NBARD Act 18अध्याय IV · Transfer of Business to the National Bank
धारा 18 · रिजर्व बैंक से कारोबार का हस्तांतरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, अधिसूचना द्वारा, ऐसी तिथि को, रिजर्व बैंक के पास मौजूद परिसंपत्तियों और देनदारियों की सूची, जो निम्नलिखित से संबंधित हो सकती है:
(क) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46ए के तहत स्थापित और अनुरक्षित राष्ट्रीय कृषि ऋण (दीर्घकालिक संचालन) कोष; और
(ख) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46ख के तहत स्थापित और अनुरक्षित राष्ट्रीय कृषि ऋण (स्थिरीकरण) कोष।
इसे राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरित कर दिया जाएगा और यह क्रमशः धारा 42 में निर्दिष्ट राष्ट्रीय ग्रामीण ऋण (दीर्घकालिक संचालन) कोष और धारा 43 में निर्दिष्ट राष्ट्रीय ग्रामीण ऋण (स्थिरीकरण) कोष का हिस्सा बन जाएगा।
(2) केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, अधिसूचना द्वारा, ऐसी तिथि से प्रभावी, वे ऋण एवं अग्रिम जो रिजर्व बैंक ने धारा 17 [भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के खंड (4) के उपखंड (क) को छोड़कर] के तहत राज्य सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दिए हैं, और जिन्हें रिजर्व बैंक सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट कर सकता है, वे यथासंभव राष्ट्रीय बैंक द्वारा धारा 21 के तहत दिए गए ऋण एवं अग्रिम माने जाएंगे, और राष्ट्रीय बैंक ऐसे ऋण एवं अग्रिमों की राशि रिजर्व बैंक को ऐसी शर्तों और नियमों पर चुकाएगा जो केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके निर्दिष्ट कर सकती है।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी परिसंपत्ति या देयता या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक के सभी अधिकार, देयताएँ, हित, विशेषाधिकार और दायित्व, चाहे वे किसी भी प्रकृति के हों (विनिमय बिल और वचन पत्र की खरीद, बिक्री और पुनर्भुगतान से उत्पन्न होने वाले अधिकार और दायित्व सहित), उस तिथि को राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरित हो जाएँगे और उसमें निहित हो जाएँगे जिस तिथि को ऐसी परिसंपत्ति या देयता उपधारा (1) के तहत राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरित हो जाती है या, जैसा भी मामला हो, ऐसा ऋण या अग्रिम उपधारा (2) के तहत राष्ट्रीय बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण या अग्रिम बन जाता है।
(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी परिसंपत्ति या दायित्व से संबंधित, जो उस उपधारा के तहत नियुक्त तिथि से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हो, या उपधारा ( 2) में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम से संबंधित, जो उस उपधारा के तहत नियुक्त तिथि से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हो, सभी अनुबंध, विलेख, बांड, समझौते, अभिरक्षा पत्र, कानूनी प्रतिनिधित्व के अनुदान और अन्य सभी प्रकार के दस्तावेज राष्ट्रीय बैंक के विरुद्ध या उसके पक्ष में, जैसा भी मामला हो, पूर्ण रूप से प्रभावी होंगे और उन पर उसी प्रकार पूर्ण और प्रभावी ढंग से अमल किया जा सकता है या कार्रवाई की जा सकती है जैसे कि रिजर्व बैंक के स्थान पर राष्ट्रीय बैंक उसमें पक्षकार होता, या जैसे कि वे राष्ट्रीय बैंक के पक्ष में होते।
(5) यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन निर्धारित तिथि से ठीक पहले, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी परिसंपत्ति या देयता या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम से संबंधित कोई वाद, अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित हो, तो उपधारा (1) के अधीन ऐसी परिसंपत्ति या देयता के राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरण के कारण, या जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) के अधीन ऐसे ऋण या अग्रिम के राष्ट्रीय बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण या अग्रिम बन जाने के कारण, या इस अधिनियम में निहित किसी भी बात के कारण, वह कार्यवाही समाप्त नहीं होगी, बंद नहीं होगी , या किसी भी प्रकार से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रीय बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध वाद, अपील या अन्य कार्यवाही जारी रखी जा सकती है, चलाई जा सकती है और लागू की जा सकती है।
(क) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46ए के तहत स्थापित और अनुरक्षित राष्ट्रीय कृषि ऋण (दीर्घकालिक संचालन) कोष; और
(ख) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46ख के तहत स्थापित और अनुरक्षित राष्ट्रीय कृषि ऋण (स्थिरीकरण) कोष।
इसे राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरित कर दिया जाएगा और यह क्रमशः धारा 42 में निर्दिष्ट राष्ट्रीय ग्रामीण ऋण (दीर्घकालिक संचालन) कोष और धारा 43 में निर्दिष्ट राष्ट्रीय ग्रामीण ऋण (स्थिरीकरण) कोष का हिस्सा बन जाएगा।
(2) केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, अधिसूचना द्वारा, ऐसी तिथि से प्रभावी, वे ऋण एवं अग्रिम जो रिजर्व बैंक ने धारा 17 [भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के खंड (4) के उपखंड (क) को छोड़कर] के तहत राज्य सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दिए हैं, और जिन्हें रिजर्व बैंक सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट कर सकता है, वे यथासंभव राष्ट्रीय बैंक द्वारा धारा 21 के तहत दिए गए ऋण एवं अग्रिम माने जाएंगे, और राष्ट्रीय बैंक ऐसे ऋण एवं अग्रिमों की राशि रिजर्व बैंक को ऐसी शर्तों और नियमों पर चुकाएगा जो केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके निर्दिष्ट कर सकती है।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी परिसंपत्ति या देयता या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक के सभी अधिकार, देयताएँ, हित, विशेषाधिकार और दायित्व, चाहे वे किसी भी प्रकृति के हों (विनिमय बिल और वचन पत्र की खरीद, बिक्री और पुनर्भुगतान से उत्पन्न होने वाले अधिकार और दायित्व सहित), उस तिथि को राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरित हो जाएँगे और उसमें निहित हो जाएँगे जिस तिथि को ऐसी परिसंपत्ति या देयता उपधारा (1) के तहत राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरित हो जाती है या, जैसा भी मामला हो, ऐसा ऋण या अग्रिम उपधारा (2) के तहत राष्ट्रीय बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण या अग्रिम बन जाता है।
(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी परिसंपत्ति या दायित्व से संबंधित, जो उस उपधारा के तहत नियुक्त तिथि से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हो, या उपधारा ( 2) में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम से संबंधित, जो उस उपधारा के तहत नियुक्त तिथि से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हो, सभी अनुबंध, विलेख, बांड, समझौते, अभिरक्षा पत्र, कानूनी प्रतिनिधित्व के अनुदान और अन्य सभी प्रकार के दस्तावेज राष्ट्रीय बैंक के विरुद्ध या उसके पक्ष में, जैसा भी मामला हो, पूर्ण रूप से प्रभावी होंगे और उन पर उसी प्रकार पूर्ण और प्रभावी ढंग से अमल किया जा सकता है या कार्रवाई की जा सकती है जैसे कि रिजर्व बैंक के स्थान पर राष्ट्रीय बैंक उसमें पक्षकार होता, या जैसे कि वे राष्ट्रीय बैंक के पक्ष में होते।
(5) यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन निर्धारित तिथि से ठीक पहले, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी परिसंपत्ति या देयता या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी ऋण या अग्रिम से संबंधित कोई वाद, अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित हो, तो उपधारा (1) के अधीन ऐसी परिसंपत्ति या देयता के राष्ट्रीय बैंक को हस्तांतरण के कारण, या जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) के अधीन ऐसे ऋण या अग्रिम के राष्ट्रीय बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण या अग्रिम बन जाने के कारण, या इस अधिनियम में निहित किसी भी बात के कारण, वह कार्यवाही समाप्त नहीं होगी, बंद नहीं होगी , या किसी भी प्रकार से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रीय बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध वाद, अपील या अन्य कार्यवाही जारी रखी जा सकती है, चलाई जा सकती है और लागू की जा सकती है।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

