस अधिकारी से है जिसे आयुक्त द्वारा वह कार्य सौंपा गया है;(92)
"तिमाही" से तात्पर्य एक ऐसी अवधि से है जिसमें लगातार तीन कैलेंडर माह शामिल होते हैं, जो कैलेंडर वर्ष के मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर के अंतिम दिन समाप्त होते हैं;(93)
माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति का "प्राप्तकर्ता" से तात्पर्य है -(क)
जहां माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के लिए प्रतिफल देय हो, वहां वह व्यक्ति जो उस प्रतिफल का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है;(ख)
जहां माल की आपूर्ति के लिए कोई प्रतिफल देय नहीं है, वहां वह व्यक्ति जिसे माल वितरित किया जाता है या उपलब्ध कराया जाता है, या जिसे माल का कब्ज़ा या उपयोग दिया जाता है या उपलब्ध कराया जाता है; और(ग)
जहां किसी सेवा की आपूर्ति के लिए कोई प्रतिफल देय नहीं है, वहां वह व्यक्ति जिसे सेवा प्रदान की जाती है,(94)
"पंजीकृत व्यक्ति" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो धारा 25 के अंतर्गत पंजीकृत है, लेकिन इसमें विशिष्ट पहचान संख्या वाला व्यक्ति शामिल नहीं है।(95)
"विनियम" से तात्पर्य परिषद की अनुशंसाओं पर इस अधिनियम के अंतर्गत सरकार द्वारा बनाए गए विनियमों से है;(96)
माल के संबंध में "हटाना" का अर्थ है -(क)
माल के आपूर्तिकर्ता द्वारा या ऐसे आपूर्तिकर्ता की ओर से कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा माल की डिलीवरी के लिए माल का प्रेषण; या(ख)
माल प्राप्तकर्ता द्वारा या ऐसे प्राप्तकर्ता की ओर से कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा माल का संग्रह;(97)
"प्रतिसूचना" से तात्पर्य इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित या अन्यथा प्रस्तुत की जाने वाली किसी भी प्रतिसूचना से है;(98)
"रिवर्स चार्ज" का अर्थ है माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के प्राप्तकर्ता द्वारा कर का भुगतान करने का दायित्व, ऐसे माल या सेवाओं या दोनों के आपूर्तिकर्ता के बजाय, धारा 9 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के तहत, या एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के तहत;(99)
"पुनरीक्षण प्राधिकारी" से तात्पर्य धारा 108 में निर्दिष्ट निर्णय या आदेशों के पुनरीक्षण के लिए नियुक्त या अधिकृत प्राधिकारी से है;(100)
"अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है;(101)
"प्रतिभूतियों" का वही अर्थ होगा जो प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 की धारा 2 के खंड (एच) में दिया गया है;(102)
"सेवाएँ" का अर्थ वस्तुओं, धन और प्रतिभूतियों के अलावा कुछ भी है, लेकिन इसमें धन के उपयोग या नकद या किसी अन्य माध्यम से एक रूप, मुद्रा या मूल्यवर्ग से दूसरे रूप, मुद्रा या मूल्यवर्ग में उसके रूपांतरण से संबंधित गतिविधियाँ शामिल हैं, जिसके लिए अलग से प्रतिफल लिया जाता है;(103)
"राज्य" से तात्पर्य पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेश से है;(104)
"राज्य कर" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत लगाया गया कर है;(105)
किसी भी सामान या सेवाओं या दोनों के संबंध में "आपूर्तिकर्ता" से तात्पर्य उक्त सामान या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति से होगा तथा इसमें आपूर्ति किए गए सामान या सेवाओं या दोनों के संबंध में ऐसे आपूर्तिकर्ता की ओर से ऐसे एजेंट के रूप में कार्य करने वाला एजेंट भी शामिल होगा;(106)
"दूरसंचार सेवा" "कर अवधि" से तात्पर्य उस अवधि से है जिसके लिए रिटर्न प्रस्तुत करना आवश्यक है;(107)
"कर योग्य व्यक्ति" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो धारा 22 या धारा 24 के अंतर्गत पंजीकृत है या पंजीकृत होने के लिए उत्तरदायी है;(108)
"कर योग्य आपूर्ति" से तात्पर्य वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति से है जिस पर इस अधिनियम के तहत कर लगाया जा सकता है;(109)
“कर योग्य क्षेत्र” से तात्पर्य उस क्षेत्र से है जिस पर इस अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं;(110)
"दूरसंचार सेवा" से तात्पर्य किसी भी प्रकार की सेवा (जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मेल, वॉइस मेल, डेटा सेवाएं, ऑडियो टेक्स्ट सेवाएं, वीडियो टेक्स्ट सेवाएं, रेडियो पेजिंग और सेलुलर मोबाइल टेलीफोन सेवाएं शामिल हैं) से है, जो उपयोगकर्ताओं को किसी भी प्रकार के संकेतों, सिग्नलों, लेखन, छवियों और ध्वनियों या किसी भी प्रकार की जानकारी के प्रसारण या प्राप्ति के माध्यम से, तार, रेडियो, दृश्य या अन्य विद्युत चुम्बकीय साधनों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है;(111)
"केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम" से तात्पर्य केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 से है;(112)
"राज्य में कारोबार" या "केंद्र शासित प्रदेश में कारोबार" से तात्पर्य किसी कर योग्य व्यक्ति द्वारा किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भीतर की गई सभी कर योग्य आपूर्तियों (उन आवक आपूर्तियों के मूल्य को छोड़कर जिन पर किसी व्यक्ति द्वारा रिवर्स चार्ज आधार पर कर देय है) और छूट प्राप्त आपूर्तियों, वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के निर्यात और उक्त कर योग्य व्यक्ति द्वारा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से की गई वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की अंतर-राज्यीय आपूर्तियों के कुल मूल्य से है, लेकिन इसमें केंद्रीय कर, राज्य कर, केंद्र शासित प्रदेश कर, एकीकृत कर और उपकर शामिल नहीं हैं;(113)
“सामान्य निवास स्थान” से तात्पर्य है -(क)
किसी व्यक्ति के मामले में, वह स्थान जहाँ वह सामान्यतः निवास करता है;(ख)
अन्य मामलों में, वह स्थान जहाँ व्यक्ति निगमित है या अन्यथा कानूनी रूप से गठित है;(114)
"केंद्र शासित प्रदेश" से तात्पर्य निम्नलिखित क्षेत्रों से है, -(क)
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह;(ख)
लक्षद्वीप;(सी)
दादरा और नगर हवेली;(घ)
दमन और दीव;(ई)
चंडीगढ़; और(f)
अन्य क्षेत्र;(115)
"केंद्र शासित प्रदेश कर" से तात्पर्य केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत लगाए गए केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर से है;(116)
"केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम" से तात्पर्य केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 से है;(117)
"वैध रिटर्न" से तात्पर्य धारा 39 की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रस्तुत किए गए रिटर्न से है जिस पर स्व-निर्धारित कर का पूर्ण भुगतान किया गया है;(118)
"वाउचर" से तात्पर्य एक ऐसे साधन से है जिसमें माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के लिए प्रतिफल या आंशिक प्रतिफल के रूप में इसे स्वीकार करने का दायित्व होता है और जहां आपूर्ति की जाने वाली वस्तुएं या सेवाएं या दोनों या उनके संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान या तो स्वयं साधन पर या संबंधित दस्तावेज़ में, जिसमें ऐसे साधन के उपयोग की शर्तें और नियम शामिल हैं, इंगित की जाती हैं;(119)
"कार्य अनुबंध" से तात्पर्य किसी अचल संपत्ति के निर्माण, निर्माण, निर्माण, पूर्णता, स्थापना, साज-सज्जा, सुधार, संशोधन, मरम्मत, रखरखाव, नवीनीकरण, परिवर्तन या चालू करने के लिए किए गए अनुबंध से है, जिसमें माल में संपत्ति का हस्तांतरण (चाहे माल के रूप में हो या किसी अन्य रूप में) ऐसे अनुबंध के निष्पादन में शामिल होता है;(120)
इस अधिनियम में प्रयुक्त और परिभाषित न किए गए शब्द और अभिव्यक्तियाँ, परन्तु एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम और वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उन अधिनियमों में उन्हें दिया गया है।इस धारा पर आपका निजी नोट
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