Electricity Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम के अंतर्गत,--
(1) "अपीलीय न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 110 के अधीन स्थापित विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण से है;
(2) "नियुक्त तिथि" से तात्पर्य ऐसी तिथि से है जिसे केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा नियुक्त कर सकती है;
(3) "आपूर्ति क्षेत्र" से तात्पर्य उस क्षेत्र से है जिसके भीतर वितरण लाइसेंसधारी को उसके लाइसेंस द्वारा बिजली की आपूर्ति करने के लिए अधिकृत किया गया है;
(4) "उपयुक्त आयोग" से तात्पर्य धारा 76 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय विनियामक आयोग या धारा 82 में निर्दिष्ट राज्य विनियामक आयोग या धारा 83 में निर्दिष्ट संयुक्त आयोग से है, जैसा भी मामला हो;
(5) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है,--
(क) केंद्र सरकार,--
(i) किसी ऐसी उत्पादन कंपनी के संबंध में जो पूर्णतः या आंशिक रूप से उसके स्वामित्व में हो;
(ii) अंतर-राज्यीय विद्युत उत्पादन, पारेषण, व्यापार या आपूर्ति के संबंध में तथा किसी खान, तेल क्षेत्र, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाई अड्डे, टेलीग्राफ, प्रसारण स्टेशन और रक्षा कार्यों, गोदी, परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठानों के संबंध में;
(iii) राष्ट्रीय लोड डिस्पैच सेंटर और क्षेत्रीय लोड डिस्पैच सेंटर के संबंध में;
(iv) इसके स्वामित्व वाली या इसके नियंत्रण में किसी भी कार्य या विद्युत प्रतिष्ठान के संबंध में;
(ख) किसी अन्य मामले में, इस अधिनियम के अधीन अधिकार क्षेत्र रखने वाली राज्य सरकार;
(6) "प्राधिकरण" से तात्पर्य धारा 70 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से है;
(7) "बोर्ड" से तात्पर्य राज्य विद्युत बोर्ड से है, जिसका गठन इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (54 ऑफ 1948) की धारा 5 की उपधारा (1) के तहत किया गया हो;
(8) "कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट" से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा मुख्यतः अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली उत्पन्न करने हेतु स्थापित विद्युत संयंत्र से है तथा इसमें किसी सहकारी समिति या व्यक्तियों के संघ द्वारा मुख्यतः ऐसी सहकारी समिति या संघ के सदस्यों के उपयोग के लिए बिजली उत्पन्न करने हेतु स्थापित विद्युत संयंत्र भी शामिल है;
(9) "केंद्रीय आयोग" से तात्पर्य धारा 76 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग से है;
(10) "केंद्रीय पारेषण उपयोगिता" से तात्पर्य किसी भी सरकारी कंपनी से है जिसे केंद्र सरकार धारा 38 की उपधारा (1) के तहत अधिसूचित कर सकती है;
(11) "अध्यक्ष" से तात्पर्य प्राधिकरण या उपयुक्त आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से है, जैसा भी मामला हो;
(12) "सह-उत्पादन" का अर्थ है एक ऐसी प्रक्रिया जो एक साथ दो या दो से अधिक उपयोगी ऊर्जा (बिजली सहित) का उत्पादन करती है;
(13) "कंपनी" से तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत गठित और पंजीकृत कंपनी से है तथा इसमें केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के तहत कोई निगमित निकाय शामिल है;
(14) "संरक्षण" का अर्थ है बिजली की आपूर्ति और उपयोग में दक्षता में वृद्धि के परिणामस्वरूप बिजली की खपत में कोई कमी;
(15) "उपभोक्ता" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसे लाइसेंसधारी या सरकार द्वारा या इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत जनता को बिजली की आपूर्ति के व्यवसाय में लगे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली की आपूर्ति की जाती है और इसमें कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल है जिसका परिसर उस समय बिजली प्राप्त करने के उद्देश्य से लाइसेंसधारी, सरकार या ऐसे अन्य व्यक्ति के कार्यों से जुड़ा हुआ है;
(16) "समर्पित पारेषण लाइनें" से तात्पर्य बिंदु-से-बिंदु पारेषण के लिए किसी भी विद्युत आपूर्ति लाइन से है जो धारा 9 में निर्दिष्ट कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट या धारा 10 में निर्दिष्ट जनरेटिंग स्टेशन की विद्युत लाइनों या विद्युत संयंत्रों को किसी भी पारेषण लाइन या उप-स्टेशन, या जनरेटिंग स्टेशन, या लोड सेंटर से जोड़ने के उद्देश्य से आवश्यक हैं;
(17) "वितरण लाइसेंसधारी" से तात्पर्य एक लाइसेंसधारी से है जिसे अपने आपूर्ति क्षेत्र में उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति के लिए वितरण प्रणाली संचालित और रखरखाव करने के लिए अधिकृत किया गया है;
(18) "वितरण मुख्य" से तात्पर्य किसी मुख्य भाग के उस हिस्से से है जिससे कोई सेवा लाइन सीधे जुड़ी हुई है, या जुड़ने का इरादा है;
(19) "वितरण प्रणाली" से तात्पर्य पारेषण लाइनों या उत्पादन स्टेशन कनेक्शन पर वितरण बिंदुओं और उपभोक्ताओं की स्थापना के कनेक्शन बिंदु के बीच तारों और संबंधित सुविधाओं की प्रणाली से है;
(20) "विद्युत लाइन" से तात्पर्य किसी भी ऐसी लाइन से है जिसका उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए विद्युत परिवहन के लिए किया जाता है और इसमें शामिल हैं--
(क) ऐसी किसी रेखा के लिए कोई भी सहारा, अर्थात् कोई भी संरचना, मीनार, खंभा या अन्य वस्तु जिसमें, जिस पर, जिसके द्वारा या जिससे ऐसी कोई रेखा समर्थित, वहन या निलंबित है, या हो सकती है; और
(ख) विद्युत परिवहन के उद्देश्य से ऐसी किसी लाइन से जुड़ा कोई उपकरण;
(21) "विद्युत निरीक्षक" से तात्पर्य धारा 162 की उपधारा (1) के अधीन उपयुक्त सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति से है तथा इसमें मुख्य विद्युत निरीक्षक भी शामिल है;
(22) "विद्युत संयंत्र" से तात्पर्य किसी भी संयंत्र, उपकरण, यंत्र या उपकरण या उसके किसी भाग से है जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण या आपूर्ति के लिए किया जाता है या उससे संबंधित है, लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं है--
(क) एक विद्युत लाइन; या
(ख) किसी परिसर को आपूर्ति की गई बिजली की मात्रा का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाने वाला मीटर; या
(ग) उपभोक्ता के नियंत्रण में स्थित विद्युत उपकरण, यंत्र या उपकरण;
(23) "विद्युत" से तात्पर्य विद्युत ऊर्जा से है--
(क) किसी भी उद्देश्य के लिए उत्पन्न, प्रेषित, आपूर्ति या व्यापार किया गया; या
(ख) संदेश भेजने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया हो;
(24) "विद्युत आपूर्ति संहिता" से तात्पर्य धारा 50 के अंतर्गत निर्दिष्ट विद्युत आपूर्ति संहिता से है;
(25) "विद्युत प्रणाली" से तात्पर्य किसी उत्पादन कंपनी या लाइसेंसधारी के नियंत्रण में स्थित ऐसी प्रणाली से है, जिसमें एक या अधिक विशेषताएं हों--
(क) उत्पादन स्टेशन; या
(ख) पारेषण लाइनें; या
(ग) विद्युत लाइनें और उप-स्टेशन,
और जब इसका प्रयोग किसी राज्य या संघ के संदर्भ में किया जाता है, तो इसका तात्पर्य उसके क्षेत्रों के भीतर की संपूर्ण विद्युत प्रणाली से है;
(26) "विद्युत व्यापारी" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे धारा 12 के अंतर्गत विद्युत व्यापार करने का लाइसेंस दिया गया है;
(27) "फ्रेंचाइजी" से तात्पर्य वितरण लाइसेंसधारी द्वारा आपूर्ति क्षेत्र के भीतर किसी विशेष क्षेत्र में उसकी ओर से बिजली वितरित करने के लिए अधिकृत व्यक्ति से है;
(28) "उत्पादन कंपनी" से तात्पर्य किसी कंपनी या निगमित निकाय या संघ या व्यक्तियों के निकाय से है, चाहे निगमित हो या नहीं, या कृत्रिम कानूनी व्यक्ति, जो किसी उत्पादन स्टेशन का मालिक हो या उसका संचालन करता हो या उसका रखरखाव करता हो;
(29) "उत्पन्न करना" का अर्थ है किसी परिसर को आपूर्ति देने या आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से किसी उत्पादन स्टेशन से बिजली का उत्पादन करना;
(30) "उत्पादन केंद्र" या "केंद्र" से तात्पर्य विद्युत उत्पादन के लिए किसी भी केंद्र से है, जिसमें स्टेप-अप ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर, स्विच यार्ड, केबल या अन्य सहायक उपकरण सहित कोई भी भवन और संयंत्र, यदि कोई हो, जो उस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है और उसका स्थल; एक स्थल जिसका उपयोग उत्पादन केंद्र के लिए किया जाना है, और उत्पादन केंद्र के परिचालन कर्मचारियों के आवास के लिए उपयोग किया जाने वाला कोई भी भवन, और जहां जल-शक्ति द्वारा विद्युत उत्पन्न की जाती है, उसमें पेनस्टॉक, हेड और टेल वर्क्स, मुख्य और नियामक जलाशय, बांध और अन्य जल-कार्य शामिल हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में इसमें कोई उप-केंद्र शामिल नहीं है;
(31) "सरकारी कंपनी" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 617 में दिया गया है;
(32) "ग्रिड" से तात्पर्य परस्पर जुड़े ट्रांसमिशन लाइनों, सबस्टेशन और जनरेटिंग प्लांटों की उच्च वोल्टेज बैकबोन प्रणाली से है;
(33) "ग्रिड कोड" से तात्पर्य केंद्रीय आयोग द्वारा धारा 79 की उपधारा (1) के खंड (h) के अधीन निर्दिष्ट ग्रिड कोड से है;
(34) "ग्रिड मानक" से तात्पर्य प्राधिकरण द्वारा धारा 73 के खंड (घ) के अंतर्गत निर्दिष्ट ग्रिड मानकों से है;
(35) "उच्च वोल्टेज लाइन" से तात्पर्य ऐसी विद्युत लाइन या केबल से है जिसका नाममात्र वोल्टेज प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(36) "अंतर-राज्यीय संचरण प्रणाली" में शामिल है--
(i) किसी राज्य के क्षेत्र से दूसरे राज्य के क्षेत्र तक मुख्य पारेषण लाइन के माध्यम से बिजली पहुंचाने की कोई प्रणाली;
(ii) किसी मध्यवर्ती राज्य के क्षेत्र में विद्युत का परिवहन तथा साथ ही राज्य के भीतर विद्युत का परिवहन जो विद्युत के ऐसे अंतर-राज्यीय संचरण के लिए आकस्मिक है;
(iii) किसी राज्य के क्षेत्र के भीतर किसी केंद्रीय पारेषण उपयोगिता द्वारा निर्मित, स्वामित्व वाली, संचालित, अनुरक्षित या नियंत्रित प्रणाली पर विद्युत का पारेषण;
(37) 'अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली' से तात्पर्य अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के अलावा विद्युत संचरण के लिए किसी भी प्रणाली से है;
(38) 'लाइसेंस' से तात्पर्य धारा 14 के तहत प्रदत्त लाइसेंस से है;
(39) "लाइसेंसधारी" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे धारा 14 के अंतर्गत लाइसेंस प्रदान किया गया है;
(40) "लाइन" से तात्पर्य किसी भी तार, केबल, ट्यूब, पाइप, इन्सुलेटर, कंडक्टर या अन्य समान वस्तु (जिसमें उसका आवरण या कोटिंग शामिल है) से है जिसे बिजली ले जाने के लिए डिज़ाइन या अनुकूलित किया गया है और इसमें कोई भी लाइन शामिल है जो ऐसी किसी लाइन को घेरती है या सहारा देती है, या उससे घिरी हुई है या उसे सहारा देती है या उसके निकट स्थापित है, या उसके साथ मिलकर सहारा दी जाती है, ले जाई जाती है या निलंबित की जाती है;
(41) "स्थानीय प्राधिकरण" से तात्पर्य किसी नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम, ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर गठित पंचायत, बंदरगाह आयुक्तों के निकाय या अन्य प्राधिकरण से है जो विधिवत रूप से किसी क्षेत्र या स्थानीय निधि के नियंत्रण या प्रबंधन के लिए अधिकृत है या संघ या किसी राज्य सरकार द्वारा सौंपा गया है;
(42) "मुख्य" से तात्पर्य किसी भी विद्युत आपूर्ति लाइन से है जिसके माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है, या आपूर्ति करने का इरादा है;
(43) "सदस्य" से तात्पर्य उपयुक्त आयोग या प्राधिकरण या संयुक्त आयोग, या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो, के सदस्य से है, और इसमें ऐसे आयोग या प्राधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष भी शामिल हैं;
(44) "राष्ट्रीय विद्युत योजना" से तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन अधिसूचित राष्ट्रीय विद्युत योजना से है;
(45) "राष्ट्रीय लोड डिस्पैच केंद्र" से तात्पर्य धारा 26 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केंद्र से है;
(46) "अधिसूचना" का अर्थ आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना है तथा "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(47) "खुली पहुँच" का अर्थ है उपयुक्त आयोग द्वारा निर्दिष्ट विनियमों के अनुसार किसी लाइसेंसधारी या उपभोक्ता या उत्पादन में लगे व्यक्ति द्वारा पारेषण लाइनों या वितरण प्रणाली या ऐसी लाइनों या प्रणाली से संबंधित सुविधाओं के उपयोग के लिए गैर-भेदभावपूर्ण प्रावधान;
(48) "ओवरहेड लाइन" से तात्पर्य एक विद्युत लाइन से है जो जमीन के ऊपर और खुले में रखी जाती है लेकिन इसमें कर्षण प्रणाली की लाइव रेल शामिल नहीं होती है;
(49) "व्यक्ति" में कोई कंपनी या निगमित निकाय या संघ या व्यक्तियों का निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, या कृत्रिम कानूनी व्यक्ति शामिल होगा;
(50) "विद्युत प्रणाली" से तात्पर्य विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और आपूर्ति के सभी पहलुओं से है और इसमें निम्नलिखित में से एक या अधिक शामिल हैं, अर्थात्:--
(क) उत्पादन केंद्र;
(ख) पारेषण या मुख्य पारेषण लाइनें;
(ग) उप-स्टेशन;
(घ) टाई-लाइनें;
(ई) माल प्रेषण गतिविधियाँ;
(f) मुख्य या वितरण मुख्य;
(जी) विद्युत आपूर्ति लाइनें;
(h) ओवरहेड लाइनें;
(i) सेवा लाइनें;
(जे) कार्य;
(51) "परिसर" में कोई भूमि, भवन या संरचना शामिल है;
(52) "निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत उपयुक्त सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(53) "सार्वजनिक दीपक" से तात्पर्य किसी सड़क को रोशन करने के लिए प्रयुक्त विद्युत दीपक से है;
(54) "वास्तविक समय संचालन" का अर्थ है किसी दिए गए समय पर की जाने वाली कार्रवाई जिस पर विद्युत प्रणाली के बारे में जानकारी संबंधित लोड डिस्पैच सेंटर को उपलब्ध कराई जाती है;
(55) "क्षेत्रीय विद्युत समिति" से तात्पर्य किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत प्रणालियों के एकीकृत संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संकल्प द्वारा स्थापित समिति से है;
(56) "क्षेत्रीय लोड प्रेषण केंद्र" से तात्पर्य धारा 27 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केंद्र से है;
(57) "विनियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों से है;
(58) "निरस्त कानून" से तात्पर्य भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9), विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) और विद्युत नियामक आयोग अधिनियम, 1998 (1998 का 14) से है, जिसे धारा 185 द्वारा निरस्त कर दिया गया है;
(59) "नियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों से है;
(60) "अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम की अनुसूची से है;
(61) "सर्विस-लाइन" से तात्पर्य किसी भी विद्युत आपूर्ति-लाइन से है जिसके माध्यम से विद्युत की आपूर्ति की जाती है, या आपूर्ति करने का इरादा है--
(क) किसी एक उपभोक्ता को वितरण मुख्य लाइन से या वितरण लाइसेंसधारी के परिसर से सीधे; या
(ख) वितरण मुख्य पाइपलाइन से एक ही परिसर में या वितरण मुख्य पाइपलाइन के एक ही बिंदु से आपूर्ति किए गए निकटवर्ती परिसरों में उपभोक्ताओं के एक समूह को;
(62) 'निर्दिष्ट' का अर्थ है, इस अधिनियम के अंतर्गत उपयुक्त आयोग या प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा निर्दिष्ट;
(63) "स्टैंड अलोन सिस्टम" से तात्पर्य ग्रिड से कनेक्शन के बिना किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में बिजली उत्पन्न करने और बिजली वितरित करने के लिए स्थापित विद्युत प्रणाली से है;
(64) "राज्य आयोग" से तात्पर्य धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन गठित राज्य विद्युत विनियामक आयोग से है तथा इसमें धारा 83 की उपधारा (1) के अधीन गठित संयुक्त आयोग भी शामिल है;
(65) "राज्य ग्रिड कोड" से तात्पर्य धारा 86 की उपधारा (1) के खंड (h) के अधीन निर्दिष्ट राज्य ग्रिड कोड से है;
(66) "राज्य लोड प्रेषण केंद्र" से तात्पर्य धारा 31 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केंद्र से है;
(67) "राज्य पारेषण उपयोगिता" से तात्पर्य बोर्ड या राज्य सरकार द्वारा धारा 39 की उपधारा (1) के तहत निर्दिष्ट सरकारी कंपनी से है;
(68) "सड़क" में कोई भी मार्ग, सड़क, गली, चौक, आंगन, गली, मार्ग या खुला स्थान शामिल है, चाहे वह मुख्य मार्ग हो या नहीं, जिस पर जनता को आने-जाने का अधिकार हो, और साथ ही किसी सार्वजनिक पुल या पुल के ऊपर का सड़क मार्ग और पैदल मार्ग;
(69) "उप-स्टेशन" का अर्थ विद्युत संचरण या वितरण के लिए विद्युत को रूपांतरित या परिवर्तित करने वाला स्टेशन है तथा इसमें ट्रांसफार्मर, कन्वर्टर, स्विच-गियर, कैपेसिटर, सिंक्रोनस कंडेंसर, संरचनाएं, केबल और अन्य सहायक उपकरण तथा उस उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले भवन और उसका स्थल शामिल हैं;
(70) विद्युत के संबंध में "आपूर्ति" का अर्थ है लाइसेंसधारी या उपभोक्ता को विद्युत की बिक्री;
(71) "व्यापार" का अर्थ है पुनर्विक्रय के लिए बिजली की खरीद और "व्यापार" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(72) "संचरण लाइनें" का अर्थ है सभी उच्च दाब केबल और ओवरहेड लाइनें (जो किसी लाइसेंसधारी की वितरण प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा नहीं हैं) जो एक उत्पादन स्टेशन से दूसरे उत्पादन स्टेशन या उप-स्टेशन तक बिजली संचारित करती हैं, साथ ही ऐसे केबल या ओवरहेड लाइनों के नियंत्रण के लिए आवश्यक और उपयोग किए जाने वाले सभी स्टेप-अप और स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर और अन्य कार्य, और ऐसे भवन या उसका भाग जो ऐसे ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर और अन्य कार्यों को रखने के लिए आवश्यक हो;
(73) "संचरण लाइसेंसधारी" से तात्पर्य संचरण लाइनें स्थापित करने या संचालित करने के लिए अधिकृत लाइसेंसधारी से है;
(74) "संचारण" का अर्थ पारेषण लाइनों के माध्यम से बिजली का परिवहन है और "संचारण" अभिव्यक्ति को तदनुसार समझा जाएगा;
(75) "उपयोगिता" से तात्पर्य विद्युत लाइनों या विद्युत संयंत्र से है, और इसमें इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत उत्पादन कंपनी या लाइसेंसधारी के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति से संबंधित सभी भूमि, भवन, कार्य और उससे जुड़ी सामग्री शामिल है;
(76) "व्हीलिंग" का अर्थ है वह संचालन जिसके द्वारा किसी पारेषण लाइसेंसधारी या वितरण लाइसेंसधारी की वितरण प्रणाली और संबद्ध सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति द्वारा धारा 62 के तहत निर्धारित शुल्कों के भुगतान पर बिजली के परिवहन के लिए किया जाता है;
(77) "कार्य" में विद्युत लाइन, और कोई भी भवन, संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और किसी भी प्रकार की कोई अन्य वस्तु शामिल है जो जनता को बिजली संचारित करने, वितरित करने या आपूर्ति करने के लिए और इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत दिए गए लाइसेंस या स्वीकृति के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
(1) "अपीलीय न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 110 के अधीन स्थापित विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण से है;
(2) "नियुक्त तिथि" से तात्पर्य ऐसी तिथि से है जिसे केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा नियुक्त कर सकती है;
(3) "आपूर्ति क्षेत्र" से तात्पर्य उस क्षेत्र से है जिसके भीतर वितरण लाइसेंसधारी को उसके लाइसेंस द्वारा बिजली की आपूर्ति करने के लिए अधिकृत किया गया है;
(4) "उपयुक्त आयोग" से तात्पर्य धारा 76 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय विनियामक आयोग या धारा 82 में निर्दिष्ट राज्य विनियामक आयोग या धारा 83 में निर्दिष्ट संयुक्त आयोग से है, जैसा भी मामला हो;
(5) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है,--
(क) केंद्र सरकार,--
(i) किसी ऐसी उत्पादन कंपनी के संबंध में जो पूर्णतः या आंशिक रूप से उसके स्वामित्व में हो;
(ii) अंतर-राज्यीय विद्युत उत्पादन, पारेषण, व्यापार या आपूर्ति के संबंध में तथा किसी खान, तेल क्षेत्र, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाई अड्डे, टेलीग्राफ, प्रसारण स्टेशन और रक्षा कार्यों, गोदी, परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठानों के संबंध में;
(iii) राष्ट्रीय लोड डिस्पैच सेंटर और क्षेत्रीय लोड डिस्पैच सेंटर के संबंध में;
(iv) इसके स्वामित्व वाली या इसके नियंत्रण में किसी भी कार्य या विद्युत प्रतिष्ठान के संबंध में;
(ख) किसी अन्य मामले में, इस अधिनियम के अधीन अधिकार क्षेत्र रखने वाली राज्य सरकार;
(6) "प्राधिकरण" से तात्पर्य धारा 70 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से है;
(7) "बोर्ड" से तात्पर्य राज्य विद्युत बोर्ड से है, जिसका गठन इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (54 ऑफ 1948) की धारा 5 की उपधारा (1) के तहत किया गया हो;
(8) "कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट" से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा मुख्यतः अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली उत्पन्न करने हेतु स्थापित विद्युत संयंत्र से है तथा इसमें किसी सहकारी समिति या व्यक्तियों के संघ द्वारा मुख्यतः ऐसी सहकारी समिति या संघ के सदस्यों के उपयोग के लिए बिजली उत्पन्न करने हेतु स्थापित विद्युत संयंत्र भी शामिल है;
(9) "केंद्रीय आयोग" से तात्पर्य धारा 76 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग से है;
(10) "केंद्रीय पारेषण उपयोगिता" से तात्पर्य किसी भी सरकारी कंपनी से है जिसे केंद्र सरकार धारा 38 की उपधारा (1) के तहत अधिसूचित कर सकती है;
(11) "अध्यक्ष" से तात्पर्य प्राधिकरण या उपयुक्त आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से है, जैसा भी मामला हो;
(12) "सह-उत्पादन" का अर्थ है एक ऐसी प्रक्रिया जो एक साथ दो या दो से अधिक उपयोगी ऊर्जा (बिजली सहित) का उत्पादन करती है;
(13) "कंपनी" से तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत गठित और पंजीकृत कंपनी से है तथा इसमें केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के तहत कोई निगमित निकाय शामिल है;
(14) "संरक्षण" का अर्थ है बिजली की आपूर्ति और उपयोग में दक्षता में वृद्धि के परिणामस्वरूप बिजली की खपत में कोई कमी;
(15) "उपभोक्ता" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसे लाइसेंसधारी या सरकार द्वारा या इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत जनता को बिजली की आपूर्ति के व्यवसाय में लगे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली की आपूर्ति की जाती है और इसमें कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल है जिसका परिसर उस समय बिजली प्राप्त करने के उद्देश्य से लाइसेंसधारी, सरकार या ऐसे अन्य व्यक्ति के कार्यों से जुड़ा हुआ है;
(16) "समर्पित पारेषण लाइनें" से तात्पर्य बिंदु-से-बिंदु पारेषण के लिए किसी भी विद्युत आपूर्ति लाइन से है जो धारा 9 में निर्दिष्ट कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट या धारा 10 में निर्दिष्ट जनरेटिंग स्टेशन की विद्युत लाइनों या विद्युत संयंत्रों को किसी भी पारेषण लाइन या उप-स्टेशन, या जनरेटिंग स्टेशन, या लोड सेंटर से जोड़ने के उद्देश्य से आवश्यक हैं;
(17) "वितरण लाइसेंसधारी" से तात्पर्य एक लाइसेंसधारी से है जिसे अपने आपूर्ति क्षेत्र में उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति के लिए वितरण प्रणाली संचालित और रखरखाव करने के लिए अधिकृत किया गया है;
(18) "वितरण मुख्य" से तात्पर्य किसी मुख्य भाग के उस हिस्से से है जिससे कोई सेवा लाइन सीधे जुड़ी हुई है, या जुड़ने का इरादा है;
(19) "वितरण प्रणाली" से तात्पर्य पारेषण लाइनों या उत्पादन स्टेशन कनेक्शन पर वितरण बिंदुओं और उपभोक्ताओं की स्थापना के कनेक्शन बिंदु के बीच तारों और संबंधित सुविधाओं की प्रणाली से है;
(20) "विद्युत लाइन" से तात्पर्य किसी भी ऐसी लाइन से है जिसका उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए विद्युत परिवहन के लिए किया जाता है और इसमें शामिल हैं--
(क) ऐसी किसी रेखा के लिए कोई भी सहारा, अर्थात् कोई भी संरचना, मीनार, खंभा या अन्य वस्तु जिसमें, जिस पर, जिसके द्वारा या जिससे ऐसी कोई रेखा समर्थित, वहन या निलंबित है, या हो सकती है; और
(ख) विद्युत परिवहन के उद्देश्य से ऐसी किसी लाइन से जुड़ा कोई उपकरण;
(21) "विद्युत निरीक्षक" से तात्पर्य धारा 162 की उपधारा (1) के अधीन उपयुक्त सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति से है तथा इसमें मुख्य विद्युत निरीक्षक भी शामिल है;
(22) "विद्युत संयंत्र" से तात्पर्य किसी भी संयंत्र, उपकरण, यंत्र या उपकरण या उसके किसी भाग से है जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण या आपूर्ति के लिए किया जाता है या उससे संबंधित है, लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं है--
(क) एक विद्युत लाइन; या
(ख) किसी परिसर को आपूर्ति की गई बिजली की मात्रा का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाने वाला मीटर; या
(ग) उपभोक्ता के नियंत्रण में स्थित विद्युत उपकरण, यंत्र या उपकरण;
(23) "विद्युत" से तात्पर्य विद्युत ऊर्जा से है--
(क) किसी भी उद्देश्य के लिए उत्पन्न, प्रेषित, आपूर्ति या व्यापार किया गया; या
(ख) संदेश भेजने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया हो;
(24) "विद्युत आपूर्ति संहिता" से तात्पर्य धारा 50 के अंतर्गत निर्दिष्ट विद्युत आपूर्ति संहिता से है;
(25) "विद्युत प्रणाली" से तात्पर्य किसी उत्पादन कंपनी या लाइसेंसधारी के नियंत्रण में स्थित ऐसी प्रणाली से है, जिसमें एक या अधिक विशेषताएं हों--
(क) उत्पादन स्टेशन; या
(ख) पारेषण लाइनें; या
(ग) विद्युत लाइनें और उप-स्टेशन,
और जब इसका प्रयोग किसी राज्य या संघ के संदर्भ में किया जाता है, तो इसका तात्पर्य उसके क्षेत्रों के भीतर की संपूर्ण विद्युत प्रणाली से है;
(26) "विद्युत व्यापारी" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे धारा 12 के अंतर्गत विद्युत व्यापार करने का लाइसेंस दिया गया है;
(27) "फ्रेंचाइजी" से तात्पर्य वितरण लाइसेंसधारी द्वारा आपूर्ति क्षेत्र के भीतर किसी विशेष क्षेत्र में उसकी ओर से बिजली वितरित करने के लिए अधिकृत व्यक्ति से है;
(28) "उत्पादन कंपनी" से तात्पर्य किसी कंपनी या निगमित निकाय या संघ या व्यक्तियों के निकाय से है, चाहे निगमित हो या नहीं, या कृत्रिम कानूनी व्यक्ति, जो किसी उत्पादन स्टेशन का मालिक हो या उसका संचालन करता हो या उसका रखरखाव करता हो;
(29) "उत्पन्न करना" का अर्थ है किसी परिसर को आपूर्ति देने या आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से किसी उत्पादन स्टेशन से बिजली का उत्पादन करना;
(30) "उत्पादन केंद्र" या "केंद्र" से तात्पर्य विद्युत उत्पादन के लिए किसी भी केंद्र से है, जिसमें स्टेप-अप ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर, स्विच यार्ड, केबल या अन्य सहायक उपकरण सहित कोई भी भवन और संयंत्र, यदि कोई हो, जो उस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है और उसका स्थल; एक स्थल जिसका उपयोग उत्पादन केंद्र के लिए किया जाना है, और उत्पादन केंद्र के परिचालन कर्मचारियों के आवास के लिए उपयोग किया जाने वाला कोई भी भवन, और जहां जल-शक्ति द्वारा विद्युत उत्पन्न की जाती है, उसमें पेनस्टॉक, हेड और टेल वर्क्स, मुख्य और नियामक जलाशय, बांध और अन्य जल-कार्य शामिल हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में इसमें कोई उप-केंद्र शामिल नहीं है;
(31) "सरकारी कंपनी" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 617 में दिया गया है;
(32) "ग्रिड" से तात्पर्य परस्पर जुड़े ट्रांसमिशन लाइनों, सबस्टेशन और जनरेटिंग प्लांटों की उच्च वोल्टेज बैकबोन प्रणाली से है;
(33) "ग्रिड कोड" से तात्पर्य केंद्रीय आयोग द्वारा धारा 79 की उपधारा (1) के खंड (h) के अधीन निर्दिष्ट ग्रिड कोड से है;
(34) "ग्रिड मानक" से तात्पर्य प्राधिकरण द्वारा धारा 73 के खंड (घ) के अंतर्गत निर्दिष्ट ग्रिड मानकों से है;
(35) "उच्च वोल्टेज लाइन" से तात्पर्य ऐसी विद्युत लाइन या केबल से है जिसका नाममात्र वोल्टेज प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(36) "अंतर-राज्यीय संचरण प्रणाली" में शामिल है--
(i) किसी राज्य के क्षेत्र से दूसरे राज्य के क्षेत्र तक मुख्य पारेषण लाइन के माध्यम से बिजली पहुंचाने की कोई प्रणाली;
(ii) किसी मध्यवर्ती राज्य के क्षेत्र में विद्युत का परिवहन तथा साथ ही राज्य के भीतर विद्युत का परिवहन जो विद्युत के ऐसे अंतर-राज्यीय संचरण के लिए आकस्मिक है;
(iii) किसी राज्य के क्षेत्र के भीतर किसी केंद्रीय पारेषण उपयोगिता द्वारा निर्मित, स्वामित्व वाली, संचालित, अनुरक्षित या नियंत्रित प्रणाली पर विद्युत का पारेषण;
(37) 'अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली' से तात्पर्य अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के अलावा विद्युत संचरण के लिए किसी भी प्रणाली से है;
(38) 'लाइसेंस' से तात्पर्य धारा 14 के तहत प्रदत्त लाइसेंस से है;
(39) "लाइसेंसधारी" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे धारा 14 के अंतर्गत लाइसेंस प्रदान किया गया है;
(40) "लाइन" से तात्पर्य किसी भी तार, केबल, ट्यूब, पाइप, इन्सुलेटर, कंडक्टर या अन्य समान वस्तु (जिसमें उसका आवरण या कोटिंग शामिल है) से है जिसे बिजली ले जाने के लिए डिज़ाइन या अनुकूलित किया गया है और इसमें कोई भी लाइन शामिल है जो ऐसी किसी लाइन को घेरती है या सहारा देती है, या उससे घिरी हुई है या उसे सहारा देती है या उसके निकट स्थापित है, या उसके साथ मिलकर सहारा दी जाती है, ले जाई जाती है या निलंबित की जाती है;
(41) "स्थानीय प्राधिकरण" से तात्पर्य किसी नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम, ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर गठित पंचायत, बंदरगाह आयुक्तों के निकाय या अन्य प्राधिकरण से है जो विधिवत रूप से किसी क्षेत्र या स्थानीय निधि के नियंत्रण या प्रबंधन के लिए अधिकृत है या संघ या किसी राज्य सरकार द्वारा सौंपा गया है;
(42) "मुख्य" से तात्पर्य किसी भी विद्युत आपूर्ति लाइन से है जिसके माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है, या आपूर्ति करने का इरादा है;
(43) "सदस्य" से तात्पर्य उपयुक्त आयोग या प्राधिकरण या संयुक्त आयोग, या अपीलीय न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो, के सदस्य से है, और इसमें ऐसे आयोग या प्राधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष भी शामिल हैं;
(44) "राष्ट्रीय विद्युत योजना" से तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन अधिसूचित राष्ट्रीय विद्युत योजना से है;
(45) "राष्ट्रीय लोड डिस्पैच केंद्र" से तात्पर्य धारा 26 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केंद्र से है;
(46) "अधिसूचना" का अर्थ आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना है तथा "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(47) "खुली पहुँच" का अर्थ है उपयुक्त आयोग द्वारा निर्दिष्ट विनियमों के अनुसार किसी लाइसेंसधारी या उपभोक्ता या उत्पादन में लगे व्यक्ति द्वारा पारेषण लाइनों या वितरण प्रणाली या ऐसी लाइनों या प्रणाली से संबंधित सुविधाओं के उपयोग के लिए गैर-भेदभावपूर्ण प्रावधान;
(48) "ओवरहेड लाइन" से तात्पर्य एक विद्युत लाइन से है जो जमीन के ऊपर और खुले में रखी जाती है लेकिन इसमें कर्षण प्रणाली की लाइव रेल शामिल नहीं होती है;
(49) "व्यक्ति" में कोई कंपनी या निगमित निकाय या संघ या व्यक्तियों का निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, या कृत्रिम कानूनी व्यक्ति शामिल होगा;
(50) "विद्युत प्रणाली" से तात्पर्य विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और आपूर्ति के सभी पहलुओं से है और इसमें निम्नलिखित में से एक या अधिक शामिल हैं, अर्थात्:--
(क) उत्पादन केंद्र;
(ख) पारेषण या मुख्य पारेषण लाइनें;
(ग) उप-स्टेशन;
(घ) टाई-लाइनें;
(ई) माल प्रेषण गतिविधियाँ;
(f) मुख्य या वितरण मुख्य;
(जी) विद्युत आपूर्ति लाइनें;
(h) ओवरहेड लाइनें;
(i) सेवा लाइनें;
(जे) कार्य;
(51) "परिसर" में कोई भूमि, भवन या संरचना शामिल है;
(52) "निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत उपयुक्त सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(53) "सार्वजनिक दीपक" से तात्पर्य किसी सड़क को रोशन करने के लिए प्रयुक्त विद्युत दीपक से है;
(54) "वास्तविक समय संचालन" का अर्थ है किसी दिए गए समय पर की जाने वाली कार्रवाई जिस पर विद्युत प्रणाली के बारे में जानकारी संबंधित लोड डिस्पैच सेंटर को उपलब्ध कराई जाती है;
(55) "क्षेत्रीय विद्युत समिति" से तात्पर्य किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत प्रणालियों के एकीकृत संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संकल्प द्वारा स्थापित समिति से है;
(56) "क्षेत्रीय लोड प्रेषण केंद्र" से तात्पर्य धारा 27 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केंद्र से है;
(57) "विनियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों से है;
(58) "निरस्त कानून" से तात्पर्य भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9), विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) और विद्युत नियामक आयोग अधिनियम, 1998 (1998 का 14) से है, जिसे धारा 185 द्वारा निरस्त कर दिया गया है;
(59) "नियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों से है;
(60) "अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम की अनुसूची से है;
(61) "सर्विस-लाइन" से तात्पर्य किसी भी विद्युत आपूर्ति-लाइन से है जिसके माध्यम से विद्युत की आपूर्ति की जाती है, या आपूर्ति करने का इरादा है--
(क) किसी एक उपभोक्ता को वितरण मुख्य लाइन से या वितरण लाइसेंसधारी के परिसर से सीधे; या
(ख) वितरण मुख्य पाइपलाइन से एक ही परिसर में या वितरण मुख्य पाइपलाइन के एक ही बिंदु से आपूर्ति किए गए निकटवर्ती परिसरों में उपभोक्ताओं के एक समूह को;
(62) 'निर्दिष्ट' का अर्थ है, इस अधिनियम के अंतर्गत उपयुक्त आयोग या प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा निर्दिष्ट;
(63) "स्टैंड अलोन सिस्टम" से तात्पर्य ग्रिड से कनेक्शन के बिना किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में बिजली उत्पन्न करने और बिजली वितरित करने के लिए स्थापित विद्युत प्रणाली से है;
(64) "राज्य आयोग" से तात्पर्य धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन गठित राज्य विद्युत विनियामक आयोग से है तथा इसमें धारा 83 की उपधारा (1) के अधीन गठित संयुक्त आयोग भी शामिल है;
(65) "राज्य ग्रिड कोड" से तात्पर्य धारा 86 की उपधारा (1) के खंड (h) के अधीन निर्दिष्ट राज्य ग्रिड कोड से है;
(66) "राज्य लोड प्रेषण केंद्र" से तात्पर्य धारा 31 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केंद्र से है;
(67) "राज्य पारेषण उपयोगिता" से तात्पर्य बोर्ड या राज्य सरकार द्वारा धारा 39 की उपधारा (1) के तहत निर्दिष्ट सरकारी कंपनी से है;
(68) "सड़क" में कोई भी मार्ग, सड़क, गली, चौक, आंगन, गली, मार्ग या खुला स्थान शामिल है, चाहे वह मुख्य मार्ग हो या नहीं, जिस पर जनता को आने-जाने का अधिकार हो, और साथ ही किसी सार्वजनिक पुल या पुल के ऊपर का सड़क मार्ग और पैदल मार्ग;
(69) "उप-स्टेशन" का अर्थ विद्युत संचरण या वितरण के लिए विद्युत को रूपांतरित या परिवर्तित करने वाला स्टेशन है तथा इसमें ट्रांसफार्मर, कन्वर्टर, स्विच-गियर, कैपेसिटर, सिंक्रोनस कंडेंसर, संरचनाएं, केबल और अन्य सहायक उपकरण तथा उस उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले भवन और उसका स्थल शामिल हैं;
(70) विद्युत के संबंध में "आपूर्ति" का अर्थ है लाइसेंसधारी या उपभोक्ता को विद्युत की बिक्री;
(71) "व्यापार" का अर्थ है पुनर्विक्रय के लिए बिजली की खरीद और "व्यापार" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(72) "संचरण लाइनें" का अर्थ है सभी उच्च दाब केबल और ओवरहेड लाइनें (जो किसी लाइसेंसधारी की वितरण प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा नहीं हैं) जो एक उत्पादन स्टेशन से दूसरे उत्पादन स्टेशन या उप-स्टेशन तक बिजली संचारित करती हैं, साथ ही ऐसे केबल या ओवरहेड लाइनों के नियंत्रण के लिए आवश्यक और उपयोग किए जाने वाले सभी स्टेप-अप और स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर और अन्य कार्य, और ऐसे भवन या उसका भाग जो ऐसे ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर और अन्य कार्यों को रखने के लिए आवश्यक हो;
(73) "संचरण लाइसेंसधारी" से तात्पर्य संचरण लाइनें स्थापित करने या संचालित करने के लिए अधिकृत लाइसेंसधारी से है;
(74) "संचारण" का अर्थ पारेषण लाइनों के माध्यम से बिजली का परिवहन है और "संचारण" अभिव्यक्ति को तदनुसार समझा जाएगा;
(75) "उपयोगिता" से तात्पर्य विद्युत लाइनों या विद्युत संयंत्र से है, और इसमें इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत उत्पादन कंपनी या लाइसेंसधारी के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति से संबंधित सभी भूमि, भवन, कार्य और उससे जुड़ी सामग्री शामिल है;
(76) "व्हीलिंग" का अर्थ है वह संचालन जिसके द्वारा किसी पारेषण लाइसेंसधारी या वितरण लाइसेंसधारी की वितरण प्रणाली और संबद्ध सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति द्वारा धारा 62 के तहत निर्धारित शुल्कों के भुगतान पर बिजली के परिवहन के लिए किया जाता है;
(77) "कार्य" में विद्युत लाइन, और कोई भी भवन, संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और किसी भी प्रकार की कोई अन्य वस्तु शामिल है जो जनता को बिजली संचारित करने, वितरित करने या आपूर्ति करने के लिए और इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत दिए गए लाइसेंस या स्वीकृति के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
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