IT Act 3Aअध्याय II · Digital Signature and Electronic Signature
धारा 3A · इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 3ए. इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर. --(1) धारा 3 में किसी बात के होते हुए भी, लेकिन उपधारा (2) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कोई ग्राहक किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण तकनीक द्वारा प्रमाणित कर सकता है जो--
(क) विश्वसनीय माना जाता है; और
(ख) द्वितीय अनुसूची में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण तकनीक को विश्वसनीय माना जाएगा यदि--
(क) हस्ताक्षर निर्माण डेटा या प्रमाणीकरण डेटा, जिस संदर्भ में उनका उपयोग किया जाता है, उस संदर्भ में हस्ताक्षरकर्ता या, जैसा भी मामला हो, प्रमाणीकरणकर्ता से जुड़ा होता है और किसी अन्य व्यक्ति से नहीं;
(ख) हस्ताक्षर निर्माण डेटा या प्रमाणीकरण डेटा, हस्ताक्षर करने के समय, हस्ताक्षरकर्ता या, जैसा भी मामला हो, प्रमाणीकरणकर्ता के नियंत्रण में था और किसी अन्य व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं था;
(ग) हस्ताक्षर लगाने के बाद इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर में किया गया कोई भी परिवर्तन पता लगाया जा सकता है;
(घ) इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकरण के बाद सूचना में किया गया कोई भी परिवर्तन पता लगाया जा सकता है; और
(ई) यह ऐसी अन्य शर्तों को पूरा करता है जो निर्धारित की जा सकती हैं।
(3) केंद्र सरकार यह पता लगाने के उद्देश्य से प्रक्रिया निर्धारित कर सकती है कि क्या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर उस व्यक्ति का है जिसके द्वारा इसे अंकित या प्रमाणित किया गया है।
(4) केंद्र सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, द्वितीय अनुसूची में किसी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण तकनीक और ऐसे हस्ताक्षर लगाने की प्रक्रिया को जोड़ या हटा सकती है:
बशर्ते कि दूसरी अनुसूची में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या प्रमाणीकरण तकनीक का उल्लेख तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसा हस्ताक्षर या तकनीक विश्वसनीय न हो।
(5) उपधारा (4) के अंतर्गत जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।]
(क) विश्वसनीय माना जाता है; और
(ख) द्वितीय अनुसूची में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण तकनीक को विश्वसनीय माना जाएगा यदि--
(क) हस्ताक्षर निर्माण डेटा या प्रमाणीकरण डेटा, जिस संदर्भ में उनका उपयोग किया जाता है, उस संदर्भ में हस्ताक्षरकर्ता या, जैसा भी मामला हो, प्रमाणीकरणकर्ता से जुड़ा होता है और किसी अन्य व्यक्ति से नहीं;
(ख) हस्ताक्षर निर्माण डेटा या प्रमाणीकरण डेटा, हस्ताक्षर करने के समय, हस्ताक्षरकर्ता या, जैसा भी मामला हो, प्रमाणीकरणकर्ता के नियंत्रण में था और किसी अन्य व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं था;
(ग) हस्ताक्षर लगाने के बाद इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर में किया गया कोई भी परिवर्तन पता लगाया जा सकता है;
(घ) इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकरण के बाद सूचना में किया गया कोई भी परिवर्तन पता लगाया जा सकता है; और
(ई) यह ऐसी अन्य शर्तों को पूरा करता है जो निर्धारित की जा सकती हैं।
(3) केंद्र सरकार यह पता लगाने के उद्देश्य से प्रक्रिया निर्धारित कर सकती है कि क्या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर उस व्यक्ति का है जिसके द्वारा इसे अंकित या प्रमाणित किया गया है।
(4) केंद्र सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, द्वितीय अनुसूची में किसी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण तकनीक और ऐसे हस्ताक्षर लगाने की प्रक्रिया को जोड़ या हटा सकती है:
बशर्ते कि दूसरी अनुसूची में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या प्रमाणीकरण तकनीक का उल्लेख तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसा हस्ताक्षर या तकनीक विश्वसनीय न हो।
(5) उपधारा (4) के अंतर्गत जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।]
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