ESI Act 75अध्याय VI · Adjudication of Dispute and Claims
धारा 75 · कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा विनिश्चित किए जाने वाले मामले
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि निम्नलिखित के बारे में, अर्थात्ः-
(क) कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अर्थ में कर्मचारी है या नहीं अथवा वह कर्मचारी-अभिदाय देने के लिए जिम्मेदार है या नहीं, अथवा
(ख) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कर्मचारी की मज़दूरी की दर या औसत दैनिक मज़दूरी, अथवा
(ग) किसी कर्मचारी की बाबत प्रधान नियोजक द्वारा संदेय अभिदाय की दर, अथवा
(घ) वह व्यक्ति, जो किसी कर्मचारी की बाबत प्रधान नियोजक है या था, अथवा
(ङ) किसी प्रसुविधा के लिए किसी व्यक्ति का अधिकार और उसका परिमाण तथा उसकी अस्तित्वावधि, अथवा
(ङङ) आश्रित-प्रसुविधाओं के किसी संदाय के पुनर्विलोकन पर धारा 55क के अधीन निगम द्वारा निकाला गया कोई निदेश, अथवा
(छ) कोई अन्य विषय, जो इस अधिनियम के अधीन संदेय या वसूलीय किसी अभिदाय या प्रसुविधा या अन्य शोध्य राशियों की बाबत प्रधान नियोजक और निगम के बीच, या प्रधान नियोजक और अव्यवहित नियोजक के बीच, या किसी व्यक्ति या निगम के बीच या कर्मचारी और प्रधान नियोजक या अव्यवहित नियोजक के बीच विवादग्रस्त हो, [या कोई अन्य विषय जिसका इस अधिनियम के अधीन कर्चमारी बीमा न्यायालय द्वारा विनिश्चित किया जाना अपेक्षित हो या जो ऐसे विनिश्चित किया जा सके],
कोई प्रश्न या विवाद पैदा हो तो ऐसे प्रश्न या विवाद का विनिश्चय कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा 3[उपधारा (2क) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए,] इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।
(2) [उपधारा (2क) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए,] निम्नलिखित दावों का विनिश्चय कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा किया जाएगा, अर्थात्ः-
(क) प्रधान नियोजक से अभिदायों की वसूली का दावा;
(ख) किसी अव्यवहित नियोजक से अभिदायों का वसूल करने के लिए प्रधान नियोजक द्वारा दावा;
(घ) प्रधान नियोजक के विरुद्ध धारा 68 के अधीन दावा;
(ङ) किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त प्रसुविधाओं के मूल्य या रकम की वसूली के लिए धारा 70 के अधीन उस दशा में दावा जिसमें वह व्यक्ति उनका विधिपूर्ण रूप से हकदार नहीं है; तथा
(च) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञेय किसी प्रसुविधा की वसूली के लिए कोई दावा ।
(2क) यदि कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष की किसी कार्यवाही में निःशक्तता संबंधी कोई प्रश्न पैदा होता है और उस पर चिकित्सक बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण का विनिश्चय, अभिप्राप्त नहीं किया गया है और ऐसे प्रश्न का विनिश्चय कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष के दावे या प्रश्न को अवधारित करने के लिए आवश्यक है तो वह न्यायालय निगम को निदेश देगा कि निगम वह प्रश्न इस अधिनियम के अधीन विनिश्चित करवाए और तत्पश्चात् वह अपने समक्ष के उस दावे या प्रश्न के अवधारण के लिए, यथास्थिति, चिकित्सक बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण के विनिश्चय के अनुसार उस दशा में के सिवाय कार्यवाही करेगा जिसमें कि अपील कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष धारा 54क की उपधारा (2) के अधीन की गई है, जिस दशा में कर्मचारी बीमा न्यायालय अपने समक्ष पैदा हुए सभी मामलों को स्वयं अवधारित कर सकेगा ।
(2ख) कोई ऐसा मामला, जो किसी प्रधान नियोजक और निगम के बीच किसी अभिदाय या किसी अन्य देय के बारे में विवाद है, प्रधान नियोजक द्वारा, कर्मचारी बीमा न्यायालय में तब तक नहीं उठाया जाएगा जब तक उसने निगम द्वारा यथा दावाकृत उससे देय रकम का पचास प्रतिशत न्यायालय के पास जमा न कर दिया हो :
परन्तु न्यायालय, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, इस उपधारा के अधीन जमा की जाने वाली रकम को अधित्यजित या कम कर सकेगा ।
(3) किसी भी सिविल न्यायालय को यथापूर्वोक्त किसी प्रश्न या विवाद का विनिश्चय करने या उस पर कोई कार्यवाही करने की या किसी ऐसे दायित्व पर, जिसका विनिश्चय [चिकित्सक बोर्ड द्वारा, या चिकित्सा अपील अधिकरण द्वारा, या कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा] या इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किया जाना है, न्यायनिर्णय देने की अधिकारिता नहीं होगी ।
(क) कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अर्थ में कर्मचारी है या नहीं अथवा वह कर्मचारी-अभिदाय देने के लिए जिम्मेदार है या नहीं, अथवा
(ख) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कर्मचारी की मज़दूरी की दर या औसत दैनिक मज़दूरी, अथवा
(ग) किसी कर्मचारी की बाबत प्रधान नियोजक द्वारा संदेय अभिदाय की दर, अथवा
(घ) वह व्यक्ति, जो किसी कर्मचारी की बाबत प्रधान नियोजक है या था, अथवा
(ङ) किसी प्रसुविधा के लिए किसी व्यक्ति का अधिकार और उसका परिमाण तथा उसकी अस्तित्वावधि, अथवा
(ङङ) आश्रित-प्रसुविधाओं के किसी संदाय के पुनर्विलोकन पर धारा 55क के अधीन निगम द्वारा निकाला गया कोई निदेश, अथवा
(छ) कोई अन्य विषय, जो इस अधिनियम के अधीन संदेय या वसूलीय किसी अभिदाय या प्रसुविधा या अन्य शोध्य राशियों की बाबत प्रधान नियोजक और निगम के बीच, या प्रधान नियोजक और अव्यवहित नियोजक के बीच, या किसी व्यक्ति या निगम के बीच या कर्मचारी और प्रधान नियोजक या अव्यवहित नियोजक के बीच विवादग्रस्त हो, [या कोई अन्य विषय जिसका इस अधिनियम के अधीन कर्चमारी बीमा न्यायालय द्वारा विनिश्चित किया जाना अपेक्षित हो या जो ऐसे विनिश्चित किया जा सके],
कोई प्रश्न या विवाद पैदा हो तो ऐसे प्रश्न या विवाद का विनिश्चय कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा 3[उपधारा (2क) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए,] इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।
(2) [उपधारा (2क) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए,] निम्नलिखित दावों का विनिश्चय कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा किया जाएगा, अर्थात्ः-
(क) प्रधान नियोजक से अभिदायों की वसूली का दावा;
(ख) किसी अव्यवहित नियोजक से अभिदायों का वसूल करने के लिए प्रधान नियोजक द्वारा दावा;
(घ) प्रधान नियोजक के विरुद्ध धारा 68 के अधीन दावा;
(ङ) किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त प्रसुविधाओं के मूल्य या रकम की वसूली के लिए धारा 70 के अधीन उस दशा में दावा जिसमें वह व्यक्ति उनका विधिपूर्ण रूप से हकदार नहीं है; तथा
(च) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञेय किसी प्रसुविधा की वसूली के लिए कोई दावा ।
(2क) यदि कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष की किसी कार्यवाही में निःशक्तता संबंधी कोई प्रश्न पैदा होता है और उस पर चिकित्सक बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण का विनिश्चय, अभिप्राप्त नहीं किया गया है और ऐसे प्रश्न का विनिश्चय कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष के दावे या प्रश्न को अवधारित करने के लिए आवश्यक है तो वह न्यायालय निगम को निदेश देगा कि निगम वह प्रश्न इस अधिनियम के अधीन विनिश्चित करवाए और तत्पश्चात् वह अपने समक्ष के उस दावे या प्रश्न के अवधारण के लिए, यथास्थिति, चिकित्सक बोर्ड या चिकित्सा अपील अधिकरण के विनिश्चय के अनुसार उस दशा में के सिवाय कार्यवाही करेगा जिसमें कि अपील कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष धारा 54क की उपधारा (2) के अधीन की गई है, जिस दशा में कर्मचारी बीमा न्यायालय अपने समक्ष पैदा हुए सभी मामलों को स्वयं अवधारित कर सकेगा ।
(2ख) कोई ऐसा मामला, जो किसी प्रधान नियोजक और निगम के बीच किसी अभिदाय या किसी अन्य देय के बारे में विवाद है, प्रधान नियोजक द्वारा, कर्मचारी बीमा न्यायालय में तब तक नहीं उठाया जाएगा जब तक उसने निगम द्वारा यथा दावाकृत उससे देय रकम का पचास प्रतिशत न्यायालय के पास जमा न कर दिया हो :
परन्तु न्यायालय, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, इस उपधारा के अधीन जमा की जाने वाली रकम को अधित्यजित या कम कर सकेगा ।
(3) किसी भी सिविल न्यायालय को यथापूर्वोक्त किसी प्रश्न या विवाद का विनिश्चय करने या उस पर कोई कार्यवाही करने की या किसी ऐसे दायित्व पर, जिसका विनिश्चय [चिकित्सक बोर्ड द्वारा, या चिकित्सा अपील अधिकरण द्वारा, या कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा] या इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किया जाना है, न्यायनिर्णय देने की अधिकारिता नहीं होगी ।
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