Competition Act 29अध्याय IV · Duties, Powers and Functions of Commission
धारा 29 · संयोजनों की जांच की प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ आयोग की प्रथम दृष्टया यह राय हो कि किसी संयोजन से भारत में संबंधित बाजार में प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है, या पड़ चुका है, तो वह संयोजन के पक्षकारों को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा और उनसे नोटिस प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर यह बताने को कहेगा कि ऐसे संयोजन के संबंध में जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए।
1 [(1ए) उपधारा (1) के तहत संयोजन के पक्षकारों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद, आयोग महानिदेशक से रिपोर्ट मंगवा सकता है और ऐसी रिपोर्ट महानिदेशक द्वारा आयोग द्वारा निर्देशित समय के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।]
3 [(1बी) आयोग धारा 6 की उपधारा (2) के तहत नोटिस प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपनी प्रथम दृष्ट्या राय बनाएगा।]
(2) यदि आयोग प्रथम दृष्टया यह राय रखता है कि संयोजन का प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, या पड़ने की संभावना है, तो वह संयोजन के पक्षकारों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने की तिथि से [ सात दिनों के भीतर] [या उपधारा (1ए) के तहत महानिदेशक से मंगाई गई रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से, जो भी बाद में हो] उक्त संयोजन के पक्षकारों को संयोजन का विवरण प्रकाशित करने का निर्देश देगा, ऐसे निर्देश के [सात दिनों के भीतर], ऐसे तरीके से, जैसा वह उचित समझे, ताकि संयोजन की जानकारी जनता और ऐसे संयोजन से प्रभावित या प्रभावित होने की संभावना वाले व्यक्तियों को प्राप्त हो सके।
(3) आयोग उक्त संयोजन से प्रभावित या प्रभावित होने की संभावना वाले किसी भी व्यक्ति या जनता के सदस्य को उपधारा ( 2 ) के तहत संयोजन का विवरण प्रकाशित होने की तिथि से दस दिनों के भीतर आयोग के समक्ष अपनी लिखित आपत्तियां, यदि कोई हो, दर्ज करने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
(4) आयोग, उपधारा (3) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से [ सात दिनों के भीतर] उक्त संयोजन के पक्षकारों से ऐसी अतिरिक्त या अन्य जानकारी मांग सकता है जिसे वह उचित समझे।
(5) आयोग द्वारा मांगी गई अतिरिक्त या अन्य जानकारी उप-धारा ( 4 ) में निर्दिष्ट पक्षों द्वारा उप-धारा (4) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से [दस दिनों के भीतर] प्रस्तुत की जाएगी।
9 [(6) सभी सूचना प्राप्त होने के बाद, आयोग मामले से धारा 29ए या धारा 31 में निहित प्रावधानों के अनुसार निपटेगा, जैसा भी मामला हो।
(7) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, आयोग उपधारा (1) के तहत प्रथम दृष्ट्या राय बनाने से पहले संयोजन के पक्षकारों द्वारा प्रस्तावित उचित संशोधनों को स्वीकार कर सकता है या स्वतः ही संशोधनों का प्रस्ताव कर सकता है।]
1 [(1ए) उपधारा (1) के तहत संयोजन के पक्षकारों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद, आयोग महानिदेशक से रिपोर्ट मंगवा सकता है और ऐसी रिपोर्ट महानिदेशक द्वारा आयोग द्वारा निर्देशित समय के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।]
3 [(1बी) आयोग धारा 6 की उपधारा (2) के तहत नोटिस प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपनी प्रथम दृष्ट्या राय बनाएगा।]
(2) यदि आयोग प्रथम दृष्टया यह राय रखता है कि संयोजन का प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, या पड़ने की संभावना है, तो वह संयोजन के पक्षकारों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने की तिथि से [ सात दिनों के भीतर] [या उपधारा (1ए) के तहत महानिदेशक से मंगाई गई रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से, जो भी बाद में हो] उक्त संयोजन के पक्षकारों को संयोजन का विवरण प्रकाशित करने का निर्देश देगा, ऐसे निर्देश के [सात दिनों के भीतर], ऐसे तरीके से, जैसा वह उचित समझे, ताकि संयोजन की जानकारी जनता और ऐसे संयोजन से प्रभावित या प्रभावित होने की संभावना वाले व्यक्तियों को प्राप्त हो सके।
(3) आयोग उक्त संयोजन से प्रभावित या प्रभावित होने की संभावना वाले किसी भी व्यक्ति या जनता के सदस्य को उपधारा ( 2 ) के तहत संयोजन का विवरण प्रकाशित होने की तिथि से दस दिनों के भीतर आयोग के समक्ष अपनी लिखित आपत्तियां, यदि कोई हो, दर्ज करने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
(4) आयोग, उपधारा (3) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से [ सात दिनों के भीतर] उक्त संयोजन के पक्षकारों से ऐसी अतिरिक्त या अन्य जानकारी मांग सकता है जिसे वह उचित समझे।
(5) आयोग द्वारा मांगी गई अतिरिक्त या अन्य जानकारी उप-धारा ( 4 ) में निर्दिष्ट पक्षों द्वारा उप-धारा (4) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से [दस दिनों के भीतर] प्रस्तुत की जाएगी।
9 [(6) सभी सूचना प्राप्त होने के बाद, आयोग मामले से धारा 29ए या धारा 31 में निहित प्रावधानों के अनुसार निपटेगा, जैसा भी मामला हो।
(7) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, आयोग उपधारा (1) के तहत प्रथम दृष्ट्या राय बनाने से पहले संयोजन के पक्षकारों द्वारा प्रस्तावित उचित संशोधनों को स्वीकार कर सकता है या स्वतः ही संशोधनों का प्रस्ताव कर सकता है।]
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