SC/ST Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "अत्याचार" से तात्पर्य धारा 3 के तहत दंडनीय अपराध से है;
(ख) "संहिता" से तात्पर्य दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) से है;
1 [(बीबी) "आश्रित" से तात्पर्य पीड़ित के पति/पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई और बहन से है, जो उसके भरण-पोषण और रखरखाव के लिए पूरी तरह या मुख्य रूप से ऐसे पीड़ित पर निर्भर हैं;
(b) "आर्थिक बहिष्कार" का अर्थ है--
(i) किसी अन्य व्यक्ति के साथ लेन-देन करने, काम के बदले काम करने या व्यापार करने से इनकार करना; या
(ii) सेवाओं तक पहुंच सहित अवसरों से वंचित करना या प्रतिफल के बदले सेवा प्रदान करने के संविदात्मक अवसरों से वंचित करना; या
(iii) सामान्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं में जिन शर्तों पर कार्य किया जाता है, उन शर्तों पर कोई कार्य करने से इनकार करना; या
(iv) किसी अन्य व्यक्ति के साथ बनाए जाने वाले व्यावसायिक या व्यापारिक संबंधों से परहेज करना;
(बीडी) "विशेष न्यायालय" से तात्पर्य धारा 14 की उपधारा (1) के तहत स्थापित विशेष न्यायालय से है, जो विशेष रूप से इस अधिनियम के अंतर्गत अपराधों की सुनवाई करने के लिए स्थापित किया गया है;
(हो) "वन अधिकार" का वही अर्थ होगा जो अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) की धारा 3 की उपधारा (1) में दिया गया है;
(बीएफ) "मैनुअल स्कैवेंजर" का वही अर्थ होगा जो मैनुअल स्कैवेंजर के रूप में रोजगार निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (25 ऑफ 2013) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (जी) में दिया गया है;
(बीजी) "लोक सेवक" से तात्पर्य भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 21 के तहत परिभाषित लोक सेवक से है, साथ ही किसी अन्य कानून के तहत लोक सेवक माने जाने वाले किसी अन्य व्यक्ति से है, और इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन अपनी आधिकारिक क्षमता में कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल है;]
(ग) "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति" का वही अर्थ होगा जो संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (24) और खंड (25) के अधीन उन्हें दिया गया है;
(घ) "विशेष न्यायालय" से तात्पर्य धारा 14 में विशेष न्यायालय के रूप में निर्दिष्ट सत्र न्यायालय से है;
(ई) "विशेष लोक अभियोजक" से तात्पर्य एक लोक अभियोजक से है जिसे विशेष लोक अभियोजक के रूप में निर्दिष्ट किया गया है या धारा 15 में निर्दिष्ट अधिवक्ता से है;
2 [(प्रत्येक) "अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है;
(ईबी) "सामाजिक बहिष्कार" का अर्थ है किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को कोई प्रथागत सेवा प्रदान करने या उससे कोई सेवा प्राप्त करने से रोकना या उन सामाजिक संबंधों से परहेज करना जो कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ बनाए रखता है या उसे दूसरों से अलग-थलग करना;
(ईसी) "पीड़ित" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (सी) के अंतर्गत "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति" की परिभाषा में आता है, और जिसने इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध के घटित होने के परिणामस्वरूप शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक या आर्थिक हानि या अपनी संपत्ति को हानि झेली है या अनुभव की है, और इसमें उसके रिश्तेदार, कानूनी अभिभावक और कानूनी वारिस शामिल हैं;
(संपादक) "गवाह" से तात्पर्य ऐसे किसी भी व्यक्ति से है जो तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित हो, या जिसके पास इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध से संबंधित किसी अपराध की जांच, पूछताछ या मुकदमे के उद्देश्य से आवश्यक कोई सूचना हो, या जिसे ऐसे मामले की जांच, पूछताछ या मुकदमे के दौरान सूचना देने, बयान देने या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो या हो सकती है, और इसमें ऐसे अपराध का पीड़ित भी शामिल है;]
3 [(f) इस अधिनियम में प्रयुक्त, लेकिन अपरिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, तथा भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860), भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974), जैसा भी मामला हो, में परिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, उन अधिनियमों में क्रमशः उन्हें दिए गए अर्थों के अनुरूप मानी जाएँगी।]
(2) इस अधिनियम में किसी अधिनियम या उसके किसी प्रावधान का कोई संदर्भ, ऐसे क्षेत्र के संबंध में जिसमें ऐसा अधिनियम या ऐसा प्रावधान लागू नहीं है, उस क्षेत्र में लागू संबंधित कानून, यदि कोई हो, के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
(क) "अत्याचार" से तात्पर्य धारा 3 के तहत दंडनीय अपराध से है;
(ख) "संहिता" से तात्पर्य दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) से है;
1 [(बीबी) "आश्रित" से तात्पर्य पीड़ित के पति/पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई और बहन से है, जो उसके भरण-पोषण और रखरखाव के लिए पूरी तरह या मुख्य रूप से ऐसे पीड़ित पर निर्भर हैं;
(b) "आर्थिक बहिष्कार" का अर्थ है--
(i) किसी अन्य व्यक्ति के साथ लेन-देन करने, काम के बदले काम करने या व्यापार करने से इनकार करना; या
(ii) सेवाओं तक पहुंच सहित अवसरों से वंचित करना या प्रतिफल के बदले सेवा प्रदान करने के संविदात्मक अवसरों से वंचित करना; या
(iii) सामान्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं में जिन शर्तों पर कार्य किया जाता है, उन शर्तों पर कोई कार्य करने से इनकार करना; या
(iv) किसी अन्य व्यक्ति के साथ बनाए जाने वाले व्यावसायिक या व्यापारिक संबंधों से परहेज करना;
(बीडी) "विशेष न्यायालय" से तात्पर्य धारा 14 की उपधारा (1) के तहत स्थापित विशेष न्यायालय से है, जो विशेष रूप से इस अधिनियम के अंतर्गत अपराधों की सुनवाई करने के लिए स्थापित किया गया है;
(हो) "वन अधिकार" का वही अर्थ होगा जो अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) की धारा 3 की उपधारा (1) में दिया गया है;
(बीएफ) "मैनुअल स्कैवेंजर" का वही अर्थ होगा जो मैनुअल स्कैवेंजर के रूप में रोजगार निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (25 ऑफ 2013) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (जी) में दिया गया है;
(बीजी) "लोक सेवक" से तात्पर्य भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 21 के तहत परिभाषित लोक सेवक से है, साथ ही किसी अन्य कानून के तहत लोक सेवक माने जाने वाले किसी अन्य व्यक्ति से है, और इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन अपनी आधिकारिक क्षमता में कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल है;]
(ग) "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति" का वही अर्थ होगा जो संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (24) और खंड (25) के अधीन उन्हें दिया गया है;
(घ) "विशेष न्यायालय" से तात्पर्य धारा 14 में विशेष न्यायालय के रूप में निर्दिष्ट सत्र न्यायालय से है;
(ई) "विशेष लोक अभियोजक" से तात्पर्य एक लोक अभियोजक से है जिसे विशेष लोक अभियोजक के रूप में निर्दिष्ट किया गया है या धारा 15 में निर्दिष्ट अधिवक्ता से है;
2 [(प्रत्येक) "अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है;
(ईबी) "सामाजिक बहिष्कार" का अर्थ है किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को कोई प्रथागत सेवा प्रदान करने या उससे कोई सेवा प्राप्त करने से रोकना या उन सामाजिक संबंधों से परहेज करना जो कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ बनाए रखता है या उसे दूसरों से अलग-थलग करना;
(ईसी) "पीड़ित" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (सी) के अंतर्गत "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति" की परिभाषा में आता है, और जिसने इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध के घटित होने के परिणामस्वरूप शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक या आर्थिक हानि या अपनी संपत्ति को हानि झेली है या अनुभव की है, और इसमें उसके रिश्तेदार, कानूनी अभिभावक और कानूनी वारिस शामिल हैं;
(संपादक) "गवाह" से तात्पर्य ऐसे किसी भी व्यक्ति से है जो तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित हो, या जिसके पास इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध से संबंधित किसी अपराध की जांच, पूछताछ या मुकदमे के उद्देश्य से आवश्यक कोई सूचना हो, या जिसे ऐसे मामले की जांच, पूछताछ या मुकदमे के दौरान सूचना देने, बयान देने या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो या हो सकती है, और इसमें ऐसे अपराध का पीड़ित भी शामिल है;]
3 [(f) इस अधिनियम में प्रयुक्त, लेकिन अपरिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, तथा भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860), भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974), जैसा भी मामला हो, में परिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, उन अधिनियमों में क्रमशः उन्हें दिए गए अर्थों के अनुरूप मानी जाएँगी।]
(2) इस अधिनियम में किसी अधिनियम या उसके किसी प्रावधान का कोई संदर्भ, ऐसे क्षेत्र के संबंध में जिसमें ऐसा अधिनियम या ऐसा प्रावधान लागू नहीं है, उस क्षेत्र में लागू संबंधित कानून, यदि कोई हो, के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
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