Competition Act 26अध्याय IV · Duties, Powers and Functions of Commission
धारा 26 · धारा 19 के तहत जांच की प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [26. धारा 19 के तहत जांच की प्रक्रिया.-- (1) केंद्र सरकार या राज्य सरकार या किसी वैधानिक प्राधिकरण से संदर्भ प्राप्त होने पर या अपने स्वयं के ज्ञान या धारा 19 के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर, यदि आयोग की राय है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो वह महानिदेशक को मामले की जांच कराने का निर्देश देगा:
बशर्ते कि यदि प्राप्त सूचना का विषय, आयोग की राय में, पहले प्राप्त किसी सूचना के विषय के समान है या उसमें शामिल किया गया है, तो नई सूचना को पिछली सूचना के साथ जोड़ा जा सकता है।
(2) जहां केंद्र सरकार या राज्य सरकार या किसी वैधानिक प्राधिकरण से संदर्भ प्राप्त होने पर या धारा 19 के तहत प्राप्त सूचना के आधार पर आयोग की राय हो कि प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है, तो वह मामले को तुरंत बंद कर देगा और ऐसे आदेश पारित करेगा जैसा वह उचित समझे और अपने आदेश की एक प्रति केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों को भेजेगा, जैसा भी मामला हो।
2 [(2ए) आयोग धारा 3 में निर्दिष्ट समझौते या धारा 4 के अंतर्गत किसी उद्यम या समूह के आचरण की जांच नहीं करेगा, यदि वही या लगभग वही तथ्य और मुद्दे जो धारा 19 के अंतर्गत प्राप्त सूचना या केंद्र सरकार या राज्य सरकार या किसी वैधानिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ में उठाए गए हैं, आयोग द्वारा अपने पिछले आदेश में पहले ही तय किए जा चुके हैं।]
(3) महानिदेशक उपधारा (1) के अधीन निर्देश प्राप्त होने पर आयोग द्वारा निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने निष्कर्षों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
2 [(3ए) यदि उपधारा (3) में निर्दिष्ट महानिदेशक की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आयोग की राय है कि आगे की जांच आवश्यक है, तो वह महानिदेशक को मामले की आगे जांच करने का निर्देश दे सकता है।
(3ख) उपधारा (3क) के तहत निर्देश प्राप्त होने पर महानिदेशक मामले की जांच करेगा और आयोग द्वारा निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने निष्कर्षों पर एक पूरक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।]
(4) आयोग उपधारा (3) और (3बी) में निर्दिष्ट रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित पक्षों को भेज सकता है:
बशर्ते कि यदि जांच केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ के आधार पर कराई जाती है, तो आयोग उपधारा ( 3 ) और (3बी) में संदर्भित रिपोर्ट की एक प्रति केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण को, जैसा भी मामला हो, अग्रेषित करेगा।
(5) यदि उपधारा (3) और (3बी) में निर्दिष्ट महानिदेशक की रिपोर्ट में यह अनुशंसा की जाती है कि इस अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं है, तो आयोग महानिदेशक की ऐसी रिपोर्ट पर केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों से आपत्तियां या सुझाव आमंत्रित करेगा।
(6) यदि उपधारा (5) में निर्दिष्ट आपत्तियों या सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग महानिदेशक की सिफारिश से सहमत होता है, तो वह मामले को तुरंत बंद कर देगा और ऐसे आदेश पारित करेगा जो वह उचित समझे और अपने आदेश को केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों को सूचित करेगा, जैसा भी मामला हो।
(7) यदि उपधारा (5) में निर्दिष्ट आपत्तियों या सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग की राय हो कि आगे की जांच आवश्यक है, तो वह महानिदेशक द्वारा मामले में आगे की जांच का निर्देश दे सकता है या मामले में आगे की जांच करवा सकता है या स्वयं इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मामले में आगे की जांच कर सकता है।
(8) यदि उपधारा (3) और (3ख) में निर्दिष्ट महानिदेशक की रिपोर्ट में इस अधिनियम के किसी प्रावधान के उल्लंघन की अनुशंसा की जाती है, और आयोग की राय है कि आगे की जांच आवश्यक है, तो वह इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसे उल्लंघन की जांच करेगा।]
4 [(9) उपधारा (7) या उपधारा (8) के तहत जांच या पूछताछ पूरी होने पर, जैसा भी मामला हो, आयोग मामले को बंद करने का आदेश पारित कर सकता है या धारा 27 के तहत आदेश पारित कर सकता है और अपने आदेश की एक प्रति केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों को भेज सकता है, जैसा भी मामला हो:
बशर्ते कि ऐसा आदेश पारित करने से पहले, आयोग एक कारण बताओ नोटिस जारी करेगा जिसमें कथित रूप से किए गए उल्लंघनों और विनियमों द्वारा निर्दिष्ट अन्य विवरणों का उल्लेख होगा तथा संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा।
बशर्ते कि यदि प्राप्त सूचना का विषय, आयोग की राय में, पहले प्राप्त किसी सूचना के विषय के समान है या उसमें शामिल किया गया है, तो नई सूचना को पिछली सूचना के साथ जोड़ा जा सकता है।
(2) जहां केंद्र सरकार या राज्य सरकार या किसी वैधानिक प्राधिकरण से संदर्भ प्राप्त होने पर या धारा 19 के तहत प्राप्त सूचना के आधार पर आयोग की राय हो कि प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है, तो वह मामले को तुरंत बंद कर देगा और ऐसे आदेश पारित करेगा जैसा वह उचित समझे और अपने आदेश की एक प्रति केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों को भेजेगा, जैसा भी मामला हो।
2 [(2ए) आयोग धारा 3 में निर्दिष्ट समझौते या धारा 4 के अंतर्गत किसी उद्यम या समूह के आचरण की जांच नहीं करेगा, यदि वही या लगभग वही तथ्य और मुद्दे जो धारा 19 के अंतर्गत प्राप्त सूचना या केंद्र सरकार या राज्य सरकार या किसी वैधानिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ में उठाए गए हैं, आयोग द्वारा अपने पिछले आदेश में पहले ही तय किए जा चुके हैं।]
(3) महानिदेशक उपधारा (1) के अधीन निर्देश प्राप्त होने पर आयोग द्वारा निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने निष्कर्षों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
2 [(3ए) यदि उपधारा (3) में निर्दिष्ट महानिदेशक की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आयोग की राय है कि आगे की जांच आवश्यक है, तो वह महानिदेशक को मामले की आगे जांच करने का निर्देश दे सकता है।
(3ख) उपधारा (3क) के तहत निर्देश प्राप्त होने पर महानिदेशक मामले की जांच करेगा और आयोग द्वारा निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने निष्कर्षों पर एक पूरक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।]
(4) आयोग उपधारा (3) और (3बी) में निर्दिष्ट रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित पक्षों को भेज सकता है:
बशर्ते कि यदि जांच केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ के आधार पर कराई जाती है, तो आयोग उपधारा ( 3 ) और (3बी) में संदर्भित रिपोर्ट की एक प्रति केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण को, जैसा भी मामला हो, अग्रेषित करेगा।
(5) यदि उपधारा (3) और (3बी) में निर्दिष्ट महानिदेशक की रिपोर्ट में यह अनुशंसा की जाती है कि इस अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं है, तो आयोग महानिदेशक की ऐसी रिपोर्ट पर केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों से आपत्तियां या सुझाव आमंत्रित करेगा।
(6) यदि उपधारा (5) में निर्दिष्ट आपत्तियों या सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग महानिदेशक की सिफारिश से सहमत होता है, तो वह मामले को तुरंत बंद कर देगा और ऐसे आदेश पारित करेगा जो वह उचित समझे और अपने आदेश को केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों को सूचित करेगा, जैसा भी मामला हो।
(7) यदि उपधारा (5) में निर्दिष्ट आपत्तियों या सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग की राय हो कि आगे की जांच आवश्यक है, तो वह महानिदेशक द्वारा मामले में आगे की जांच का निर्देश दे सकता है या मामले में आगे की जांच करवा सकता है या स्वयं इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मामले में आगे की जांच कर सकता है।
(8) यदि उपधारा (3) और (3ख) में निर्दिष्ट महानिदेशक की रिपोर्ट में इस अधिनियम के किसी प्रावधान के उल्लंघन की अनुशंसा की जाती है, और आयोग की राय है कि आगे की जांच आवश्यक है, तो वह इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसे उल्लंघन की जांच करेगा।]
4 [(9) उपधारा (7) या उपधारा (8) के तहत जांच या पूछताछ पूरी होने पर, जैसा भी मामला हो, आयोग मामले को बंद करने का आदेश पारित कर सकता है या धारा 27 के तहत आदेश पारित कर सकता है और अपने आदेश की एक प्रति केंद्र सरकार या राज्य सरकार या वैधानिक प्राधिकरण या संबंधित पक्षों को भेज सकता है, जैसा भी मामला हो:
बशर्ते कि ऐसा आदेश पारित करने से पहले, आयोग एक कारण बताओ नोटिस जारी करेगा जिसमें कथित रूप से किए गए उल्लंघनों और विनियमों द्वारा निर्दिष्ट अन्य विवरणों का उल्लेख होगा तथा संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा।
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