Competition Act 11अध्याय III · Competition Commission of India
धारा 11 · अध्यक्ष और अन्य सदस्यों का इस्तीफा, पद से हटाना और निलंबन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य केंद्र सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर से लिखित सूचना देकर अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है:
बशर्ते कि अध्यक्ष या कोई सदस्य, जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें अपना पद पहले छोड़ने की अनुमति न दी जाए, तब तक ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने की समाप्ति तक या उनके उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने तक या उनके कार्यकाल की समाप्ति तक, इनमें से जो भी पहले हो, पद पर बने रहेंगे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार आदेश द्वारा अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके पद से हटा सकती है, यदि ऐसा अध्यक्ष या सदस्य, जैसा भी मामला हो,
(क) दिवालिया घोषित किया गया है, या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी समय किसी भी सवैतनिक रोजगार में संलग्न रहा हो; या
(ग) ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो केंद्र सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो; या
(घ) उसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक हो; या
(f) सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया है।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी सदस्य को उस उपधारा के खंड (घ) या खंड (ङ) में निर्दिष्ट आधार पर उसके पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भ दिए जाने पर, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई जांच के बाद यह रिपोर्ट न दी गई हो कि सदस्य को ऐसे आधार पर हटाया जाना चाहिए।
बशर्ते कि अध्यक्ष या कोई सदस्य, जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें अपना पद पहले छोड़ने की अनुमति न दी जाए, तब तक ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने की समाप्ति तक या उनके उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने तक या उनके कार्यकाल की समाप्ति तक, इनमें से जो भी पहले हो, पद पर बने रहेंगे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार आदेश द्वारा अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके पद से हटा सकती है, यदि ऐसा अध्यक्ष या सदस्य, जैसा भी मामला हो,
(क) दिवालिया घोषित किया गया है, या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी समय किसी भी सवैतनिक रोजगार में संलग्न रहा हो; या
(ग) ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो केंद्र सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो; या
(घ) उसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक हो; या
(f) सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया है।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी सदस्य को उस उपधारा के खंड (घ) या खंड (ङ) में निर्दिष्ट आधार पर उसके पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भ दिए जाने पर, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई जांच के बाद यह रिपोर्ट न दी गई हो कि सदस्य को ऐसे आधार पर हटाया जाना चाहिए।
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