CGST Act 107अध्याय XVIII · Appeals and Revision
धारा 107 · अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम या राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के तहत किसी निर्णयकर्ता द्वारा पारित किसी निर्णय या आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति, उक्त निर्णय या आदेश की सूचना उस व्यक्ति को दिए जाने की तिथि से तीन माह के भीतर, निर्धारित अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है।
(2) आयुक्त, स्वयं या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त के अनुरोध पर, किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाकर उसकी जाँच कर सकता है जिसमें किसी निर्णयकर्ता प्राधिकारी ने इस अधिनियम या राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत कोई निर्णय या आदेश पारित किया हो, ताकि वह उक्त निर्णय या आदेश की वैधता या औचित्य से स्वयं संतुष्ट हो सके, और वह आदेश द्वारा अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को उक्त निर्णय या आदेश की सूचना की तिथि से छह माह के भीतर अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन करने का निर्देश दे सकता है, ताकि उक्त निर्णय या आदेश से उत्पन्न होने वाले ऐसे बिंदुओं का निर्धारण किया जा सके जो आयुक्त द्वारा अपने आदेश में निर्दिष्ट किए गए हों।
(3) जहां उपधारा (2) के तहत किसी आदेश के अनुसरण में, अधिकृत अधिकारी अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन करता है, तो अपीलीय प्राधिकारी ऐसे आवेदन पर इस प्रकार विचार करेगा मानो वह निर्णय प्राधिकारी के निर्णय या आदेश के विरुद्ध की गई अपील हो और ऐसा अधिकृत अधिकारी अपीलकर्ता हो, और इस अधिनियम के अपील संबंधी प्रावधान ऐसे आवेदन पर लागू होंगे।
(4) अपीलीय प्राधिकारी, यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता को उपरोक्त तीन महीने या छह महीने की अवधि के भीतर अपील प्रस्तुत करने से पर्याप्त कारणवश रोका गया था, तो वह इसे एक और महीने की अवधि के भीतर प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकता है।
(5) इस धारा के अंतर्गत प्रत्येक अपील ऐसे प्रपत्र में होगी और ऐसे तरीके से सत्यापित की जाएगी जैसा कि निर्धारित किया जा सके।
(6) उपधारा (1) के अंतर्गत कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक अपीलकर्ता ने भुगतान न कर दिया हो---
(क) कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड की राशि का वह भाग, जो विवादित आदेश से उत्पन्न हुआ है, पूर्ण रूप से, जैसा कि उसने स्वीकार किया है; और
( ख ) उक्त आदेश से उत्पन्न विवादित कर की शेष राशि के दस प्रतिशत के बराबर राशि , जिसके संबंध में अपील दायर की गई है।
3. [बशर्ते कि धारा 129 की उपधारा (3) के तहत किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक कि अपीलकर्ता द्वारा जुर्माने के पच्चीस प्रतिशत के बराबर राशि का भुगतान न कर दिया गया हो।]
(7) जहां अपीलकर्ता ने उपधारा (6) के तहत राशि का भुगतान कर दिया है, वहां शेष राशि की वसूली की कार्यवाही स्थगित मानी जाएगी।
(8) अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्ता को सुनवाई का अवसर देगा।
(9) अपीलीय प्राधिकारी, यदि अपील की सुनवाई के किसी भी चरण में पर्याप्त कारण बताया जाए, तो पक्षकारों या उनमें से किसी को समय दे सकता है और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से अपील की सुनवाई स्थगित कर सकता है:
बशर्ते कि अपील की सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष को तीन बार से अधिक स्थगन नहीं दिया जाएगा।
(10) अपीलीय प्राधिकारी, अपील की सुनवाई के समय, अपीलकर्ता को अपील के आधारों में निर्दिष्ट न किए गए किसी अन्य अपीलीय आधार को जोड़ने की अनुमति दे सकता है, यदि वह संतुष्ट है कि अपील के आधारों से उस आधार का लोप जानबूझकर या अनुचित नहीं था।
(11) अपीलीय प्राधिकारी, आवश्यक अतिरिक्त जाँच करने के बाद, अपील के विरुद्ध लिए गए निर्णय या आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त करने के लिए, जैसा वह उचित समझे वैसा आदेश पारित करेगा, परन्तु मामले को उक्त निर्णय या आदेश पारित करने वाले न्यायनिर्णायक प्राधिकारी को वापस नहीं भेजेगा।
बशर्ते कि किसी शुल्क, दंड या ज़ब्ती के बदले जुर्माने को बढ़ाने, अधिक मूल्य की वस्तुओं को ज़ब्त करने, या धनवापसी या इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि को कम करने का आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलकर्ता को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण बताने का उचित अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, यदि अपीलीय प्राधिकारी की राय है कि कोई कर अदा नहीं किया गया है, कम अदा किया गया है, या गलत तरीके से वापस किया गया है, या जहां इनपुट टैक्स क्रेडिट गलत तरीके से लिया गया है या उपयोग किया गया है, तो अपीलकर्ता को ऐसे कर या इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान करने का आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलकर्ता को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस न दिया जाए और आदेश धारा 73 या धारा 741 [या धारा 74ए] के तहत निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर पारित न किया जाए।
(12) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील का निपटारा करने का आदेश लिखित में होगा तथा उसमें निर्धारण के बिंदु, उस पर निर्णय तथा ऐसे निर्णय के कारण बताए जाएंगे।
(13) अपीलीय प्राधिकारी, जहां संभव हो, अपील दायर होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रत्येक अपील की सुनवाई और निर्णय करेगा:
बशर्ते कि यदि किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश द्वारा आदेश जारी करने पर रोक लगा दी जाती है, तो एक वर्ष की अवधि की गणना करते समय ऐसी रोक की अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा।
(14) अपील के निपटारे पर, अपीलीय प्राधिकारी अपने द्वारा पारित आदेश को अपीलकर्ता, प्रतिवादी और निर्णय प्राधिकारी को सूचित करेगा।
(15) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश की एक प्रति क्षेत्राधिकार आयुक्त या उसके द्वारा इस संबंध में नामित प्राधिकारी तथा क्षेत्राधिकार राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त या उसके द्वारा इस संबंध में नामित प्राधिकारी को भी भेजी जाएगी।
(16) इस धारा के अधीन पारित प्रत्येक आदेश, धारा 108 या धारा 113 या धारा 117 या धारा 118 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अंतिम और पक्षों पर बाध्यकारी होगा।
(2) आयुक्त, स्वयं या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त के अनुरोध पर, किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाकर उसकी जाँच कर सकता है जिसमें किसी निर्णयकर्ता प्राधिकारी ने इस अधिनियम या राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत कोई निर्णय या आदेश पारित किया हो, ताकि वह उक्त निर्णय या आदेश की वैधता या औचित्य से स्वयं संतुष्ट हो सके, और वह आदेश द्वारा अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को उक्त निर्णय या आदेश की सूचना की तिथि से छह माह के भीतर अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन करने का निर्देश दे सकता है, ताकि उक्त निर्णय या आदेश से उत्पन्न होने वाले ऐसे बिंदुओं का निर्धारण किया जा सके जो आयुक्त द्वारा अपने आदेश में निर्दिष्ट किए गए हों।
(3) जहां उपधारा (2) के तहत किसी आदेश के अनुसरण में, अधिकृत अधिकारी अपीलीय प्राधिकारी को आवेदन करता है, तो अपीलीय प्राधिकारी ऐसे आवेदन पर इस प्रकार विचार करेगा मानो वह निर्णय प्राधिकारी के निर्णय या आदेश के विरुद्ध की गई अपील हो और ऐसा अधिकृत अधिकारी अपीलकर्ता हो, और इस अधिनियम के अपील संबंधी प्रावधान ऐसे आवेदन पर लागू होंगे।
(4) अपीलीय प्राधिकारी, यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता को उपरोक्त तीन महीने या छह महीने की अवधि के भीतर अपील प्रस्तुत करने से पर्याप्त कारणवश रोका गया था, तो वह इसे एक और महीने की अवधि के भीतर प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकता है।
(5) इस धारा के अंतर्गत प्रत्येक अपील ऐसे प्रपत्र में होगी और ऐसे तरीके से सत्यापित की जाएगी जैसा कि निर्धारित किया जा सके।
(6) उपधारा (1) के अंतर्गत कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक अपीलकर्ता ने भुगतान न कर दिया हो---
(क) कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड की राशि का वह भाग, जो विवादित आदेश से उत्पन्न हुआ है, पूर्ण रूप से, जैसा कि उसने स्वीकार किया है; और
( ख ) उक्त आदेश से उत्पन्न विवादित कर की शेष राशि के दस प्रतिशत के बराबर राशि , जिसके संबंध में अपील दायर की गई है।
3. [बशर्ते कि धारा 129 की उपधारा (3) के तहत किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक कि अपीलकर्ता द्वारा जुर्माने के पच्चीस प्रतिशत के बराबर राशि का भुगतान न कर दिया गया हो।]
(7) जहां अपीलकर्ता ने उपधारा (6) के तहत राशि का भुगतान कर दिया है, वहां शेष राशि की वसूली की कार्यवाही स्थगित मानी जाएगी।
(8) अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्ता को सुनवाई का अवसर देगा।
(9) अपीलीय प्राधिकारी, यदि अपील की सुनवाई के किसी भी चरण में पर्याप्त कारण बताया जाए, तो पक्षकारों या उनमें से किसी को समय दे सकता है और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से अपील की सुनवाई स्थगित कर सकता है:
बशर्ते कि अपील की सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष को तीन बार से अधिक स्थगन नहीं दिया जाएगा।
(10) अपीलीय प्राधिकारी, अपील की सुनवाई के समय, अपीलकर्ता को अपील के आधारों में निर्दिष्ट न किए गए किसी अन्य अपीलीय आधार को जोड़ने की अनुमति दे सकता है, यदि वह संतुष्ट है कि अपील के आधारों से उस आधार का लोप जानबूझकर या अनुचित नहीं था।
(11) अपीलीय प्राधिकारी, आवश्यक अतिरिक्त जाँच करने के बाद, अपील के विरुद्ध लिए गए निर्णय या आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त करने के लिए, जैसा वह उचित समझे वैसा आदेश पारित करेगा, परन्तु मामले को उक्त निर्णय या आदेश पारित करने वाले न्यायनिर्णायक प्राधिकारी को वापस नहीं भेजेगा।
बशर्ते कि किसी शुल्क, दंड या ज़ब्ती के बदले जुर्माने को बढ़ाने, अधिक मूल्य की वस्तुओं को ज़ब्त करने, या धनवापसी या इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि को कम करने का आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलकर्ता को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण बताने का उचित अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, यदि अपीलीय प्राधिकारी की राय है कि कोई कर अदा नहीं किया गया है, कम अदा किया गया है, या गलत तरीके से वापस किया गया है, या जहां इनपुट टैक्स क्रेडिट गलत तरीके से लिया गया है या उपयोग किया गया है, तो अपीलकर्ता को ऐसे कर या इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान करने का आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलकर्ता को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस न दिया जाए और आदेश धारा 73 या धारा 741 [या धारा 74ए] के तहत निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर पारित न किया जाए।
(12) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील का निपटारा करने का आदेश लिखित में होगा तथा उसमें निर्धारण के बिंदु, उस पर निर्णय तथा ऐसे निर्णय के कारण बताए जाएंगे।
(13) अपीलीय प्राधिकारी, जहां संभव हो, अपील दायर होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रत्येक अपील की सुनवाई और निर्णय करेगा:
बशर्ते कि यदि किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश द्वारा आदेश जारी करने पर रोक लगा दी जाती है, तो एक वर्ष की अवधि की गणना करते समय ऐसी रोक की अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा।
(14) अपील के निपटारे पर, अपीलीय प्राधिकारी अपने द्वारा पारित आदेश को अपीलकर्ता, प्रतिवादी और निर्णय प्राधिकारी को सूचित करेगा।
(15) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश की एक प्रति क्षेत्राधिकार आयुक्त या उसके द्वारा इस संबंध में नामित प्राधिकारी तथा क्षेत्राधिकार राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त या उसके द्वारा इस संबंध में नामित प्राधिकारी को भी भेजी जाएगी।
(16) इस धारा के अधीन पारित प्रत्येक आदेश, धारा 108 या धारा 113 या धारा 117 या धारा 118 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अंतिम और पक्षों पर बाध्यकारी होगा।
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