Copyright Act 79अध्याय XV · Miscellaneous
धारा 79 · निरसन, व्यावृत्तियां और अंतःकालीन उपबंध
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम, 1914 (1914 का 3) और यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामें द्वारा पारित तथा भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम, 1914 द्वारा भारत में उसके लागू होने में यथा उपांतरित कापीराइट ऐक्ट, 1911 एतद्द्वारा निरसित किए जाते हैं ।
(2) जहां किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व कोई ऐसा कार्य किया है जिससे उसने किसी कृति के ऐसी रीति से जो उस समय विधिपूर्ण थी, पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण के सम्बन्ध में अथवा किसी कृति के पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण के प्रयोजन के लिए या उस दृष्टि से उस समय जबकि ऐसा पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण विधिपूर्ण होता, यदि यह अधिनियम प्रवृत्त न हुआ होता, कोई व्यय या दायित्व उपगत किए हैं, वहां इस धारा की कोई बात ऐसे कार्य के सम्बन्ध में या उससे उत्पन्न किन्हीं अधिकारों या हितों को जो उक्त तारीख को अस्तित्व में और मूल्यवान हों तब के सिवाय न तो घटाएगी और न उन्हें हानि पहुंचाएगी जबकि वह व्यक्ति जो इस अधिनियम के आधार से ऐसे पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण को निर्बंधित करने का हकदार हो जाता है ऐसा प्रतिकर, जैसा करार के अभाव में प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड द्वारा अवधारित किया जाए, संदत्त करने के लिए, सहमत हो जाता है ।
(3) इस अधिनियम के आधार पर कोई प्रतिलिप्यधिकार किसी ऐसी कृति में अस्तित्व में नहीं आएगा जिसमें प्रतिलिप्यधिकार उपधारा (1) द्वारा निरसित किसी अधिनियम के अधीन इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पूर्व अस्तित्व में नहीं था ।
(4) जहां इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पहले किसी कृति में प्रतिलिप्यधिकार अस्तित्व में था, वहां ऐसे प्रतिलिप्यधिकार को समाविष्ट करने वाले अधिकार, ऐसे प्रारम्भ की तारीख से वे अधिकार होंगे जो कृतियों के उन वर्गों के सम्बन्ध में, जिनमें ऐसी कृति आती है, धारा 14 में विनिर्दिष्ट है, और जहां उस धारा द्वारा कोई नए अधिकार प्रदत्त किए गए हैं वहां ऐसे अधिकारों का स्वामी, -
(क) किसी ऐसी दशा में जिसमें कृति में प्रतिलिप्यधिकार इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व पूर्णतः समनुदिष्ट था, समनुदेशिती या उसका हित में उत्तराधिकारी होगा;
(ख) किसी अन्य दशा में, वह व्यक्ति होगा जो उपधारा (1) द्वारा निरसित किसी अधिनियम के अधीन उस कृति में प्रतिलिप्यधिकार का प्रथम स्वामी था या उसके विधिक प्रतिनिधि होंगे ।
(5) इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, जहां कोई व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पूर्व किसी कृति में प्रतिलिप्यधिकार का या ऐसे प्रतिलिप्यधिकार में किसी अधिकार का या ऐसे किसी अधिकार में किसी हित का हकदार है वहां वह ऐसे अधिकार या हित का हकदार उस कालावधि तक बना रहेगा जिस तक कि वह उसका हकदार होता यदि यह अधिनियम प्रवृत्त न हुआ होता ।
(6) इस अधिनियम की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह इसके प्रारम्भ से पूर्व किए गए किसी कार्य को प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन बनाती है यदि ऐसा कार्य अन्यथा ऐसा अतिलंघन न हुआ होता ।
(7) इस धारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस धारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह निरसनों के प्रभावों की बाबत साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) के लागू होने को प्रभावित करती है ।
(2) जहां किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व कोई ऐसा कार्य किया है जिससे उसने किसी कृति के ऐसी रीति से जो उस समय विधिपूर्ण थी, पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण के सम्बन्ध में अथवा किसी कृति के पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण के प्रयोजन के लिए या उस दृष्टि से उस समय जबकि ऐसा पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण विधिपूर्ण होता, यदि यह अधिनियम प्रवृत्त न हुआ होता, कोई व्यय या दायित्व उपगत किए हैं, वहां इस धारा की कोई बात ऐसे कार्य के सम्बन्ध में या उससे उत्पन्न किन्हीं अधिकारों या हितों को जो उक्त तारीख को अस्तित्व में और मूल्यवान हों तब के सिवाय न तो घटाएगी और न उन्हें हानि पहुंचाएगी जबकि वह व्यक्ति जो इस अधिनियम के आधार से ऐसे पुनरुत्पादन या प्रस्तुतीकरण को निर्बंधित करने का हकदार हो जाता है ऐसा प्रतिकर, जैसा करार के अभाव में प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड द्वारा अवधारित किया जाए, संदत्त करने के लिए, सहमत हो जाता है ।
(3) इस अधिनियम के आधार पर कोई प्रतिलिप्यधिकार किसी ऐसी कृति में अस्तित्व में नहीं आएगा जिसमें प्रतिलिप्यधिकार उपधारा (1) द्वारा निरसित किसी अधिनियम के अधीन इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पूर्व अस्तित्व में नहीं था ।
(4) जहां इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पहले किसी कृति में प्रतिलिप्यधिकार अस्तित्व में था, वहां ऐसे प्रतिलिप्यधिकार को समाविष्ट करने वाले अधिकार, ऐसे प्रारम्भ की तारीख से वे अधिकार होंगे जो कृतियों के उन वर्गों के सम्बन्ध में, जिनमें ऐसी कृति आती है, धारा 14 में विनिर्दिष्ट है, और जहां उस धारा द्वारा कोई नए अधिकार प्रदत्त किए गए हैं वहां ऐसे अधिकारों का स्वामी, -
(क) किसी ऐसी दशा में जिसमें कृति में प्रतिलिप्यधिकार इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व पूर्णतः समनुदिष्ट था, समनुदेशिती या उसका हित में उत्तराधिकारी होगा;
(ख) किसी अन्य दशा में, वह व्यक्ति होगा जो उपधारा (1) द्वारा निरसित किसी अधिनियम के अधीन उस कृति में प्रतिलिप्यधिकार का प्रथम स्वामी था या उसके विधिक प्रतिनिधि होंगे ।
(5) इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, जहां कोई व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पूर्व किसी कृति में प्रतिलिप्यधिकार का या ऐसे प्रतिलिप्यधिकार में किसी अधिकार का या ऐसे किसी अधिकार में किसी हित का हकदार है वहां वह ऐसे अधिकार या हित का हकदार उस कालावधि तक बना रहेगा जिस तक कि वह उसका हकदार होता यदि यह अधिनियम प्रवृत्त न हुआ होता ।
(6) इस अधिनियम की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह इसके प्रारम्भ से पूर्व किए गए किसी कार्य को प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन बनाती है यदि ऐसा कार्य अन्यथा ऐसा अतिलंघन न हुआ होता ।
(7) इस धारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस धारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह निरसनों के प्रभावों की बाबत साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) के लागू होने को प्रभावित करती है ।
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