LSA Act 3Aअध्याय II · The National Legal Services Authority
धारा 3A · सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा सर्वोच्च न्यायालय विधि सेवा समिति नामक एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित शक्तियों का प्रयोग करना और कार्यों का निष्पादन करना होगा।
(2) समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे—
(क) सर्वोच्च न्यायालय का एक कार्यरत न्यायाधीश जो अध्यक्ष होगा; और
(ख) अन्य सदस्यों की ऐसी संख्या, जिनके पास केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनुभव और योग्यताएं हों।
भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा मनोनीत किया जाएगा।
(3) भारत के मुख्य न्यायाधीश समिति के सचिव के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करेंगे, जिनके पास केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनुभव और योग्यताएं हों।
(4) समिति के सदस्यों और सचिव के कार्यकाल और उससे संबंधित अन्य शर्तें ऐसी होंगी जो केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
(5) समिति अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित संख्या में अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकती है।
(6) समिति के अधिकारी और अन्य कर्मचारी ऐसे वेतन और भत्तों के हकदार होंगे और ऐसी अन्य सेवा शर्तों के अधीन होंगे जो केंद्र सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से निर्धारित की जा सकती हैं।]
(2) समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे—
(क) सर्वोच्च न्यायालय का एक कार्यरत न्यायाधीश जो अध्यक्ष होगा; और
(ख) अन्य सदस्यों की ऐसी संख्या, जिनके पास केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनुभव और योग्यताएं हों।
भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा मनोनीत किया जाएगा।
(3) भारत के मुख्य न्यायाधीश समिति के सचिव के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करेंगे, जिनके पास केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनुभव और योग्यताएं हों।
(4) समिति के सदस्यों और सचिव के कार्यकाल और उससे संबंधित अन्य शर्तें ऐसी होंगी जो केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
(5) समिति अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित संख्या में अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकती है।
(6) समिति के अधिकारी और अन्य कर्मचारी ऐसे वेतन और भत्तों के हकदार होंगे और ऐसी अन्य सेवा शर्तों के अधीन होंगे जो केंद्र सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से निर्धारित की जा सकती हैं।]
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