LSA Act 19अध्याय VI · Lok Adalats
धारा 19 · लोक अदालतों का संगठन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [19. लोक अदालतों का संगठन.— (1) प्रत्येक राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण या सर्वोच्च न्यायालय विधि सेवा समिति या प्रत्येक उच्च न्यायालय विधि सेवा समिति या, जैसा भी मामला हो, तालुक विधि सेवा समिति लोक अदालतों का आयोजन ऐसे अंतरालों और स्थानों पर तथा ऐसे अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए तथा ऐसे क्षेत्रों के लिए कर सकती है जैसा वह उचित समझे।
(2) किसी क्षेत्र के लिए आयोजित प्रत्येक लोक अदालत में इतनी संख्या में सदस्य होंगे—
(क) सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी; और
(ख) अन्य व्यक्ति,
उस क्षेत्र का, जैसा कि राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण या सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति या उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, या जैसा भी मामला हो, लोक अदालत का आयोजन करने वाली तालुक विधिक सेवा समिति द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(3) उपधारा (2) के खंड (ख ) में निर्दिष्ट अन्य व्यक्तियों का अनुभव और योग्यताएं सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा आयोजित लोक अदालतों के लिए ऐसी होंगी जैसी केंद्र सरकार भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके निर्धारित करे।
(4) उपधारा (2) के खंड (ख ) में निर्दिष्ट अन्य व्यक्तियों का अनुभव और योग्यताएँ, उपधारा (3) में निर्दिष्ट लोक अदालतों के अलावा अन्य लोक अदालतों के लिए, ऐसी होंगी जैसी राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके निर्धारित की जाएँ।
(5) लोक अदालत को विवाद के पक्षों के बीच समझौता या निपटारा करने का अधिकार होगा—
(i) कोई भी मामला जो लंबित हो; या
(ii) कोई भी मामला जो के अधिकार क्षेत्र में आता है, और जिसे के समक्ष नहीं लाया गया है,
कोई भी न्यायालय जिसके लिए लोक अदालत का आयोजन किया गया हो:
बशर्ते कि लोक अदालत को किसी ऐसे मामले या विषय में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होगा जो किसी भी कानून के तहत समझौता योग्य न हो।
(2) किसी क्षेत्र के लिए आयोजित प्रत्येक लोक अदालत में इतनी संख्या में सदस्य होंगे—
(क) सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी; और
(ख) अन्य व्यक्ति,
उस क्षेत्र का, जैसा कि राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण या सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति या उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, या जैसा भी मामला हो, लोक अदालत का आयोजन करने वाली तालुक विधिक सेवा समिति द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(3) उपधारा (2) के खंड (ख ) में निर्दिष्ट अन्य व्यक्तियों का अनुभव और योग्यताएं सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा आयोजित लोक अदालतों के लिए ऐसी होंगी जैसी केंद्र सरकार भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके निर्धारित करे।
(4) उपधारा (2) के खंड (ख ) में निर्दिष्ट अन्य व्यक्तियों का अनुभव और योग्यताएँ, उपधारा (3) में निर्दिष्ट लोक अदालतों के अलावा अन्य लोक अदालतों के लिए, ऐसी होंगी जैसी राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके निर्धारित की जाएँ।
(5) लोक अदालत को विवाद के पक्षों के बीच समझौता या निपटारा करने का अधिकार होगा—
(i) कोई भी मामला जो लंबित हो; या
(ii) कोई भी मामला जो के अधिकार क्षेत्र में आता है, और जिसे के समक्ष नहीं लाया गया है,
कोई भी न्यायालय जिसके लिए लोक अदालत का आयोजन किया गया हो:
बशर्ते कि लोक अदालत को किसी ऐसे मामले या विषय में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होगा जो किसी भी कानून के तहत समझौता योग्य न हो।
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