SIDBI Act 32अध्याय VII · Transfer of Part of Business of Development Bank
धारा 32 · विकास बैंक के कारोबार के एक हिस्से का हस्तांतरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा नियुक्त तिथि को लघु उद्योग विकास निधि और राष्ट्रीय समता निधि (इसके बाद इस धारा में निधि के रूप में संदर्भित) से संबंधित विकास बैंक के व्यवसाय, परिसंपत्तियां और देनदारियां, अधिकार, हित, विशेषाधिकार और दायित्व लघु उद्योग बैंक को हस्तांतरित हो जाएंगे और उसमें निहित हो जाएंगे।
स्पष्टीकरण .-- "लघु उद्योग विकास कोष" और "राष्ट्रीय समता कोष" से तात्पर्य विकास बैंक की पुस्तकों और खातों में इस उपधारा में निर्धारित तिथि से ठीक पहले वाले दिन इसी नाम से उल्लिखित लघु उद्योग विकास कोष और राष्ट्रीय समता कोष से है।
(2) उपधारा (1) के तहत लघु उद्योग बैंक को निधियों के हस्तांतरण और उसमें निहित होने के लिए, वह बैंक विकास बैंक को ऐसी राशि और ऐसी शर्तों और नियमों पर भुगतान करेगा जैसा विकास बैंक निर्धारित करे।
(3) निधियों से संबंधित सभी अनुबंध, विलेख, बांड, समझौते, अभिरक्षा पत्र, विधि प्रतिनिधित्व के अनुदान और अन्य सभी प्रकार के दस्तावेज जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट तिथि से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हैं और जिनमें विकास बैंक एक पक्षकार है या जो विकास बैंक के पक्ष में हैं, वे निम्नलिखित होंगे:--
(क) यदि वे केवल निधियों से संबंधित हों, तो लघु उद्योग बैंक के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण बल और प्रभाव रखें और उन्हें उसी पूर्ण और प्रभावी ढंग से लागू और क्रियान्वित किया जा सकता है जैसे कि विकास बैंक के स्थान पर लघु उद्योग बैंक उसका पक्षकार होता या जैसे कि वे लघु उद्योग बैंक के पक्ष में जारी किए गए होते; और
(ख) यदि वे न केवल निधियों से बल्कि विकास बैंक के किसी अन्य व्यवसाय या कार्यों से भी संबंधित हों, तो वे विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक दोनों के विरुद्ध या उनके पक्ष में पूर्ण रूप से लागू और प्रभावी होंगे तथा उन्हें उसी प्रकार पूर्ण और प्रभावी ढंग से लागू या क्रियान्वित किया जा सकता है जैसे कि विकास बैंक के अतिरिक्त लघु उद्योग बैंक भी उसमें पक्षकार होता या जैसे कि वे विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक दोनों के पक्ष में जारी किए गए हों।
(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट तिथि को निधियों से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई वाद, अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही लंबित हो, तो विकास बैंक के व्यवसाय को लघु उद्योग बैंक को हस्तांतरित करने या इस अधिनियम में निहित किसी भी बात के कारण वह कार्यवाही समाप्त नहीं होगी, बंद नहीं होगी या किसी भी प्रकार से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होगी, बल्कि वाद, अपील या अन्य कार्यवाही,--
(क) जहां यह विशेष रूप से निधियों से संबंधित है, वहां लघु उद्योग बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध अभियोजित और लागू किया जाना जारी रखा जाएगा; और
(ख) जहां यह न केवल निधियों से बल्कि विकास बैंक के किसी अन्य व्यवसाय या कार्यों से भी संबंधित हो, तो विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक द्वारा या उनके विरुद्ध इसे जारी रखा जाएगा, इस पर मुकदमा चलाया जाएगा और इसे लागू किया जाएगा, या यदि केंद्र सरकार लिखित आदेश द्वारा ऐसा निर्देश देती है, तो उनमें से किसी एक द्वारा या उसके विरुद्ध, जैसा कि ऐसे आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(5) यदि कोई प्रश्न उठता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोई अनुबंध, विलेख, बांड, समझौता, अभिरक्षा पत्र, विधि प्रतिनिधित्व का अनुदान या अन्य दस्तावेज, या उपधारा (4) में निर्दिष्ट कोई मुकदमा, अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही निधि से संबंधित है या नहीं, तो इसे निर्णय के लिए विकास बैंक को भेजा जाएगा और इस पर विकास बैंक का निर्णय अंतिम होगा।
(6) इस धारा के प्रावधान औद्योगिक विकास बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1964 (18 ऑफ 1964) या किसी अन्य कानून या उक्त अधिनियम या अन्य कानून के आधार पर लागू किसी भी साधन में निहित किसी भी बात के बावजूद प्रभावी होंगे।
स्पष्टीकरण .-- "लघु उद्योग विकास कोष" और "राष्ट्रीय समता कोष" से तात्पर्य विकास बैंक की पुस्तकों और खातों में इस उपधारा में निर्धारित तिथि से ठीक पहले वाले दिन इसी नाम से उल्लिखित लघु उद्योग विकास कोष और राष्ट्रीय समता कोष से है।
(2) उपधारा (1) के तहत लघु उद्योग बैंक को निधियों के हस्तांतरण और उसमें निहित होने के लिए, वह बैंक विकास बैंक को ऐसी राशि और ऐसी शर्तों और नियमों पर भुगतान करेगा जैसा विकास बैंक निर्धारित करे।
(3) निधियों से संबंधित सभी अनुबंध, विलेख, बांड, समझौते, अभिरक्षा पत्र, विधि प्रतिनिधित्व के अनुदान और अन्य सभी प्रकार के दस्तावेज जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट तिथि से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हैं और जिनमें विकास बैंक एक पक्षकार है या जो विकास बैंक के पक्ष में हैं, वे निम्नलिखित होंगे:--
(क) यदि वे केवल निधियों से संबंधित हों, तो लघु उद्योग बैंक के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण बल और प्रभाव रखें और उन्हें उसी पूर्ण और प्रभावी ढंग से लागू और क्रियान्वित किया जा सकता है जैसे कि विकास बैंक के स्थान पर लघु उद्योग बैंक उसका पक्षकार होता या जैसे कि वे लघु उद्योग बैंक के पक्ष में जारी किए गए होते; और
(ख) यदि वे न केवल निधियों से बल्कि विकास बैंक के किसी अन्य व्यवसाय या कार्यों से भी संबंधित हों, तो वे विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक दोनों के विरुद्ध या उनके पक्ष में पूर्ण रूप से लागू और प्रभावी होंगे तथा उन्हें उसी प्रकार पूर्ण और प्रभावी ढंग से लागू या क्रियान्वित किया जा सकता है जैसे कि विकास बैंक के अतिरिक्त लघु उद्योग बैंक भी उसमें पक्षकार होता या जैसे कि वे विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक दोनों के पक्ष में जारी किए गए हों।
(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट तिथि को निधियों से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई वाद, अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही लंबित हो, तो विकास बैंक के व्यवसाय को लघु उद्योग बैंक को हस्तांतरित करने या इस अधिनियम में निहित किसी भी बात के कारण वह कार्यवाही समाप्त नहीं होगी, बंद नहीं होगी या किसी भी प्रकार से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होगी, बल्कि वाद, अपील या अन्य कार्यवाही,--
(क) जहां यह विशेष रूप से निधियों से संबंधित है, वहां लघु उद्योग बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध अभियोजित और लागू किया जाना जारी रखा जाएगा; और
(ख) जहां यह न केवल निधियों से बल्कि विकास बैंक के किसी अन्य व्यवसाय या कार्यों से भी संबंधित हो, तो विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक द्वारा या उनके विरुद्ध इसे जारी रखा जाएगा, इस पर मुकदमा चलाया जाएगा और इसे लागू किया जाएगा, या यदि केंद्र सरकार लिखित आदेश द्वारा ऐसा निर्देश देती है, तो उनमें से किसी एक द्वारा या उसके विरुद्ध, जैसा कि ऐसे आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(5) यदि कोई प्रश्न उठता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोई अनुबंध, विलेख, बांड, समझौता, अभिरक्षा पत्र, विधि प्रतिनिधित्व का अनुदान या अन्य दस्तावेज, या उपधारा (4) में निर्दिष्ट कोई मुकदमा, अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही निधि से संबंधित है या नहीं, तो इसे निर्णय के लिए विकास बैंक को भेजा जाएगा और इस पर विकास बैंक का निर्णय अंतिम होगा।
(6) इस धारा के प्रावधान औद्योगिक विकास बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1964 (18 ऑफ 1964) या किसी अन्य कानून या उक्त अधिनियम या अन्य कानून के आधार पर लागू किसी भी साधन में निहित किसी भी बात के बावजूद प्रभावी होंगे।
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