धारा 112 · छोटे-मोटे संगठित अपराध।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई भी किसी समूह या गिरोह का सदस्य होकर, अकेले या संयुक्त रूप से, चोरी, छीना-झपटी, धोखाधड़ी, टिकटों की अनधिकृत बिक्री, अनधिकृत सट्टेबाजी या जुआ, सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों की बिक्री या किसी अन्य समान आपराधिक कृत्य को अंजाम देता है, उसे लघु संगठित अपराध करने वाला कहा जाता है।
स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “चोरी” में छल-कपट से चोरी, वाहन, आवासीय मकान या व्यावसायिक परिसर से चोरी, माल की चोरी, जेब कतरना, कार्ड स्किमिंग के माध्यम से चोरी, दुकान से चोरी और स्वचालित टेलर मशीन की चोरी शामिल है।
(2) जो कोई भी छोटा-मोटा संगठित अपराध करता है, उसे कम से कम एक वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जो सात वर्ष तक बढ़ सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “चोरी” में छल-कपट से चोरी, वाहन, आवासीय मकान या व्यावसायिक परिसर से चोरी, माल की चोरी, जेब कतरना, कार्ड स्किमिंग के माध्यम से चोरी, दुकान से चोरी और स्वचालित टेलर मशीन की चोरी शामिल है।
(2) जो कोई भी छोटा-मोटा संगठित अपराध करता है, उसे कम से कम एक वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जो सात वर्ष तक बढ़ सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 7 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 1 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 112IPC New Section
New Section
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