LSA Act 18अध्याय V · Finance, Accounts and Audit
धारा 18 · लेखा एवं लेखापरीक्षा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण (इसके बाद इस धारा में 'प्राधिकरण' कहा गया है), जैसा भी मामला हो, उचित खाते और अन्य प्रासंगिक अभिलेख रखेगा तथा आय एवं व्यय खाते और बैलेंस शीट सहित वार्षिक लेखा-विवरण तैयार करेगा, ऐसे प्रारूप में और ऐसे तरीके से जैसा कि केंद्र सरकार भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के परामर्श से निर्धारित करे।
(2) प्राधिकरणों के खातों का लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जैसा कि उनके द्वारा निर्दिष्ट किया जाए और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में किया गया कोई भी व्यय संबंधित प्राधिकरण द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
(3) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और इस अधिनियम के अंतर्गत किसी प्राधिकरण के लेखापरीक्षा के संबंध में उनके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सरकारी लेखापरीक्षा के संबंध में प्राप्त हैं, और विशेष रूप से उन्हें बही-खातों, खातों, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों एवं कागजातों को प्रस्तुत करने की मांग करने और इस अधिनियम के अंतर्गत प्राधिकरणों के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।
(4) प्राधिकरणों के खाते, जैसा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा इस संबंध में नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित किया गया हो, और उस पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित, प्राधिकरणों द्वारा प्रतिवर्ष केंद्र सरकार या राज्य सरकारों को, जैसा भी मामला हो, भेजे जाएंगे।
1 [(5) केंद्र सरकार उपधारा (4) के तहत प्राप्त खातों और लेखापरीक्षा रिपोर्ट को प्राप्त होने के बाद यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगी।
(6) राज्य सरकार उपधारा (4) के अधीन प्राप्त खातों और लेखापरीक्षा रिपोर्ट को प्राप्ति के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करवाएगी।]
(2) प्राधिकरणों के खातों का लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जैसा कि उनके द्वारा निर्दिष्ट किया जाए और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में किया गया कोई भी व्यय संबंधित प्राधिकरण द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
(3) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और इस अधिनियम के अंतर्गत किसी प्राधिकरण के लेखापरीक्षा के संबंध में उनके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सरकारी लेखापरीक्षा के संबंध में प्राप्त हैं, और विशेष रूप से उन्हें बही-खातों, खातों, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों एवं कागजातों को प्रस्तुत करने की मांग करने और इस अधिनियम के अंतर्गत प्राधिकरणों के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।
(4) प्राधिकरणों के खाते, जैसा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा इस संबंध में नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित किया गया हो, और उस पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित, प्राधिकरणों द्वारा प्रतिवर्ष केंद्र सरकार या राज्य सरकारों को, जैसा भी मामला हो, भेजे जाएंगे।
1 [(5) केंद्र सरकार उपधारा (4) के तहत प्राप्त खातों और लेखापरीक्षा रिपोर्ट को प्राप्त होने के बाद यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगी।
(6) राज्य सरकार उपधारा (4) के अधीन प्राप्त खातों और लेखापरीक्षा रिपोर्ट को प्राप्ति के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करवाएगी।]
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