PBPT Act 27अध्याय IV · Attachment, Adjudication and Confiscation
धारा 27 · बेनामी संपत्ति की ज़ब्ती और स्वामित्व।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [27. बेनामी संपत्ति की ज़ब्ती एवं निहित होना। --(1) जहाँ धारा 26 की उपधारा (3) के अंतर्गत किसी संपत्ति के संबंध में कोई आदेश पारित किया जाता है और ऐसी संपत्ति को बेनामी संपत्ति घोषित किया जाता है, तो न्यायनिर्णय प्राधिकारी संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, बेनामी संपत्ति घोषित की गई संपत्ति को ज़ब्त करने का आदेश देगा:
बशर्ते कि जहां न्यायनिर्णायक प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की गई हो, वहां संपत्ति की जब्ती धारा 46 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश के अधीन होगी:
इसके अलावा, संपत्ति की जब्ती निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
(2) उपधारा (1) में कोई बात ऐसी संपत्ति पर लागू नहीं होगी जो किसी व्यक्ति द्वारा बेनामीदार से पर्याप्त प्रतिफल के बदले, धारा 24 की उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी होने से पहले, बेनामी लेन-देन की जानकारी के बिना, धारित या अधिग्रहित की गई हो।
(3) जहां उपधारा (1) के तहत ज़ब्ती का आदेश दिया गया है, वहां ऐसी संपत्ति में सभी अधिकार और स्वामित्व सभी भारों से मुक्त होकर केंद्र सरकार में पूर्णतः निहित हो जाएंगे और ऐसी ज़ब्ती के संबंध में कोई मुआवजा देय नहीं होगा।
(4) इस अधिनियम के उद्देश्यों को विफल करने के उद्देश्य से ऐसी संपत्ति में किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा सृजित कोई भी अधिकार शून्य और अमान्य होगा।
(5) यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही के अंतिम रूप से संपन्न होने पर कोई ज़ब्ती आदेश नहीं दिया जाता है, तो सरकार के विरुद्ध कोई दावा नहीं किया जा सकेगा।]
बशर्ते कि जहां न्यायनिर्णायक प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की गई हो, वहां संपत्ति की जब्ती धारा 46 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश के अधीन होगी:
इसके अलावा, संपत्ति की जब्ती निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
(2) उपधारा (1) में कोई बात ऐसी संपत्ति पर लागू नहीं होगी जो किसी व्यक्ति द्वारा बेनामीदार से पर्याप्त प्रतिफल के बदले, धारा 24 की उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी होने से पहले, बेनामी लेन-देन की जानकारी के बिना, धारित या अधिग्रहित की गई हो।
(3) जहां उपधारा (1) के तहत ज़ब्ती का आदेश दिया गया है, वहां ऐसी संपत्ति में सभी अधिकार और स्वामित्व सभी भारों से मुक्त होकर केंद्र सरकार में पूर्णतः निहित हो जाएंगे और ऐसी ज़ब्ती के संबंध में कोई मुआवजा देय नहीं होगा।
(4) इस अधिनियम के उद्देश्यों को विफल करने के उद्देश्य से ऐसी संपत्ति में किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा सृजित कोई भी अधिकार शून्य और अमान्य होगा।
(5) यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही के अंतिम रूप से संपन्न होने पर कोई ज़ब्ती आदेश नहीं दिया जाता है, तो सरकार के विरुद्ध कोई दावा नहीं किया जा सकेगा।]
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