CSS 31अध्याय IV · Employees State Insurance Corporation
धारा 31 · नियोक्ता द्वारा अंशदान के भुगतान आदि से संबंधित प्रावधान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) नियोक्ता प्रत्येक कर्मचारी के संबंध में, चाहे वह सीधे उसके द्वारा नियोजित हो या किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से, नियोक्ता का अंशदान और कर्मचारी का अंशदान दोनों का भुगतान करेगा।
(2) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, इस संहिता और इसके अंतर्गत इस संबंध में बनाए गए नियमों और विनियमों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, नियोक्ता अपने द्वारा सीधे नियोजित कर्मचारी (छूट प्राप्त कर्मचारी न होने पर) के मामले में, कर्मचारी के अंशदान को उसके वेतन में कटौती करके वसूल करने का हकदार होगा, अन्यथा नहीं।
बशर्ते कि ऐसी कोई कटौती वेतन से नहीं की जाएगी, सिवाय उस अवधि या अवधि के उस भाग से संबंधित कटौती के जिसके लिए अंशदान देय है, या उस अवधि के लिए कर्मचारी के अंशदान की राशि से अधिक कटौती नहीं की जाएगी।
(3) किसी विपरीत अनुबंध के बावजूद, न तो नियोक्ता और न ही ठेकेदार किसी कर्मचारी को देय मजदूरी से नियोक्ता का अंशदान काटने या अन्यथा उससे वसूल करने का हकदार होगा।
(4) इस अध्याय के अंतर्गत नियोक्ता द्वारा वेतन से काटी गई कोई भी राशि कर्मचारी द्वारा उसे उस अंशदान के भुगतान के उद्देश्य से सौंपी गई मानी जाएगी जिसके लिए वह काटी गई थी।
(5) नियोक्ता निगम को अंशदान भेजने का व्यय वहन करेगा।
(6) कोई नियोक्ता, जिसने किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से नियोजित कर्मचारी के संबंध में अंशदान का भुगतान किया है, ठेकेदार से भुगतान किए गए अंशदान की राशि (अर्थात नियोक्ता का अंशदान और कर्मचारी का अंशदान, यदि कोई हो,) वसूल करने का हकदार होगा, या तो नियोक्ता द्वारा किसी अनुबंध के तहत उसे देय किसी राशि से कटौती करके, या ठेकेदार द्वारा देय ऋण के रूप में।
(7) ठेकेदार अपने द्वारा या अपने माध्यम से नियोजित कर्मचारियों का एक रजिस्टर बनाए रखेगा जैसा कि विनियमों में प्रावधान है और उप-धारा (6) के तहत देय किसी भी राशि के निपटान से पहले उसे नियोक्ता को प्रस्तुत करेगा।
(8) उपधारा (6) में निर्दिष्ट मामले में, ठेकेदार अपने द्वारा या अपने माध्यम से नियोजित कर्मचारी से वेतन में कटौती द्वारा कर्मचारी का अंशदान वसूलने का हकदार होगा, अन्यथा नहीं, ऐसी शर्तों के अधीन जैसा कि उपधारा (2) के परंतुक में निर्दिष्ट है।
(9) इस संहिता के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निगम इस अध्याय के अधीन देय अंशदानों के भुगतान और संग्रह से संबंधित या उससे जुड़े किसी भी मामले के लिए नियम बना सकता है।
(2) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, इस संहिता और इसके अंतर्गत इस संबंध में बनाए गए नियमों और विनियमों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, नियोक्ता अपने द्वारा सीधे नियोजित कर्मचारी (छूट प्राप्त कर्मचारी न होने पर) के मामले में, कर्मचारी के अंशदान को उसके वेतन में कटौती करके वसूल करने का हकदार होगा, अन्यथा नहीं।
बशर्ते कि ऐसी कोई कटौती वेतन से नहीं की जाएगी, सिवाय उस अवधि या अवधि के उस भाग से संबंधित कटौती के जिसके लिए अंशदान देय है, या उस अवधि के लिए कर्मचारी के अंशदान की राशि से अधिक कटौती नहीं की जाएगी।
(3) किसी विपरीत अनुबंध के बावजूद, न तो नियोक्ता और न ही ठेकेदार किसी कर्मचारी को देय मजदूरी से नियोक्ता का अंशदान काटने या अन्यथा उससे वसूल करने का हकदार होगा।
(4) इस अध्याय के अंतर्गत नियोक्ता द्वारा वेतन से काटी गई कोई भी राशि कर्मचारी द्वारा उसे उस अंशदान के भुगतान के उद्देश्य से सौंपी गई मानी जाएगी जिसके लिए वह काटी गई थी।
(5) नियोक्ता निगम को अंशदान भेजने का व्यय वहन करेगा।
(6) कोई नियोक्ता, जिसने किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से नियोजित कर्मचारी के संबंध में अंशदान का भुगतान किया है, ठेकेदार से भुगतान किए गए अंशदान की राशि (अर्थात नियोक्ता का अंशदान और कर्मचारी का अंशदान, यदि कोई हो,) वसूल करने का हकदार होगा, या तो नियोक्ता द्वारा किसी अनुबंध के तहत उसे देय किसी राशि से कटौती करके, या ठेकेदार द्वारा देय ऋण के रूप में।
(7) ठेकेदार अपने द्वारा या अपने माध्यम से नियोजित कर्मचारियों का एक रजिस्टर बनाए रखेगा जैसा कि विनियमों में प्रावधान है और उप-धारा (6) के तहत देय किसी भी राशि के निपटान से पहले उसे नियोक्ता को प्रस्तुत करेगा।
(8) उपधारा (6) में निर्दिष्ट मामले में, ठेकेदार अपने द्वारा या अपने माध्यम से नियोजित कर्मचारी से वेतन में कटौती द्वारा कर्मचारी का अंशदान वसूलने का हकदार होगा, अन्यथा नहीं, ऐसी शर्तों के अधीन जैसा कि उपधारा (2) के परंतुक में निर्दिष्ट है।
(9) इस संहिता के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निगम इस अध्याय के अधीन देय अंशदानों के भुगतान और संग्रह से संबंधित या उससे जुड़े किसी भी मामले के लिए नियम बना सकता है।
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