CSS 60अध्याय VI · Meternity Benefit
धारा 60 · मातृत्व लाभ के भुगतान का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस संहिता के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक महिला मातृत्व लाभ की हकदार होगी और उसका नियोक्ता मातृत्व लाभ के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा, जो उसकी वास्तविक अनुपस्थिति की अवधि के लिए औसत दैनिक मजदूरी की दर से दिया जाएगा, अर्थात् उसके प्रसव के दिन से ठीक पहले की अवधि और उस दिन के ठीक बाद की कोई भी अवधि।
स्पष्टीकरण। ---इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "औसत दैनिक मजदूरी" से तात्पर्य मातृत्व अवकाश के कारण अनुपस्थिति की तिथि से ठीक पहले के तीन कैलेंडर महीनों की अवधि के दौरान महिला द्वारा काम किए गए दिनों के लिए उसे देय मजदूरी का औसत है, जो मजदूरी संहिता, 2019 (29 ऑफ 2019) के तहत निर्धारित या संशोधित न्यूनतम मजदूरी दर के अधीन है।
(2) कोई भी महिला मातृत्व लाभ की हकदार नहीं होगी, जब तक कि उसने वास्तव में उस नियोक्ता के प्रतिष्ठान में, जिससे वह मातृत्व लाभ का दावा करती है, अपनी अपेक्षित प्रसव तिथि से ठीक पहले के बारह महीनों में कम से कम अस्सी दिनों की अवधि के लिए काम न किया हो।
स्पष्टीकरण। --- इस उपधारा के अंतर्गत अवधि की गणना के प्रयोजन से, प्रसव की अपेक्षित तिथि से ठीक पहले के बारह महीनों की अवधि के दौरान, प्रतिष्ठान में वास्तव में काम किए गए दिनों, काम से छुट्टी पर रखे गए दिनों या किसी भी लागू कानून के तहत वेतन सहित अवकाश घोषित किए गए छुट्टियों पर रहने वाले दिनों को ध्यान में रखा जाएगा।
(3) किसी महिला को मातृत्व लाभ प्राप्त करने की अधिकतम अवधि छब्बीस सप्ताह होगी, जिसमें से आठ सप्ताह से अधिक की अवधि उसके प्रसव की अनुमानित तिथि से पहले की नहीं होगी:
बशर्ते कि दो या दो से अधिक जीवित बच्चों वाली महिला को मातृत्व लाभ प्राप्त करने की अधिकतम अवधि बारह सप्ताह होगी, जिसमें से छह सप्ताह से अधिक की अवधि उसकी अपेक्षित प्रसव तिथि से पहले की नहीं होगी।
इसके अलावा, यदि इस अवधि के दौरान किसी महिला की मृत्यु हो जाती है, तो मातृत्व लाभ केवल उसकी मृत्यु के दिन तक के दिनों के लिए ही देय होगा।
इसके अलावा, यदि कोई महिला बच्चे को जन्म देने के बाद प्रसव के दौरान या प्रसव की तारीख के तुरंत बाद की अवधि के दौरान, जिसके लिए वह मातृत्व लाभ की हकदार है, मर जाती है और दोनों ही मामलों में बच्चा पीछे छोड़ जाती है, तो नियोक्ता उस पूरी अवधि के लिए मातृत्व लाभ के लिए उत्तरदायी होगा, लेकिन यदि बच्चा भी उक्त अवधि के दौरान मर जाता है, तो बच्चे की मृत्यु की तारीख तक के दिनों के लिए।
स्पष्टीकरण। ---इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "बच्चा" में मृत शिशु भी शामिल है।
(4) कोई महिला जो तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेती है या किसी कमीशनिंग मां को गोद लेने की अनुमति देती है, वह बच्चे को गोद लेने वाली मां या कमीशनिंग मां को सौंपे जाने की तारीख से बारह सप्ताह की अवधि के लिए मातृत्व लाभ की हकदार होगी।
(5) यदि किसी महिला को सौंपा गया कार्य इस प्रकार का हो कि वह घर से काम कर सके, तो नियोक्ता उसे मातृत्व लाभ का लाभ उठाने के बाद ऐसी अवधि और ऐसी शर्तों पर ऐसा करने की अनुमति दे सकता है, जिन पर नियोक्ता और महिला आपसी सहमति से सहमत हों।
स्पष्टीकरण। ---इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "औसत दैनिक मजदूरी" से तात्पर्य मातृत्व अवकाश के कारण अनुपस्थिति की तिथि से ठीक पहले के तीन कैलेंडर महीनों की अवधि के दौरान महिला द्वारा काम किए गए दिनों के लिए उसे देय मजदूरी का औसत है, जो मजदूरी संहिता, 2019 (29 ऑफ 2019) के तहत निर्धारित या संशोधित न्यूनतम मजदूरी दर के अधीन है।
(2) कोई भी महिला मातृत्व लाभ की हकदार नहीं होगी, जब तक कि उसने वास्तव में उस नियोक्ता के प्रतिष्ठान में, जिससे वह मातृत्व लाभ का दावा करती है, अपनी अपेक्षित प्रसव तिथि से ठीक पहले के बारह महीनों में कम से कम अस्सी दिनों की अवधि के लिए काम न किया हो।
स्पष्टीकरण। --- इस उपधारा के अंतर्गत अवधि की गणना के प्रयोजन से, प्रसव की अपेक्षित तिथि से ठीक पहले के बारह महीनों की अवधि के दौरान, प्रतिष्ठान में वास्तव में काम किए गए दिनों, काम से छुट्टी पर रखे गए दिनों या किसी भी लागू कानून के तहत वेतन सहित अवकाश घोषित किए गए छुट्टियों पर रहने वाले दिनों को ध्यान में रखा जाएगा।
(3) किसी महिला को मातृत्व लाभ प्राप्त करने की अधिकतम अवधि छब्बीस सप्ताह होगी, जिसमें से आठ सप्ताह से अधिक की अवधि उसके प्रसव की अनुमानित तिथि से पहले की नहीं होगी:
बशर्ते कि दो या दो से अधिक जीवित बच्चों वाली महिला को मातृत्व लाभ प्राप्त करने की अधिकतम अवधि बारह सप्ताह होगी, जिसमें से छह सप्ताह से अधिक की अवधि उसकी अपेक्षित प्रसव तिथि से पहले की नहीं होगी।
इसके अलावा, यदि इस अवधि के दौरान किसी महिला की मृत्यु हो जाती है, तो मातृत्व लाभ केवल उसकी मृत्यु के दिन तक के दिनों के लिए ही देय होगा।
इसके अलावा, यदि कोई महिला बच्चे को जन्म देने के बाद प्रसव के दौरान या प्रसव की तारीख के तुरंत बाद की अवधि के दौरान, जिसके लिए वह मातृत्व लाभ की हकदार है, मर जाती है और दोनों ही मामलों में बच्चा पीछे छोड़ जाती है, तो नियोक्ता उस पूरी अवधि के लिए मातृत्व लाभ के लिए उत्तरदायी होगा, लेकिन यदि बच्चा भी उक्त अवधि के दौरान मर जाता है, तो बच्चे की मृत्यु की तारीख तक के दिनों के लिए।
स्पष्टीकरण। ---इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "बच्चा" में मृत शिशु भी शामिल है।
(4) कोई महिला जो तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेती है या किसी कमीशनिंग मां को गोद लेने की अनुमति देती है, वह बच्चे को गोद लेने वाली मां या कमीशनिंग मां को सौंपे जाने की तारीख से बारह सप्ताह की अवधि के लिए मातृत्व लाभ की हकदार होगी।
(5) यदि किसी महिला को सौंपा गया कार्य इस प्रकार का हो कि वह घर से काम कर सके, तो नियोक्ता उसे मातृत्व लाभ का लाभ उठाने के बाद ऐसी अवधि और ऐसी शर्तों पर ऐसा करने की अनुमति दे सकता है, जिन पर नियोक्ता और महिला आपसी सहमति से सहमत हों।
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