CSS 39अध्याय IV · Employees State Insurance Corporation
धारा 39 · चिकित्सा लाभ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) बीमित व्यक्ति या (जहां ऐसा चिकित्सा लाभ उसके परिवार को दिया जाता है) उसके परिवार का कोई सदस्य जिसकी स्थिति में चिकित्सा उपचार और देखभाल की आवश्यकता हो, चिकित्सा लाभ प्राप्त करने का हकदार होगा।
(2) ऐसा चिकित्सा लाभ अस्पताल या औषधालय, क्लिनिक या अन्य संस्था में बाह्य रोगी उपचार और उपस्थिति के रूप में या बीमित व्यक्ति के घर जाकर या अस्पताल या अन्य संस्था में रोगी के रूप में उपचार द्वारा दिया जा सकता है।
(3) किसी बीमित व्यक्ति और (जहां ऐसा चिकित्सा लाभ उसके परिवार को दिया जाता है) उसके परिवार की चिकित्सा लाभ का दावा करने की योग्यता और वे शर्तें जिनके अधीन ऐसा लाभ दिया जा सकता है, उसका पैमाना और अवधि ऐसी होगी जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि जिस व्यक्ति के संबंध में इस अध्याय के अंतर्गत अंशदान देय होना बंद हो जाता है, उसे विनियमों द्वारा निर्धारित अवधि और प्रकृति के अनुसार चिकित्सा लाभ प्रदान किया जा सकता है:
इसके अलावा, बीमाकृत व्यक्ति जो सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर चुका है, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत सेवानिवृत्त होने वाला व्यक्ति या समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने वाला व्यक्ति और उसका जीवनसाथी अंशदान के भुगतान और विनियमों में निर्दिष्ट अन्य शर्तों के अधीन चिकित्सा लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे।
इसके अलावा, यदि कोई बीमित व्यक्ति रोजगार संबंधी चोट के कारण स्थायी विकलांगता के चलते बीमा योग्य रोजगार से बाहर हो जाता है, तो उसे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अंशदान और अन्य शर्तों के भुगतान के अधीन चिकित्सा लाभ प्राप्त होते रहेंगे।
इसके अलावा, रोजगार के दौरान चोट लगने पर बीमित व्यक्ति को चिकित्सा लाभ प्रदान करने की शर्तें विनियमों में निर्दिष्ट होंगी।
(4) (क) निगम चिकित्सा शिक्षा संस्थान स्थापित कर सकता है, जिसमें कॉलेज, दंत चिकित्सा कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं, ताकि उनकी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट चिकित्सा शिक्षा संस्थान अपने छात्रों से निगम की सेवा के लिए ऐसे समय और ऐसे तरीके से बांड प्रस्तुत करने की अपेक्षा करेंगे, जैसा कि विनियमों में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट चिकित्सा शिक्षा संस्थान और प्रशिक्षण संस्थान निगम द्वारा स्वयं या निगम के अनुरोध पर केंद्र सरकार, किसी राज्य सरकार, केंद्र सरकार या राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य निकाय द्वारा चलाए जा सकते हैं।
स्पष्टीकरण .-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, 'अन्य निकाय' अभिव्यक्ति का अर्थ व्यक्तियों का ऐसा कोई संगठन है जिसे केंद्र सरकार उपधारा (4) में निर्दिष्ट महाविद्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों को चलाने में सक्षम समझती है।
(6) निगम, बीमित व्यक्तियों के कल्याण के लिए निवारक एवं उपचारात्मक उपाय करने हेतु, बीमित व्यक्तियों के स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियों के आकलन हेतु ऐसे व्यावसायिक एवं महामारी विज्ञान सर्वेक्षण एवं अध्ययन कर सकता है, जैसा कि विनियमों में निर्दिष्ट किया गया हो।
(2) ऐसा चिकित्सा लाभ अस्पताल या औषधालय, क्लिनिक या अन्य संस्था में बाह्य रोगी उपचार और उपस्थिति के रूप में या बीमित व्यक्ति के घर जाकर या अस्पताल या अन्य संस्था में रोगी के रूप में उपचार द्वारा दिया जा सकता है।
(3) किसी बीमित व्यक्ति और (जहां ऐसा चिकित्सा लाभ उसके परिवार को दिया जाता है) उसके परिवार की चिकित्सा लाभ का दावा करने की योग्यता और वे शर्तें जिनके अधीन ऐसा लाभ दिया जा सकता है, उसका पैमाना और अवधि ऐसी होगी जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि जिस व्यक्ति के संबंध में इस अध्याय के अंतर्गत अंशदान देय होना बंद हो जाता है, उसे विनियमों द्वारा निर्धारित अवधि और प्रकृति के अनुसार चिकित्सा लाभ प्रदान किया जा सकता है:
इसके अलावा, बीमाकृत व्यक्ति जो सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर चुका है, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत सेवानिवृत्त होने वाला व्यक्ति या समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने वाला व्यक्ति और उसका जीवनसाथी अंशदान के भुगतान और विनियमों में निर्दिष्ट अन्य शर्तों के अधीन चिकित्सा लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे।
इसके अलावा, यदि कोई बीमित व्यक्ति रोजगार संबंधी चोट के कारण स्थायी विकलांगता के चलते बीमा योग्य रोजगार से बाहर हो जाता है, तो उसे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अंशदान और अन्य शर्तों के भुगतान के अधीन चिकित्सा लाभ प्राप्त होते रहेंगे।
इसके अलावा, रोजगार के दौरान चोट लगने पर बीमित व्यक्ति को चिकित्सा लाभ प्रदान करने की शर्तें विनियमों में निर्दिष्ट होंगी।
(4) (क) निगम चिकित्सा शिक्षा संस्थान स्थापित कर सकता है, जिसमें कॉलेज, दंत चिकित्सा कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं, ताकि उनकी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट चिकित्सा शिक्षा संस्थान अपने छात्रों से निगम की सेवा के लिए ऐसे समय और ऐसे तरीके से बांड प्रस्तुत करने की अपेक्षा करेंगे, जैसा कि विनियमों में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट चिकित्सा शिक्षा संस्थान और प्रशिक्षण संस्थान निगम द्वारा स्वयं या निगम के अनुरोध पर केंद्र सरकार, किसी राज्य सरकार, केंद्र सरकार या राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य निकाय द्वारा चलाए जा सकते हैं।
स्पष्टीकरण .-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, 'अन्य निकाय' अभिव्यक्ति का अर्थ व्यक्तियों का ऐसा कोई संगठन है जिसे केंद्र सरकार उपधारा (4) में निर्दिष्ट महाविद्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों को चलाने में सक्षम समझती है।
(6) निगम, बीमित व्यक्तियों के कल्याण के लिए निवारक एवं उपचारात्मक उपाय करने हेतु, बीमित व्यक्तियों के स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियों के आकलन हेतु ऐसे व्यावसायिक एवं महामारी विज्ञान सर्वेक्षण एवं अध्ययन कर सकता है, जैसा कि विनियमों में निर्दिष्ट किया गया हो।
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