BNSS 207अध्याय XIV · Jurisdiction of the Criminal Courts in Inquiries and Trialsपहले CRPC 187बदलाव हुआ
धारा 207 · स्थानीय अधिकार क्षेत्र से बाहर किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण हो कि किसी व्यक्ति ने अपने स्थानीय अधिकार क्षेत्र के भीतर, ऐसे अधिकार क्षेत्र के बाहर (चाहे भारत के भीतर हो या बाहर) कोई ऐसा अपराध किया है, जिसकी धारा 197 से 205 (दोनों सहित) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधानों के तहत उस अधिकार क्षेत्र के भीतर जांच या मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, लेकिन उस समय लागू किसी कानून के तहत भारत में विचारणीय है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट उस अपराध की जांच इस प्रकार कर सकता है मानो वह उस स्थानीय अधिकार क्षेत्र के भीतर किया गया हो और ऐसे व्यक्ति को इस धारा में पूर्व निर्धारित तरीके से अपने समक्ष उपस्थित होने के लिए बाध्य कर सकता है, और ऐसे व्यक्ति को उस मजिस्ट्रेट के पास भेज सकता है जिसे ऐसे अपराध की जांच या मुकदमा चलाने का अधिकार क्षेत्र प्राप्त है, या, यदि ऐसा अपराध मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है और ऐसा व्यक्ति इस धारा के तहत कार्य कर रहे मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार जमानत देने के लिए तैयार और इच्छुक है, तो ऐसे अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए बांड या जमानत बांड ले सकता है।
(2) जब एक से अधिक मजिस्ट्रेटों को ऐसा अधिकार प्राप्त हो और इस धारा के तहत कार्य करने वाला मजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट न हो पाए कि ऐसे व्यक्ति को किस मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजा जाना चाहिए या उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए, तो मामला उच्च न्यायालय के आदेशों के लिए रिपोर्ट किया जाएगा।
(2) जब एक से अधिक मजिस्ट्रेटों को ऐसा अधिकार प्राप्त हो और इस धारा के तहत कार्य करने वाला मजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट न हो पाए कि ऐसे व्यक्ति को किस मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजा जाना चाहिए या उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए, तो मामला उच्च न्यायालय के आदेशों के लिए रिपोर्ट किया जाएगा।
पुराने कानून में
BNSS 207CRPC 187
187. Power to issue summons or warrant for offence committed beyond local jurisdiction.
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