धारा 73 · अदालती कार्यवाही से संबंधित किसी भी सामग्री को बिना अनुमति के छापना या प्रकाशित करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
धारा 72 में निर्दिष्ट अपराध के संबंध में न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही से संबंधित कोई भी सामग्री, न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना, मुद्रित या प्रकाशित करने वाले किसी भी व्यक्ति को दो वर्ष तक की कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
स्पष्टीकरण .---किसी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन इस धारा के अर्थ में अपराध नहीं माना जाएगा।
स्पष्टीकरण .---किसी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन इस धारा के अर्थ में अपराध नहीं माना जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 73IPC 228A (3)
228A (3)
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

