NBARD Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "कृषि" में बागवानी, पशुपालन, वानिकी, दुग्ध उत्पादन और मुर्गीपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियाँ शामिल हैं, चाहे वे कृषि के साथ संयुक्त रूप से की जाती हों या नहीं, और "कृषि संचालन" अभिव्यक्ति को तदनुसार समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "मत्स्यपालन" में अंतर्देशीय और समुद्री दोनों प्रकार की मत्स्य पालन का विकास, मछली पकड़ना और उससे संबंधित या उससे जुड़े सभी कार्य शामिल हैं;
(ख) "कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम" से तात्पर्य कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम अधिनियम, 1963 (10 ऑफ 1963) की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित निगम से है, तथा उस अधिनियम की धारा 3ए के अंतर्गत इसका नाम बदलकर कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम कर दिया गया है;
(ग) "बोर्ड" से तात्पर्य राष्ट्रीय बैंक के निदेशक मंडल से है;
(घ) "केंद्रीय सहकारी बैंक" से तात्पर्य किसी राज्य के किसी जिले में स्थित प्रमुख सहकारी समिति से है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य उस जिले में स्थित अन्य सहकारी समितियों का वित्तपोषण करना है।
बशर्ते कि किसी जिले में ऐसी प्रमुख समिति के अतिरिक्त, या जहां किसी जिले में ऐसी कोई प्रमुख समिति न हो, वहां राज्य सरकार उस जिले में अन्य सहकारी समितियों को वित्तपोषण का व्यवसाय करने वाली एक या एक से अधिक सहकारी समितियों को इस परिभाषा के अर्थ के अंतर्गत केंद्रीय सहकारी बैंक या केंद्रीय सहकारी बैंक घोषित कर सकती है;
(ई) "अध्यक्ष" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त अध्यक्ष 1 *** से है;
(f) "सहकारी समिति" से तात्पर्य सहकारी समिति अधिनियम, 1912 (1912 का 2) या किसी अन्य सहकारी समितियों से संबंधित कानून के तहत पंजीकृत या पंजीकृत मानी जाने वाली किसी भी राज्य में उस समय लागू समिति से है;
(जी) "फसलों" में कृषि कार्यों के उत्पाद शामिल हैं;
(h) "निदेशक" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त निदेशक से है;
2 * * * * *
(j) "प्रबंध निदेशक" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त प्रबंध निदेशक से है;
(k) "फसलों का विपणन" में किसी कृषि उत्पादक या ऐसे उत्पादकों के किसी संगठन द्वारा विपणन से पहले फसलों का प्रसंस्करण शामिल है;
3 [(क) "सूक्ष्म उद्यम", "लघु उद्यम" और "मध्यम उद्यम" के वही अर्थ होंगे जो क्रमशः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (27 ऑफ 2006) में उन्हें दिए गए हैं];
(एल) "राष्ट्रीय बैंक" से तात्पर्य धारा 3 के अधीन स्थापित कृषि एवं ग्रामीण विकास राष्ट्रीय बैंक से है;
(m) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है;
(n) "प्राथमिक ग्रामीण ऋण समिति" से तात्पर्य किसी भी नाम से पुकारी जाने वाली सहकारी समिति से है,--
(1) जिसका उद्देश्य या व्यवसाय अपने सदस्यों को कृषि या कृषि कार्यों या फसलों के विपणन या ग्रामीण विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है; और
(2) जिसके उपनियमों में किसी अन्य सहकारी समिति को सदस्य के रूप में प्रवेश की अनुमति नहीं है:
बशर्ते कि यह उपखंड किसी सहकारी समिति के सदस्य के रूप में प्रवेश पर लागू नहीं होगा, जो कि राज्य सहकारी बैंक या केंद्रीय सहकारी बैंक है, इस कारण से कि ऐसा बैंक राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध कराए गए धन से सहकारी समिति की शेयर पूंजी की सदस्यता लेता है;
(ओ) "निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित से है;
(पी) "क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक" से तात्पर्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (21 ऑफ 1976) की धारा 3 के तहत स्थापित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक से है;
(q) "ग्रामीण विकास" से तात्पर्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से है, जो ऐसे विकास के लिए सहायक गतिविधियों के माध्यम से किया जाता है।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए,--
(क) ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सहायक गतिविधियों में ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं के प्रावधान से संबंधित गतिविधियाँ और कुटीर एवं ग्राम उद्योगों, 4 [सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, हस्तशिल्प, हथकरघा] और अन्य ग्रामीण शिल्पों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियाँ शामिल हैं;
(ख) "ग्रामीण क्षेत्र" से तात्पर्य किसी गाँव में समाहित क्षेत्र से है तथा इसमें किसी कस्बे में समाहित क्षेत्र भी शामिल है, जिसकी जनसंख्या दस हजार से अधिक न हो या ऐसी कोई अन्य संख्या हो जो रिजर्व बैंक समय-समय पर निर्दिष्ट करे;
(आर) "रिजर्व बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के तहत गठित भारतीय रिजर्व बैंक से है;
(एस) "अनुसूचित बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में शामिल बैंक से है;
5 * * * * *
(u) "राज्य सहकारी बैंक" से तात्पर्य किसी राज्य की प्रमुख सहकारी समिति से है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य राज्य में अन्य सहकारी समितियों का वित्तपोषण करना है:
बशर्ते कि किसी राज्य में ऐसी प्रमुख समिति के अतिरिक्त, या जहां किसी राज्य में ऐसी कोई प्रमुख समिति नहीं है, वहां राज्य सरकार उस राज्य में व्यवसाय करने वाली एक या एक से अधिक सहकारी समितियों को इस परिभाषा के अर्थ के अंतर्गत राज्य सहकारी बैंक या राज्य सहकारी बैंक घोषित कर सकती है;
(v) "राज्य भूमि विकास बैंक" से तात्पर्य उस सहकारी समिति से है जो किसी राज्य में प्रमुख भूमि विकास बैंक (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) है और जिसका प्राथमिक उद्देश्य कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करना है।
बशर्ते कि किसी राज्य में ऐसे प्रमुख भूमि विकास बैंक के अतिरिक्त, या यदि किसी राज्य में ऐसा कोई बैंक नहीं है, तो राज्य सरकार उस राज्य में व्यवसाय करने वाली और ऐसी सहकारी समिति के उपनियमों द्वारा कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करने के लिए अधिकृत किसी भी सहकारी समिति को इस परिभाषा के अर्थ में राज्य भूमि विकास बैंक घोषित कर सकती है;
(w) यहाँ प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ जो परिभाषित नहीं हैं, परन्तु भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उस अधिनियम में उन्हें क्रमशः दिया गया है;
(x) इस अधिनियम में प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ, जो न तो इस अधिनियम में और न ही भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) में परिभाषित हैं, परन्तु बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उन्हें बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में क्रमशः दिया गया है।
(क) "कृषि" में बागवानी, पशुपालन, वानिकी, दुग्ध उत्पादन और मुर्गीपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियाँ शामिल हैं, चाहे वे कृषि के साथ संयुक्त रूप से की जाती हों या नहीं, और "कृषि संचालन" अभिव्यक्ति को तदनुसार समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "मत्स्यपालन" में अंतर्देशीय और समुद्री दोनों प्रकार की मत्स्य पालन का विकास, मछली पकड़ना और उससे संबंधित या उससे जुड़े सभी कार्य शामिल हैं;
(ख) "कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम" से तात्पर्य कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम अधिनियम, 1963 (10 ऑफ 1963) की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित निगम से है, तथा उस अधिनियम की धारा 3ए के अंतर्गत इसका नाम बदलकर कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम कर दिया गया है;
(ग) "बोर्ड" से तात्पर्य राष्ट्रीय बैंक के निदेशक मंडल से है;
(घ) "केंद्रीय सहकारी बैंक" से तात्पर्य किसी राज्य के किसी जिले में स्थित प्रमुख सहकारी समिति से है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य उस जिले में स्थित अन्य सहकारी समितियों का वित्तपोषण करना है।
बशर्ते कि किसी जिले में ऐसी प्रमुख समिति के अतिरिक्त, या जहां किसी जिले में ऐसी कोई प्रमुख समिति न हो, वहां राज्य सरकार उस जिले में अन्य सहकारी समितियों को वित्तपोषण का व्यवसाय करने वाली एक या एक से अधिक सहकारी समितियों को इस परिभाषा के अर्थ के अंतर्गत केंद्रीय सहकारी बैंक या केंद्रीय सहकारी बैंक घोषित कर सकती है;
(ई) "अध्यक्ष" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त अध्यक्ष 1 *** से है;
(f) "सहकारी समिति" से तात्पर्य सहकारी समिति अधिनियम, 1912 (1912 का 2) या किसी अन्य सहकारी समितियों से संबंधित कानून के तहत पंजीकृत या पंजीकृत मानी जाने वाली किसी भी राज्य में उस समय लागू समिति से है;
(जी) "फसलों" में कृषि कार्यों के उत्पाद शामिल हैं;
(h) "निदेशक" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त निदेशक से है;
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(j) "प्रबंध निदेशक" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त प्रबंध निदेशक से है;
(k) "फसलों का विपणन" में किसी कृषि उत्पादक या ऐसे उत्पादकों के किसी संगठन द्वारा विपणन से पहले फसलों का प्रसंस्करण शामिल है;
3 [(क) "सूक्ष्म उद्यम", "लघु उद्यम" और "मध्यम उद्यम" के वही अर्थ होंगे जो क्रमशः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (27 ऑफ 2006) में उन्हें दिए गए हैं];
(एल) "राष्ट्रीय बैंक" से तात्पर्य धारा 3 के अधीन स्थापित कृषि एवं ग्रामीण विकास राष्ट्रीय बैंक से है;
(m) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है;
(n) "प्राथमिक ग्रामीण ऋण समिति" से तात्पर्य किसी भी नाम से पुकारी जाने वाली सहकारी समिति से है,--
(1) जिसका उद्देश्य या व्यवसाय अपने सदस्यों को कृषि या कृषि कार्यों या फसलों के विपणन या ग्रामीण विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है; और
(2) जिसके उपनियमों में किसी अन्य सहकारी समिति को सदस्य के रूप में प्रवेश की अनुमति नहीं है:
बशर्ते कि यह उपखंड किसी सहकारी समिति के सदस्य के रूप में प्रवेश पर लागू नहीं होगा, जो कि राज्य सहकारी बैंक या केंद्रीय सहकारी बैंक है, इस कारण से कि ऐसा बैंक राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध कराए गए धन से सहकारी समिति की शेयर पूंजी की सदस्यता लेता है;
(ओ) "निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित से है;
(पी) "क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक" से तात्पर्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (21 ऑफ 1976) की धारा 3 के तहत स्थापित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक से है;
(q) "ग्रामीण विकास" से तात्पर्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से है, जो ऐसे विकास के लिए सहायक गतिविधियों के माध्यम से किया जाता है।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए,--
(क) ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सहायक गतिविधियों में ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं के प्रावधान से संबंधित गतिविधियाँ और कुटीर एवं ग्राम उद्योगों, 4 [सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, हस्तशिल्प, हथकरघा] और अन्य ग्रामीण शिल्पों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियाँ शामिल हैं;
(ख) "ग्रामीण क्षेत्र" से तात्पर्य किसी गाँव में समाहित क्षेत्र से है तथा इसमें किसी कस्बे में समाहित क्षेत्र भी शामिल है, जिसकी जनसंख्या दस हजार से अधिक न हो या ऐसी कोई अन्य संख्या हो जो रिजर्व बैंक समय-समय पर निर्दिष्ट करे;
(आर) "रिजर्व बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के तहत गठित भारतीय रिजर्व बैंक से है;
(एस) "अनुसूचित बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में शामिल बैंक से है;
5 * * * * *
(u) "राज्य सहकारी बैंक" से तात्पर्य किसी राज्य की प्रमुख सहकारी समिति से है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य राज्य में अन्य सहकारी समितियों का वित्तपोषण करना है:
बशर्ते कि किसी राज्य में ऐसी प्रमुख समिति के अतिरिक्त, या जहां किसी राज्य में ऐसी कोई प्रमुख समिति नहीं है, वहां राज्य सरकार उस राज्य में व्यवसाय करने वाली एक या एक से अधिक सहकारी समितियों को इस परिभाषा के अर्थ के अंतर्गत राज्य सहकारी बैंक या राज्य सहकारी बैंक घोषित कर सकती है;
(v) "राज्य भूमि विकास बैंक" से तात्पर्य उस सहकारी समिति से है जो किसी राज्य में प्रमुख भूमि विकास बैंक (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) है और जिसका प्राथमिक उद्देश्य कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करना है।
बशर्ते कि किसी राज्य में ऐसे प्रमुख भूमि विकास बैंक के अतिरिक्त, या यदि किसी राज्य में ऐसा कोई बैंक नहीं है, तो राज्य सरकार उस राज्य में व्यवसाय करने वाली और ऐसी सहकारी समिति के उपनियमों द्वारा कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करने के लिए अधिकृत किसी भी सहकारी समिति को इस परिभाषा के अर्थ में राज्य भूमि विकास बैंक घोषित कर सकती है;
(w) यहाँ प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ जो परिभाषित नहीं हैं, परन्तु भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उस अधिनियम में उन्हें क्रमशः दिया गया है;
(x) इस अधिनियम में प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ, जो न तो इस अधिनियम में और न ही भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) में परिभाषित हैं, परन्तु बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उन्हें बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में क्रमशः दिया गया है।
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