ESI Act 55अध्याय V · Benefits
धारा 55 · चिकित्सक बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण द्वारा विनिश्चयों का पुनर्विलोकन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के अधीन चिकित्सक बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण के किसी भी विनिश्चय का किसी भी समय, यथास्थिति, चिकित्सीय बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण द्वारा उस दशा में पुनर्विलोकन किया जा सकेगा जब उसने नए साक्ष्य द्वारा यह समाधान कर लिया हो कि विनिश्चय कर्मचारी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी तात्त्विक तथ्य के अप्रकटन या दुर्व्यपदेशन (चाहे अप्रकटन या दुर्व्यपदेशन कपटपूर्ण रहा हो या नहीं) के परिणामस्वरूप दिया गया था ।
(2) सुसंगत नियोजन-क्षति के परिणामस्वरूप कितनी निःशक्तता हुई है इस बात के निर्धारण का भी चिकित्सक बोर्ड द्वारा उस दशा में पुनर्विलोकन किया जा सकेगा जब कि उसने यह समाधान कर लिया हो कि निर्धारण के पश्चात् से सुसंगत क्षति के परिणामों में सारवान् और अनवेक्षित अपवृद्धि हुई है :
परन्तु इस उपधारा के अधीन निर्धारण का पुनर्विलोकन नहीं होगा जब तक चिकित्सक बोर्ड की यह राय न हो कि निर्धारण द्वारा विचार में ली गई कालावधि को और पूर्वोक्त किसी अपवृद्धि की अधिसम्भाव्य अस्तित्वावधि को ध्यान में रखते हुए उसका पुनर्विलोकन न करने से सारवान् अन्याय होगा ।
(3) चिकित्सा अपील अधिकरण की इजाज़त के बिना निर्धारण का, उसकी तारीख से पांच वर्ष के पूर्व या अनंतिम निर्धारण की दशा में छह मास के पूर्व किए गए किसी आवेदन पर उपधारा (2) के अधीन पुनर्विलोकन न किया जाएगा और ऐसे पुनर्विलोकन पर उस कालावधि में, जो किसी पुनरीक्षित निर्धारण द्वारा विचार में ली जाएगी, आवेदन की तारीख के पूर्व की कोई कालावधि सम्मिलित नहीं होगी ।
(4) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, चिकित्सक बोर्ड पुनर्विलोकन के मामले पर कार्यवाही किसी भी ऐसी रीति से कर सकेगा जिसमें वह उसे मूल निर्देश होने पर कर सकता था, और विशिष्टतः पुनर्विलोकनाधीन निर्धारण के अन्तिम होते हुए भी अनंतिम निर्धारण कर सकेगा, और धारा 54क के उपबंध इस धारा के अधीन के पुनर्विलोकन के आवेदन को और ऐसे आवेदन के संबंध में चिकित्सक बोर्ड के विनिश्चय को ऐसे ही लागू होंगे जैसे वे उस धारा के अधीन निःशक्तता-प्रसुविधा के किसी मामले की और ऐसे मामले के संबंध में चिकित्सक बोर्ड के विनिश्चय को लागू होते हैं ।
(2) सुसंगत नियोजन-क्षति के परिणामस्वरूप कितनी निःशक्तता हुई है इस बात के निर्धारण का भी चिकित्सक बोर्ड द्वारा उस दशा में पुनर्विलोकन किया जा सकेगा जब कि उसने यह समाधान कर लिया हो कि निर्धारण के पश्चात् से सुसंगत क्षति के परिणामों में सारवान् और अनवेक्षित अपवृद्धि हुई है :
परन्तु इस उपधारा के अधीन निर्धारण का पुनर्विलोकन नहीं होगा जब तक चिकित्सक बोर्ड की यह राय न हो कि निर्धारण द्वारा विचार में ली गई कालावधि को और पूर्वोक्त किसी अपवृद्धि की अधिसम्भाव्य अस्तित्वावधि को ध्यान में रखते हुए उसका पुनर्विलोकन न करने से सारवान् अन्याय होगा ।
(3) चिकित्सा अपील अधिकरण की इजाज़त के बिना निर्धारण का, उसकी तारीख से पांच वर्ष के पूर्व या अनंतिम निर्धारण की दशा में छह मास के पूर्व किए गए किसी आवेदन पर उपधारा (2) के अधीन पुनर्विलोकन न किया जाएगा और ऐसे पुनर्विलोकन पर उस कालावधि में, जो किसी पुनरीक्षित निर्धारण द्वारा विचार में ली जाएगी, आवेदन की तारीख के पूर्व की कोई कालावधि सम्मिलित नहीं होगी ।
(4) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, चिकित्सक बोर्ड पुनर्विलोकन के मामले पर कार्यवाही किसी भी ऐसी रीति से कर सकेगा जिसमें वह उसे मूल निर्देश होने पर कर सकता था, और विशिष्टतः पुनर्विलोकनाधीन निर्धारण के अन्तिम होते हुए भी अनंतिम निर्धारण कर सकेगा, और धारा 54क के उपबंध इस धारा के अधीन के पुनर्विलोकन के आवेदन को और ऐसे आवेदन के संबंध में चिकित्सक बोर्ड के विनिश्चय को ऐसे ही लागू होंगे जैसे वे उस धारा के अधीन निःशक्तता-प्रसुविधा के किसी मामले की और ऐसे मामले के संबंध में चिकित्सक बोर्ड के विनिश्चय को लागू होते हैं ।
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