IT Act 89अध्याय XIII · Miscellaneous
धारा 89 · नियंत्रक को नियम बनाने का अधिकार है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) नियंत्रक, साइबर विनियम सलाहकार समिति से परामर्श करने के बाद और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुरूप विनियम बना सकता है, ताकि इस अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 18 के खंड 1 [ (एन) ] के तहत प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकरण के प्रकटीकरण अभिलेख वाले डेटाबेस के रखरखाव से संबंधित विवरण;
(ख) वे शर्तें एवं प्रतिबंध जिनके अधीन नियंत्रक धारा 19 की उपधारा (1) के अंतर्गत किसी विदेशी प्रमाणन प्राधिकरण को मान्यता दे सकता है;
(ग) वे नियम एवं शर्तें जिनके अधीन धारा 21 की उपधारा (3) के खंड (ग) के अधीन लाइसेंस प्रदान किया जा सकता है;
(घ) धारा 30 के खंड (घ) के अधीन प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा पालन किए जाने वाले अन्य मानक;
(ई) वह तरीका जिससे प्रमाणन प्राधिकारी धारा 34 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट मामलों का खुलासा करेगा;
(f) धारा 35 की उपधारा (3) के तहत आवेदन के साथ संलग्न किए जाने वाले विवरण।
(जी) वह तरीका जिससे ग्राहक धारा 42 की उपधारा (2) के तहत प्रमाणन प्राधिकारी को निजी कुंजी के समझौता होने की सूचना देगा।
(3) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन यह सहमति दें कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अंतर्गत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 18 के खंड 1 [ (एन) ] के तहत प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकरण के प्रकटीकरण अभिलेख वाले डेटाबेस के रखरखाव से संबंधित विवरण;
(ख) वे शर्तें एवं प्रतिबंध जिनके अधीन नियंत्रक धारा 19 की उपधारा (1) के अंतर्गत किसी विदेशी प्रमाणन प्राधिकरण को मान्यता दे सकता है;
(ग) वे नियम एवं शर्तें जिनके अधीन धारा 21 की उपधारा (3) के खंड (ग) के अधीन लाइसेंस प्रदान किया जा सकता है;
(घ) धारा 30 के खंड (घ) के अधीन प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा पालन किए जाने वाले अन्य मानक;
(ई) वह तरीका जिससे प्रमाणन प्राधिकारी धारा 34 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट मामलों का खुलासा करेगा;
(f) धारा 35 की उपधारा (3) के तहत आवेदन के साथ संलग्न किए जाने वाले विवरण।
(जी) वह तरीका जिससे ग्राहक धारा 42 की उपधारा (2) के तहत प्रमाणन प्राधिकारी को निजी कुंजी के समझौता होने की सूचना देगा।
(3) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन यह सहमति दें कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अंतर्गत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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संबंधित कानूनी धाराएँ
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §18नियंत्रक के कार्य।
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §19विदेशी प्रमाणन प्राधिकरणों की मान्यता।
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §21इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करने का लाइसेंस।
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §30प्रमाणन प्राधिकारी को कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §34खुलासा।
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §35इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करने वाला प्रमाणन प्राधिकारी।
- संबंधितसू.प्रौ. अधि. §42निजी कुंजी का नियंत्रण।
