PBPT Act 26अध्याय IV · Attachment, Adjudication and Confiscation
धारा 26 · बेनामी संपत्ति का न्यायनिर्णय।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 24 की उपधारा ( 5 ) के तहत संदर्भ प्राप्त होने पर, निर्णय प्राधिकारी निम्नलिखित व्यक्तियों को, अर्थात्, उसमें निर्दिष्ट तिथि को, ऐसे दस्तावेज, विवरण या साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी करेगा, जिन्हें आवश्यक समझा जाए:--
(क) उसमें बेनामीदार के रूप में निर्दिष्ट व्यक्ति;
(ख) कोई भी व्यक्ति जिसे उसमें लाभकारी स्वामी के रूप में संदर्भित किया गया हो या जिसकी पहचान इस प्रकार की गई हो;
(ग) कोई भी हितधारक पक्ष, जिसमें बैंकिंग कंपनी भी शामिल है;
(घ) कोई भी व्यक्ति जिसने संपत्ति के संबंध में दावा किया है:
बशर्ते कि निर्णयकर्ता प्राधिकरण संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर नोटिस जारी करेगा:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि नोटिस में उस व्यक्ति को, जिसे नोटिस जारी किया गया है, मांगी गई जानकारी प्रदान करने के लिए कम से कम तीस दिनों की अवधि दी जाएगी।
(2) जहां संपत्ति एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से धारित है, वहां न्यायनिर्णायक प्राधिकारी संपत्ति के सभी धारकों को नोटिस देने का हर संभव प्रयास करेगा:
बशर्ते कि यदि नोटिस किसी एक व्यक्ति को दिया जाता है, तो नोटिस की तामील इस आधार पर अमान्य नहीं होगी कि उक्त नोटिस संपत्ति के सभी धारकों को नहीं दिया गया था।
(3) निर्णयकर्ता प्राधिकारी, इसके बाद--
(क) उपधारा ( 1 ) के तहत जारी नोटिस के जवाब में, यदि कोई हो, तो उस पर विचार करना;
(ख) ऐसी पूछताछ करना या करवाना तथा ऐसी रिपोर्ट या साक्ष्य मंगवाना जैसा वह उचित समझे; और
(ग) सभी प्रासंगिक सामग्रियों को ध्यान में रखते हुए,
उसमें नामित बेनामीदार , आरंभिक अधिकारी और संपत्ति के स्वामी होने का दावा करने वाले किसी अन्य व्यक्ति को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए, और उसके बाद आदेश पारित किया जाए।
(i) संपत्ति को बेनामी संपत्ति न मानते हुए कुर्की आदेश को रद्द करना; या
(ii) संपत्ति को बेनामी संपत्ति मानते हुए और अन्य सभी मामलों में कुर्की आदेश की पुष्टि करना।
(4) जहाँ निर्णयकर्ता प्राधिकारी संतुष्ट है कि जिन संपत्तियों के संबंध में उसे संदर्भित किया गया है, उनमें से कुछ भाग बेनामी संपत्ति है, लेकिन वह ऐसे भाग की विशेष रूप से पहचान करने में सक्षम नहीं है, तो वह अपने सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार यह निष्कर्ष दर्ज करेगा कि संपत्तियों का कौन सा भाग बेनामी है।
(5) जहाँ अपने समक्ष कार्यवाही के दौरान, निर्णय प्राधिकारी को यह विश्वास करने का कारण हो कि आरंभिक अधिकारी द्वारा उसे संदर्भित संपत्ति के अतिरिक्त कोई संपत्ति बेनामी संपत्ति है, तो वह संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क करेगा और धारा 24 की उपधारा ( 5 ) के तहत संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से संपत्ति को उसे संदर्भित संपत्ति माना जाएगा।
(6) निर्णय प्राधिकारी कार्यवाही के किसी भी चरण में, किसी पक्ष के आवेदन पर या स्वतः संज्ञान से , अनुचित रूप से शामिल किए गए किसी पक्ष का नाम हटा सकता है या किसी ऐसे व्यक्ति का नाम जोड़ सकता है जिसकी उपस्थिति निर्णय प्राधिकारी के समक्ष आवश्यक हो ताकि वह संदर्भ में शामिल सभी प्रश्नों पर निर्णय ले सके और उनका निपटारा कर सके।
(7) उपधारा ( 3 ) के तहत कोई आदेश उस महीने के अंत से एक वर्ष की समाप्ति के बाद पारित नहीं किया जाएगा जिसमें धारा 24 की उपधारा ( 5 ) के तहत संदर्भ प्राप्त हुआ था।
1 [ स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह अवधि जिसके दौरान किसी न्यायालय के आदेश या निषेधाज्ञा द्वारा कार्यवाही स्थगित की गई हो, को बाहर रखा जाएगा:
बशर्ते कि यदि उपर्युक्त अवधि को समाप्त करने के तुरंत बाद, निर्णयकर्ता प्राधिकारी के पास आदेश पारित करने के लिए उपलब्ध परिसीमा अवधि साठ दिनों से कम हो, तो ऐसी शेष अवधि को साठ दिनों तक विस्तारित माना जाएगा।]
2. [बशर्ते कि यदि इस उपधारा के अंतर्गत आदेश पारित करने की समय सीमा 1 जुलाई, 2021 से शुरू होकर 29 सितंबर, 2021 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान समाप्त हो जाती है, तो ऐसे आदेश पारित करने की समय सीमा 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दी जाएगी।]
(8) बेनामीदार या कोई अन्य व्यक्ति जो संपत्ति का स्वामी होने का दावा करता है, वह स्वयं उपस्थित हो सकता है या अपना मामला प्रस्तुत करने के लिए अपनी पसंद के किसी अधिकृत प्रतिनिधि की सहायता ले सकता है।
स्पष्टीकरण .--उपधारा ( 8 ) के प्रयोजनों के लिए, अधिकृत प्रतिनिधि से तात्पर्य लिखित रूप में अधिकृत व्यक्ति से है, जो कि--
(i) कोई व्यक्ति जो बेनामीदार या ऐसे अन्य व्यक्ति से किसी भी प्रकार से संबंधित हो, या कोई व्यक्ति जो बेनामीदार या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा नियमित रूप से नियोजित हो; या
(ii) किसी अनुसूचित बैंक का कोई अधिकारी जिसके साथ बेनामीदार या ऐसा अन्य व्यक्ति खाता रखता है या जिसके साथ उसका अन्य नियमित लेन-देन होता है; या
(iii) कोई भी विधि व्यवसायी जो भारत में किसी भी दीवानी न्यायालय में वकालत करने का हकदार हो; या
(iv) कोई भी व्यक्ति जिसने बोर्ड द्वारा इस संबंध में मान्यता प्राप्त कोई लेखांकन परीक्षा उत्तीर्ण की हो; या
(v) कोई भी व्यक्ति जिसने ऐसी शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त कर ली हों, जैसा कि बोर्ड इस उद्देश्य के लिए निर्धारित कर सकता है।
(क) उसमें बेनामीदार के रूप में निर्दिष्ट व्यक्ति;
(ख) कोई भी व्यक्ति जिसे उसमें लाभकारी स्वामी के रूप में संदर्भित किया गया हो या जिसकी पहचान इस प्रकार की गई हो;
(ग) कोई भी हितधारक पक्ष, जिसमें बैंकिंग कंपनी भी शामिल है;
(घ) कोई भी व्यक्ति जिसने संपत्ति के संबंध में दावा किया है:
बशर्ते कि निर्णयकर्ता प्राधिकरण संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर नोटिस जारी करेगा:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि नोटिस में उस व्यक्ति को, जिसे नोटिस जारी किया गया है, मांगी गई जानकारी प्रदान करने के लिए कम से कम तीस दिनों की अवधि दी जाएगी।
(2) जहां संपत्ति एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से धारित है, वहां न्यायनिर्णायक प्राधिकारी संपत्ति के सभी धारकों को नोटिस देने का हर संभव प्रयास करेगा:
बशर्ते कि यदि नोटिस किसी एक व्यक्ति को दिया जाता है, तो नोटिस की तामील इस आधार पर अमान्य नहीं होगी कि उक्त नोटिस संपत्ति के सभी धारकों को नहीं दिया गया था।
(3) निर्णयकर्ता प्राधिकारी, इसके बाद--
(क) उपधारा ( 1 ) के तहत जारी नोटिस के जवाब में, यदि कोई हो, तो उस पर विचार करना;
(ख) ऐसी पूछताछ करना या करवाना तथा ऐसी रिपोर्ट या साक्ष्य मंगवाना जैसा वह उचित समझे; और
(ग) सभी प्रासंगिक सामग्रियों को ध्यान में रखते हुए,
उसमें नामित बेनामीदार , आरंभिक अधिकारी और संपत्ति के स्वामी होने का दावा करने वाले किसी अन्य व्यक्ति को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए, और उसके बाद आदेश पारित किया जाए।
(i) संपत्ति को बेनामी संपत्ति न मानते हुए कुर्की आदेश को रद्द करना; या
(ii) संपत्ति को बेनामी संपत्ति मानते हुए और अन्य सभी मामलों में कुर्की आदेश की पुष्टि करना।
(4) जहाँ निर्णयकर्ता प्राधिकारी संतुष्ट है कि जिन संपत्तियों के संबंध में उसे संदर्भित किया गया है, उनमें से कुछ भाग बेनामी संपत्ति है, लेकिन वह ऐसे भाग की विशेष रूप से पहचान करने में सक्षम नहीं है, तो वह अपने सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार यह निष्कर्ष दर्ज करेगा कि संपत्तियों का कौन सा भाग बेनामी है।
(5) जहाँ अपने समक्ष कार्यवाही के दौरान, निर्णय प्राधिकारी को यह विश्वास करने का कारण हो कि आरंभिक अधिकारी द्वारा उसे संदर्भित संपत्ति के अतिरिक्त कोई संपत्ति बेनामी संपत्ति है, तो वह संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क करेगा और धारा 24 की उपधारा ( 5 ) के तहत संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से संपत्ति को उसे संदर्भित संपत्ति माना जाएगा।
(6) निर्णय प्राधिकारी कार्यवाही के किसी भी चरण में, किसी पक्ष के आवेदन पर या स्वतः संज्ञान से , अनुचित रूप से शामिल किए गए किसी पक्ष का नाम हटा सकता है या किसी ऐसे व्यक्ति का नाम जोड़ सकता है जिसकी उपस्थिति निर्णय प्राधिकारी के समक्ष आवश्यक हो ताकि वह संदर्भ में शामिल सभी प्रश्नों पर निर्णय ले सके और उनका निपटारा कर सके।
(7) उपधारा ( 3 ) के तहत कोई आदेश उस महीने के अंत से एक वर्ष की समाप्ति के बाद पारित नहीं किया जाएगा जिसमें धारा 24 की उपधारा ( 5 ) के तहत संदर्भ प्राप्त हुआ था।
1 [ स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, परिसीमा अवधि की गणना करते समय, वह अवधि जिसके दौरान किसी न्यायालय के आदेश या निषेधाज्ञा द्वारा कार्यवाही स्थगित की गई हो, को बाहर रखा जाएगा:
बशर्ते कि यदि उपर्युक्त अवधि को समाप्त करने के तुरंत बाद, निर्णयकर्ता प्राधिकारी के पास आदेश पारित करने के लिए उपलब्ध परिसीमा अवधि साठ दिनों से कम हो, तो ऐसी शेष अवधि को साठ दिनों तक विस्तारित माना जाएगा।]
2. [बशर्ते कि यदि इस उपधारा के अंतर्गत आदेश पारित करने की समय सीमा 1 जुलाई, 2021 से शुरू होकर 29 सितंबर, 2021 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान समाप्त हो जाती है, तो ऐसे आदेश पारित करने की समय सीमा 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दी जाएगी।]
(8) बेनामीदार या कोई अन्य व्यक्ति जो संपत्ति का स्वामी होने का दावा करता है, वह स्वयं उपस्थित हो सकता है या अपना मामला प्रस्तुत करने के लिए अपनी पसंद के किसी अधिकृत प्रतिनिधि की सहायता ले सकता है।
स्पष्टीकरण .--उपधारा ( 8 ) के प्रयोजनों के लिए, अधिकृत प्रतिनिधि से तात्पर्य लिखित रूप में अधिकृत व्यक्ति से है, जो कि--
(i) कोई व्यक्ति जो बेनामीदार या ऐसे अन्य व्यक्ति से किसी भी प्रकार से संबंधित हो, या कोई व्यक्ति जो बेनामीदार या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा नियमित रूप से नियोजित हो; या
(ii) किसी अनुसूचित बैंक का कोई अधिकारी जिसके साथ बेनामीदार या ऐसा अन्य व्यक्ति खाता रखता है या जिसके साथ उसका अन्य नियमित लेन-देन होता है; या
(iii) कोई भी विधि व्यवसायी जो भारत में किसी भी दीवानी न्यायालय में वकालत करने का हकदार हो; या
(iv) कोई भी व्यक्ति जिसने बोर्ड द्वारा इस संबंध में मान्यता प्राप्त कोई लेखांकन परीक्षा उत्तीर्ण की हो; या
(v) कोई भी व्यक्ति जिसने ऐसी शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त कर ली हों, जैसा कि बोर्ड इस उद्देश्य के लिए निर्धारित कर सकता है।
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