धारा 197 · राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप और दावे।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई भी, बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक संचार द्वारा या अन्यथा,—
(क) ऐसा कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है कि किसी विशेष वर्ग के व्यक्ति किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण भारत के संविधान के प्रति, जैसा कि कानून द्वारा स्थापित है, सच्ची आस्था और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए नहीं रख सकते; या
(ख) यह दावा करता है, परामर्श देता है, सलाह देता है, प्रचार करता है या प्रकाशित करता है कि किसी भी वर्ग के व्यक्तियों को किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकारों से वंचित या वंचित किया जाएगा; या
(ग) किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण किसी वर्ग के व्यक्तियों के दायित्व के संबंध में कोई दावा, सलाह, दलील या अपील करता है या प्रकाशित करता है, और ऐसा दावा, सलाह, दलील या अपील उन सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच असामंजस्य या शत्रुता या घृणा या दुर्भावना की भावना पैदा करता है या पैदा करने की संभावना है; या
(घ) भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली झूठी या भ्रामक जानकारी बनाना या प्रकाशित करना, तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) जो कोई उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध किसी पूजा स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन में लगी किसी सभा में करता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो पाँच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(क) ऐसा कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है कि किसी विशेष वर्ग के व्यक्ति किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण भारत के संविधान के प्रति, जैसा कि कानून द्वारा स्थापित है, सच्ची आस्था और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए नहीं रख सकते; या
(ख) यह दावा करता है, परामर्श देता है, सलाह देता है, प्रचार करता है या प्रकाशित करता है कि किसी भी वर्ग के व्यक्तियों को किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकारों से वंचित या वंचित किया जाएगा; या
(ग) किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण किसी वर्ग के व्यक्तियों के दायित्व के संबंध में कोई दावा, सलाह, दलील या अपील करता है या प्रकाशित करता है, और ऐसा दावा, सलाह, दलील या अपील उन सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच असामंजस्य या शत्रुता या घृणा या दुर्भावना की भावना पैदा करता है या पैदा करने की संभावना है; या
(घ) भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली झूठी या भ्रामक जानकारी बनाना या प्रकाशित करना, तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) जो कोई उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध किसी पूजा स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन में लगी किसी सभा में करता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो पाँच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 5 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 197IPC 153B
153B. Imputations, assertions prejudicial to national integration.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

