धारा 353 · सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित किसी भी प्रकार का कथन, झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट बनाता, प्रकाशित करता या प्रसारित करता है---
(क) भारत की सेना, नौसेना या वायु सेना के किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को विद्रोह करने या अन्यथा अपने कर्तव्य की अवहेलना करने या उसमें विफल होने के लिए प्रेरित करने के इरादे से, या ऐसा करने की संभावना रखते हुए; या
(ख) जनता में, या जनता के किसी वर्ग में भय या दहशत पैदा करने के इरादे से, या जिससे भय या दहशत पैदा होने की संभावना हो, जिसके द्वारा कोई व्यक्ति राज्य के विरुद्ध या सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने के लिए प्रेरित हो सकता है; या
(ग) किसी वर्ग या समुदाय के व्यक्तियों को किसी अन्य वर्ग या समुदाय के विरुद्ध कोई अपराध करने के लिए उकसाने के इरादे से, या जिससे उकसाने की संभावना हो,
ऐसा करने पर तीन वर्ष तक की कारावास की सजा, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
(2) जो कोई भी धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास स्थान, भाषा, जाति या समुदाय या किसी अन्य आधार पर विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना की भावना पैदा करने या बढ़ावा देने के इरादे से, या जिसके ऐसा करने की संभावना हो, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित, झूठी सूचना, अफवाह या भयावह समाचार युक्त कोई भी कथन या रिपोर्ट बनाता, प्रकाशित करता या प्रसारित करता है, उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(3) जो कोई उपधारा (2) में निर्दिष्ट अपराध किसी पूजा स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन में लगी किसी सभा में करता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो पाँच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपवाद। ---इस धारा के अर्थ के अंतर्गत यह अपराध नहीं माना जाएगा, जब किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा कोई कथन, झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट बनाने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने पर यह मानने का उचित आधार हो कि ऐसा कथन, झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट सत्य है और वह इसे सद्भावना से और उपर्युक्त किसी भी इरादे के बिना बनाता, प्रकाशित करता या प्रसारित करता है।
(क) भारत की सेना, नौसेना या वायु सेना के किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को विद्रोह करने या अन्यथा अपने कर्तव्य की अवहेलना करने या उसमें विफल होने के लिए प्रेरित करने के इरादे से, या ऐसा करने की संभावना रखते हुए; या
(ख) जनता में, या जनता के किसी वर्ग में भय या दहशत पैदा करने के इरादे से, या जिससे भय या दहशत पैदा होने की संभावना हो, जिसके द्वारा कोई व्यक्ति राज्य के विरुद्ध या सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने के लिए प्रेरित हो सकता है; या
(ग) किसी वर्ग या समुदाय के व्यक्तियों को किसी अन्य वर्ग या समुदाय के विरुद्ध कोई अपराध करने के लिए उकसाने के इरादे से, या जिससे उकसाने की संभावना हो,
ऐसा करने पर तीन वर्ष तक की कारावास की सजा, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
(2) जो कोई भी धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास स्थान, भाषा, जाति या समुदाय या किसी अन्य आधार पर विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना की भावना पैदा करने या बढ़ावा देने के इरादे से, या जिसके ऐसा करने की संभावना हो, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित, झूठी सूचना, अफवाह या भयावह समाचार युक्त कोई भी कथन या रिपोर्ट बनाता, प्रकाशित करता या प्रसारित करता है, उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(3) जो कोई उपधारा (2) में निर्दिष्ट अपराध किसी पूजा स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन में लगी किसी सभा में करता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो पाँच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपवाद। ---इस धारा के अर्थ के अंतर्गत यह अपराध नहीं माना जाएगा, जब किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा कोई कथन, झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट बनाने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने पर यह मानने का उचित आधार हो कि ऐसा कथन, झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट सत्य है और वह इसे सद्भावना से और उपर्युक्त किसी भी इरादे के बिना बनाता, प्रकाशित करता या प्रसारित करता है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 5 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
पुराने कानून में
BNS 353IPC 505
505. Statements conducing to public mischief
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

