Electricity Act 67अध्याय VIII · Works of licensees
धारा 67 · सड़कों, रेलवे लाइनों आदि को खोलने संबंधी प्रावधान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) लाइसेंसधारी समय-समय पर, लेकिन हमेशा अपने लाइसेंस की शर्तों और नियमों के अधीन रहते हुए, अपने आपूर्ति या पारेषण क्षेत्र के भीतर या जब उसके लाइसेंस की शर्तों द्वारा आपूर्ति क्षेत्र के बाहर विद्युत आपूर्ति लाइनें बिछाने या लगाने की अनुमति हो, तो उस क्षेत्र के बाहर निम्नलिखित कार्य कर सकता है:-
(क) किसी सड़क, रेलवे या ट्रामवे की मिट्टी और फुटपाथ को खोलना और तोड़ना;
(ख) किसी सड़क, रेलवे या ट्रामवे में या उसके नीचे किसी सीवर, नाली या सुरंग को खोलना और तोड़ना;
(ग) मुख्य सीवर पाइप के अलावा किसी भी लाइन या कार्य या पाइप की स्थिति में परिवर्तन करना;
(घ) विद्युत लाइनें, विद्युत संयंत्र और अन्य कार्य स्थापित करना;
(ई) उसकी मरम्मत करना, उसमें परिवर्तन करना या उसे हटाना;
(f) विद्युत संचरण या आपूर्ति के लिए आवश्यक अन्य सभी कार्य करना।
(2) उपयुक्त सरकार, इस संबंध में अपने द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा, निर्दिष्ट कर सकती है,--
(क) वे मामले और परिस्थितियाँ जिनमें कार्य संपन्न करने के लिए उपयुक्त सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, स्वामी या अधिभोगी, जैसा भी मामला हो, की लिखित सहमति आवश्यक होगी;
(ख) वह प्राधिकरण जो उन परिस्थितियों में अनुमति प्रदान कर सकता है जहां स्वामी या अधिभोगी कार्यों के निष्पादन पर आपत्ति जताता है;
(ग) लाइसेंसधारी द्वारा कार्य करने से पहले दी जाने वाली सूचना की प्रकृति और अवधि;
(घ) खंड (ग) में निर्दिष्ट सूचना के अनुसार प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने की प्रक्रिया और तरीका;
(ई) इस धारा के अंतर्गत कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों को मुआवजे या किराए का निर्धारण एवं भुगतान;
(f) आपातकालीन स्थिति में किए जाने वाले मरम्मत और कार्य;
(जी) इस धारा के अंतर्गत कुछ कार्यों को संपन्न कराने का स्वामी या अधिभोगी का अधिकार तथा उसके लिए व्यय का भुगतान;
(h) सीवर, पाइप या अन्य विद्युत लाइनों या कार्यों के निकट अन्य कार्यों को करने की प्रक्रिया;
(i) पाइपों, विद्युत लाइनों, विद्युत संयंत्र, टेलीग्राफ लाइनों, सीवर लाइनों, सुरंगों, नालियों आदि की स्थिति में परिवर्तन की प्रक्रिया;
(j) सड़कों, रेलवे, ट्रामवे, सीवर, नालियों या सुरंगों पर किए जाने वाले कार्यों से संबंधित बाड़ लगाने, सुरक्षा व्यवस्था करने, प्रकाश व्यवस्था करने और अन्य सुरक्षा उपायों की प्रक्रिया और उनकी तत्काल बहाली;
(k) ऐसे कार्यों द्वारा सार्वजनिक उपद्रव, पर्यावरणीय क्षति और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को अनावश्यक क्षति से बचाव;
(एल) उन कार्यों को करने की प्रक्रिया जो उपयुक्त सरकार, लाइसेंसधारी या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा मरम्मत योग्य नहीं हैं;
(m) किसी रेल मार्ग, ट्राम मार्ग, जलमार्ग आदि के जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक राशि जमा करने का तरीका;
(n) ऐसे कार्यों से प्रभावित संपत्ति की बहाली और उसके रखरखाव का तरीका;
(ओ) लाइसेंसधारी द्वारा देय मुआवजे की जमा करने और सुरक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया; और
(पी) ऐसे अन्य मामले जो इस धारा के अंतर्गत कार्यों के निर्माण और रखरखाव से संबंधित हों या उनसे उत्पन्न हों।
(3) लाइसेंसधारी, इस धारा और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यथासंभव कम से कम क्षति, हानि और असुविधा उत्पन्न करेगा, और अपने द्वारा या अपने द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति द्वारा उत्पन्न किसी भी क्षति, हानि या असुविधा के लिए पूर्ण क्षतिपूर्ति करेगा।
(4) जहां इस धारा के अंतर्गत कोई मतभेद या विवाद [उपधारा (3) के अधीन मुआवजे की राशि सहित] उत्पन्न होता है, तो मामले का निर्धारण उपयुक्त आयोग द्वारा किया जाएगा।
(5) उपयुक्त आयोग, इस धारा के अंतर्गत उत्पन्न किसी मतभेद या विवाद का निर्धारण करते समय, उपधारा (3) के अंतर्गत किसी मुआवजे के अतिरिक्त, उस उपधारा के अंतर्गत देय मुआवजे की राशि से अधिक जुर्माना नहीं लगा सकता है।
(क) किसी सड़क, रेलवे या ट्रामवे की मिट्टी और फुटपाथ को खोलना और तोड़ना;
(ख) किसी सड़क, रेलवे या ट्रामवे में या उसके नीचे किसी सीवर, नाली या सुरंग को खोलना और तोड़ना;
(ग) मुख्य सीवर पाइप के अलावा किसी भी लाइन या कार्य या पाइप की स्थिति में परिवर्तन करना;
(घ) विद्युत लाइनें, विद्युत संयंत्र और अन्य कार्य स्थापित करना;
(ई) उसकी मरम्मत करना, उसमें परिवर्तन करना या उसे हटाना;
(f) विद्युत संचरण या आपूर्ति के लिए आवश्यक अन्य सभी कार्य करना।
(2) उपयुक्त सरकार, इस संबंध में अपने द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा, निर्दिष्ट कर सकती है,--
(क) वे मामले और परिस्थितियाँ जिनमें कार्य संपन्न करने के लिए उपयुक्त सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, स्वामी या अधिभोगी, जैसा भी मामला हो, की लिखित सहमति आवश्यक होगी;
(ख) वह प्राधिकरण जो उन परिस्थितियों में अनुमति प्रदान कर सकता है जहां स्वामी या अधिभोगी कार्यों के निष्पादन पर आपत्ति जताता है;
(ग) लाइसेंसधारी द्वारा कार्य करने से पहले दी जाने वाली सूचना की प्रकृति और अवधि;
(घ) खंड (ग) में निर्दिष्ट सूचना के अनुसार प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने की प्रक्रिया और तरीका;
(ई) इस धारा के अंतर्गत कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों को मुआवजे या किराए का निर्धारण एवं भुगतान;
(f) आपातकालीन स्थिति में किए जाने वाले मरम्मत और कार्य;
(जी) इस धारा के अंतर्गत कुछ कार्यों को संपन्न कराने का स्वामी या अधिभोगी का अधिकार तथा उसके लिए व्यय का भुगतान;
(h) सीवर, पाइप या अन्य विद्युत लाइनों या कार्यों के निकट अन्य कार्यों को करने की प्रक्रिया;
(i) पाइपों, विद्युत लाइनों, विद्युत संयंत्र, टेलीग्राफ लाइनों, सीवर लाइनों, सुरंगों, नालियों आदि की स्थिति में परिवर्तन की प्रक्रिया;
(j) सड़कों, रेलवे, ट्रामवे, सीवर, नालियों या सुरंगों पर किए जाने वाले कार्यों से संबंधित बाड़ लगाने, सुरक्षा व्यवस्था करने, प्रकाश व्यवस्था करने और अन्य सुरक्षा उपायों की प्रक्रिया और उनकी तत्काल बहाली;
(k) ऐसे कार्यों द्वारा सार्वजनिक उपद्रव, पर्यावरणीय क्षति और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को अनावश्यक क्षति से बचाव;
(एल) उन कार्यों को करने की प्रक्रिया जो उपयुक्त सरकार, लाइसेंसधारी या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा मरम्मत योग्य नहीं हैं;
(m) किसी रेल मार्ग, ट्राम मार्ग, जलमार्ग आदि के जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक राशि जमा करने का तरीका;
(n) ऐसे कार्यों से प्रभावित संपत्ति की बहाली और उसके रखरखाव का तरीका;
(ओ) लाइसेंसधारी द्वारा देय मुआवजे की जमा करने और सुरक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया; और
(पी) ऐसे अन्य मामले जो इस धारा के अंतर्गत कार्यों के निर्माण और रखरखाव से संबंधित हों या उनसे उत्पन्न हों।
(3) लाइसेंसधारी, इस धारा और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यथासंभव कम से कम क्षति, हानि और असुविधा उत्पन्न करेगा, और अपने द्वारा या अपने द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति द्वारा उत्पन्न किसी भी क्षति, हानि या असुविधा के लिए पूर्ण क्षतिपूर्ति करेगा।
(4) जहां इस धारा के अंतर्गत कोई मतभेद या विवाद [उपधारा (3) के अधीन मुआवजे की राशि सहित] उत्पन्न होता है, तो मामले का निर्धारण उपयुक्त आयोग द्वारा किया जाएगा।
(5) उपयुक्त आयोग, इस धारा के अंतर्गत उत्पन्न किसी मतभेद या विवाद का निर्धारण करते समय, उपधारा (3) के अंतर्गत किसी मुआवजे के अतिरिक्त, उस उपधारा के अंतर्गत देय मुआवजे की राशि से अधिक जुर्माना नहीं लगा सकता है।
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