धारा 156 · किसी लोक सेवक द्वारा स्वेच्छा से किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी को भागने की अनुमति देना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई लोक सेवक होते हुए किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी की हिरासत में रहते हुए स्वेच्छा से ऐसे कैदी को उस स्थान से भागने देता है जहाँ वह कैदी कैद है, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 156IPC 128
128. Public servant voluntarily allowing prisoner of state or war to escape.
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