IF Act 35अध्याय V · Of the Control Over Forestsand Landsnotbeingthe Property of Government
धारा 35 · विशेष प्रयोजनों के लिए वनों का संरक्षण
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी वन या बंजर भूमि में-
(क) खेती के लिए भूमि तोड़ना या साफ करना,
(ख) डोर चराना, या
(ग) वनस्पति को जलाना या उसे साफ करना,
उस सूरत में विनियमित या प्रतिषिद्ध कर सकेगी जिसमें कि ऐसा विनियमन या प्रतिषेध निम्नलिखित प्रयोजनों में से किसी के लिए आवश्यक प्रतीत होता है, अर्थात्ः-
(i) आंधी, तेज वायु, लुढ़कते पत्थरों, बाड़ और हिमानी से संरक्षण,
(ii) पहाड़ी भू-भागों की शिखरों और ढलानों और घाटियों पर मृदा का परिरक्षण, भूमि-स्खलन या खादर और वेगधारा के बनने को रोकना, या कटाव या उस पर बालू, पत्थर या बजरी के जमाव से भूमि का संरक्षण,
(iii) झरनों, नदियों और तलाबों में जलपूर्ति बनाए रखना,
(iv) पथों, पुलों, रेलों और संचार के अन्य मार्गों का संरक्षण,
(v) लोक स्वास्थ्य का परिरक्षण ।
(2) राज्य सरकार ऐसे किसी प्रयोजन के लिए ऐसे संकर्म, जैसे वह ठीक समझती है, किसी बन या बंजर भूमि में अपने व्यय पर बनवा सकेगी।
(3) जब तक कि ऐसे बन या भूमि के स्वामी को इस बात के लिए समाहूत करने वाली सूचना न दे दी गई हो कि तुम ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट युक्तियुक्त कालावधि के अन्दर यह हेतुक दर्शित करो कि, यथास्थिति, ऐसी अधिसूचना क्यों न निकाली जाए या संकर्म क्यों न बनाया जाए, और जब तक कि उसके आक्षेपों की, यदि कोई हों, और किसी साक्ष्य की जो वह उनके समर्थन में पेश करे, सुनवाई उस अधिकारी द्वारा न की जा चुकी हो जो उस निमित्त सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया है और राज्य सरकार उन पर विचार न कर चुकी हो, तब तक उपधारा (1) के अधीन कोई अधिसूचना नहीं निकाली जाएगी और न उपधारा (2) के अधीन कोई संकर्म आरंभ किया जाएगा।
(क) खेती के लिए भूमि तोड़ना या साफ करना,
(ख) डोर चराना, या
(ग) वनस्पति को जलाना या उसे साफ करना,
उस सूरत में विनियमित या प्रतिषिद्ध कर सकेगी जिसमें कि ऐसा विनियमन या प्रतिषेध निम्नलिखित प्रयोजनों में से किसी के लिए आवश्यक प्रतीत होता है, अर्थात्ः-
(i) आंधी, तेज वायु, लुढ़कते पत्थरों, बाड़ और हिमानी से संरक्षण,
(ii) पहाड़ी भू-भागों की शिखरों और ढलानों और घाटियों पर मृदा का परिरक्षण, भूमि-स्खलन या खादर और वेगधारा के बनने को रोकना, या कटाव या उस पर बालू, पत्थर या बजरी के जमाव से भूमि का संरक्षण,
(iii) झरनों, नदियों और तलाबों में जलपूर्ति बनाए रखना,
(iv) पथों, पुलों, रेलों और संचार के अन्य मार्गों का संरक्षण,
(v) लोक स्वास्थ्य का परिरक्षण ।
(2) राज्य सरकार ऐसे किसी प्रयोजन के लिए ऐसे संकर्म, जैसे वह ठीक समझती है, किसी बन या बंजर भूमि में अपने व्यय पर बनवा सकेगी।
(3) जब तक कि ऐसे बन या भूमि के स्वामी को इस बात के लिए समाहूत करने वाली सूचना न दे दी गई हो कि तुम ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट युक्तियुक्त कालावधि के अन्दर यह हेतुक दर्शित करो कि, यथास्थिति, ऐसी अधिसूचना क्यों न निकाली जाए या संकर्म क्यों न बनाया जाए, और जब तक कि उसके आक्षेपों की, यदि कोई हों, और किसी साक्ष्य की जो वह उनके समर्थन में पेश करे, सुनवाई उस अधिकारी द्वारा न की जा चुकी हो जो उस निमित्त सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया है और राज्य सरकार उन पर विचार न कर चुकी हो, तब तक उपधारा (1) के अधीन कोई अधिसूचना नहीं निकाली जाएगी और न उपधारा (2) के अधीन कोई संकर्म आरंभ किया जाएगा।
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