CSS 8अध्याय II · Social Security Organisations
धारा 8 · किसी भी सामाजिक सुरक्षा संगठन के सदस्य को अयोग्य घोषित करना और उसे संगठन से हटाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति का सदस्य नहीं चुना जाएगा, या सदस्य बना नहीं रहेगा, जो कि,---
(क) दिवालिया घोषित किया गया है या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) पागल पाया जाता है या मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है; या
(ग) नैतिक पतन से जुड़े किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है या ठहराया जा चुका है; या
(घ) किसी प्रतिष्ठान में नियोक्ता है और इस संहिता के तहत किसी भी देय राशि के भुगतान में चूक की है;
(ई) यदि वह संसद सदस्य या राज्य विधान सभा सदस्य होते हुए किसी सामाजिक सुरक्षा संगठन का सदस्य है, और वह संसद या राज्य विधान सभा का सदस्य नहीं रह जाता है; या
(f) यदि वह संसद सदस्य या राज्य विधान सभा सदस्य होते हुए सामाजिक सुरक्षा संगठन का सदस्य है, और वह बन जाता है---
(i) केंद्रीय या राज्य सरकार का मंत्री; या
(ii) लोकसभा या राज्य विधानसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष; या
(iii) राज्य परिषद के उपाध्यक्ष।
स्पष्टीकरण 1. --- यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई व्यक्ति खंड (घ) के अधीन अयोग्य है, तो इसे उपयुक्त सरकार को भेजा जाएगा और ऐसे किसी भी प्रश्न पर उपयुक्त सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
स्पष्टीकरण 2. --- खंड (एफ) उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगा जो मंत्री होने के नाते सामाजिक सुरक्षा संगठन के पदेन सदस्य हैं।
(2) केंद्रीय बोर्ड, निगम और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के मामले में केंद्र सरकार और राज्य असंगठित श्रमिक बोर्ड और भवन श्रमिक कल्याण बोर्ड के मामले में राज्य सरकार, ऐसे सामाजिक सुरक्षा संगठन के किसी भी सदस्य को उसके पद से हटा सकती है, जो,---
(क) उपधारा (1) में उल्लिखित किसी भी अयोग्यता के अधीन है या हो गया है; या
(ख) सामाजिक सुरक्षा संगठन, जिसका वह सदस्य है, की लगातार तीन से अधिक बैठकों में बिना अनुमति के अनुपस्थित रहता है;
(ग) ऐसी सरकार की राय में, उस सदस्य ने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उस सदस्य का पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है या ऐसी सरकार की राय में वह सदस्य के रूप में बने रहने के लिए अन्यथा अयोग्य या अनुपयुक्त है:
बशर्ते कि खंड (ख) और (ग) के तहत किसी भी व्यक्ति को तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उस व्यक्ति को यह कारण बताने का अवसर न दिया गया हो कि उसे क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।
इसके अलावा, यदि केंद्रीय बोर्ड की कार्यकारी समिति या निगम की स्थायी समिति का कोई सदस्य केंद्रीय बोर्ड या निगम का सदस्य नहीं रहता है, तो वह अपने पद पर बना नहीं रहेगा।
(3) सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति का कोई सदस्य किसी भी समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, जिसने उसे नियुक्त किया था, को संबोधित अपने हस्ताक्षर से लिखित रूप में अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है और ऐसे त्यागपत्र की स्वीकृति पर उसका पद रिक्त हो जाएगा।
(4) यदि किसी सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति में, केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, की यह राय हो कि---
(क) यदि उसका कोई सदस्य, जो नियोक्ताओं, कर्मचारियों या असंगठित श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसा भी मामला हो, उनका पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व करना बंद कर देता है; या
(ख) यदि उसका कोई सदस्य किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञ होने का दावा करता है, और बाद में यह पाया जाता है कि उसके पास उस क्षेत्र में पर्याप्त विशेषज्ञता नहीं है; या
(ग) यदि ऐसी सरकार में परिस्थितियों या सेवाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, ऐसी सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई सदस्य सरकार का प्रतिनिधित्व जारी नहीं रख सकता है, तो ऐसी सरकार आदेश द्वारा ऐसे सदस्य को उसके पद से हटा सकती है।
बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति को खंड (क) या खंड (ख) के तहत तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उस व्यक्ति को यह कारण बताने का अवसर न दिया गया हो कि उसे क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।
(5) यदि किसी सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति का कोई सदस्य, जो किसी कंपनी का निदेशक है और निदेशक के रूप में, सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति के विचार के लिए आने वाले किसी मामले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय हित रखता है, तो वह हित की जानकारी प्राप्त होने के बाद यथाशीघ्र अपने हित की प्रकृति का खुलासा करेगा और ऐसा खुलासा सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी समिति की कार्यवाही में दर्ज किया जाएगा, जैसा भी मामला हो, और इसके बाद वह सदस्य उस मामले से संबंधित सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति की किसी भी कार्यवाही या निर्णय में भाग नहीं लेगा।
(क) दिवालिया घोषित किया गया है या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) पागल पाया जाता है या मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है; या
(ग) नैतिक पतन से जुड़े किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है या ठहराया जा चुका है; या
(घ) किसी प्रतिष्ठान में नियोक्ता है और इस संहिता के तहत किसी भी देय राशि के भुगतान में चूक की है;
(ई) यदि वह संसद सदस्य या राज्य विधान सभा सदस्य होते हुए किसी सामाजिक सुरक्षा संगठन का सदस्य है, और वह संसद या राज्य विधान सभा का सदस्य नहीं रह जाता है; या
(f) यदि वह संसद सदस्य या राज्य विधान सभा सदस्य होते हुए सामाजिक सुरक्षा संगठन का सदस्य है, और वह बन जाता है---
(i) केंद्रीय या राज्य सरकार का मंत्री; या
(ii) लोकसभा या राज्य विधानसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष; या
(iii) राज्य परिषद के उपाध्यक्ष।
स्पष्टीकरण 1. --- यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई व्यक्ति खंड (घ) के अधीन अयोग्य है, तो इसे उपयुक्त सरकार को भेजा जाएगा और ऐसे किसी भी प्रश्न पर उपयुक्त सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
स्पष्टीकरण 2. --- खंड (एफ) उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगा जो मंत्री होने के नाते सामाजिक सुरक्षा संगठन के पदेन सदस्य हैं।
(2) केंद्रीय बोर्ड, निगम और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के मामले में केंद्र सरकार और राज्य असंगठित श्रमिक बोर्ड और भवन श्रमिक कल्याण बोर्ड के मामले में राज्य सरकार, ऐसे सामाजिक सुरक्षा संगठन के किसी भी सदस्य को उसके पद से हटा सकती है, जो,---
(क) उपधारा (1) में उल्लिखित किसी भी अयोग्यता के अधीन है या हो गया है; या
(ख) सामाजिक सुरक्षा संगठन, जिसका वह सदस्य है, की लगातार तीन से अधिक बैठकों में बिना अनुमति के अनुपस्थित रहता है;
(ग) ऐसी सरकार की राय में, उस सदस्य ने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उस सदस्य का पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है या ऐसी सरकार की राय में वह सदस्य के रूप में बने रहने के लिए अन्यथा अयोग्य या अनुपयुक्त है:
बशर्ते कि खंड (ख) और (ग) के तहत किसी भी व्यक्ति को तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उस व्यक्ति को यह कारण बताने का अवसर न दिया गया हो कि उसे क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।
इसके अलावा, यदि केंद्रीय बोर्ड की कार्यकारी समिति या निगम की स्थायी समिति का कोई सदस्य केंद्रीय बोर्ड या निगम का सदस्य नहीं रहता है, तो वह अपने पद पर बना नहीं रहेगा।
(3) सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति का कोई सदस्य किसी भी समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, जिसने उसे नियुक्त किया था, को संबोधित अपने हस्ताक्षर से लिखित रूप में अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है और ऐसे त्यागपत्र की स्वीकृति पर उसका पद रिक्त हो जाएगा।
(4) यदि किसी सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति में, केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, की यह राय हो कि---
(क) यदि उसका कोई सदस्य, जो नियोक्ताओं, कर्मचारियों या असंगठित श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसा भी मामला हो, उनका पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व करना बंद कर देता है; या
(ख) यदि उसका कोई सदस्य किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञ होने का दावा करता है, और बाद में यह पाया जाता है कि उसके पास उस क्षेत्र में पर्याप्त विशेषज्ञता नहीं है; या
(ग) यदि ऐसी सरकार में परिस्थितियों या सेवाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, ऐसी सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई सदस्य सरकार का प्रतिनिधित्व जारी नहीं रख सकता है, तो ऐसी सरकार आदेश द्वारा ऐसे सदस्य को उसके पद से हटा सकती है।
बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति को खंड (क) या खंड (ख) के तहत तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उस व्यक्ति को यह कारण बताने का अवसर न दिया गया हो कि उसे क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।
(5) यदि किसी सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति का कोई सदस्य, जो किसी कंपनी का निदेशक है और निदेशक के रूप में, सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति के विचार के लिए आने वाले किसी मामले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय हित रखता है, तो वह हित की जानकारी प्राप्त होने के बाद यथाशीघ्र अपने हित की प्रकृति का खुलासा करेगा और ऐसा खुलासा सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी समिति की कार्यवाही में दर्ज किया जाएगा, जैसा भी मामला हो, और इसके बाद वह सदस्य उस मामले से संबंधित सामाजिक सुरक्षा संगठन या उसकी किसी समिति की किसी भी कार्यवाही या निर्णय में भाग नहीं लेगा।
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