SC/ST Act 4अध्याय II · Offences of Atrocities
धारा 4 · कर्तव्यों की उपेक्षा करने पर दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [4. कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड। --(1) जो कोई लोक सेवक होते हुए, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य न होते हुए, इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अधीन अपने द्वारा किए जाने वाले कर्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा करता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि छह माह से कम नहीं होगी, लेकिन एक वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट लोक सेवक के कर्तव्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे--
(क) मुखबिर के हस्ताक्षर लेने से पहले, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा मौखिक रूप से दी गई और लिखित रूप में दर्ज की गई सूचना को मुखबिर को पढ़कर सुनाना;
(ख) इस अधिनियम और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना तथा इसे इस अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के तहत पंजीकृत करना;
(ग) इस प्रकार दर्ज की गई सूचना की एक प्रति सूचना देने वाले को तुरंत उपलब्ध कराना;
(घ) पीड़ितों या गवाहों के बयान दर्ज करना;
(ई) जांच करना तथा विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय में साठ दिनों की अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना तथा यदि कोई विलंब हो तो उसका लिखित स्पष्टीकरण देना;
(f) किसी भी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को सही ढंग से तैयार करना, प्रारूपित करना और अनुवाद करना;
(जी) इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में निर्दिष्ट किसी अन्य कर्तव्य का पालन करना:
बशर्ते कि इस संबंध में लोक सेवक के विरुद्ध आरोप प्रशासनिक जांच की सिफारिश पर ही दर्ज किए जाएंगे।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट कर्तव्य के उल्लंघन के संबंध में किसी लोक सेवक द्वारा संज्ञान विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय द्वारा लिया जाएगा और वह ऐसे लोक सेवक के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही के लिए निर्देश देगा।]
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट लोक सेवक के कर्तव्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे--
(क) मुखबिर के हस्ताक्षर लेने से पहले, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा मौखिक रूप से दी गई और लिखित रूप में दर्ज की गई सूचना को मुखबिर को पढ़कर सुनाना;
(ख) इस अधिनियम और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना तथा इसे इस अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के तहत पंजीकृत करना;
(ग) इस प्रकार दर्ज की गई सूचना की एक प्रति सूचना देने वाले को तुरंत उपलब्ध कराना;
(घ) पीड़ितों या गवाहों के बयान दर्ज करना;
(ई) जांच करना तथा विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय में साठ दिनों की अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना तथा यदि कोई विलंब हो तो उसका लिखित स्पष्टीकरण देना;
(f) किसी भी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को सही ढंग से तैयार करना, प्रारूपित करना और अनुवाद करना;
(जी) इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में निर्दिष्ट किसी अन्य कर्तव्य का पालन करना:
बशर्ते कि इस संबंध में लोक सेवक के विरुद्ध आरोप प्रशासनिक जांच की सिफारिश पर ही दर्ज किए जाएंगे।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट कर्तव्य के उल्लंघन के संबंध में किसी लोक सेवक द्वारा संज्ञान विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय द्वारा लिया जाएगा और वह ऐसे लोक सेवक के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही के लिए निर्देश देगा।]
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 1 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 6 माह
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

